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दहीमन कैसर का रामबाण उपाय.

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कैंसर जैसी बीमारी खत्म हो जाती है, कैंसर सहित कई असाध्य रोगों में एक अचूक औषधि है, दहीमन ! कैंसर जैसी गंभीर बीमारी को एक पेड़ की पत्‍ती से ठीक किया जा सकता है, शायद यह पढ़कर आपको यकीन न हो लेकिन यह सच है, छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में दहीमन नाम के इस पेड़ से और भी बीमारियों का उपचार होता है।  दहीमन :----  इस पेड़ की पत्तियां खाइए ठीक हो जाएगा कैंसर, पत्तियों पर कुछ भी लिखें, उभरकर आ जाता है सामने ! ब्लड प्रेशर और पीलिया जैसी बीमारियों को भी खत्म हो जाती है ! छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में मिलता है यह पेड़ ! छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में दहीमन नाम का यह पेड़ काफी चर्चा में है। इस पेड़ की पत्तियां संजीवनी बूटी का काम करती हैं। इसके सेवन से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी को ठीक किया जा सकता है। अब तक कई लोगों को इसकी पत्ती से आराम भी मिला है। इसके अलावा इससे मानसिक पीड़ा, ब्लड प्रेशर और पीलिया जैसी बीमारियों को भी खत्म किया जा सकता है। पत्तियों की खासियत भी काफी अनोखी है ! इस पेड़ के इन गुणों की वजह से ही अब इसके सरंक्षण की प्रकिया भी तेजी से स्टार्ट हो गई है। वन विभाग द्वारा यह इसके पौधों क...

वैजयंती माला के अद्भुत चमत्कार.

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*** वैजयंती माला के चमत्कारी फायदे:-रुपये पैसों के लिए धारण करना भी बेहद लाभकारी. वैजयंती माला को चमत्कारी माना गया है. जो कमलगट्टे के समान शुभ और लाभकारी होता है। वैजयंती माला भगवान श्रीकृष्ण को अत्यंत प्रिय है, इसलिए आपने श्रीकृष्ण की आरती भजन में सुना भी होगा, 'गले में वैजयंती मालाा, बजा रहे मुरली मधुर बाला'। जो लोग लाइफ में कई तरह की परेशानियों से गुजर रहे हैं. उन्हें भगवान श्रीकृष्ण का प्रिय वैजयंती माला जरूर घर में रखना चाहिए और धारण करना चाहिएं. वैजयंती माला के बारे में धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख किया गया है। यह माला भगवान कृष्ण के गले में भी सुशोभित होती है। कहा जाता है कि, धरती माता ने भगवान कृष्ण को सृष्टि की रक्षा करने के लिए वैजयंती माला पूरी श्रद्धा और प्रेम से भेट की थी। उसके बाद से भगवान कृष्ण को वैजयंती माला बहुत श्रद्धा और प्रेम के साथ दी थी। वैजयंती माला के वैजयंती के बीजों से बनती है। वैजयंती माला का प्रयोग पूजा-पाठ, हवन, यज्ञ और जीवन में आ रही की समस्याओं का समाधान पाने के लिए उपाय के तौर पर इस्तेमाल की जाती है।  वैजयंती माला को लेकर एक मान्यता यह भी है कि, ...

पेरीडांट रत्न छात्रों और व्यापारियों के लिए अत्यंत लाभकारी है.

