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नवार्ण मंत्र कि महिमा।

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**** नवार्ण मंत्र को सिद्ध करने के बाद साधक को संसार में कुछ भी पाना असंभव नहीं रहता है। माता भगवती जगत् जननी दुर्गा जी की साधना-उपासना के क्रम में, नवार्ण मंत्र एक ऐसा महत्त्वपूर्ण महामंत्र है। नवार्ण अर्थात नौ अक्षरों का इस नौ अक्षर के महामंत्र में नौ ग्रहों को नियंत्रित करने की शक्ति है, जिसके माध्यम से सभी क्षेत्रों में पूर्ण सफलता प्राप्त की जा सकती है और भगवती दुर्गा का पूर्ण आशीर्वाद प्राप्त किया जा सकता है यह महामंत्र शक्ति साधना में सर्वोपरि तथा सभी मंत्रों-स्तोत्रों में से एक महत्त्वपूर्ण महामंत्र है। यह माता भगवती दुर्गा जी के तीनों स्वरूपों माता महासरस्वती, माता महालक्ष्मी व माता महाकाली की एक साथ साधना का पूर्ण प्रभावक बीज मंत्र है और साथ ही माता दुर्गा के नौ रूपों का संयुक्त मंत्र है और इसी महामंत्र से नौ ग्रहों को भी शांत किया जा सकता है। नवार्ण मंत्र। || ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे || नौ अक्षर वाले इस अद्भुत नवार्ण मंत्र में देवी दुर्गा की नौ शक्तियां समायी हुई है। जिसका सम्बन्ध नौ ग्रहों से भी है। ऐं = सरस्वती का बीज मन्त्र है । ह्रीं = महालक्ष्मी का बीज मन्त्र है ...

केतु देवता बताएंगे, हम पूर्व जन्म में कौन थे और क्या करके आए हैं।

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*** केतु देवता बताएंगे आप पूर्व जन्म में क्या थे और क्या करके आएं हैं। कुंडली में केतु को पूर्व जन्म के कर्मों और अधूरी इच्छाओं का कारक माना जाता है, जो बताता है कि, आप पिछले जन्म में किन क्षेत्रों में अधिक सक्रिय थे या कहाँ मोह रह गया था। जिस भाव में केतु होता है, वहां व्यक्ति का पूर्व जन्म का अनुभव होता है, लेकिन इस जन्म में उस भाव से मोहभंग या अलगाव महसूस हो सकता है।  विभिन्न घरों में केतु का पूर्व जन्म आधारित फल इस प्रकार है। #प्रथम भाव (लग्न) व्यक्ति पिछले जन्म में अपने शरीर, स्वास्थ्य या आत्म-केंद्रित कार्यों में अधिक मग्न रहा हो सकता है, इस जन्म में स्वभाव में चंचलता या वैराग्य मिल सकता है। #द्वितीय भाव पिछले जन्म में धन, परिवार या वाणी के मामलों में ज्यादा रुझान था, इस जन्म में इन मामलों में मोहभंग या उतार-चढ़ाव रह सकता है। #तृतीय भाव पूर्व जन्म में साहस, यात्रा या छोटे भाई-बहनों के साथ अधिक समय बीता हो सकता है। #चतुर्थ भाव व्यक्ति पिछले जन्म में सुख-सुविधाओं और मातृ सुख में काफी लिप्त रहा हो सकता है। #पंचम भाव यह पूर्व जन्म के कर्मों का मुख्य घर है, यहाँ केतु होने पर व्यक्...

जब जीवन में तरक्की उन्नति के सभी मार्ग बंद हो जाएं तो कीजिए भगवान शेषनाग कि अचूक साधना।

