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स्वधा: स्त्रोत पितृ शांति का अचूक उपाय।

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*** स्वधा स्तोत्र: पितृ दोष निवारण और पूर्वजों की शांति का सबसे शक्तिशाली उपाय। नमस्ते मित्रों। क्या आप कभी ऐसा महसूस करते हैं कि, आपके प्रयासों के बावजूद जीवन में स्थिरता नहीं आ पा रही। क्या पारिवारिक समस्याएं, स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां या मानसिक अशांति आपको परेशान कर रही है। कभी-कभी इन समस्याओं का कारण हमारे पूर्वजों से जुड़ी ऊर्जात्मक बाधाएं भी हो सकती हैं। आज हम बात कर रहे हैं, स्वधा स्तोत्र की, जो ब्रह्मा वैवर्त महापुराण का एक अत्यंत प्रभावशाली स्तोत्र है। स्वधा कौन हैं और क्यों है यह स्तोत्र विशेष। स्वधा केवल एक शब्द नहीं, बल्कि एक दिव्य शक्ति हैं। वे पितृ देवताओं की तृप्ति और आशीर्वाद प्रदान करने वाली देवी हैं। जब भी हम श्राद्ध कर्म या तर्पण करते हैं, तो स्वधा नाम का उच्चारण ही उस अर्पण को पूर्वजों तक पहुंचाता है। ब्रह्मा जी द्वारा रचित यह स्तोत्र न केवल पितृ दोष को दूर करता है, बल्कि श्राद्ध और तर्पण का फल भी प्रदान करता है। स्तोत्र का महत्व और लाभ‌। • स्वधा का उच्चारण मात्र करने से व्यक्ति सभी तीर्थों में स्नान करने का पुण्य प्राप्त करता है। • यह स्तोत्र सभी प्रकार के पापों स...

राहु पोटली का अचूक उपाय, राजनीति और शेयर मार्केट में सफलता के लिए करें, ये उपाय।

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*** राहु पोटली का चमत्कारिक प्रयोग, आर्थिक उन्नति के साथ साथ सभी प्रकार कि, परेशानियों से छुटकारा मिलता है, शेयर मार्केट और राजनीति करने कि इच्छा रखने बालों को जरूर राहु कि, साधना करना चाहिए। पूर्व कर्मों के दोषों को समाप्त करने के लिए करें, राहु बीज मंत्र जाप, जाप की विधि, फायदे और सावधानियाँ। जैसा कि, आप जानते हैं,राहु देवता की साधना करने से जीवन में वह हासिल किया जा सकता है, जिसे देने की क्षमता किसी के पास नहीं है, राहु देवता वह सब कुछ दे सकते है, जो अन्य कोई ग्रह नहीं दे सकता, राहु जब देने पर आते है तो, सड़क से उठाकर आसमान में बिठा देते है और जब लेने पर आते है तो आसमान से उठाकर सड़क पर पटक देते है। राहु, नवग्रहों में एक छाया ग्रह है, जो मानसिक तनाव, भ्रम और आकस्मिक घटनाओं का कारक होता है,राहु बीज मंत्र का जाप मानसिक शांति और राहु से उत्पन्न समस्याओं से राहत प्रदान करता है, राहु बीज मंत्र का जाप कुंडली में राहु दोष, कालसर्प दोष और ग्रहण योग के प्रभाव को कम करता है,राहु बीज मंत्र का जाप करने के लिए शनिवार या बुधवार को एकांत स्थान पर बैठकर कम से कम 108 बार जाप करना चाहिए।  अगर किस...

