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हनुमान जी की पूजा साधना उपासना के साथ-साथ परिक्रमा करने का बहुत महत्व है.

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*** *हनुमानजी कि, पूजा, साधना के अलाबा उनकी परिक्रमा करने से बड़े से बड़ा संकट खत्म हो जाता है.  जब जीवन में चारों तरफ से संकट घेर ले और बचने का कोई रास्ता नजर ना आए तो, किसी ऐसे हनुमान मंदिर की तलाश करें, जहां पर हनुमान जी की मूर्ति की परिक्रमा लगाने की व्यवस्था हो, अर्थात हनुमान जी की मूर्ति बीच में हो और उसके चारों तरफ परिक्रमा लगाने की जगह हो, जहां आप परिक्रमा लगा सकें. हनुमान जी की परिक्रमा करने से सभी ग्रह/ नक्षत्र जातक के अनुकूल हो जाते हैं. तथा अपनी कृपा और अपना आशीर्वाद देने लगते हैं, जिससे व्यक्ति के जीवन में चारों तरफ से सुख और समृद्धि के नए रास्ते खुलने लगते हैं. अपने संकट के निदान हेतु कम से कम 8 मंगलवार या 11 मंगलवार हनुमान जी की परिक्रमा करनी चाहिए और परिक्रमा करते समय निम्नलिखित चौपाई का निरंतर पाठ करतें रहें. !! संकट कटे मिटे सब पीरा,जो सुमिरै हनुमत बलबीरा'!! अर्थ:--जो भी व्यक्ति बलवान और वीर हनुमान जी का सच्चे मन से स्मरण करता है, उसके सभी संकट (मुसीबतें) दूर हो जाते हैं और सारी पीड़ाएं (दुख-दर्द) मिट जाती हैं。 कहेहु तात अस मोर प्रनामा। सब प्रकार प्रभु पूरनकामा॥...

किस कारण से संतान का सुख नहीं मिलता??

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**** किस कारण से संतान से जीवन में संतान का सुख नहीं मिलता कारण और उपाय।  संतान के बिना वैवाहिक जीवन अधूरा माना जाता है, विशेष रूप से महिलाएं मां बनकर स्वयं को सौभाग्यशाली मानते हैं, और संपूर्णता को प्राप्त हो जाती है, वैवाहिक बंधन में बंध चुके लोगों की तमन्ना होती है कि, उनके जीवन में खुशियां बरकरार रहे। फिर चाहें वो सुख-शांति से जुड़ी हो या फिर धन-संपत्ति से जुड़ी हो। इन्हीं में से एक प्रमुख चीज संतान भी है। जिसके बिना शादी-शुदा जीवन और पारिवारिक सुख अधूरा रहता है। लेकिन कई बार लोगों को इस सुख की प्राप्ति बहुत देर से होती है। ज्योतिष मान्यता के अनुसार वैसे तो कई तरह के श्राप या योग बताए गए हैं, जिसके चलते पहले तो संतान नहीं होती है, संतान हो जाती है तो, संतान को कष्ट होता है या संतान की मृत्यु भी हो सकती है।  1- सर्प श्राप। इस शाप के प्रमुख आठ योग या प्रकार बताए गए हैं। यह योग राहु के कारण बनता है। इसके लिए नाग प्रतिमा बनाकर विधिपूर्वक पूजा की जाए और अंत में हवन कर दान किया जाए तो, इस शाप का प्रभाव नष्ट हो जाता है। इससे नागराज प्रसन्न होकर कुल की वृद्धि करते हैं। 2- पितृ श्र...

