नवार्ण मंत्र की चमत्कारी साधना और हवन करने की विधि।
नवार्ण मंत्र की साधना के चमत्कारी फायदे और हवन करने की विधि।
नवार्ण मंत्र सिद्ध करने से धन-समृद्धि, मान-सम्मान और सुख-शांति मिलती है, भय समाप्त होता है, शत्रुओं का नाश होता है, और कुंडली के ग्रह दोष शांत होते हैं. इसके अलावा, मानसिक शक्ति, साहस और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है और सभी प्रकार के सांसारिक सुखों की प्राप्ति होती है. यह मंत्र देवी दुर्गा की नौ शक्तियों को जागृत करता है और समस्त मनोकामनाओं को पूर्ण करने में सक्षम है।
व्यक्तिगत लाभ:--
मानसिक शांति और आत्मविश्वास:---मंत्र के जाप से हृदय में ईश्वर का वास होता है और घबराहट व डर दूर होता है, जिससे आत्मविश्वास बढ़ता है।
साहस और पराक्रम में वृद्धि:--यह मंत्र साधक को साहस और पराक्रम प्रदान करता है।
शारीरिक और मानसिक शक्ति:---मंत्र साधना से शारीरिक और मानसिक दोनों प्रकार की शक्ति प्राप्त होती है।
भौतिक लाभ:--धन-समृद्धि और सुख:
नवार्ण मंत्र दरिद्रता को दूर करता है और धन, सुख-समृद्धि में वृद्धि करता है।
पद-प्रतिष्ठा और करियर में तरक्की:--यह मंत्र करियर में तरक्की और पद-प्रतिष्ठा में वृद्धि दिलाता है।
सांसारिक सुख:---इस मंत्र की साधना गृहस्थ जीवन के सभी पक्षों को सुदृढ़ बनाती है और सभी सांसारिक सुखों की प्राप्ति कराती है।
आध्यात्मिक और ग्रह-संबंधी लाभ:---
नवग्रहों की शांति:---यह मंत्र कुंडली के ग्रह दोषों से मुक्ति दिलाता है और नवग्रहों की पीड़ा को शांत करता है।
आध्यात्मिक जागृति:---मंत्र शक्ति के जागरण से साधक को आध्यात्मिक प्रगति और दिव्य आशीर्वाद प्राप्त होता है।
सभी विघ्नों का नाश:---नवार्ण मंत्र के प्रभाव से साधक के सभी प्रकार के विघ्नों और बाधाओं का नाश होता है।
अन्य लाभ:--
वाक् सिद्धि:---यदि मौन और दीर्घकालिक साधना की जाए, तो वाक् सिद्धि प्राप्त हो सकती है।
त्रिकाल की शक्ति:---यह मंत्र मां दुर्गा के नौ स्वरूपों और नौ ग्रहों से संबंधित है, जिससे देवी की सभी शक्तियों का लाभ प्राप्त होता है।
नवार्ण मंत्र कितने दिनों में सिद्ध होता है?
नवार्ण मंत्र को सिद्ध करने की अवधि व्यक्तिगत साधना और जप की संख्या पर निर्भर करती है, लेकिन पारंपरिक रूप से 9 दिनों में 1,25,000 बार जप करने से यह सिद्ध माना जाता है. कुछ लोग प्रतिदिन 1, 3, 5, 7, या 11 मालाएं जप करके भी सिद्धि प्राप्त करते हैं, और नवरात्रि के नौ दिनों में प्रतिदिन निश्चित समय पर जप करना उत्तम होता है।
साधना की अवधि और मालाएं:--
9 दिनों में सवा लाख जप: मंत्र सिद्धि के लिए 9 दिनों की अवधि में कुल 1,25,000 बार मंत्र का जप करना एक प्रमुख नियम है।
दैनिक जप की संख्या: यदि 1,25,000 जप एक साथ नहीं कर पाते हैं, तो प्रतिदिन 1, 3, 5, 7, या 11 मालाएं (108 मनकों वाली) मंत्र का जप करना चाहिए।
साधना का तरीका:---
स्थान और समय: --नवरात्रि के दिनों में, एक निश्चित समय पर, लाल कपड़े पर देवी की प्रतिमा या यंत्र स्थापित करके, गाय के घी का अखंड दीपक जलाएं।
उत्तर दिशा की ओर मुख करें:--- जप करते समय उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठना चाहिए।
माला और वस्त्र:-- काली हकीक या स्फटिक की माला का प्रयोग करें और सात्विक वस्त्र पहनें।
*** सावधानी और संकल्प:--- मंत्र अत्यंत शक्तिशाली है, इसलिए जप से पहले किसी गुरु का मार्गदर्शन लेना और संकल्प लेना आवश्यक है।
सात्विकता:-- साधना काल में काम, क्रोध, लोभ, मोह से दूर रहें और ब्रह्मचर्य का पालन करें।
नवार्ण मंत्र के क्या चमत्कार हैं?
