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विष योग जीवन में मृत्यु के सामान कष्ट देता है.

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*** विष योग, जीवन को जहर के समान बना देता है, आदमी को कदम कदम पर दुर्भाग्य और मुसीबतों का सामना करना पड़ता है.  कई बार इस योग के कारण व्यक्ति मानसिक रूप से डिस्टर्ब हो जाता है और पागलपन जैसी स्थिति भी उत्पन्न हो जाती है, ऐसे जातक के अंदर बहम की स्थिति बनी रहती है, वह सही से निर्णय नहीं ले पता क्या करें, क्या ना करें, किसी पर विश्वास नहीं करता. अगर कोई उसके भले की बात करता है, तब भी उसे बुरा लगता है और उसे अपना दुश्मन मानने लगता है.  ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, विष योग जीवन को मृत्यु से बदतर बना देता है.  जिनकी कुंडली में विष योग बन जाता है, उसके जीवन बहुत ही कष्टकारी हो जाता है, ऐसा जातक यदि सोने को भी हाथ लगाए तो, मिट्टी हो जाता है, जीवन में बहुत मुश्किल से सफलता मिलती है और जो सफलता मिलती है वह जातक की योग्यता के अनुसार नहीं होती, जातक लाख योग्यता होने के बाद भी कामयाब नहीं हो पाता, पैसे पैसे के लिए ऐसा जातक मोहताज हो जाता है कर्ज बढ़ जाता है कई बार जीवन में आत्महत्या करने जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है लेकिन यहां यह भी ध्यान रखने वाली बात है कि विश्व योग हमेशा खराब नहीं...

बटुक भैरव की चमत्कारी उपासना

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*** बटुक भैरव की साधना से जीवन में सभी प्रकार के मुसीबत से छुटकारा मिलता है और धन संपत्ति की प्राप्ति होती है. मुख्य रूप से आठ भैरव माने गए हैं:-- 1.असितांग भैरव, 2. रुद्र भैरव, 3. चंद्र भैरव, 4. क्रोध भैरव, 5. उन्मत्त भैरव, 6. कपाली भैरव, 7. भीषण भैरव और 8. संहार भैरव। आदि शंकराचार्य ने भी 'प्रपञ्च-सार तंत्र' में अष्ट-भैरवों के नाम लिखे हैं। तंत्र शास्त्र में भी इनका उल्लेख मिलता है। इसके अलावा सप्तविंशति रहस्य में 7 भैरवों के नाम हैं। इसी ग्रंथ में दस वीर-भैरवों का उल्लेख भी मिलता है। इसी में तीन बटुक-भैरवों का उल्लेख है। रुद्रायमल तंत्र में 64 भैरवों के नामों का उल्लेख है।   बटुक भैरव : -- 1. 'बटुकाख्यस्य देवस्य भैरवस्य महात्मन:। ब्रह्मा विष्णु, महेशाधैर्वन्दित दयानिधे।।'- अर्थात् ब्रह्मा, विष्णु, महेशादि देवों द्वारा वंदित बटुक नाम से प्रसिद्ध इन भैरव देव की उपासना कल्पवृक्ष के समान फलदायी है।    2. बटुक भैरव भगवान का बाल रूप है। इन्हें आनंद भैरव भी कहते हैं। उक्त सौम्य स्वरूप की आराधना शीघ्र फलदायी है। यह कार्य में सफलता के लिए महत्वपूर्ण है। 'महा-काल-भैरव'...

शनि देव का अभिषेक करने से सभी प्रकार की परेशानियों से छुटकारा मिल जाता है.

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*** शनिवार के दिन शनिदेव का तिल के तेल या सरसों के तेल से अभिषेक करने से जीवन के सभी प्रकार के कष्ट खत्म होने लगते हैं और जीवन में तरक्की उन्नति होती है. शनि देव का अभिषेक मुख्य रूप से शनिवार को किया जाता है। इसके लिए स्वच्छ जल और शुद्ध सरसों या तिल के तेल का प्रयोग किया जाता है, अभिषेक करते समय मन में श्रद्धा रखना और 'ॐ शं शनैश्चराय नमः' मंत्र का जाप करना अत्यंत फलदायी माना गया है。  अभिषेक की सरल विधि:-- सही समय: अभिषेक सूर्योदय से पहले या सूर्यास्त के समय करना सबसे उत्तम माना जाता है,स्नान करके स्वच्छ वस्त्र (विशेषकर नीले या काले) धारण करें, याद रखें कि, सिर ढका हुआ नहीं होना चाहिए。 *** अभिषेक सामग्री: स्वच्छ जल, सरसों/तिल का तेल, काले तिल, काले वस्त्र, और नीले फूल。   अभिषेक करने की प्रक्रिया प्रक्रिया:-- सबसे पहले जल से अभिषेक करें, इसके बाद शनिदेव को सरसों का तेल अर्पित करें, काले तिल, फूल और काले वस्त्र चढ़ाएं, अंत में तेल का दीपक जलाकर आरती करें, अभिषेक और पूजा के दौरान इस मंत्र का उच्चारण करें: ॐ शं शनैश्चराय नमः धार्मिक कथाओं की मान्यताओं के अनुसार शनिदेव को कर्मफल...

हनुमान जी को चोला चढ़ाने के अद्भुत एवं चमत्कारी फायदे.

