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अपनी राशि के अनुसार व्यापारी या नौकरी करें.

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*** अपनी जन्म कुंडली राशि के अनुसार नौकरी अथवा व्यापार करें निश्चित रूप से सफलता मिलेगी.  कई बार हम अपने जीवन में व्यापार या नौकरी करते हैं, लेकिन हमें आशा के अनुरूप सफलता नहीं  है, कई बार हमारी नौकरी या व्यापार खत्म हो जाता है, थक हार कर कई बार यह प्रश्न हमारे मन में उठता है कि, आखिर हम क्या काम करें, नौकरी करें या व्यापार करें, जिससे हमें सफलता मिले जीवन में तरक्की उन्नति हो, इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए हमें अपने कुंडली के हिसाब से व्यापारिया नौकरी करनी चाहिए, ताकि हमारा चौमुखी विकास हो जीवन में तरक्की उन्नति हो. मेष राशि:--- मेष राशि के स्वामी श्री मंगल देव है, इसलिए मेष राशि वाले जातक यदि अपने व्यवसाय में निम्न उपाय करेंगे तो अवश्य ही उनको अपने व्यवसाय में सफलता प्राप्त होगी ऐसा हमारा विश्वास है। आप अपने कार्यालय में प्रयास करें कि, पीने का जल किसी मिट्टी अथवा तांबे के पात्र में रखें, यदि आप कर्मचारी वर्ग का जल इन पात्रों में नहीं रख सकते हैं तो, कम से कम अपने प्रयोग करने का जल इन पात्रों में से किसी भी पात्र में अवश्य रखें। आप जब भी अपने व्यवसाय स्थल पर आए तो अपने नि...

अपनी राशि के अनुसार व्यापारी या नौकरी करें.

*** अपनी जन्म कुंडली राशि के अनुसार नौकरी अथवा व्यापार करें निश्चित रूप से सफलता मिलेगी.  कई बार हम अपने जीवन में व्यापार या नौकरी करते हैं, लेकिन हमें आशा के अनुरूप सफलता नहीं  है, कई बार हमारी नौकरी या व्यापार खत्म हो जाता है, थक हार कर कई बार यह प्रश्न हमारे मन में उठता है कि, आखिर हम क्या काम करें, नौकरी करें या व्यापार करें, जिससे हमें सफलता मिले जीवन में तरक्की उन्नति हो, इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए हमें अपने कुंडली के हिसाब से व्यापारिया नौकरी करनी चाहिए, ताकि हमारा चौमुखी विकास हो जीवन में तरक्की उन्नति हो. मेष राशि:--- मेष राशि के स्वामी श्री मंगल देव है, इसलिए मेष राशि वाले जातक यदि अपने व्यवसाय में निम्न उपाय करेंगे तो अवश्य ही उनको अपने व्यवसाय में सफलता प्राप्त होगी ऐसा हमारा विश्वास है। आप अपने कार्यालय में प्रयास करें कि, पीने का जल किसी मिट्टी अथवा तांबे के पात्र में रखें, यदि आप कर्मचारी वर्ग का जल इन पात्रों में नहीं रख सकते हैं तो, कम से कम अपने प्रयोग करने का जल इन पात्रों में से किसी भी पात्र में अवश्य रखें। आप जब भी अपने व्यवसाय स्थल पर आए तो अपने नि...

मंगली जातक जातिकाओं का विवाह और विशेष सावधानी.

