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13, 18, 19, 21 मुखी रुद्राक्ष पहनने के फायदे.

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*** जीवन में तरक्की, उन्नति और धन संपत्ति प्राप्त करने के लिए 7 मुखी, 13 मुखी, 19 या 21 मुखी रुद्राक्ष धारण करना सबसे उत्तम माना जाता है。 *** सात मुखी रुद्राक्ष लाभ:-- इसे साक्षात माता लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता हैं, इसे पहनने से धन-धान्य, व्यापार में सफलता और नए अवसर प्राप्त होते हैं。किनके लिए: जो लोग आर्थिक स्थिरता और ऐश्वर्या पाना चाहते हैं。 ***  तेरह मुखी रुद्राक्ष लाभ:-- यह धन, आकर्षण और भौतिक सुखों की प्राप्ति के लिए बहुत चमत्कारी माना गया है। यह आपको सही निर्णय लेने की क्षमता देता है और धन के रास्ते में आने वाली बाधाओं को दूर करता है。 ***  इक्कीस मुखी रुद्राक्ष लाभ: ---यह कुबेर देव का प्रतिनिधित्व करता हैं,  इसे पहनने से अकूत धन-संपत्ति, अपार सफलता और सौभाग्य की प्राप्ति होती है. *** धारण करने के मुख्य नियम:--रुद्राक्ष हमेशा सोमवार या किसी शुभ मुहूर्त में सुबह स्नान के बाद पहनना चाहिए。इसे लाल या पीले रंग के सूती धागे में या चांदी की माला में धारण कर सकते हैं. ज्योतिष शास्त्र में रुद्राक्ष धारण करना बहुत मंगलकारी माना जाता है। मान्यता है कि, इसे धारण करने से व्यक्त...

सात मुखी रुद्राक्ष जीवन में सभी प्रकार के भौतिक सुख और संपत्ति देने में सक्षम होता है.

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*** सात मुखी रुद्राक्ष जीवन में सभी प्रकार के भौतिक सुख और संपत्ति देने में सक्षम होता है, इसको धारण करने से लक्ष्मी की कृपा और शनि देव का आशीर्वाद प्राप्त होता है।। सात मुखी रुद्राक्ष को सबसे ज्‍यादा शुभ माना जाता है।  इस रुद्राक्ष पर धन की देवी मां लक्ष्‍मी की कृपा बरसती है। सात नंबर को अंकज्‍योतिष में सबसे ज्‍यादा भाग्‍यशाली अंक माना जाता है। इस रुद्राक्ष को धारण करने वाला व्‍यक्‍ति कला में निपुण बनता है और उसे सौंदर्य, सुख और प्रसिद्धि की प्राप्‍ति होती है। इस रुद्राक्ष के स्‍वामी ग्रह शुक्र देवता होते हैं, इसलिए इस रुद्राक्ष को धारण करने से शुक्र से संबंधित सभी दुष्‍प्रभाव दूर हो जाते हैं। सात मुखी रूद्राक्ष का प्रतिनिधित्व स्वयं माँ लक्ष्मी द्वारा किया जाता है। जैसा की हमारे पुराणों में वर्णित है माँ लक्ष्मी धन धान्य का प्रतिनिधित्व करती है, उनका आसान कमल का पुष्प है, उनके ऊपर हाथियों द्वारा लगातार जल की वर्षा की जाती रहती है, जो दर्शाता है की माँ लक्ष्मी की कृपा से मनुष्य अपनी पुरानी यादो से बाहर आकर वर्तमान में जीवन जीना प्रारम्भ करता है और दिन प्रतिदिन अपनी परेशानियों से ऊ...

प्रेत योनि से मुक्ति का सबसे सरल उपाय नारायण बलि.