नवार्ण मंत्र (ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे) के जाप से व्यक्ति को शिक्षा में सफलता, करियर में उन्नति, धन-समृद्धि, मानसिक शांति और भय से मुक्ति मिलती है, साथ ही यह नवग्रह दोषों को शांत करता है और व्यक्ति को साहस व आत्मविश्वास प्रदान करता है. यह मंत्र दुर्गा के तीनों स्वरूपों - महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती - को प्रसन्न कर सभी प्रकार के कष्टों का नाश करता है।
मंत्र सिद्ध होने के बाद क्या होता है?
मंत्र सिद्ध होने पर, मंत्र की शक्ति जागृत होती है और साधक को इच्छित फल की प्राप्ति होने लगती है, जिससे बाधाएं दूर होती हैं, आत्मविश्वास बढ़ता है और सकारात्मक विचार उत्पन्न होते हैं। साधक अपने इष्टदेव की उपस्थिति अनुभव कर सकता है, और उसकी शुभ व सात्विक इच्छाएं पूरी होने लगती हैं।
सिद्धि प्राप्त होने के क्या लक्षण हैं?
सिद्धि प्राप्त होने के लक्षणों में शारीरिक परिवर्तन जैसे शरीर का हल्का महसूस करना, त्वचा का चिकना होना, और एक विशेष सुगंध आना शामिल है। मानसिक परिवर्तन के रूप में मन का शांत और प्रसन्न होना, और मोह-माया से अनासक्ति। आध्यात्मिक अनुभव में सुषुम्ना नाड़ी में प्रकाश देखना, छहों चक्रों का दिखाई देना, और अपने इष्टदेव के दर्शन होना भी प्रमुख हैं।
नवार्ण मंत्र से हवन करने की विधि:--
नवार्ण मंत्र (ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे) के साथ हवन करने के लिए, पहले अग्नि प्रज्वलित करें और गणेश, सूर्य, नवग्रह, कुलदेवता आदि की आहुति दें. फिर हवन सामग्री को घी में डुबोकर नवार्ण मंत्र 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे नमः' के साथ हवनकुंड में एक-एक करके डालें. पूर्ण आहुति के लिए एक नारियल में पान, सुपारी, लौंग, घी आदि रखकर हवनकुंड में अर्पित करें।
आवश्यक सामग्री :--
हवन कुंड, आम की लकड़ी, घी, जौ, तिल, चावल, कपूर, लौंग, गुग्गल, जायफल, पान, सुपारी आदि हवन सामग्री
हवन विधि:---
अग्नि प्रज्वलित करें: हवन कुंड में आम की सूखी लकड़ी रखकर कपूर और घी से अग्नि प्रज्वलित करें।
संकल्प और आहुतियाँ:---
सबसे पहले अग्नि देव का ध्यान करते हुए "ऊं आग्नेय नम: स्वाहा" बोलकर आहुति दें।
इसके बाद गणेशजी का ध्यान करते हुए "ॐ गणेशाय नम: स्वाहा" बोलकर आहुति दें।
फिर सूर्य देव, नवग्रहों, कुलदेवता और अन्य देवी-देवताओं के नाम से आहुति दें, जैसे "ॐ सूर्य नम: स्वाहा", "ॐ नवग्रहाय नम: स्वाहा", "ॐ कुल देवताय नम: स्वाहा".
नवार्ण मंत्र से आहुति: नवार्ण मंत्र "ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे" का उच्चारण करते हुए कम से कम एक माला तक आहुति दें।
पूर्ण आहुति:--
एक नारियल के गोले को कलावा से बांधें,उसके ऊपरी भाग को चाकू से काटें और उसमें घी, पान, सुपारी, लौंग, जायफल व अन्य सामग्री डालें, पूर्ण आहुति मंत्र पढ़ते हुए इसे हवनकुंड की अग्नि में अर्पित करें।
प्रदक्षिणा और समापन:-- हवन के बाद कुंड की परिक्रमा करें और अंत में सभी देवी-देवताओं से क्षमा प्रार्थना करते हुए हवन समाप्त करें।
मां दुर्गा का नवार्ण मंत्र क्या है?
नवार्ण मंत्र || ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चें, नौ अक्षर वाले इस अद्भुत नवार्ण मंत्र में देवी दुर्गा की नौ शक्तियां समायी हुई है। जिसका सम्बन्ध नौ ग्रहों से भी है। ऐं = सरस्वती का बीज मन्त्र है । ह्रीं = महालक्ष्मी का बीज मन्त्र है।
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अनिल सुधांशु
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