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*** छात्रों और व्यापारियों के लिए किसी वरदान से कम पेरिडॉट पहनने के क्या फायदे होते हैंं, पेरीडांट रत्न धारण करना. किसी वरदान से काम नहीं है. ज्योतिष शास्त्र में पेरिडॉट घृतमणि) को बुध ग्रह का प्रमुख और अत्यंत चमत्कारी रत्न माना गया है。इसे धारण करने से कमजोर बुध मजबूत होता है, जिससे बुद्धि, व्यापार, और संचार क्षमता में आश्चर्यजनक सुधार देखने को मिलता है. पेरिडॉट पहनने के मुख्य ज्योतिषीय और जीवन-संबंधी लाभ निम्नलिखित हैं: 1. बुद्धि और एकाग्रता में वृद्धि:-- यह रत्न सोचने की क्षमता, तर्कशक्ति और निर्णय लेने की शक्ति को तेज करता है。विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए यह बहुत लाभकारी है。 2. बेहतर संचार और वाक्पटुता:-- चूंकि बुध ग्रह वाणी और संवाद का कारक है, पेरिडॉट आपकी संचार शैली को प्रभावशाली बनाता है。यह वक्ताओं, लेखकों, और सेल्स/मार्केटिंग प्रोफेशनल्स के लिए विशेष रूप से फायदेमंद है。 3. व्यापार और धन लाभ:-- बुध व्यापार का देवता है। पेरिडॉट पहनने से व्यापार में आ रही बाधाएं दूर होती हैं, आर्थिक स्थिति मजबूत होती है और धन-धान्य की वृद्धि होती है。  4. म...

अश्वगंधा केतु को शांत करने का अचूक उपाय.

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*** पितृदोष बीमारियों और केतू की शांति के लिए चमत्कारी लाभ पहुंचता है. #केतु अश्वगंधा की जड़ का प्रतिनिधि ग्रह केतु है। केतु के शुभ प्रभाव में वृद्धि करने और बुरे प्रभाव कम करने में अश्वगंधा चमत्कार की तरह काम करता है। अगर आपका केतु निर्बल है, तो पेशाब की बीमारी। * संतान उत्पति में रुकावट। * सिर के बाल झड़ जाते हैं। * शरीर की नसों में कमजोरी आ जाती है। * केतु के अशुभ प्रभाव से चर्म रोग होता है। * कान खराब हो जाता है या सुनने की क्षमता कमजोर पड़ जाती है। * कान, रीढ़, घुटने, लिंग, जोड़ आदि में समस्या उत्पन्न हो जाती है। *यौनशक्ति में कमी आती है .... ओर इन सभी समश्याओ का उपचार अकेला अश्वगंधा कर देता है ।। अगर आप सेक्स पावर, सेक्स में इच्छी की कमी, वीर्य में कमी, शीघ्रपतन जैसी समस्याओं से हो रहे हैं परेशान तो अश्वगंधा का सेवन अवश्य करें. इसमें एक ऐसी शक्तिवर्धक औषधि मौजूद है, जो पुरुषों में यौन क्षमता को दुरुस्त करने में मददगार होता है. अश्वगंधा का सेवन करने से  वीर्य की गुणवत्ता में सुधार और संख्याओं में भी वृद्धि करता है, ओर अगर आपके यौनशक्ति दुर्बल नही भी है, तो भी अश्वगंधा का उपयोग...

13, 18, 19, 21 मुखी रुद्राक्ष पहनने के फायदे.

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*** जीवन में तरक्की, उन्नति और धन संपत्ति प्राप्त करने के लिए 7 मुखी, 13 मुखी, 19 या 21 मुखी रुद्राक्ष धारण करना सबसे उत्तम माना जाता है。 *** सात मुखी रुद्राक्ष लाभ:-- इसे साक्षात माता लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता हैं, इसे पहनने से धन-धान्य, व्यापार में सफलता और नए अवसर प्राप्त होते हैं。किनके लिए: जो लोग आर्थिक स्थिरता और ऐश्वर्या पाना चाहते हैं。 ***  तेरह मुखी रुद्राक्ष लाभ:-- यह धन, आकर्षण और भौतिक सुखों की प्राप्ति के लिए बहुत चमत्कारी माना गया है। यह आपको सही निर्णय लेने की क्षमता देता है और धन के रास्ते में आने वाली बाधाओं को दूर करता है。 ***  इक्कीस मुखी रुद्राक्ष लाभ: ---यह कुबेर देव का प्रतिनिधित्व करता हैं,  इसे पहनने से अकूत धन-संपत्ति, अपार सफलता और सौभाग्य की प्राप्ति होती है. *** धारण करने के मुख्य नियम:--रुद्राक्ष हमेशा सोमवार या किसी शुभ मुहूर्त में सुबह स्नान के बाद पहनना चाहिए。इसे लाल या पीले रंग के सूती धागे में या चांदी की माला में धारण कर सकते हैं. ज्योतिष शास्त्र में रुद्राक्ष धारण करना बहुत मंगलकारी माना जाता है। मान्यता है कि, इसे धारण करने से व्यक्त...