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**** भगवान शेषनाग साधना, जीवन में धन दौलत की बरसात कर देगी, यह बड़ी अचूक साधना है। जब जीवन में तरक्की- उन्नति और धन -संपत्ति आगमन के सभी मार्ग बंद हो जाएं तो, इस साधना को आजमा कर देखना चाहिए, यह अचूक साधना कभी निष्फल नहीं होती है। यह साधना अखंड धन प्राप्ति के लिए है,यहाँ तक देखा गया है, इस साधना से आसन की स्थिरता भी मिलती है, धन मार्ग में आ रही बाधा अपने आप हट जाती है, नाग देवता के इस रूप को आप सभी जानते हैं, भगवान विष्णु के सुरक्षा आसन के रूप में जाने जाते हैं, यह भगवान विष्णु का अभेद सुरक्षा कवच है। जब कोई साधक सच्चे मन से भगवान शेषनाग की उपासना या साधना करता है तो, उसके जीवन के सारे दुर्भाग्य का नाश कर देते हैं,उसके जीवन में अखंड धन की बरसात कर देते हैं, अगर जीवन के उन्नति के सभी मार्ग बंद हो गए हैं, अगर जीवन में अचल संपति की कामना है, आय के स्त्रोत नहीं बन रहे तो आप भगवान शेष नाग की साधना से वह आसानी से प्राप्त कर सकते हैं। जो भी साधक भगवान शेषनाग की साधना करता है, उसे अभेद सुरक्षा कवच प्रदान करते हैं, कर्ज से मुक्ति देते हैं, व्यापार में वृद्धि होती है, जीवन में सभी कष्टों का नाश ...

कर्मफल दाता शनिदेव कि पूजा का विधान और अलग-अलग वारह घरों में प्रभाव और उपाय

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*** कर्म फल दाता शनिदेव कि पूजा का विधान और अलग-अलग वारह घरों में उसका प्रभाव और उपाय। शनिदेव की पूजा शनिवार को सूर्योदय से पहले या सूर्यास्त के बाद करना उत्तम है। स्नान कर नीले/काले वस्त्र पहनें। घर या मंदिर में सरसों के तेल का दीपक जलाएं, काले तिल, नीले फूल और लौंग अर्पित करें। "ॐ शं शनैश्चराय नमः" मंत्र का जाप करें, पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाकर परिक्रमा करें और शनि चालीसा का पाठ करें।  शनि पूजा का विस्तृत विधान। पूजा का समय: शनिवार के दिन सुबह जल्दी या शाम के समय (सूर्यास्त के बाद) पूजा करें, स्नान के बाद स्वच्छ, संभव हो तो नीले या काले रंग के वस्त्र धारण करें, सरसों का तेल, काले तिल, नीले फूल, शमी का पत्ता, काला कपड़ा, लोहे की वस्तु, अगरबत्ती, धूप और कपूर। पूजा विधि:-- घर के मंदिर में या शनि मंदिर में शनिदेव की प्रतिमा के सामने सरसों के तेल का दीपक जलाएं। शनिदेव को काला तिल और तेल अर्पित करें। "ॐ शं शनैश्चराय नमः" या "ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः" मंत्र का 108 बार जाप करें। शनि चालीसा और शनि आरती करें। विशेष उपाय। शाम को पीपल के पेड़ की जड़ ...

गोमती चक्र के अद्भुत और चमत्कारी उपाय, जो जीवन की दशा और दिशा बदल देंगे।

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गोमती चक्र क्या है और इसे घर में रखने के अत्यंत शक्तिशाली फायदे व धन लाभ के लिए अत्यंत  लाभकारी, जीवन की दशा और दिशा को बदलने की शक्ति रखते हैं ?  महाशक्तिशाली, अत्यंत लाभकारी, दुर्लभ व् प्राकृतिक गोमती चक्र के बारे में जानने वाले है, जो इस पृथ्वी में सिर्फ गोमती नदी में ही पाया जाता है, इस पत्थर का उपयोग हजारों सालों से तांत्रिक क्रियाओं में, पूजा पाठ और गहना आदि के निर्माण कार्य में किया जाता आ रहा है तो, सबसे पहले जानते है की गौमती चक्र क्या है? उसके पश्चात हम जानेंगे कि, इसे घर में रखने के अन्य  लाभकारी फायदे कौन-कौन से है? गोमती चक्र : गोमती चक्र एक सुंदर प्राकृतिक पत्थर है इसे सुदर्शन चक्र के नाम से भी जाना जाता है, यह गोमती नदी में पाया जाता है, इसके चपटे वाले भाग में चक्र की गोल आकृति प्राकृतिक रूप से बनी होती है और दूसरा भाग खोल कि तरह ऊंचा होता है, इसे नाग चक्र भी कहा जाता है, ज्योतिषों के अनुसार जिसके कुंडली में सर्प दोष होता है, उसके लिए सिद्ध गोमती चक्र बहुत ही लाभदायक है। (१) सिद्ध गोमती चक्र वास्तु दोष को नष्ट करता है। 11 गोमती चक्र दक्षिण पूर्व दिशा में इम...