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*** मांगलिक कुंडली का जीवन पर प्रभाव और उपाय, मांगलिक जातक को मांगलिक जातक से ही विवाह करना चाहिए. अन्यथा कई बार जीवन में बड़ी समस्याएं खड़ी हो जाती हैं.  कभी कभी धोके से या अनजाने में भी किसी मांगलिक दोष वाले पाटर्नर से विवाह हो जो जाये तो, ज्योतिष के अनुसार उनका उपाय करना जरूरी हो जाता है  नहीं तो दाम्पत्य जीवन में समस्या आने लगती है, जब किसी लड़के या लड़की की कुंडली में पहले, चौथे, सातवें, आठवे या बारहवे भाव में मंगल ग्रह हो तो ऐसे लोग मांगलिक कहलाते है, और उनकी कुंडली में मंगल दोष पाया जाता है ।   अगर विपरीत से हो जाये तो, दोनों के वैवाहिक जीवन में असंतोष, संतान उत्पन्न में परेशानी, महत्वाकांक्षाओं का बढ़ना, पति पत्नी में आपस में संबंध ठीक ना रहना, तलाक होने तक की नौबत आ जाती है, कभी कभी तो जिन्दगी भर के लिए दोनों को अलग हो जाना पड़ता है. मंगल खराब होने के क्या लक्षण हैं? ज्योतिष शास्त्र में मंगल को ऊर्जा, साहस, पराक्रम और भूमि का कारक माना जाता है। कुंडली में मंगल के कमजोर या खराब होने पर व्यक्ति में साहस की कमी, आत्मविश्वास में गिरावट, लगातार कर्ज, रक्त संबंधी ...

योग्य एवं गुणवान पुत्र के लिए करें भगवान सूर्य देव की साधना.

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*** गुणवान. चरित्रवान. मेधावी एवं सर्वगुणसंपन्न सुन्दर स्वस्थ और निरोग पुत्र के लिए भगवान सूर्य देव की साधना की जाती है.  गुणवान. चरित्रवान. मेधावी एवं सर्वगुण संपन्न. सुन्दर स्वस्थ और निरोग पुत्र के लिए भगवान सूर्य देव की साधना की जाती है. इसमें किसी प्रकार का कोई संशय नहीं है. इसका सबसे बड़ा प्रमाण भगवान सूर्य देव के अति तेजस्वी पुत्र हैं. जिनमें सूर्यपुत्र शनिदेव कर्ण और धर्मराज का नाम बड़ी श्रद्धा से लिया जाता है. जिनकी योग्यता बल और न्याय से, दान से पूरी दुनिया परिचित है. प्रत्येक माता-पिता की इच्छा होती है, उनको ऐसे ही पुत्र प्राप्त हो, जो अपने साथ-साथ उनका भी नाम रोशन करें,  लेकिन इसके लिए जप तप और साधना की आवश्यकता होती है. और भगवान भास्कर की साधना आपकी यह मनोकामना पूर्ण करने में पूरी तरह से सक्षम है. आदित्यं च शिवं विद्याच्छिवमादित्यरूपिणाम्। उभयोरन्तरं नास्ति ह्यादित्यस्य शिवस्य च।। एष ब्रह्मा च विष्णुश्च रूद्र एव हि भास्करः। त्रिमूर्त्यात्मा त्रिवेदात्मा सर्वदेवमयो रविः।। सूर्य एवं शिव में कोई भेद नहीं है. क्योंकि ब्रह्मा, विष्णु व रूद्र तीनों देव स्थित हैं। सूर्य ह...

दहीमन कैसर का रामबाण उपाय.

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कैंसर जैसी बीमारी खत्म हो जाती है, कैंसर सहित कई असाध्य रोगों में एक अचूक औषधि है, दहीमन ! कैंसर जैसी गंभीर बीमारी को एक पेड़ की पत्‍ती से ठीक किया जा सकता है, शायद यह पढ़कर आपको यकीन न हो लेकिन यह सच है, छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में दहीमन नाम के इस पेड़ से और भी बीमारियों का उपचार होता है।  दहीमन :----  इस पेड़ की पत्तियां खाइए ठीक हो जाएगा कैंसर, पत्तियों पर कुछ भी लिखें, उभरकर आ जाता है सामने ! ब्लड प्रेशर और पीलिया जैसी बीमारियों को भी खत्म हो जाती है ! छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में मिलता है यह पेड़ ! छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में दहीमन नाम का यह पेड़ काफी चर्चा में है। इस पेड़ की पत्तियां संजीवनी बूटी का काम करती हैं। इसके सेवन से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी को ठीक किया जा सकता है। अब तक कई लोगों को इसकी पत्ती से आराम भी मिला है। इसके अलावा इससे मानसिक पीड़ा, ब्लड प्रेशर और पीलिया जैसी बीमारियों को भी खत्म किया जा सकता है। पत्तियों की खासियत भी काफी अनोखी है ! इस पेड़ के इन गुणों की वजह से ही अब इसके सरंक्षण की प्रकिया भी तेजी से स्टार्ट हो गई है। वन विभाग द्वारा यह इसके पौधों क...

