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राहुल देवता के कवच का नियमित पाठ राजनीतिक संचार जगत और शेयर मार्केट में बहुत लाभकारी सिद्ध होता है.

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*** राहू देवता का चमत्कारी कवच, हर प्रकार से तरक्की और उन्नति देता है, जो राजनीति, संचार जगत और शेयर मार्केट में काम करते है, उनके लिए राहु की साधना सबसे सिद्ध और अचूक उपाय है. कहा जाता है कि, जो कोई ग्रह नहीं दे सकता, वह सब कुछ राहु देने में सक्षम है, राहु यदि मेहरबान हो जाएं तो, आदमी को फकीर से राजा की ताकत रखते हैं, राहु ग्रह कवच स्तोत्र का पाठ राहु ग्रह को शांत करने के सबसे सरल उपायों में से एक है। ज्योतिष शास्त्र की दृष्टि से यह एक छाया ग्रह है अर्थात आकाश में पिंड रूप में इसक अस्तित्व नहीं है। फिर भी इसके अपरिमित महत्व से इंकार नहीं किया जा सकता है। राहु कवच नित्यप्रति पढ़ने से जन्म-कुंडली में राहु द्वारा प्राप्त हो रहे खराब परिणाम बन्द हो जाते हैं और राहु ग्रह शुभ फल देने लगता है। जब भी कुंडली में राहु अनुकूल न हो तो राहु ग्रह कवच का पाठ करने से सभी परेशानियां दूर हो जाती हैं और धन, शक्ति, प्रसिद्धि, नाम और सभी सुख प्राप्त होते हैं। अथ राहुकवचम्  अस्य श्रीराहुकवचस्तोत्रमंत्रस्य चंद्रमा ऋषिः । अनुष्टुप छन्दः । रां बीजं । नमः शक्तिः । स्वाहा कीलकम् । राहुप्रीत्यर्थं जपे विनियो...

25 अक्टूबर 2026 रविवार शरद पूर्णिमा का महत्व और उपाय.

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*** 25 अक्टूबर 2026 रविवार शरद पूर्णिमा का महत्व और विशेष उपाय शरद पूर्णिमा (जिसे कोजागरी पूर्णिमा भी कहा जाता है) हिंदू धर्म में धन की देवी मां लक्ष्मी, चंद्रमा और भगवान श्रीकृष्ण की कृपा प्राप्त करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस रात चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है और आकाश से अमृत की वर्षा होती है।  शरद पूर्णिमा का महत्व:-- मां लक्ष्मी का आगमन: मान्यता है कि, शरद पूर्णिमा की रात को मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और यह देखती हैं कि, कौन जागकर उनकी आराधना कर रहा है। जो भक्त इस रात जागरण और पूजन करते हैं, उनके घर में मां लक्ष्मी का स्थायी वास होता है।  अमृतमयी खीर:--- इस रात दूध और चावल से बनी खीर को बनाकर रात भर चांदनी (खुले आसमान के नीचे) में रखा जाता है। ऐसा माना जाता है कि चंद्रमा की किरणों से इस खीर में औषधीय और अमृत जैसे गुण आ जाते हैं, जिसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करने से उत्तम स्वास्थ्य और मानसिक शांति मिलती है।  रासलीला और धार्मिक प्रसंग:---इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रज में गोपियों के साथ महारास रचाया था। इसलिए ब्रज क्षेत्र और कई अन्...

विजयदशमी दशहरा 2026 किस प्रकार पूजन करें.

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**** विजयदशमी (दशहरा) के दिन किसी भी शुभ काम के लिए मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं होती, यह दिन इतना शुभ होता है.        ज्योतिषीय दृष्टि में दशहरे (विजयादशमी) को एक अत्यंत पावन और अबूझ मुहूर्त माना जाता है, जिसे हिंदू पंचांग के साढ़े तीन सबसे शुभ मुहूर्तों (साढ़े तीन मुहूर्त) में से एक का स्थान प्राप्त है। इस दिन ब्रह्मांड में ऐसी सकारात्मक ऊर्जा और ग्रहों का ऐसा अद्भुत संयोग बनता है, जो किसी भी नए कार्य की शुरुआत, खरीद-फरोख्त और सफलता के लिए सर्वथा उपयुक्त होता है। 1. सर्वार्थसिद्धि और अबूझ मुहूर्त ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को सर्वार्थसिद्धि योग के रूप में देखा जाता है। इस दिन का समय इतना पवित्र होता है कि किसी भी शुभ या मांगलिक कार्य को शुरू करने के लिए अलग से कोई पंचांग या शुभ मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं होती है। यदि आप लंबे समय से किसी विशेष तिथि का इंतजार कर रहे हैं, तो दशहरा इसके लिए सबसे उत्तम दिन माना जाता है। 2. नए कार्यों और व्यावसायिक शुरुआत के लिए श्रेष्ठ:-- मान्यता है कि, दशहरे के दिन शुरू किए गए कार्य कभी असफल...

जगत जननी मां जगदंबे कि, स्तुति.

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*** हे जगत जननी माता जगदंबे आपके चरणों में कोटि-कोटि नमन, हे मां ! जगत के कल्याण हेतु, सबको सद्बुद्धि दो, ताकि सब का कल्याण हो, सबके भंडार भर रहे. सबकी खूब तरक्की उन्नति हो सब आपस में मिलजुल कर प्रेम और भाईचारे के साथ रहे हमारे देश की एक तारा करता हमेशा बनी रहें.  देवी स्तोत्र (मूल श्लोक) या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥ या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥ या देवी सर्वभूतेषु निद्रारूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥ या देवी सर्वभूतेषु क्षुधारूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥ या देवी सर्वभूतेषु छायारूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥ या देवी सर्वभूतेषु शान्तिरूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥ या देवी सर्वभूतेषु श्रद्धारूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥ 🌼 भावार्थ (सरल हिन्दी अर्थ) 1. शक्तिरूपेण जो देवी समस्त प्राणियों में शक्ति बनकर विद्यमान हैं, उन्हें बार-बार प्रणाम। 2. बुद्धिरूपेण ...

