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शादी से पहले जन्म कुंडली मिलन क्यों जरूरी है कहीं कुंडली में नाडी़ दोष नहीं है।

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*** नाड़ी दोष – कुंडली में नाड़ी दोष के प्रकार, प्रभाव और उपाय, विवाह से पहले वर वधु कि जन्म कुंडली अवश्य मिलाएं, ताकि भविष्य में परेशानी ना हो।  विवाह व्यक्ति के जीवन में एक महत्वपूर्ण जीवन-परिवर्तनकारी घटना है। जिस पर पूरा जीवन टिका होता है, वैदिक ज्योतिष के अनुसार, विभिन्न कारक जोड़ों के वैवाहिक जीवन को प्रभावित करते हैं। इसलिए, प्रभाव को समझने और दीर्घायु और वैवाहिक आनंद सुनिश्चित करने के लिए, जोड़े हमेशा अपनी राशियों की अनुकूलता की जांच करें और शादी से पहले कुंडली मिलान करें। शादी से पहले कुंडली मिलान क्यों ज़रूरी है। कुण्डली मिलान या राशिफल मिलान एक कठोर प्रक्रिया है जिसमें अष्टकूट पद्धति के आधार पर होने वाले वर और वधू की कुंडली या जन्म कुंडली का मिलान किया जाता है. इसमें ज्योतिषी आठ गुणों की जांच करेंगे और जोड़ों में अनुकूलता की भविष्यवाणी करेंगे। नाड़ी गुण या नाड़ी कूट भावी जोड़े की कुंडली का मिलान करते समय विश्लेषण किए जाने वाले आठ महत्वपूर्ण गुणों में से एक है। इसमें अधिकतम बिंदु शामिल हैं, और यदि किसी जोड़े के नाड़ी गुण बिंदु कम हैं, तो वे कुंडली में दोष से पीड़ित हैं। ऐ...

पुत्र जीवक बीज के प्रयोग से पुत्र होने कि, संभावना बढ़ जाती है।

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*** #पुत्र जीवक बीज महिलाओं के लिए बलिदान, पूरी होगी पुत्र प्राप्ति कि कामना। #पुत्रजीवा – संतान सुख प्रदान करने वाली चमत्कारी औषधि पुत्रजीवा एक अद्भुत आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी है, जिसे संतान प्राप्ति में कारगर माना जाता है। इसे कुमार जीवा, जियापोता, महापुत्र, पुत्रजीनवा आदि नामों से भी जाना जाता है। आयुर्वेद के अनुसार, इसके बीज और पत्तों में गर्भधारण को बढ़ावा देने वाले औषधीय गुण होते हैं, जो संतानहीन महिलाओं को संतान सुख प्राप्त करने में मदद करते हैं। ✅ औषधीय गुण और लाभ:-- गर्भधारण में सहायक: पुत्रजीवा के बीज वीर्यवर्धक, गर्भदायक और वात-कफ को दूर करने वाले होते हैं। गर्भपात रोकने में प्रभावी: --बार-बार गर्भपात होने वाली महिलाओं के लिए यह औषधि रामबाण सिद्ध होती है। कम मात्रा में माहवारी की समस्या में उपयोगी:-- जो महिलाएं अनियमित या कम मासिक स्राव के कारण गर्भधारण नहीं कर पातीं, उनके लिए पुत्रजीवा का सेवन लाभकारी होता है। माला पहनने का महत्व:-- आयुर्वेद के अनुसार, यदि संतानहीन महिला पुत्रजीवा के बीजों की माला पहनती है, तो गर्भधारण की संभावना बढ़ जाती है। ** गर्भधारण के लिए विशेष प्रयोग विध...