लाल और सफेद चंदन के चमत्कारिक उपाय:--

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**** चंदन की माला के उपाय और पहनने के लाभ क्या-क्या है चंदन की माला आध्यात्मिक और शारीरिक दोनों दृष्टियों से बहुत लाभकारी है। इसे धारण करने से मन शांत रहता है, एकाग्रता बढ़ती है, और आकर्षण शक्ति  मजबूत होती है।  चंदन दो प्रकार के होते हैं:--- सफेद और लाल (रक्त चंदन), दोनों के अलग-अलग ज्योतिषीय और तांत्रिक महत्व हैं।  चंदन की माला पहनने के लाभ:-- मानसिक शांति और तनावमुक्ति: --चंदन की तासीर ठंडी होती है। इसे पहनने से शरीर और मन शांत रहता है, जिससे तनाव और गुस्सा कम होता है।  आकर्षण में वृद्धि: ---गले में चंदन की माला या तिलक लगाने से आकर्षण क्षमता बढ़ती है, जिससे लोग आपकी तरफ आकर्षित होते हैं और रुके हुए काम पूरे होते हैं।  एकाग्रता और ध्यान: --इसे पहनकर मंत्र जाप करने या ध्यान  लगाने से मन आसानी से केंद्रित होता है और आध्यात्मिक ऊर्जा बढ़ती है।  विभिन्न चंदन की मालाओं का महत्व:-- सफेद चंदन की माला:-- भगवान विष्णु, श्रीकृष्ण और राम के मंत्रों के जाप के लिए उत्तम है। इससे मां लक्ष्मी और सरस्वती के मंत्रों (जैसे गायत्री मंत्र) का जाप करने से विशेष लाभ मिलत...

मां कामाख्या:-- कामियां सिंदूर के उपयोग का फायदा:--

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*** माँ कामाख्या रक्त वस्त्र और सिंदूर का महत्व, उपयोग और उसके चमत्कारी लाभ:-- माँ कामाख्या देवी तंत्र साधना और शक्ति उपासना की प्रमुख देवी हैं। असम के गुवाहाटी में स्थित कामाख्या मंदिर को सिद्धपीठों में गिना जाता है, जहां देवी के योनि रूप की पूजा की जाती है। इस मंदिर की एक विशेषता रक्ता वस्त्र (लाल वस्त्र) और कामाख्या सिंदूर है, जो शक्ति साधकों और श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इन दोनों का उपयोग तंत्र साधना, आध्यात्मिक उन्नति, और मनोकामना पूर्ति के लिए किया जाता है. ---माँ कामाख्या रक्ता वस्त्र का महत्व:-- ***रक्ता वस्त्र क्या है? रक्ता वस्त्र, माँ कामाख्या के मंदिर में पूजन के दौरान देवी को अर्पित किए गए लाल वस्त्र को कहा जाता है। यह वस्त्र माँ की ऊर्जा को धारण करता है और इसे विशेष रूप से शक्ति साधकों, तांत्रिकों और भक्तों को प्रदान किया जाता है। *** रक्ता वस्त्र की उत्पत्ति:-- कामाख्या मंदिर में हर वर्ष अंबुबाची महोत्सव मनाया जाता है, जब देवी की मूर्ति से प्राकृतिक रूप से रक्तस्राव होता है। इस दौरान मंदिर के गर्भगृह में माँ को अर्पित किए गए वस्त्र को "रक्ता...

अपनी राशि के अनुसार व्यापारी या नौकरी करें.

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*** अपनी जन्म कुंडली राशि के अनुसार नौकरी अथवा व्यापार करें निश्चित रूप से सफलता मिलेगी.  कई बार हम अपने जीवन में व्यापार या नौकरी करते हैं, लेकिन हमें आशा के अनुरूप सफलता नहीं  है, कई बार हमारी नौकरी या व्यापार खत्म हो जाता है, थक हार कर कई बार यह प्रश्न हमारे मन में उठता है कि, आखिर हम क्या काम करें, नौकरी करें या व्यापार करें, जिससे हमें सफलता मिले जीवन में तरक्की उन्नति हो, इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए हमें अपने कुंडली के हिसाब से व्यापारिया नौकरी करनी चाहिए, ताकि हमारा चौमुखी विकास हो जीवन में तरक्की उन्नति हो. मेष राशि:--- मेष राशि के स्वामी श्री मंगल देव है, इसलिए मेष राशि वाले जातक यदि अपने व्यवसाय में निम्न उपाय करेंगे तो अवश्य ही उनको अपने व्यवसाय में सफलता प्राप्त होगी ऐसा हमारा विश्वास है। आप अपने कार्यालय में प्रयास करें कि, पीने का जल किसी मिट्टी अथवा तांबे के पात्र में रखें, यदि आप कर्मचारी वर्ग का जल इन पात्रों में नहीं रख सकते हैं तो, कम से कम अपने प्रयोग करने का जल इन पात्रों में से किसी भी पात्र में अवश्य रखें। आप जब भी अपने व्यवसाय स्थल पर आए तो अपने नि...

