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सात मुखी रुद्राक्ष, जीवन में सभी प्रकार के भौतिक सुख समृद्धि और धन देने में सक्षम होता है।

*** सात मुखी रुद्राक्ष जीवन में सभी प्रकार के भौतिक सुख और संपत्ति देने में सक्षम होता है, इसको धारण करने से लक्ष्मी की कृपा और शनि देव का आशीर्वाद प्राप्त होता है।। सात मुखी रुद्राक्ष को सबसे ज्‍यादा शुभ माना जाता है।  इस रुद्राक्ष पर धन की देवी मां लक्ष्‍मी की कृपा बरसती है। सात नंबर को अंकज्‍योतिष में सबसे ज्‍यादा भाग्‍यशाली अंक माना जाता है। इस रुद्राक्ष को धारण करने वाला व्‍यक्‍ति कला में निपुण बनता है और उसे सौंदर्य, सुख और प्रसिद्धि की प्राप्‍ति होती है। इस रुद्राक्ष के स्‍वामी ग्रह शुक्र देवता होते हैं, इसलिए इस रुद्राक्ष को धारण करने से शुक्र से संबंधित सभी दुष्‍प्रभाव दूर हो जाते हैं। सात मुखी रूद्राक्ष का प्रतिनिधित्व स्वयं माँ लक्ष्मी द्वारा किया जाता है। जैसा की हमारे पुराणों में वर्णित है माँ लक्ष्मी धन धान्य का प्रतिनिधित्व करती है, उनका आसान कमल का पुष्प है, उनके ऊपर हाथियों द्वारा लगातार जल की वर्षा की जाती रहती है, जो दर्शाता है की माँ लक्ष्मी की कृपा से मनुष्य अपनी पुरानी यादो से बाहर आकर वर्तमान में जीवन जीना प्रारम्भ करता है और दिन प्रतिदिन अपनी परेशानियों से ऊ...

पीपल के नीचे बैठकर पूजा करने के चमत्कारी लाभ।

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*** पीपल वृक्ष के नीचे बैठकर साधना करने के चमत्कारी फायदे। भगवद्गीता में जहां भगवान ने स्वयं को वृक्षों में पीपल बताया है, वहीं देववृक्ष माने जाने वाले पीपल को लेकर कई उपाय भी प्रसिद्ध हैं। ऐसा माना जाता है कि, यदि पीपल की पूजा नियमित रूप से की जाए तो, सभी देवी-देवताओं की कृपा प्राप्त हो जाती है। पीपल में प्रतिदिन जल अर्पित करने से कुंडली के कई अशुभ माने जाने वाले ग्रह योगों का प्रभाव खत्म हो जाता है। सनातन धर्म में पीपल वृक्ष को देवतुल्य माना गया है। तभी तो इसके पूजन का विधान शास्त्रों में भी बताया गया है। पीपल को कलियुग का कल्पवृक्ष माना जाता है। पीपल एकमात्र पवित्र देववृक्ष है, जिसमें सभी देवताओं के साथ ही पितरों का भी वास रहता है। श्रीमद्भगवदगीता में भगवान श्री कृष्ण ने कहा है कि, ‘अश्वत्थ: सर्ववृक्षाणाम, मूलतो ब्रहमरूपाय मध्यतो विष्णुरूपिणे, अग्रत: शिवरूपाय अश्वत्थाय नमो नम:’  अर्थात मैं वृक्षों में पीपल हूं। पीपल के मूल में ब्रह्मा जी, मध्य में विष्णु जी तथा अग्र भाग में भगवान शिव जी साक्षात रूप से विराजित हैं। स्कंदपुराण के अनुसार पीपल के मूल में विष्णु, तने में केशव, शाखाओं...