तंत्र शास्त्र में योनि पूजा का महत्व।

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*** तंत्र शास्त्र में योनि पूजा का महत्व।  योनितंत्र (योनितंत्र) - कामरूप क्षेत्र (असम) की एक अन्य रचना योनि (स्त्री जननांग) की पूजा और योनि तत्व के सेवन पर प्रकाश डालती है। आठ अध्यायों (पातालों) में योनि की पूजा की विधियाँ, योनि तत्व का महत्व, इसके सेवन और कौलाचार अनुष्ठान में इसके उपयोग के लाभ, दस महाविद्याओं का वर्णन, अवधूत के विशिष्ट लक्षण, स्त्रियों के प्रति श्रद्धा, उनकी पूजा की विधियाँ और समय, वीरभाव द्वारा पंचतत्वों का उपयोग, वीरसाधना की तकनीकें आदि का वर्णन किया गया है।। योनि तंत्र। पहला पाताल कैलाश पर्वत की चोटी पर विराजमान, देवताओं के देव, समस्त सृष्टि के गुरु, से मुस्कुराती हुई दुर्गा, नागानंदिनी ने प्रश्न पूछे। हे प्रभु, 64 तंत्रों की रचना हुई है। हे करुणा के सागर, मुझे इनमें से प्रमुख तंत्र के बारे में बताइए। महादेव ने कहा:-- प्रिय पार्वती, इस महान रहस्य को सुनो। तुमने इसे दस करोड़ बार सुनने की इच्छा जताई है। हे सुंदर, यह तुम्हारे नारी स्वभाव के कारण ही है कि, तुम मुझसे बार-बार पूछती हो। पार्वती, इसे हर संभव प्रयास से छुपाना चाहिए। मंत्र पीठ, यंत्र पीठ और योनि पीठ हैं...

शादी से पहले जन्म कुंडली मिलन क्यों जरूरी है कहीं कुंडली में नाडी़ दोष नहीं है।

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*** नाड़ी दोष – कुंडली में नाड़ी दोष के प्रकार, प्रभाव और उपाय, विवाह से पहले वर वधु कि जन्म कुंडली अवश्य मिलाएं, ताकि भविष्य में परेशानी ना हो।  विवाह व्यक्ति के जीवन में एक महत्वपूर्ण जीवन-परिवर्तनकारी घटना है। जिस पर पूरा जीवन टिका होता है, वैदिक ज्योतिष के अनुसार, विभिन्न कारक जोड़ों के वैवाहिक जीवन को प्रभावित करते हैं। इसलिए, प्रभाव को समझने और दीर्घायु और वैवाहिक आनंद सुनिश्चित करने के लिए, जोड़े हमेशा अपनी राशियों की अनुकूलता की जांच करें और शादी से पहले कुंडली मिलान करें। शादी से पहले कुंडली मिलान क्यों ज़रूरी है। कुण्डली मिलान या राशिफल मिलान एक कठोर प्रक्रिया है जिसमें अष्टकूट पद्धति के आधार पर होने वाले वर और वधू की कुंडली या जन्म कुंडली का मिलान किया जाता है. इसमें ज्योतिषी आठ गुणों की जांच करेंगे और जोड़ों में अनुकूलता की भविष्यवाणी करेंगे। नाड़ी गुण या नाड़ी कूट भावी जोड़े की कुंडली का मिलान करते समय विश्लेषण किए जाने वाले आठ महत्वपूर्ण गुणों में से एक है। इसमें अधिकतम बिंदु शामिल हैं, और यदि किसी जोड़े के नाड़ी गुण बिंदु कम हैं, तो वे कुंडली में दोष से पीड़ित हैं। ऐ...

पुत्र जीवक बीज के प्रयोग से पुत्र होने कि, संभावना बढ़ जाती है।

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*** #पुत्र जीवक बीज महिलाओं के लिए बलिदान, पूरी होगी पुत्र प्राप्ति कि कामना। #पुत्रजीवा – संतान सुख प्रदान करने वाली चमत्कारी औषधि पुत्रजीवा एक अद्भुत आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी है, जिसे संतान प्राप्ति में कारगर माना जाता है। इसे कुमार जीवा, जियापोता, महापुत्र, पुत्रजीनवा आदि नामों से भी जाना जाता है। आयुर्वेद के अनुसार, इसके बीज और पत्तों में गर्भधारण को बढ़ावा देने वाले औषधीय गुण होते हैं, जो संतानहीन महिलाओं को संतान सुख प्राप्त करने में मदद करते हैं। ✅ औषधीय गुण और लाभ:-- गर्भधारण में सहायक: पुत्रजीवा के बीज वीर्यवर्धक, गर्भदायक और वात-कफ को दूर करने वाले होते हैं। गर्भपात रोकने में प्रभावी: --बार-बार गर्भपात होने वाली महिलाओं के लिए यह औषधि रामबाण सिद्ध होती है। कम मात्रा में माहवारी की समस्या में उपयोगी:-- जो महिलाएं अनियमित या कम मासिक स्राव के कारण गर्भधारण नहीं कर पातीं, उनके लिए पुत्रजीवा का सेवन लाभकारी होता है। माला पहनने का महत्व:-- आयुर्वेद के अनुसार, यदि संतानहीन महिला पुत्रजीवा के बीजों की माला पहनती है, तो गर्भधारण की संभावना बढ़ जाती है। ** गर्भधारण के लिए विशेष प्रयोग विध...