सूर्य अष्टकम पढ़ने से सरकारी नौकरी के योग बनते हैं।

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**** नियमित सूर्य अष्टम का पाठ करने से जीवन के हर क्षेत्र में तरक्की और उन्नति होती है।   * सरकारी नौकरी मिलने का आशीर्वाद या सरकार से फायदा मिलने का योग बनेगा। सूर्य अष्टकम का पाठ करने से व्यक्ति के जीवन में नवजीवन का संचार होता है। इस धरा धाम श्री सूर्य देव जी ही एक ऐसे देव हैं, जिनका दर्शन हम सभी को प्रतिदिन होता है। ज्योतिष के नवग्रह मंडल में सूर्य देव का स्थान सर्वोपरि है, सूर्य देव की नियमित साधना जीवन में चमत्कारिक रूप से लाभ पहुंचती है, जिन युवाओं को सरकारी नौकरी चाहिए या सरकार से संबंधित कार्य करने पड़ते हैं, ऐसे लोगों को नियमित रूप से सूर्य अष्टम का पाठ करना चाहिए। श्री सूर्य अष्टकम पढ़ने के फायदे:-- श्री सूर्य अष्टकम के पाठ से व्यक्ति के जीवन में चमत्कारिक परिवर्तन देखने को मिलता है। लेकिन हम यहां पर आप सभी को बता दें कि, किसी भी देवी देवता की पूजा आराधना करने से व्यक्ति के जीवन में बदलाव या मनोवांछित लाभ तभी मिल पाता है, जब पूजा आराधना पूर्ण श्रद्धा व सच्चे मन से किया जाता है। ग्रह बाधा से मुक्ति:--- ज्योतिष विद्या में श्री सूर्य देव जी को नवग्रह मंडल का प्रमुख मान...

02 अप्रैल 2026 हनुमान जन्मोत्सव ।

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*** 02 अप्रैल बृहस्पतिवार आज हनुमान जन्मोत्सव कि, पूजा विधान पाएं हनुमानजी का आशीर्वाद।। आज देशभर में हनुमान जयंती का पर्व मनाया जा रहा है। हनुमान मंदिरों में भक्तों का तांता लगा हुआ है। हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रतिवर्ष चैत्र मास की पूर्णिमा तिथि को हनुमान जी का जन्म हुआ था। शिवपुराण में बताया गया है कि भगवान शिव ने रुद्र अवतार के रूप में हनुमान जी को जन्म दिया। उनका जन्म माता अंजना और वानरराज केसरी के यहां हुआ था। हालांकि कई लोगों का मानना है कि हनुमान जी का जन्म कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को हुआ था। इसलिए इस दिन भी हनुमान जन्मोत्सव मनाया जाता है। चैत्र पूर्णिमा के दिन जन्मे हनुमान जी की विधिवत पूजा करने के साथ-साथ व्रत रखने का विधान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन बजरंगबली की पूजा करने से सुख-समृद्धि, धन-संपदा, ऐश्वर्य की प्राप्ति हो सकती है। रोग, दोष और भय से मुक्ति मिल सकती है। इसके अलावा श्री राम के साथ माता सीता की भी कृपा प्राप्त होती है।  हनुमान जयंती कब है?  चैत्र मास की पूर्णिमा तिथि समाप्त- 2 अप्रैल को सुबह 7 बजकर 41 मिनट पर हनुमान जयंती 202...

सात मुखी रुद्राक्ष, जीवन में सभी प्रकार के भौतिक सुख समृद्धि और धन देने में सक्षम होता है।

*** सात मुखी रुद्राक्ष जीवन में सभी प्रकार के भौतिक सुख और संपत्ति देने में सक्षम होता है, इसको धारण करने से लक्ष्मी की कृपा और शनि देव का आशीर्वाद प्राप्त होता है।। सात मुखी रुद्राक्ष को सबसे ज्‍यादा शुभ माना जाता है।  इस रुद्राक्ष पर धन की देवी मां लक्ष्‍मी की कृपा बरसती है। सात नंबर को अंकज्‍योतिष में सबसे ज्‍यादा भाग्‍यशाली अंक माना जाता है। इस रुद्राक्ष को धारण करने वाला व्‍यक्‍ति कला में निपुण बनता है और उसे सौंदर्य, सुख और प्रसिद्धि की प्राप्‍ति होती है। इस रुद्राक्ष के स्‍वामी ग्रह शुक्र देवता होते हैं, इसलिए इस रुद्राक्ष को धारण करने से शुक्र से संबंधित सभी दुष्‍प्रभाव दूर हो जाते हैं। सात मुखी रूद्राक्ष का प्रतिनिधित्व स्वयं माँ लक्ष्मी द्वारा किया जाता है। जैसा की हमारे पुराणों में वर्णित है माँ लक्ष्मी धन धान्य का प्रतिनिधित्व करती है, उनका आसान कमल का पुष्प है, उनके ऊपर हाथियों द्वारा लगातार जल की वर्षा की जाती रहती है, जो दर्शाता है की माँ लक्ष्मी की कृपा से मनुष्य अपनी पुरानी यादो से बाहर आकर वर्तमान में जीवन जीना प्रारम्भ करता है और दिन प्रतिदिन अपनी परेशानियों से ऊ...