अपनी राशि के अनुसार व्यापारी या नौकरी करें.

*** अपनी जन्म कुंडली राशि के अनुसार नौकरी अथवा व्यापार करें निश्चित रूप से सफलता मिलेगी.  कई बार हम अपने जीवन में व्यापार या नौकरी करते हैं, लेकिन हमें आशा के अनुरूप सफलता नहीं  है, कई बार हमारी नौकरी या व्यापार खत्म हो जाता है, थक हार कर कई बार यह प्रश्न हमारे मन में उठता है कि, आखिर हम क्या काम करें, नौकरी करें या व्यापार करें, जिससे हमें सफलता मिले जीवन में तरक्की उन्नति हो, इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए हमें अपने कुंडली के हिसाब से व्यापारिया नौकरी करनी चाहिए, ताकि हमारा चौमुखी विकास हो जीवन में तरक्की उन्नति हो. मेष राशि:--- मेष राशि के स्वामी श्री मंगल देव है, इसलिए मेष राशि वाले जातक यदि अपने व्यवसाय में निम्न उपाय करेंगे तो अवश्य ही उनको अपने व्यवसाय में सफलता प्राप्त होगी ऐसा हमारा विश्वास है। आप अपने कार्यालय में प्रयास करें कि, पीने का जल किसी मिट्टी अथवा तांबे के पात्र में रखें, यदि आप कर्मचारी वर्ग का जल इन पात्रों में नहीं रख सकते हैं तो, कम से कम अपने प्रयोग करने का जल इन पात्रों में से किसी भी पात्र में अवश्य रखें। आप जब भी अपने व्यवसाय स्थल पर आए तो अपने नि...

मंगली जातक जातिकाओं का विवाह और विशेष सावधानी.

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*** मांगलिक कुंडली का जीवन पर प्रभाव और उपाय, मांगलिक जातक को मांगलिक जातक से ही विवाह करना चाहिए. अन्यथा कई बार जीवन में बड़ी समस्याएं खड़ी हो जाती हैं.  कभी कभी धोके से या अनजाने में भी किसी मांगलिक दोष वाले पाटर्नर से विवाह हो जो जाये तो, ज्योतिष के अनुसार उनका उपाय करना जरूरी हो जाता है  नहीं तो दाम्पत्य जीवन में समस्या आने लगती है, जब किसी लड़के या लड़की की कुंडली में पहले, चौथे, सातवें, आठवे या बारहवे भाव में मंगल ग्रह हो तो ऐसे लोग मांगलिक कहलाते है, और उनकी कुंडली में मंगल दोष पाया जाता है ।   अगर विपरीत से हो जाये तो, दोनों के वैवाहिक जीवन में असंतोष, संतान उत्पन्न में परेशानी, महत्वाकांक्षाओं का बढ़ना, पति पत्नी में आपस में संबंध ठीक ना रहना, तलाक होने तक की नौबत आ जाती है, कभी कभी तो जिन्दगी भर के लिए दोनों को अलग हो जाना पड़ता है. मंगल खराब होने के क्या लक्षण हैं? ज्योतिष शास्त्र में मंगल को ऊर्जा, साहस, पराक्रम और भूमि का कारक माना जाता है। कुंडली में मंगल के कमजोर या खराब होने पर व्यक्ति में साहस की कमी, आत्मविश्वास में गिरावट, लगातार कर्ज, रक्त संबंधी ...