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*** नारायण बलि के माध्यम से अकाल मृत्यु  अर्थात प्रेत योनि से मृतक की आत्मा को मुक्ति मिलती है. नारायण बलि एक विशेष हिंदू वैदिक कर्मकांड है, जो मुख्य रूप से उन पूर्वजों या परिजनों की आत्मा की शांति और मुक्ति के लिए किया जाता है जिनकी मृत्यु किसी दुर्घटना, आत्महत्या या असमय (अकाल मृत्यु) हुई हो。 इसका उद्देश्य आत्मा को 'प्रेत योनि' से मुक्त करना और परिवार को पितृ दोष से बचाना है。   घर परिवार में अकाल मृत्यु होने के दुखद परिणाम.  घर परिवार में किसी भी सदस्य कि, जब अकाल मृत्यु हो जाती है तो तरह-तरह की परेशानी और समस्याओं को सामना करना पड़ता है, जैसे पारिवारिक सदस्यों की सभी प्रकार की तरक्की उन्नति रुक जाती है, तरह-तरह असाध्य  रोग लग जाते हैं, घर में व्यर्थ का  लड़ाई झगड़ा  रहता हैं, संतान नहीं होती, बच्चों का पढ़ाई लिखाई में मन नहीं लगता, घर की बरकत खत्म हो जाती है, परिवार के सदस्यों पर ऊपरी चक्कर दिखाई देने लगता है. चैन सुकून से नींद नहीं आती. नौकरी व्यापार चौपट हो जाता है. नारायण बलि के मुख्य लाभ:-- पितृ दोष से मुक्ति: यह पूजा कुंडली में मौजूद गंभीर 'पित...

केतु के साधक को भौतिक सुख क्यों नहीं प्राप्त होते?

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*** केतू के साधक को भौतिक सुख क्यों नहीं प्राप्त होते है? वैदिक ज्योतिष के अनुसार, केतु एक मोक्ष कारक ग्रह है। इसका मुख्य उद्देश्य जातक को सांसारिक मोह-माया और भौतिक सुखों से विरक्त कर आध्यात्मिक ज्ञान और आत्म-साक्षात्कार की ओर ले जाना होता है। यही कारण है कि इसके साधक भौतिक सुखों के बजाय आंतरिक शांति और मुक्ति की ओर आकर्षित होते हैं।  केतु के साधक को भौतिक सुख न प्राप्त होने के प्रमुख कारण:-- मोक्ष का कारक: --ज्योतिष में राहु को 'इच्छा और भोग' का प्रतीक माना जाता है, जबकि केतु को 'त्याग और मोक्ष' का। केतु की ऊर्जा जातक को सांसारिक बंधनों से मुक्त करने का कार्य करती है। इच्छाओं में शून्यता:-- केतु के प्रभाव में व्यक्ति को भौतिक वस्तुओं (जैसे- धन, विलासिता, पद) को प्राप्त करने के बाद भी एक गहरी आंतरिक शून्यता (खालीपन) का अहसास होता है। इससे उसका मन भौतिक सुखों से उचट जाता है। आध्यात्मिक झुकाव:-- केतु गुप्त विद्याओं, अंतर्ज्ञान, ध्यान और दर्शन का कारक है। साधक का मुख्य ध्यान सांसारिक उपलब्धियों से हटकर ईश्वरीय सत्य, ध्यान और आंतरिक चेतना को जागृत करने पर केंद्रित हो जाता ...

बडे मंगल का महत्व, हनुमान जी की पूजा करने से सभी प्रकार के कष्ट क्लेश कट जाते हैं.

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*** बड़े मंगल का महत्व, हनुमान जी की पूजा करने से सभी प्रकार के कष्ट क्लेश कट जाते हैं, सभी ग्रह अनुकूल हो जाते हैं, भोग के साथ मोक्ष भी प्राप्त होता है. ज्योतिष में 'बड़े मंगल' (या बुढ़वा मंगल) का संबंध सीधे तौर पर मंगल ग्रह की शांति और हनुमान जी की कृपा से है। ज्येष्ठ माह के हर मंगलवार को बड़ा मंगल कहा जाता है। ज्योतिषीय दृष्टिकोण से इस दिन बजरंगबली की पूजा करने से कुंडली के सभी प्रकार के मांगलिक दोष, भूमि-विवाद, कर्ज और शत्रुओं से मुक्ति मिलती है।। ज्योतिष में बड़े मंगल का महत्व और प्रभाव:-- मांगलिक दोष का निवारण:-- यदि किसी जातक की कुंडली में मंगल कमजोर, नीच या अशुभ स्थिति में (मांगलिक दोष) है, तो उसे विवाह संबंधी बाधाओं और क्रोध का सामना करना पड़ता है। बड़े मंगल के दिन हनुमान जी की पूजा करने से मंगल ग्रह का कुप्रभाव शांत होता है। साहस और पराक्रम में वृद्धि:-- मंगल ऊर्जा, साहस और पराक्रम का कारक है। बड़े मंगल पर हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ करने से जातक को मानसिक दृढ़ता और निर्भीकता प्राप्त होती है। कैरियर और कार्यक्षेत्र में सफलता: --सेना, पुलिस, इंजीनियरिंग, और प्रशा...

