हनुमान जी की पूजा साधना उपासना के साथ-साथ परिक्रमा करने का बहुत महत्व है.
*** *हनुमानजी कि, पूजा, साधना के अलाबा उनकी परिक्रमा करने से बड़े से बड़ा संकट खत्म हो जाता है. जब जीवन में चारों तरफ से संकट घेर ले और बचने का कोई रास्ता नजर ना आए तो, किसी ऐसे हनुमान मंदिर की तलाश करें, जहां पर हनुमान जी की मूर्ति की परिक्रमा लगाने की व्यवस्था हो, अर्थात हनुमान जी की मूर्ति बीच में हो और उसके चारों तरफ परिक्रमा लगाने की जगह हो, जहां आप परिक्रमा लगा सकें. हनुमान जी की परिक्रमा करने से सभी ग्रह/ नक्षत्र जातक के अनुकूल हो जाते हैं. तथा अपनी कृपा और अपना आशीर्वाद देने लगते हैं, जिससे व्यक्ति के जीवन में चारों तरफ से सुख और समृद्धि के नए रास्ते खुलने लगते हैं. अपने संकट के निदान हेतु कम से कम 8 मंगलवार या 11 मंगलवार हनुमान जी की परिक्रमा करनी चाहिए और परिक्रमा करते समय निम्नलिखित चौपाई का निरंतर पाठ करतें रहें. !! संकट कटे मिटे सब पीरा,जो सुमिरै हनुमत बलबीरा'!! अर्थ:--जो भी व्यक्ति बलवान और वीर हनुमान जी का सच्चे मन से स्मरण करता है, उसके सभी संकट (मुसीबतें) दूर हो जाते हैं और सारी पीड़ाएं (दुख-दर्द) मिट जाती हैं。 कहेहु तात अस मोर प्रनामा। सब प्रकार प्रभु पूरनकामा॥...