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भगवान सूर्य देव की पुत्री सुवर्चला जिसने अमृत पीने सेे इनकार कर दिया.

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*** स्वर्ग में जब अमृत बँट रहा था, तब एक ऐसी देवी भी थीं जिन्होंने अमृत का घूँट पीने से साफ इनकार कर दिया! आख़िर क्या था उस देवी का रहस्यमयी संकल्प, जिसे सुनकर स्वयं भगवान विष्णु भी नतमस्तक हो गए? **** सुवर्चला कि, प्रेरणादायक सीख, जिसने मानवों के हितों को ध्यान में रखकर अमृत पीने से इनकार कर दिया. क्षीरसागर के मंथन से जब चौदह रत्न निकले, तो अंत में भगवान धन्वंतरि अपने कर-कमलों में दिव्य अमृत-कलश लेकर प्रकट हुए। असुरों को मोहित करने के लिए भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण किया और देवताओं को अमृत पान कराने लगे। देवता पंक्तिबद्ध होकर उस अमृत की एक-एक बूँद के लिए तरस रहे थे, क्योंकि जो उस अमृत को चख लेता, वह सदा के लिए अमर, अजर और रोगमुक्त हो जाता।उसी देव-सभा में सूर्यदेव की परम विदुषी और तपस्वी पुत्री सुवर्चला भी उपस्थित थीं। जब मोहिनी रूपी भगवान विष्णु अमृत का स्वर्ण-पात्र लेकर देवी सुवर्चला के सम्मुख पहुँचे, तो उन्होंने अमृत की कटोरी आगे बढ़ा दी। परंतु सुवर्चला ने अपने दोनों हाथ पीछे खींच लिए। उन्होंने अपना मस्तक झुकाया और अत्यंत शांत स्वर में कहा: "हे प्रभु! मुझे क्षमा करें। मैं इस...

श्राद्ध पक्ष में पितृ कवच का नियमित रूप से पाठ करना चाहिए, इससे पितरों का आशीर्वाद मिलता है.

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**** श्राद्ध पक्ष में नियमित रूप से पितृ कवच का पाठ करना चाहिए, ऐसा करने से पितरों का आशीर्वाद मिलता है और जीवन में हर तरह से खूब तरक्की उन्नति होती है। पितृ कवच पढ़ने के मुख्य फायदे ये हैं, पितृ दोष से मुक्ति, पितरों की प्रसन्नता, वंश वृद्धि का आशीर्वाद, जीवन में सुख-समृद्धि, और सभी प्रकार की बाधाओं व संकटों का नाश, इसे पढ़ने से पितरों की आत्मा को शांति और मोक्ष मिलता है, जिससे व्यक्ति को जीवन में सफलता और खुशहाली प्राप्त होती है। पितृ कवच के लाभ:-- पितृ दोष निवारण:---यह कवच कुंडली से पितृ दोष को दूर करने में सहायक है, जिससे व्यक्ति के जीवन से परेशानियां दूर होती हैं। पितरों की प्रसन्नता:---पितृ कवच का पाठ करने से पूर्वज प्रसन्न होते हैं और अपने वंशजों को आशीर्वाद देते हैं, जिससे वंश वृद्धि होती है। समस्त बाधाओं से मुक्ति:---इस कवच के नियमित पाठ से जीवन में आ रही सभी प्रकार की बाधाएँ और संकट दूर होते हैं। मोक्ष की प्राप्ति:---पितृ कवच का पाठ पितरों की आत्मा को शांति और मोक्ष प्रदान करता है, जिससे उन्हें पितृ लोक से आगे बढ़ने में सहायता मिलती है। सुख-समृद्धि और यश:---पितरों के आशीर्वाद...

अपने पूर्वजों का श्राद्ध न करने के नुकसान.