मंत्रों में बीज मंत्र का रहस्य !

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*** बीज मंत्र का रहस्य,  "एक अक्षर, ब्रह्मांड की शक्ति" और मंत्रों का जाप ! **** बीज क्या है? जैसे एक छोटे से बीज में पूरा वटवृक्ष छुपा होता है, वैसे ही बीज मंत्र एक अक्षर में पूरे ब्रह्मांड की शक्ति समेटे होता है।  "बीज" यानी - उत्पत्ति का स्रोत। मंत्र यानी "मन का त्राण" - मन को तारने वाला।   तो बीज मंत्र हुआ - वो ध्वनि-बीज जो मन को तार दे, और ब्रह्मांड को उत्पन्न कर दे। शास्त्र कहते हैं: "एकाक्षरं परं ब्रह्म" - एक अक्षर ही परब्रह्म है। वो अक्षर है **ॐ** सभी बीज मंत्र उसी से निकले हैं। ** विज्ञान और अध्यात्म - ध्वनि का कमाल  आधुनिक विज्ञान:--- 1940 में वैज्ञानिक हंस जेनी ने साइमेटिक्स प्रयोग किया। उन्होंने पाया कि हर ध्वनि रेत या पानी पर एक खास ज्यामितीय आकृति बनाती है।  जब ॐ की ध्वनि बजाई गई, तो पानी पर श्री यंत्र जैसी आकृति बनी। यानी हमारे ऋषि जो हजारों साल से कहते आए, विज्ञान आज सिद्ध कर रहा है - ध्वनि से सृष्टि बनती है। ख. शास्त्रीय प्रमाण: --- मांडूक्य उपनिषद कहता है:   "ॐ इत्येतदक्षरमिदं सर्वम्" - ॐ ही ये सब कुछ है। भूत, भविष्य, ...

शिव मंदिर में दो दीपक जलाने के चमत्कार !

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*** शिव मंदिर में 2 दीपक जलाने का रहस्य, एक गोल बत्ती एक लंबी बत्ती का दिया, धन, सुख और सकारात्मक ऊर्जा का चमत्कारी उपाय ! क्या आप जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा चाहते हैं? तो आज ही संकल्प लीजिए कि, अगले सोमवार से भगवान शिव के मंदिर में एक गोल बत्ती का और एक लंबी बत्ती का दीपक जलाएंगे, ऐसा करने से आपसे जीवन में सुख संपत्ति और सकारात्मक ऊर्जा का आगमन होगा, सभी परेशानियों का अंत होने लगेगा, एक बार आजमा कर दीजिए? हमारे सनातन धर्म में दीपक को केवल प्रकाश का स्रोत नहीं माना गया, बल्कि इसे देवत्व, ज्ञान और चेतना का प्रतीक कहा गया है। खासकर भगवान शिव के मंदिर में दीपक जलाने का विशेष महत्व है। शास्त्रों में एक अद्भुत उपाय बताया गया है –  **“प्रदोष काल में 2 दीपक जलाने का उपाय”**  मान्यता है कि, इस छोटे से उपाय से मानसिक शांति मिलती है, घर की नकारात्मकता दूर होती है और आर्थिक समस्याओं में राहत मिलती है ! -- दीपक का आध्यात्मिक महत्व शास्त्र कहते हैं – “तमसो मा ज्योतिर्गमय” अर्थात अंधकार से प्रकाश की ओर चलो।  दीपक के 5 तत्व:--- मिट्टी का दीया – पृथ्वी तत्व, स्थिरता ...