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घर में विभिन्न प्रकार की धूनी देने के चमत्कारी लाभ.

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"*** #धूप" #या "#धूनी" #का_प्रयोग, इसको घर में जलने से नकारात्मक शक्तियां दूर होती है तथा घर में धन संपत्ति के अलावा सुख शांति का आगमन होता है. धूपन या धूप या फिर धूनी देना एक अत्यंत लाभकारी प्रक्रिया है। प्राचीनकाल से ही मन की शांति और प्रसन्नता के लिए तथा घर से नकारात्मक ऊर्जा को हटाने के लिए धूप का प्रयोग होता आया है। धूपन से मानसिक तनाव दूर होता है तथा कई सारे रोगों में भी लाभ मिलता है।  घर से नकारात्मक ऊर्जा निकालकर सकारात्मक उर्जा बढ़ाने के लिए 'धूप' दिए जाते हैं. धूप देने से मन को शांति और प्रसन्नता मिलती है। साथ ही, मानसिक तनाव दूर करने में भी इससे बहुत लाभ मिलता है।  "धूप" या "धूनी"—देवपूजन में या सुगंध के लिये कपूर, आग, गुग्गुल, आदि गंधद्रव्यों को जलाकर उठाया हुआ धुआँ. गंधद्रव्य जिसे जलाने से सुगंधित धुआँ उठता और फैलता है. जलाने पर महकवाली चीज ।  विशेष—धूप के लिये पाँच प्रकार के द्रव्यों में से किसी न किसी का व्यवहार होता है—(१) निर्यात अर्थात् गोंद । जैसे, गुग्गुल, राल, (२) चूर्ण, जैसे, जायफल का चूर्ण । (३) गंध, जैसे, कस्तूरी ।...

नील सरस्वती माता की चमत्कारी साधना.

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*** नील सरस्वती मंत्र साधना करने वाला व्यक्ति अपने शब्द से ही किसी को संम्मोहित कर सकता है. नील सरस्वती मंत्र साधना- यह मंत्र बहुत अधिक प्रभावशाली है, इससे सिद्ध कर देने वाले व्यक्ति वाक्शक्ति में बहुत प्रबल हो जाता है, वह कभी असफल या निरुत्साहित नहीं हो सकता, वह अपने शब्द मात्र से किसी को भी संम्मोहित कर सकता है और वाक् युद्ध में कभी हार नहीं सकता,  नील सरस्वती के दो स्वरूप की उपासना होती है:--  . सौम्य स्वरूप - वाकसिद्धि , धनधान्य , शत्रु कलह शमन केलिए और  उग्र स्वरूप -तारा तंत्र की अनेक सिद्धियां  प्राप्त करने के लिए . यहां सौम्य स्वरूप की उपासना का एक विधान दे रहे है . इन सौम्य स्वरूप की उपासना से अचूक फल मिलता है . शत्रु और कलह का शमन हो जाता है और वाक सिद्धि प्राप्त होती है जो समाज, व्यापार, राजनीति, शिक्षण, प्रवचन आदि क्षेत्र में सफलता दिलाती है . अगर कोई ज्योतिष नील सरस्वती की साधना कर ले, तो उसे ज्योतिष शास्त्र का सम्पूर्ण ज्ञान हो जाता हैं. नील सरस्वती की साधना को पूर्ण करने पर ज्योतिष द्वारा की गई, भविष्यवाणी सत्य तथा अकाट्य हो जाती हैं तथा इस साधना को करन...

धन संपत्ति के साथ-साथ मोक्ष भी प्रदान करती है माता त्रिपुरा सुंदरी की साधना.