सिद्ध कुंजिका स्त्रोत के चमत्कार और विधान.

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*** "सिद्ध कुंजिका" स्तोत्र! और उसके सिद्ध चमत्कारी प्रयोग विधि के साथ आपके लिए प्रस्तुत है. #दुर्गा_सप्तशती_में_वर्णित सिद्ध कुंजिका स्तोत्र एक अत्यंत चमत्कारिक और तीव्र प्रभाव दिखाने वाला स्तोत्र है। जो लोग पूरी दुर्गा सप्तशती का पाठ नहीं कर सकते, वह केवल कुंजिका स्तोत्र का पाठ करेंगे तो, उससे भी संपूर्ण दुर्गा सप्तशती का फल मिल जाता है।  जीवन में किसी भी प्रकार के अभाव, रोग, कष्ट, दुख, दारिद्रय और शत्रुओं का नाश करने वाले सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का पाठ नवरात्रि में अवश्य करना चाहिए। लेकिन इस स्तोत्र का पाठ करने में कुछ सावधानियां भी हैं, जिनका ध्यान रखा जाना आवश्यक है। *पाठ की विधि* :- कुंजिका स्तोत्र का पाठ वैसे तो किसी भी माह, दिन में किया जा सकता है, लेकिन नवरात्रि में यह अधिक प्रभावी होता है। कुंजिका स्तोत्र साधना भी होती है, लेकिन यहां हम इसकी सर्वमान्य विधि का वर्णन कर रहे हैं। नवरात्रि के प्रथम दिन से नवमी तक प्रतिदिन इसका पाठ किया जाता है। इसलिए साधक प्रात:काल सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नानादि दैनिक कार्यों से निवृत्त होकर अपने पूजा स्थान को साफ करके लाल रंग के आसन पर ...

इस प्रकार वास्तु देवता की पूजा करने और घर में तस्वीर लगाने से सभी प्रकार के वास्तु दोष समाप्त हो जाते हैं

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*** घर में यह तस्वीर लगा लेने से सभी प्रकार के वास्तु दोष समाप्त हो जाते हैं. वास्तु देवता की तस्वीर घर में कहां पर लगानी चाहिए. वास्तु शास्त्र के अनुसार, वास्तु देवता या किसी भी देवी-देवता की तस्वीर हमेशा घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) या पूर्व दिशा में लगानी चाहिए।  सही दिशा और नियम: दीवार का चयन: तस्वीर को हमेशा पश्चिम या दक्षिण दिशा वाली दीवार पर इस प्रकार लगाएं कि उनका मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर हो।  पूजा घर (मंदिर): भगवान या वास्तु देवता का स्थान घर के पूजा स्थल या मंदिर में ही सबसे शुभ माना जाता है।  मुख्य द्वार: देवी-देवताओं की तस्वीर या मूर्ति को मुख्य द्वार पर बाहर की तरफ नहीं लगाना चाहिए। वास्तु देवता की पूजा करने की विधि घर में सुख-शांति और सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने के लिए वास्तु देवता (वास्तु पुरुष) की पूजा और वास्तु शांति विधान किया जाता है।  आवश्यक सामग्री वास्तु मूर्ति / चित्र: वास्तु पुरुष की प्रतिमा या तस्वीर।  कलश स्थापना: तांबे या मिट्टी का कलश, गंगाजल, साफ जल, मौली (कलश सूत्र), सुपारी, सिक्का और आम/पान के पत्ते।  पूजन सामग्री: हल्...

श्राद्ध पक्ष में कौवे गाय और कुत्ते को भोजन करने का महत्व.

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** *श्राद्ध में कौवे ने नहीं लगाया भोग तो क्या करें, जानें गाय, कौआ, कुत्ते को भोजन कराने एवं पंचबलि भोग का महत्व। श्राद्ध पक्ष में पितरों को प्रसन्न करने और उनका आशीर्वाद पाने के लिए तरह-तरह के उपाय किए जाते हैं, और इन सब में जरूरी होता है, श्राद्ध पक्ष में पितरों को भोजन अर्पित करने के लिए कौवे को भोग लगाना, लेकिन अगर कौवा ने भोग ही नहीं लगाया तो, फिर क्या करें? हिंदू धर्म में पितृपक्ष का समय बहुत ही महत्वपूर्ण माना गया है, इस दौरान अपने पितरों की आत्मा की शांति और उनके आशीर्वाद की प्राप्ति के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान किए जाते हैं, शास्त्रों में वर्णन मिलता है कि, श्राद्ध का भोजन सबसे पहले कौवे को अर्पित करना चाहिए।  क्योंकि कौवा पितरों का दूत माना गया है, लेकिन कई बार ऐसा होता है कि, श्राद्ध वाले दिन घर के आंगन या छत पर कौवे दिखाई नहीं देते, ऐसे में सवाल उठता है कि, अगर कौवा न मिलें, या कौवे भोजन ग्रहण नहीं करें तो, पितरों का भोजन किसे अर्पित किया जाए? कौवा भोग न लगाएं तो क्या करें? अगर श्राद्ध के दिन आप कौवे को भोजन ग्रहण न करा पाएं तो, आप कौवे के हिस्से का भोजन गाय या कुत...