कर्मफल दाता शनिदेव कि पूजा का विधान और अलग-अलग वारह घरों में प्रभाव और उपाय
*** कर्म फल दाता शनिदेव कि पूजा का विधान और अलग-अलग वारह घरों में उसका प्रभाव और उपाय। शनिदेव की पूजा शनिवार को सूर्योदय से पहले या सूर्यास्त के बाद करना उत्तम है। स्नान कर नीले/काले वस्त्र पहनें। घर या मंदिर में सरसों के तेल का दीपक जलाएं, काले तिल, नीले फूल और लौंग अर्पित करें। "ॐ शं शनैश्चराय नमः" मंत्र का जाप करें, पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाकर परिक्रमा करें और शनि चालीसा का पाठ करें। शनि पूजा का विस्तृत विधान। पूजा का समय: शनिवार के दिन सुबह जल्दी या शाम के समय (सूर्यास्त के बाद) पूजा करें, स्नान के बाद स्वच्छ, संभव हो तो नीले या काले रंग के वस्त्र धारण करें, सरसों का तेल, काले तिल, नीले फूल, शमी का पत्ता, काला कपड़ा, लोहे की वस्तु, अगरबत्ती, धूप और कपूर। पूजा विधि:-- घर के मंदिर में या शनि मंदिर में शनिदेव की प्रतिमा के सामने सरसों के तेल का दीपक जलाएं। शनिदेव को काला तिल और तेल अर्पित करें। "ॐ शं शनैश्चराय नमः" या "ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः" मंत्र का 108 बार जाप करें। शनि चालीसा और शनि आरती करें। विशेष उपाय। शाम को पीपल के पेड़ की जड़ ...