काजल के चमत्कारी उपाय शनि राहु केतु कि शांति के अलावा शत्रुओं से रक्षा करते हैं।

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**** काजल के चमत्कारी प्रयोग, राहु केतु शनि के अलावा शत्रु से रक्षा करते हैं। काजल का ज्योतिषीय उपयोग शनि, राहु और केतु के अशुभ प्रभाव को कम करने, बुरी नजर से बचाव और नौकरी-व्यवसाय में सफलता के लिए बहुत कारगर माना जाता है। शनिवार के दिन पीपल के नीचे काजल अर्पित करना, या किसी सुनसान जगह पर काजल की डिब्बी गाड़ना शनि की साढ़ेसाती व ढैय्या से राहत दिलाता है।। काजल के प्रमुख ज्योतिष उपाय:-- शनि दोष मुक्ति:--- शनिवार को सुरमा या काजल की डिब्बी को पीड़ित व्यक्ति के सिर से 9 बार वारकर सुनसान जगह पर जमीन में दबा दें। नजर दोष से सुरक्षा: --बच्चों या घर को बुरी नजर से बचाने के लिए, शनिवार की रात काजल लगाकर सोएं और सुबह धो लें। नौकरी/व्यापार में सफलता:-- 5 ग्राम सुरमा की डली को शनिवार के दिन किसी निर्जन स्थान पर जमीन में गाड़ दें। शत्रु बाधा:-- चांदी के छोटे सांप बनाकर उनकी आंखों में काजल लगाकर, 21 दिनों तक बिस्तर के नीचे रखने से शत्रु शांत होते हैं। विवाह में देरी:-- यदि विवाह में रुकावट आ रही है, तो शनिवार को सुनसान भूमि पर लकड़ी से जमीन खोदकर काजल का उपाय (नीले फूल दबाना) करें। 1- यदि आपके परिव...

शहद स्वास्थ्,य वशीकरण के साथ-साथ ग्रहों को भी शांत करता है

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*** शहद स्वास्थ्य और वशीकरण के साथ-साथ ग्रहों को भी शांत करता है, शांत किया जाता है। शहद और भोजपत्र का उपयोग प्राचीन काल से ही तांत्रिक और ज्योतिषीय उपायों में किया जाता है। भोजपत्र पर शहद की मदद से मंत्र लिखकर या नाम लिखकर, शत्रुता दूर करने, धन प्राप्ति, और परीक्षा में सफलता जैसे उद्देश्य पूरे किए जाते हैं। ये उपाय विशेष रूप से एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा के लिए प्रसिद्ध हैं।  मुख्य उपाय:-- शत्रुता नाशक (शहद और भोजपत्र) मान्यता है कि, यदि शत्रु परेशान कर रहा है, तो भोजपत्र पर अनार की कलम से शत्रु का नाम लिखकर उसे शहद की डिब्बी में डुबोकर रख दें,इस उपाय को किसी विशेष दिन (जैसे अमावस्या या रवि-पुष्य योग) करने से शत्रु का प्रभाव कम होता है। परीक्षा में सफलता (शहद और बेलपत्र) शहद और बेलपत्र का उपयोग परीक्षा में सफलता के लिए भी एक उपाय के रूप में बताया गया है, जो एकाग्रता बढ़ाने में मदद करता है, इसे भगवान शिव को समर्पित करके (बेलपत्र पर शहद लगाकर) विशेष मनोकामना पूर्ति की जा सकती है,भोजपत्र पर लाल चंदन या अष्टगंध के साथ शहद मिलाकर माता लक्ष्मी का मंत्र लिखने से धन में वृद्धि होती है। श...