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*** ॥ श्री परमदेवी-सूक्तम् ॥ ॥ माँ त्रिपुरसुन्दरी का परम देवी-सूक्त ॥ ॥ विनियोग ॥ ॐ अस्य श्री परमदेवता सूक्त माला मन्त्रस्य मार्कण्डेय सुमेधादि-ऋषयः, गायत्र्यादि नानाविधानीच्छन्दांसि, त्रिशक्ति-रूपिणी चण्डिका देवता, ऐं बीजं सौः शक्तिः, क्लीं कीलकं चतुर्विध पुरुषार्थ सिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः ॥ इसके उपरान्त ध्यान करें। ॥ ध्यान ॥ ॐ योगाढ्यामरकाय निर्गत महत्तेजः समुत्पत्तिनी । भास्वत्पूर्ण शशांक चारू वदना नीलोल्लसद् भ्रूलता ॥ गौरोत्तुंग-कुचद्वया तदुपरि स्फूर्जप्रभामण्डला । बन्धूकारूणकाय-कान्तिरवताच्छ्री चण्डिका सर्वतः ॥ ⸻ ॥ परमदेवी-सूक्त पाठ ॥ ॐ ऐं ह्रीं श्रीं हस्ख्फ्रें इसौं ह्सौः जय जय महालक्ष्मि जगदाधारबीजे सुरासुर त्रिभुवन निधाने दयांकुरे सर्वदेवतेजो रूपिणि । महामहा महिमे महा महा रूपिणि महामहामाये महामायास्वरूपिणि । विरिंच संस्तुते विधिवरदे चिदानन्दे (विद्यानन्दे) विष्णुदेहावृते महामोह मोहिनि । मधुकैटभ जिंघासिनि नित्यवरदान तत्परे महासुधाब्धिवासिनि । महामहत्तेजोधारिणि सर्वाधारे सर्वकारणकारणे आदित्यरूपे । इन्द्रादिनिखिलनिर्जरसेविते सामगानगायिनि पूर्णोदय कारिणि विजये । जयन्ति अपराजिते सर्...

केतु देवता की साधना मोक्ष की कारक होती है.

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*** केतु जातक को समाज और दुनिया से अकेला क्यों करता है इसके पीछे उसका क्या मकसद होता है वैदिक ज्योतिष में केतु को मोक्ष, वैराग्य और आध्यात्मिकता का कारक माना गया है। केतु जातक को समाज और दुनिया से अकेला इसलिए करता है क्योंकि उसका मुख्य मकसद व्यक्ति को बाहरी मोह-माया, झूठे रिश्तों और भौतिक इच्छाओं से मुक्त करके उसकी आत्मा को उसके वास्तविक स्वरूप और ईश्वर की ओर मोड़ना होता है।  अलगाव के मुख्य कारण:-- मानसिक और भावनात्मक दूरी:-- केतु व्यक्ति के मन में भौतिक संसार के प्रति अनासक्ति पैदा करता है, जिससे वह भीड़ भाड़ में भी अकेलापन महसूस करता है।  अहंकार और भ्रम का नाश:--- यह जातक के झूठे अहंकार और सांसारिक पहचान को तोड़ता है, ताकि सत्य का ज्ञान हो सके।  पिछले जन्म के कर्म: --केतु पिछले जन्म के अधूरे ऋणों और अनुभवों को सामने लाता है, जिससे जातक का झुकाव एकांत की तरफ बढ़ता है।  इसके पीछे का मकसद:-- आध्यात्मिक विकास:-- केतु का उद्देश्य व्यक्ति को आत्म-निरीक्षण और उच्च ज्ञान की प्राप्ति कराना है।  मोक्ष की प्राप्ति:-- यह सांसारिक बंधनों को काटकर इंसान को जन्म-मृत्यु के चक...

दशम महाविद्या ग्रह और उनके उपाय

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*** 🔱 दशमहाविद्या, राशि और ग्रहों का संबंध और अचूक उपाय. दशमहाविद्याओं को तांत्रिक एवं शाक्त परंपराओं में शक्ति के दस महान स्वरूप माना गया है। ज्योतिषीय साधना की एक प्रचलित परंपरा में प्रत्येक महाविद्या का संबंध किसी ग्रह से जोड़ा जाता है। हालांकि अलग-अलग परंपराओं में राशि और ग्रहों के संबंध में मतभेद मिलते हैं, इसलिए इसे सामान्य ज्योतिषीय मार्गदर्शन के रूप में समझना उचित है।  १. माँ काली — शनि शनि से संबंधित बाधा, विलंब, कर्मजनित कठिनाई और भय के समय माँ काली की उपासना की जाती है। राशि: मेष, वृश्चिक से भी संबंध बताया जाता है। शनि शांति: शनिवार को माँ काली का ध्यान, स्तोत्र या नामजप। २. माँ तारा — गुरु ज्ञान, आध्यात्मिक मार्गदर्शन, शिक्षा और गुरु-कृपा के लिए माँ तारा की साधना मानी जाती है। राशि: धनु, मीन। गुरु शांति: गुरु ग्रह कमजोर होने पर तारा उपासना उपयोगी मानी जाती है। ३. माँ त्रिपुरसुंदरी — बुध बुद्धि, वाणी, शिक्षा, कला, सौंदर्य और मानसिक संतुलन से संबंधित साधना। राशि: मिथुन, कन्या। बुध शांति: बुध ग्रह की प्रतिकूलता में त्रिपुरसुंदरी की आराधना की परंपरा मिलती है। ४. माँ भुवनेश...

