श्राद्ध पक्ष में श्री गीता जी का पाठ आर्यमा देवता की पूजा अवश्य करनी चाहिए.
*** श्राद्ध पक्ष में आर्यमा पितृ कि, साधना और गीता पढ़ने का महत्व. जिसको सुनकर पितृ तृप्त और संतुष्ट होकर आशीर्वाद देते हैं. भगवान कृष्ण ने गीता में कहा है कि, पितरों में आर्यमा पितृ मैं हूं, अर्थात साक्षात् नारायण की पूजा ही पितरों की सेवा और पूजा है और श्राद्ध पक्ष में श्रीमद्भागवत गीता का पाठ करने से पितरों को मोक्ष और शांति मिलती है, साथ ही वंशजों को पितृ दोष से मुक्ति प्राप्त होती है, तथा पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। मुख्य लाभ:-- पितृ तृप्ति:--यदि किसी कारणवश तर्पण या पिंडदान पूरा न हो सके, तो गीता पाठ से पूर्वज तृप्त होते हैं। पितृ दोष से मुक्ति:-- गीता के पाठ से कुंडली के पितृ दोष और ग्रह बाधाओं का प्रभाव कम होता है। पितृ ऋण से छुटकारा:-- इससे व्यक्ति को पितृ ऋण से मुक्ति मिलती है और पूर्वजों के लिए वैकुंठ के द्वार खुलते हैं। आध्यात्मिक शांति:-- पाठ करने वाले के मन में शांति, संयम और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। विशेष अध्याय:-- सातवां अध्याय: --पितरों की मुक्ति और मोक्ष के लिए सबसे उत्तम माना गया है। नौवां और बारहवां अध्याय:--...