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हनुमान जी की पूजा साधना उपासना के साथ-साथ परिक्रमा करने का बहुत महत्व है.

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*** *हनुमानजी कि, पूजा, साधना के अलाबा उनकी परिक्रमा करने से बड़े से बड़ा संकट खत्म हो जाता है.  जब जीवन में चारों तरफ से संकट घेर ले और बचने का कोई रास्ता नजर ना आए तो, किसी ऐसे हनुमान मंदिर की तलाश करें, जहां पर हनुमान जी की मूर्ति की परिक्रमा लगाने की व्यवस्था हो, अर्थात हनुमान जी की मूर्ति बीच में हो और उसके चारों तरफ परिक्रमा लगाने की जगह हो, जहां आप परिक्रमा लगा सकें. हनुमान जी की परिक्रमा करने से सभी ग्रह/ नक्षत्र जातक के अनुकूल हो जाते हैं. तथा अपनी कृपा और अपना आशीर्वाद देने लगते हैं, जिससे व्यक्ति के जीवन में चारों तरफ से सुख और समृद्धि के नए रास्ते खुलने लगते हैं. अपने संकट के निदान हेतु कम से कम 8 मंगलवार या 11 मंगलवार हनुमान जी की परिक्रमा करनी चाहिए और परिक्रमा करते समय निम्नलिखित चौपाई का निरंतर पाठ करतें रहें. !! संकट कटे मिटे सब पीरा,जो सुमिरै हनुमत बलबीरा'!! अर्थ:--जो भी व्यक्ति बलवान और वीर हनुमान जी का सच्चे मन से स्मरण करता है, उसके सभी संकट (मुसीबतें) दूर हो जाते हैं और सारी पीड़ाएं (दुख-दर्द) मिट जाती हैं。 कहेहु तात अस मोर प्रनामा। सब प्रकार प्रभु पूरनकामा॥...

किस कारण से संतान का सुख नहीं मिलता??

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**** किस कारण से संतान से जीवन में संतान का सुख नहीं मिलता कारण और उपाय।  संतान के बिना वैवाहिक जीवन अधूरा माना जाता है, विशेष रूप से महिलाएं मां बनकर स्वयं को सौभाग्यशाली मानते हैं, और संपूर्णता को प्राप्त हो जाती है, वैवाहिक बंधन में बंध चुके लोगों की तमन्ना होती है कि, उनके जीवन में खुशियां बरकरार रहे। फिर चाहें वो सुख-शांति से जुड़ी हो या फिर धन-संपत्ति से जुड़ी हो। इन्हीं में से एक प्रमुख चीज संतान भी है। जिसके बिना शादी-शुदा जीवन और पारिवारिक सुख अधूरा रहता है। लेकिन कई बार लोगों को इस सुख की प्राप्ति बहुत देर से होती है। ज्योतिष मान्यता के अनुसार वैसे तो कई तरह के श्राप या योग बताए गए हैं, जिसके चलते पहले तो संतान नहीं होती है, संतान हो जाती है तो, संतान को कष्ट होता है या संतान की मृत्यु भी हो सकती है।  1- सर्प श्राप। इस शाप के प्रमुख आठ योग या प्रकार बताए गए हैं। यह योग राहु के कारण बनता है। इसके लिए नाग प्रतिमा बनाकर विधिपूर्वक पूजा की जाए और अंत में हवन कर दान किया जाए तो, इस शाप का प्रभाव नष्ट हो जाता है। इससे नागराज प्रसन्न होकर कुल की वृद्धि करते हैं। 2- पितृ श्र...

लाल और सफेद चंदन के चमत्कारिक उपाय:--

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**** चंदन की माला के उपाय और पहनने के लाभ क्या-क्या है चंदन की माला आध्यात्मिक और शारीरिक दोनों दृष्टियों से बहुत लाभकारी है। इसे धारण करने से मन शांत रहता है, एकाग्रता बढ़ती है, और आकर्षण शक्ति  मजबूत होती है।  चंदन दो प्रकार के होते हैं:--- सफेद और लाल (रक्त चंदन), दोनों के अलग-अलग ज्योतिषीय और तांत्रिक महत्व हैं।  चंदन की माला पहनने के लाभ:-- मानसिक शांति और तनावमुक्ति: --चंदन की तासीर ठंडी होती है। इसे पहनने से शरीर और मन शांत रहता है, जिससे तनाव और गुस्सा कम होता है।  आकर्षण में वृद्धि: ---गले में चंदन की माला या तिलक लगाने से आकर्षण क्षमता बढ़ती है, जिससे लोग आपकी तरफ आकर्षित होते हैं और रुके हुए काम पूरे होते हैं।  एकाग्रता और ध्यान: --इसे पहनकर मंत्र जाप करने या ध्यान  लगाने से मन आसानी से केंद्रित होता है और आध्यात्मिक ऊर्जा बढ़ती है।  विभिन्न चंदन की मालाओं का महत्व:-- सफेद चंदन की माला:-- भगवान विष्णु, श्रीकृष्ण और राम के मंत्रों के जाप के लिए उत्तम है। इससे मां लक्ष्मी और सरस्वती के मंत्रों (जैसे गायत्री मंत्र) का जाप करने से विशेष लाभ मिलत...