राशियों का स्वभाव लक्षण और उपाय।

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*** राशियों का स्वभाव और उपाय। मेष राशि :-- मेष राशि के जातक जीवन में कभी भी किसी से कोई वस्तु मुफ्त में न लें। इनको सलाह है कि यह लोग लाल रंग का कपड़ा /रूमाल का हमेशा उपयोग करें । साधु-संतों, माता पिता, बड़े बुजुर्गो व गुरुओं का सदैव आदर सत्कार करें । इस राशि के लोगो को अपना चाल चलन और व्यवहार सदैव सात्विक रखे और धर्म पर पूरी आस्था बनाये रखे। यह लोग विधवा, असहायों की सहायता करके उनका आशीर्वाद लें। मेष राशि के जातक नियमपूर्वक गाय को मीठी रोटी खिलाएं। वृषभ राशि :-- वृषभ राशि के जातक प्रतिदिन अपने घर में घी का दीपक अवश्य जलाएं। आप लोग शुक्रवार का ब्रत रखें, सदैव साफ कपड़े पहनेंऔर इस्त्र का प्रयोग करें. नया जूता-चप्पल जनवरी माह में न खरीदें. जीवन में ना तो कभी झूठी गवाही दें और ना ही किसी को धोखा दें । वृषभ राशि के लोग अपने घर में मनी प्लांट का पौधा जरुर लगाएं। मिथुन राशि:-- मिथुन राशि के जातक माँस, मदिरा आदि का बिलकुल भी सेवन न करें, घर में मछली ना पालें। इस राशि के जातक स्त्रियों को पूर्ण सम्मान दें, अपनी माता को पूर्ण आदर सत्कार दें और छोटी कन्याओं को खुश करके उनका आशीर्वाद लें। इस राश...

श्रीकृष्ण नाम जप करने के चमत्कारी फायदे।

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*** हरे कृष्ण महा मंत्र का जाप करने के अद्भुत फायदे.....  श्री भगवद गीता में कहा गया है कि, श्री कृष्ण और कृष्ण का नाम एक ही है। इसलिए, जब आप हरे कृष्ण का जाप करते हैं। तो वास्तव में इसका मतलब है कि श्री कृष्ण नाम आपकी जीभ पर हैं। वो आपके साथ है। तो हरे कृष्ण क्या हैं? इसे महा मंत्र – महान मंत्र के रूप में माना जाता है – उनका उल्लेख काली-संतराण उपनिषद में किया गया है। ये एक मंत्र है और हरे उस सचिदानंद भगवान को भाव से पुकारते है भक्त गण। यहीं पर 15 वीं शताब्दी के भक्ति आंदोलन की शुरुआत हुई जब चैतन्य महाप्रभु ने अध्यात्म पथ की शिक्ष की शुरुआत की। हरे कृष्णा मंत्र एक 16-शब्द वाला वैष्णव मंत्र है जो इस प्रकार है:  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे  यह सर्वोच्च सच्चिदानंद के तीन दिव्य शब्दों(शब्द रूप भगवन ) से बना है: “हरे”, “कृष्ण” और “राम”।  हरे कृष्ण मंत्र का जाप करने के फायदे:-  मन-बुद्धि का नियंत्रण:– मंत्र का जाप करने से व्यक्ति अपने मन को पकड़ सकता है। हम सभी अनेक इच्छाओं, बेकार विचारों के गुलाम हैं जो हमारे मन को अशांत कर...

केदारनाथ और पशुपतिनाथ भगवान शिव का एक ही स्वरूप है।

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**** भगवान केदारनाथ और पशुपति नाथ एक ही स्वरूप है, दोनों का दर्शन करके ही पूर्ण फल कि, प्राप्ति होती है। पौराणिक कथा के अनुसार केदारनाथ की कहानी में महाभारत के युद्ध में पांडवों ने अपने गोत्र (कौरवों) भाइयों की हत्या कर दी थी। पांडव इस भ्रातू हत्या के पाप से मुक्त होना चाहते थे। इसलिए वे भगवान शिव के दर्शन चाहते थे। परंतु भगवान शिव पांडवों से बहुत नाराज थे, इसलिए पांडव को दर्शन नहीं देना चाहते थे। पांडव भगवान शिव को खोजते हुए काशी तक आ पहुंचे, लेकिन वहां भी उन्हें भगवान शिव के दर्शन नहीं हुए। भगवान शिव जाकर केदार में बस गए। लेकिन पांडवो को जैसे ही ज्ञात हुआ कि भगवान शिव केदार में है वे उनका पीछे करते-करते केदार भी पहुंच गए। भगवान शंकर का बैल रूप तभी, भगवान शंकर ने बैल का रूप धारण कर लिया और अन्य पशुओं में जा मिले। पांडव फिर भी भगवान शिव को ढूंढते ही रहे। तुरंत ही भीम ने अपना विशाल रूप धारण कर लिया और दो पहाड़ पर फैला दिया जिसके बाद सभी पशु गाय बैल पैर के नीचे से चले गए, किंतु भगवान शिव उस पैर के नीचे से जाने को तैयार नहीं हुए। तभी बैल रूपी शिव धरती में समाने लगे और भीम ने बलपूर्वक बैल ...