सिद्ध तांत्रिकों के लिए कुछ भी असंभव नहीं होता.

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*** क्या हर तांत्रिक की अधोगति होती है? — शास्त्र वास्तव में क्या कहते हैं? लोग तांत्रिकों को बुरा व्यक्ति समझते हैं, लेकिन वो यह नहीं जानते कि, तंत्र का मतलब है, तीर सीधा निशाने पर लगना, क्योंकि जो भी सिद्ध तांत्रिक होता है, उसके लिए अच्छा या बुरा कुछ भी संभव नहीं होता, वह अपने शक्ति से कुछ भी करने में समर्थ होता है, इसीलिए कहा जाता है कि, तांत्रिकों से किसी भी मुद्दे पर व्यर्थ में बहस नहीं करना चाहिए, क्योंकि तांत्रिकों को चुनौती देने का मतलब है, अपने खुद के लिए परेशानी खड़ी करना और परेशानी किस रूप में पीछें लग जाए, इसकी कोई शर्त नहीं है.  यदि तांत्रिक लोगों की परेशानियों को दूर करता है और अपनी साधना को लोगों की भलाई में लगता है तो, उसे नरक कि, नहीं, स्वर्ग की प्राप्ति होती है. क्योंकि दुनिया की भलाई करने वालों का कभी बुरा नहीं होता. ** कई बार सिद्धू तंत्र को की कृपा दृष्टि से बड़ी से बड़ी घातक बीमारी पलक झपकते गायब हो जाती है, जिसको कभी संतान होने की कोई आशा न हो उसके संतान हो जाती है, क्योंकि तांत्रिकों को मां शक्ति और भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है, और वह उन्हीं के अधीन...

राहु का जीवन पर शुभ एवं अशुभ प्रभाव.

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*** राहु का जीवन पर प्रभाव और उपाय. जहां शुभ राहु जातक को जमीन से आसमान में पहुंचा देता है, वही अशुभ राहू जातक को मिट्टी में मिला देता है. वैदिक ज्योतिष में राहु एक विशेष ग्रह है, यह बहुत तीव्र गति से आपके जीवन में अपना असर दिखाता है । ज्योतिष शास्त्र में इसे बहुत मजबूत और अनिश्चित ग्रह माना जाता है, इसका महत्व आपके जीवन में बहुत ज्यादा बढ़ जाता जब इसकी महादशा या अंतर्दशा चल रही हो। राहु का प्रभाव व्यक्ति की मन, भ्रम, अचानक बदलाव और जीवन में सुख-सम्पत्ति से जुड़ा होता है। शुभ राहु व्यक्ति को अचानक ऊंचाइयों पर ले जाता है, जबकि अशुभ राहु उसी ऊंचाई से नीचे लाने के लिए भी जाना जाता है। राहु के लक्षण और उपाय क्या हैं, राहु की महादशा के दौरान क्या सावधानियां बरतें, और राहु को शांत करने के लिये कौन-से घरेलू उपाय उपयोगी हैं। ज्योतिष में राहु का प्रभाव अवस्था प्रभाव और उपाय अशुभ राहु के लक्षण मानसिक अशांति, अचानक धन की हानि, अनिद्रा, भय तथा सही निर्णय न ले पाना । घर में अशांति और तनाव, राहु की महादशा का प्रभाव 18 वर्षों की महादशा होती है, जिसमें शुभ राहु इतनी तेज गति से सफलता देता है, जिसकी कोई...