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**** श्राद्ध न करने से सभी प्रकार की तरक्की उन्नति वंश वृद्धि रुक जाती है और दुखों के अम्वार लग जाते हैं, भयंकर दुख उठाने पड़ते हैं। शास्त्रों में श्राद्ध न करने से होने वाली हानियों का जो वर्णन किया गया है, उन्हें जानकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। शास्त्रों में मृत व्यक्ति के दाहकर्म के पहले ही पिण्ड-पानी के रूप में खाने-पीने की व्यवस्था कर दी गई है। यह तो मृत व्यक्ति की इस महायात्रा में रास्ते के भोजन-पानी की बात हुई। परलोक पहुंचने पर भी उसके लिए वहां न अन्न होता है और न पानी। यदि सगे-संबंधी भी अन्न-जल न दें तो भूख-प्यास से उसे वहां बहुत ही भयंकर दु:ख होता है। आश्विन मास के पितृपक्ष में पितरों को यह आशा रहती है कि हमारे पुत्र-पौत्रादि हमें अन्न-जल से संतुष्ट करेंगे, यही आशा लेकर वे पितृलोक से पृथ्वी लोक पर आते हैं, लेकिन जो लोग पितर हैं ही कहां? यह मानकर उचित तिथि पर जल व शाक से भी श्राद्ध नहीं करते हैं, उनके पितर दु:खी व निराश होकर शाप देकर अपने लोक वापिस लौट जाते हैं और बाध्य होकर श्राद्ध न करने वाले अपने सगे-सम्बधियों का रक्त चूसने लगते हैं। फिर इस अभिशप्त परिवार को जीवन भर कष्ट-ही-क...

शनिवार को पीपल के पेड़ के नीचे आटेे के दीपक जलाने के चमत्कारी फायदे.

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=== शनिवार को पीपल के पेड़ के नीचे आटे के दीपक जलाने के चमत्कारी फायदें. शनिवार के दिन पीपल के पेड़ के नीचे आटे का दीपक जलाने से शनि दोष, साढ़ेसाती, ढैय्या से मुक्ति मिलती है और पितरों तथा मां लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है, तथा जले हुए दीपक को का बचा हुआ आटा खाकर चीटें, चींटी, जीव, जंतु अपना पेट भरते हैं, इससे भी उनकी दुआएं आपके मिलती हैं और जीवन में कष्ट कम होते हैं, बेजुबानों कि, दुआओं से जातक और उसका परिवार फलता फूलता है, जीवन में तरक्की उन्नति होती है. मुख्य लाभ:-- शनि शांति: सरसों के तेल या तिल के तेल का दीपक जलाने से शनि देव प्रसन्न होते हैं और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं। पितृ कृपा: आटे से बना चौमुखी (चार मुंह वाला) दीपक जलाने से पितृगण संतुष्ट होते हैं और घर में सुख-शांति आती है।  आर्थिक लाभ: मान्यता है कि, पीपल में देवी-देवताओं का वास होता है, जिससे धन और करियर से जुड़ी समस्याएं हल होती हैं।  सही तरीका:-- शनिवार की शाम को सूर्यास्त के बाद या गोधूल वेला में दीपक जलाना सबसे अच्छा माना जाता है,गूंथे हुए आटे का एक साफ चौमुखी दीपक बनाएं, उसमें सरसों का तेल और लंबी ...

हनुमान यंत्र का तांत्रिक और चमत्कारिक प्रयोग का जीवन पर प्रभाव.

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**** 🙏बाबा नीम करोली आश्रम, कैंची धाम, नैनीताल (उत्तरांचल) **** हनुमान जी के यंत्र की साधना बड़े से बड़े संकट से छुटकारा दिलाकर तरक्की उन्नति और धन संपत्ति और आध्यात्म के नए मार्ग खोलती है. *** जब जीवन में किसी भी प्रकार से परेशानियों का अंत न हो तो, इन सबसे छुटकारा पाने का एकमात्र उपाय है, हनुमान यंत्र की पूरी श्रद्धा भक्ति के साथ विधिवत स्थापना और पूजा. हनुमान  यंत्र :- भगवान हनुमान की असीम शक्ति, भक्ति और अद्वितीय संरक्षण का प्रतीक है। यह यंत्र विशेष रूप से उन लोगों के लिए प्रभावशाली है जो भय, शारीरिक कमजोरी, नकारात्मक ऊर्जा, बुरी नजर, शत्रु बाधा या मानसिक अस्थिरता से जूझ रहे हैं। यह यंत्र साहस, आत्मविश्वास, स्वास्थ्य और सफलता को बढ़ाने वाला शक्तिशाली तांत्रिक उपाय है। हनुमान जी की कृपा से जीवन में दृढ़ता, स्थिरता और निर्भीकता का संचार होता है, हनुमान यंत्र का नियमित पूजन व्यक्ति को शत्रुओं पर विजय, नकारात्मकता से मुक्ति और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है, हनुमान जी की निरंतर साधना से जातक के अंदर आध्यात्मिक ज्ञान और तेज बढ़ने लगता है, धीरे-धीरे यह स्थिति उसके अंदर दिव्...