सात मुखी रुद्राक्ष जीवन में सभी प्रकार के भौतिक सुख और संपत्ति देने में सक्षम होता है.

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*** सात मुखी रुद्राक्ष जीवन में सभी प्रकार के भौतिक सुख और संपत्ति देने में सक्षम होता है, इसको धारण करने से लक्ष्मी की कृपा और शनि देव का आशीर्वाद प्राप्त होता है।। सात मुखी रुद्राक्ष को सबसे ज्‍यादा शुभ माना जाता है।  इस रुद्राक्ष पर धन की देवी मां लक्ष्‍मी की कृपा बरसती है। सात नंबर को अंकज्‍योतिष में सबसे ज्‍यादा भाग्‍यशाली अंक माना जाता है। इस रुद्राक्ष को धारण करने वाला व्‍यक्‍ति कला में निपुण बनता है और उसे सौंदर्य, सुख और प्रसिद्धि की प्राप्‍ति होती है। इस रुद्राक्ष के स्‍वामी ग्रह शुक्र देवता होते हैं, इसलिए इस रुद्राक्ष को धारण करने से शुक्र से संबंधित सभी दुष्‍प्रभाव दूर हो जाते हैं। सात मुखी रूद्राक्ष का प्रतिनिधित्व स्वयं माँ लक्ष्मी द्वारा किया जाता है। जैसा की हमारे पुराणों में वर्णित है माँ लक्ष्मी धन धान्य का प्रतिनिधित्व करती है, उनका आसान कमल का पुष्प है, उनके ऊपर हाथियों द्वारा लगातार जल की वर्षा की जाती रहती है, जो दर्शाता है की माँ लक्ष्मी की कृपा से मनुष्य अपनी पुरानी यादो से बाहर आकर वर्तमान में जीवन जीना प्रारम्भ करता है और दिन प्रतिदिन अपनी परेशानियों से ऊ...

प्रेत योनि से मुक्ति का सबसे सरल उपाय नारायण बलि.

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*** नारायण बलि के माध्यम से अकाल मृत्यु  अर्थात प्रेत योनि से मृतक की आत्मा को मुक्ति मिलती है. नारायण बलि एक विशेष हिंदू वैदिक कर्मकांड है, जो मुख्य रूप से उन पूर्वजों या परिजनों की आत्मा की शांति और मुक्ति के लिए किया जाता है जिनकी मृत्यु किसी दुर्घटना, आत्महत्या या असमय (अकाल मृत्यु) हुई हो。 इसका उद्देश्य आत्मा को 'प्रेत योनि' से मुक्त करना और परिवार को पितृ दोष से बचाना है。   घर परिवार में अकाल मृत्यु होने के दुखद परिणाम.  घर परिवार में किसी भी सदस्य कि, जब अकाल मृत्यु हो जाती है तो तरह-तरह की परेशानी और समस्याओं को सामना करना पड़ता है, जैसे पारिवारिक सदस्यों की सभी प्रकार की तरक्की उन्नति रुक जाती है, तरह-तरह असाध्य  रोग लग जाते हैं, घर में व्यर्थ का  लड़ाई झगड़ा  रहता हैं, संतान नहीं होती, बच्चों का पढ़ाई लिखाई में मन नहीं लगता, घर की बरकत खत्म हो जाती है, परिवार के सदस्यों पर ऊपरी चक्कर दिखाई देने लगता है. चैन सुकून से नींद नहीं आती. नौकरी व्यापार चौपट हो जाता है. नारायण बलि के मुख्य लाभ:-- पितृ दोष से मुक्ति: यह पूजा कुंडली में मौजूद गंभीर 'पित...