केतु के साधक को भौतिक सुख क्यों नहीं प्राप्त होते?
*** केतू के साधक को भौतिक सुख क्यों नहीं प्राप्त होते है? वैदिक ज्योतिष के अनुसार, केतु एक मोक्ष कारक ग्रह है। इसका मुख्य उद्देश्य जातक को सांसारिक मोह-माया और भौतिक सुखों से विरक्त कर आध्यात्मिक ज्ञान और आत्म-साक्षात्कार की ओर ले जाना होता है। यही कारण है कि इसके साधक भौतिक सुखों के बजाय आंतरिक शांति और मुक्ति की ओर आकर्षित होते हैं। केतु के साधक को भौतिक सुख न प्राप्त होने के प्रमुख कारण:-- मोक्ष का कारक: --ज्योतिष में राहु को 'इच्छा और भोग' का प्रतीक माना जाता है, जबकि केतु को 'त्याग और मोक्ष' का। केतु की ऊर्जा जातक को सांसारिक बंधनों से मुक्त करने का कार्य करती है। इच्छाओं में शून्यता:-- केतु के प्रभाव में व्यक्ति को भौतिक वस्तुओं (जैसे- धन, विलासिता, पद) को प्राप्त करने के बाद भी एक गहरी आंतरिक शून्यता (खालीपन) का अहसास होता है। इससे उसका मन भौतिक सुखों से उचट जाता है। आध्यात्मिक झुकाव:-- केतु गुप्त विद्याओं, अंतर्ज्ञान, ध्यान और दर्शन का कारक है। साधक का मुख्य ध्यान सांसारिक उपलब्धियों से हटकर ईश्वरीय सत्य, ध्यान और आंतरिक चेतना को जागृत करने पर केंद्रित हो जाता ...