सूर्य अष्टकम पढ़ने से सरकारी नौकरी के योग बनते हैं।

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**** नियमित सूर्य अष्टम का पाठ करने से जीवन के हर क्षेत्र में तरक्की और उन्नति होती है।   * सरकारी नौकरी मिलने का आशीर्वाद या सरकार से फायदा मिलने का योग बनेगा। सूर्य अष्टकम का पाठ करने से व्यक्ति के जीवन में नवजीवन का संचार होता है। इस धरा धाम श्री सूर्य देव जी ही एक ऐसे देव हैं, जिनका दर्शन हम सभी को प्रतिदिन होता है। ज्योतिष के नवग्रह मंडल में सूर्य देव का स्थान सर्वोपरि है, सूर्य देव की नियमित साधना जीवन में चमत्कारिक रूप से लाभ पहुंचती है, जिन युवाओं को सरकारी नौकरी चाहिए या सरकार से संबंधित कार्य करने पड़ते हैं, ऐसे लोगों को नियमित रूप से सूर्य अष्टम का पाठ करना चाहिए। श्री सूर्य अष्टकम पढ़ने के फायदे:-- श्री सूर्य अष्टकम के पाठ से व्यक्ति के जीवन में चमत्कारिक परिवर्तन देखने को मिलता है। लेकिन हम यहां पर आप सभी को बता दें कि, किसी भी देवी देवता की पूजा आराधना करने से व्यक्ति के जीवन में बदलाव या मनोवांछित लाभ तभी मिल पाता है, जब पूजा आराधना पूर्ण श्रद्धा व सच्चे मन से किया जाता है। ग्रह बाधा से मुक्ति:--- ज्योतिष विद्या में श्री सूर्य देव जी को नवग्रह मंडल का प्रमुख मान...

02 अप्रैल 2026 हनुमान जन्मोत्सव ।

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*** 02 अप्रैल बृहस्पतिवार आज हनुमान जन्मोत्सव कि, पूजा विधान पाएं हनुमानजी का आशीर्वाद।। आज देशभर में हनुमान जयंती का पर्व मनाया जा रहा है। हनुमान मंदिरों में भक्तों का तांता लगा हुआ है। हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रतिवर्ष चैत्र मास की पूर्णिमा तिथि को हनुमान जी का जन्म हुआ था। शिवपुराण में बताया गया है कि भगवान शिव ने रुद्र अवतार के रूप में हनुमान जी को जन्म दिया। उनका जन्म माता अंजना और वानरराज केसरी के यहां हुआ था। हालांकि कई लोगों का मानना है कि हनुमान जी का जन्म कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को हुआ था। इसलिए इस दिन भी हनुमान जन्मोत्सव मनाया जाता है। चैत्र पूर्णिमा के दिन जन्मे हनुमान जी की विधिवत पूजा करने के साथ-साथ व्रत रखने का विधान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन बजरंगबली की पूजा करने से सुख-समृद्धि, धन-संपदा, ऐश्वर्य की प्राप्ति हो सकती है। रोग, दोष और भय से मुक्ति मिल सकती है। इसके अलावा श्री राम के साथ माता सीता की भी कृपा प्राप्त होती है।  हनुमान जयंती कब है?  चैत्र मास की पूर्णिमा तिथि समाप्त- 2 अप्रैल को सुबह 7 बजकर 41 मिनट पर हनुमान जयंती 202...