हनुमान चालीसा पढ़ने से बड़े से बड़ा संकट टल जाता है.

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*** नीम करोली धाम, कैंची धाम, नैनीताल (उत्तरांचल) हनुमान चालीसा पढ़ने का चमत्कार और सही विधि, हनुमान जी की कृपा से बड़े से बड़ा संकट टल जाता है. और यदि पूरे नियम और संयम से 40 दिन सुंदरकांड का पाठ किया जाए तो, राम भक्त हनुमान जी की कृपा से बड़े से बड़ा संकट टल जाता है और बड़े से बड़ा बिगड़ा काम बन जाता है.  हनुमान जी को कलयुग का देवता भी कहा जाता है. श्रीराम जी के परम भक्त हनुमान जी की उपासना करना बेहद आसान हैं. मंगलवार और शनिवार का दिन विशेष तौर पर उन्हें समर्पित है. ऐसे में ज्यादातर लोग उनकी भक्ति करने के लिए हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं. हनुमान चालीसा का पाठ कुछ लोग रोजाना, कुछ साप्ताहिक तो कुछ लोग विशेषकर मंगलवार को ही करते हैं. लेकिन बहुत कम लोग ही ये जानते हैं कि, हनुमान चालीसा का पाठ कैसे किया जाता है? पाठ का जाप करते समय किस तरह की सावधानियां बरतनी होती है और किन नियमों का पालन करना होता है? आइए जानते हैं इसके बारे में. हनुमान चालीसा पाठ की विधि:-- बजरंग बली के दिव्य कंपन से जुड़ने के लिए अपने शरीर और पूजा स्थान को शुद्ध और पवित्र करें. सुबह स्नान के पश्चात सरसों के तेल का...

मानव जीवन पर चंद्र का प्रभाव और ग्रहण पर किए जाने वाला विशेष प्रयोग.

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+++ मानव जीवन पर चंद्र का प्रभाव एंव उपाय और चंद्र ग्रहण पर किए जाने वाले विशेष प्रयोग.  चंद्र हमारे मन का कारक है, क्योंकि चंद्र का संबंध पानी से माना जाता है और हमारे शरीर में लगभग 75% पानी की उपस्थिति पाई जाती है, चंद्र कमजोर होने से हमारे मन की स्थिति ठीक नहीं रहती, ऐसा जातक एक निर्णय पर कायम नहीं रहता, और बार-बार अपने निर्णय बदलता है, कई बार जीवन में आत्महत्या जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है, धन की समस्या रहती है, जरूर से ज्यादा कर्ज बढ़ जाता है, अपमान बहुत करते हैं, अपनों का साथ नहीं मिलता, जन्म स्थान पर सफलता नहीं मिलती, पैतृक संपत्ति का लाभ नहीं मिलता और बात-बात पर अपमान की स्थिति देखने को मिलती है. महिलाओं के साथ और तनाव की स्थिति रहती है. चन्द्र साधना मन, भावनाओं और आकर्षण शक्ति को जागृत करने की सूक्ष्म तांत्रिक प्रक्रिया है। ग्रहण काल में यह साधना अनेक गुना प्रभाव देती है। यह प्रयोग मन-शुद्धि, चन्द्रदोष शमन और व्यक्तित्व आकर्षण के लिए किया जाता है। माला का चयन (अत्यंत महत्वपूर्ण) चन्द्र जप के लिए स्फटिक माला सर्वोत्तम मानी जाती है। यदि स्फटिक उपलब्ध न हो तो मोती माला प्रय...