जीवन में सम्पूर्णता पाने के लिए कर,ें मां तारा कि साधना।

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*** जीवन में पूर्णता के लिए करें, महाविद्या तारा साधना महाविद्या तारा साधना एक अत्यंत शक्तिशाली साधना, धन संपत्ति, मान सम्मान, भोग एवं मोक्ष सभी कुछ प्राप्त होगा। वैसे तो हर साधना अपने आप में विशिष्‍ट होती है, किन्तु हर साधना का अपना-अपना अलग ही महत्त्व होता है, तारा साधना व्यक्ति को सम्पूर्ण भोग व ऐश्‍वर्य प्रदान करती है, इसे सम्पन्न कर साधक थोड़े समय में ही ... संपूर्ण हो जाता है, संसार उसके के लिए कुछ भी संभव नहीं रहता। भगवती तारा की उपासना तांत्रिक पद्धति से मूल रूप से की जाती है और उनकी साधना करने से साधक बृहस्पति ग्रह के समान या वनस्पति गुरु के समान विद्वान भी हो जाता है। इन के तीन रूप बताए गए हैं। मां तारा की साधना करने से नकारात्मक प्रभावों से सुरक्षा, मन में शांति और स्पष्टता, भय से मुक्ति, साहस और करुणा में वृद्धि, धन-संपदा में वृद्धि, कार्यस्थल में उन्नति, ज्ञान और वाक् सिद्धि, तथा सांसारिक और आध्यात्मिक मुक्ति प्राप्त होती है। तारा साधना साधक के जीवन में भौतिक सुख और मोक्ष दोनों प्रदान करती है।  शारीरिक और मानसिक लाभ। भय से मुक्ति:-- तारा की आराधना भय और असुरक्षा से मुक...

रोट का भोग लगाने से हनुमान जी बहुत प्रसन्न होते हैं, और परेशानियां दूर होती है।

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*** हनुमान जी को रोट का भोग लगाने से अत्यंत प्रसन्न होते हैं, और मिलता है, हर क्षेत्र में विजय का आशीर्वाद।  हनुमान जी को संकटमोचन और बल-बुद्धि का दाता माना जाता है। उन्हें प्रसन्न करने के लिए शास्त्रों और लोक परंपराओं में कुछ विशेष भोग अत्यंत प्रिय बताए गए हैं। ​बूंदी और लड्डू:--- हनुमान जी को बूंदी और बेसन के लड्डू सबसे अधिक प्रिय हैं। मंगलवार और शनिवार को इसका भोग लगाने से ग्रहों के दोष शांत होते हैं। ​रोट (मीठी रोटी): शुद्ध घी, गुड़ और गेहूं के आटे से बना 'रोट' हनुमान जी को बहुत भाता है। विशेष अनुष्ठान या चोला चढ़ाते समय इसका भोग लगाया जाता है। ​इमरती: हनुमान जी को इमरती का भोग लगाना भी बहुत शुभ माना जाता है, विशेषकर संकटों से मुक्ति के लिए। ​गुड़ और चना: यह सबसे सरल और प्रिय भोग है। हनुमान जी को भुने हुए चने और गुड़ का भोग लगाने से मंगल ग्रह के अशुभ प्रभाव दूर होते हैं। ​तुलसी दल:-- किसी भी भोग में तुलसी का पत्ता रखना अनिवार्य है। हनुमान जी भगवान राम के परम भक्त हैं और बिना तुलसी के वे भोग स्वीकार नहीं करते। ​पान का बीड़ा: अपनी विशेष मनोकामना पूर्ति के लिए हनुमान जी को कत्...