वैजयंती माला के अद्भुत चमत्कार.

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*** वैजयंती माला के चमत्कारी फायदे:-रुपये पैसों के लिए धारण करना भी बेहद लाभकारी. वैजयंती माला को चमत्कारी माना गया है. जो कमलगट्टे के समान शुभ और लाभकारी होता है। वैजयंती माला भगवान श्रीकृष्ण को अत्यंत प्रिय है, इसलिए आपने श्रीकृष्ण की आरती भजन में सुना भी होगा, 'गले में वैजयंती मालाा, बजा रहे मुरली मधुर बाला'। जो लोग लाइफ में कई तरह की परेशानियों से गुजर रहे हैं. उन्हें भगवान श्रीकृष्ण का प्रिय वैजयंती माला जरूर घर में रखना चाहिए और धारण करना चाहिएं. वैजयंती माला के बारे में धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख किया गया है। यह माला भगवान कृष्ण के गले में भी सुशोभित होती है। कहा जाता है कि, धरती माता ने भगवान कृष्ण को सृष्टि की रक्षा करने के लिए वैजयंती माला पूरी श्रद्धा और प्रेम से भेट की थी। उसके बाद से भगवान कृष्ण को वैजयंती माला बहुत श्रद्धा और प्रेम के साथ दी थी। वैजयंती माला के वैजयंती के बीजों से बनती है। वैजयंती माला का प्रयोग पूजा-पाठ, हवन, यज्ञ और जीवन में आ रही की समस्याओं का समाधान पाने के लिए उपाय के तौर पर इस्तेमाल की जाती है।  वैजयंती माला को लेकर एक मान्यता यह भी है कि, ...

पेरीडांट रत्न छात्रों और व्यापारियों के लिए अत्यंत लाभकारी है.

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*** छात्रों और व्यापारियों के लिए किसी वरदान से कम पेरिडॉट पहनने के क्या फायदे होते हैंं, पेरीडांट रत्न धारण करना. किसी वरदान से काम नहीं है. ज्योतिष शास्त्र में पेरिडॉट घृतमणि) को बुध ग्रह का प्रमुख और अत्यंत चमत्कारी रत्न माना गया है。इसे धारण करने से कमजोर बुध मजबूत होता है, जिससे बुद्धि, व्यापार, और संचार क्षमता में आश्चर्यजनक सुधार देखने को मिलता है. पेरिडॉट पहनने के मुख्य ज्योतिषीय और जीवन-संबंधी लाभ निम्नलिखित हैं: 1. बुद्धि और एकाग्रता में वृद्धि:-- यह रत्न सोचने की क्षमता, तर्कशक्ति और निर्णय लेने की शक्ति को तेज करता है。विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए यह बहुत लाभकारी है。 2. बेहतर संचार और वाक्पटुता:-- चूंकि बुध ग्रह वाणी और संवाद का कारक है, पेरिडॉट आपकी संचार शैली को प्रभावशाली बनाता है。यह वक्ताओं, लेखकों, और सेल्स/मार्केटिंग प्रोफेशनल्स के लिए विशेष रूप से फायदेमंद है。 3. व्यापार और धन लाभ:-- बुध व्यापार का देवता है। पेरिडॉट पहनने से व्यापार में आ रही बाधाएं दूर होती हैं, आर्थिक स्थिति मजबूत होती है और धन-धान्य की वृद्धि होती है。  4. म...