पीपल के नीचे बैठकर पूजा करने के चमत्कारी लाभ।

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*** पीपल वृक्ष के नीचे बैठकर साधना करने के चमत्कारी फायदे। भगवद्गीता में जहां भगवान ने स्वयं को वृक्षों में पीपल बताया है, वहीं देववृक्ष माने जाने वाले पीपल को लेकर कई उपाय भी प्रसिद्ध हैं। ऐसा माना जाता है कि, यदि पीपल की पूजा नियमित रूप से की जाए तो, सभी देवी-देवताओं की कृपा प्राप्त हो जाती है। पीपल में प्रतिदिन जल अर्पित करने से कुंडली के कई अशुभ माने जाने वाले ग्रह योगों का प्रभाव खत्म हो जाता है। सनातन धर्म में पीपल वृक्ष को देवतुल्य माना गया है। तभी तो इसके पूजन का विधान शास्त्रों में भी बताया गया है। पीपल को कलियुग का कल्पवृक्ष माना जाता है। पीपल एकमात्र पवित्र देववृक्ष है, जिसमें सभी देवताओं के साथ ही पितरों का भी वास रहता है। श्रीमद्भगवदगीता में भगवान श्री कृष्ण ने कहा है कि, ‘अश्वत्थ: सर्ववृक्षाणाम, मूलतो ब्रहमरूपाय मध्यतो विष्णुरूपिणे, अग्रत: शिवरूपाय अश्वत्थाय नमो नम:’  अर्थात मैं वृक्षों में पीपल हूं। पीपल के मूल में ब्रह्मा जी, मध्य में विष्णु जी तथा अग्र भाग में भगवान शिव जी साक्षात रूप से विराजित हैं। स्कंदपुराण के अनुसार पीपल के मूल में विष्णु, तने में केशव, शाखाओं...

राशियों का स्वभाव लक्षण और उपाय।

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*** राशियों का स्वभाव और उपाय। मेष राशि :-- मेष राशि के जातक जीवन में कभी भी किसी से कोई वस्तु मुफ्त में न लें। इनको सलाह है कि यह लोग लाल रंग का कपड़ा /रूमाल का हमेशा उपयोग करें । साधु-संतों, माता पिता, बड़े बुजुर्गो व गुरुओं का सदैव आदर सत्कार करें । इस राशि के लोगो को अपना चाल चलन और व्यवहार सदैव सात्विक रखे और धर्म पर पूरी आस्था बनाये रखे। यह लोग विधवा, असहायों की सहायता करके उनका आशीर्वाद लें। मेष राशि के जातक नियमपूर्वक गाय को मीठी रोटी खिलाएं। वृषभ राशि :-- वृषभ राशि के जातक प्रतिदिन अपने घर में घी का दीपक अवश्य जलाएं। आप लोग शुक्रवार का ब्रत रखें, सदैव साफ कपड़े पहनेंऔर इस्त्र का प्रयोग करें. नया जूता-चप्पल जनवरी माह में न खरीदें. जीवन में ना तो कभी झूठी गवाही दें और ना ही किसी को धोखा दें । वृषभ राशि के लोग अपने घर में मनी प्लांट का पौधा जरुर लगाएं। मिथुन राशि:-- मिथुन राशि के जातक माँस, मदिरा आदि का बिलकुल भी सेवन न करें, घर में मछली ना पालें। इस राशि के जातक स्त्रियों को पूर्ण सम्मान दें, अपनी माता को पूर्ण आदर सत्कार दें और छोटी कन्याओं को खुश करके उनका आशीर्वाद लें। इस राश...