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हर परेशानी से छुटकारा पाने के लिए करें, मां बगलामुखी के सिद्ध तांत्रिक प्रयोग.

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*** मां बगलामुखी के सिद्ध एवं तंत्रिका प्रयोग, मां के साधक कि, कहीं भी हार नहीं होती हैं   जो व्यक्ति अपने जीवन से निराश है, जिन्हें हर कार्य में असफलता मिलती है, घर बाहर कहीं भी सम्मान नहीं मिलता, हर जगह उनका अपमान होता है, ऐसे व्यक्ति को यह साधना अवश्य करनी चाहिए, चाहें वह किसी भी क्षेत्र से हो, यह अचूक साधना है इसके प्रभाव से दुश्मन सड़क से आँख मिलाने की हिम्मत नहीं कर पाता है! यह प्रयोग आप किसी भी कार्य के लिए कर सकते हो, इस प्रयोग से  सर्व कार्य सिद्ध होते हैं ! दुनिया में कहीं भी जंग के मैदान में युद्ध के मैदान में सबसे पहले मां बगलामुखी की उपासना पूजा की जाती है, फिर जंग या युद्ध किया जाता है और इनकी उपासना साधना करने से उसको निश्चित जीत प्राप्त होती है इस चमत्कारी प्रयोग में आपको कुछ नहीं करना है, बस पूरी श्रद्धा और विश्वास से यह प्रयोग करना है, नीचे दिया हुआ हैं, इस प्रयोग से आप अपनी हर मुसीबत का इलाज कर सकते हैं, हर कार्य सिद्ध कर सकते हैं ! दिन गुरुवार:-- सामग्री - आपके वस्त्र पीले होंगे एक पीला कपड़ा लेना है, आपने छोटे साइज का ही लेना है, बड़ा नहीं लेना आधा मी...

अगर जीवन में चमत्कार देखना है तो, मां कामाख्या शक्तिपीठ असम के दर्शन कीजिए.

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*** अगर चमत्कार देखना हो तो, माता कामाख्या पीठ असम के दर्शन कीजिए, जीवन के सारे रहस्य समझ में आ जाएंगे?? कामाख्‍या देवी का मंदिर शक्तिपीठों में से एक है. ये मंदिर असम की राजधानी दिसपुर से करीब 7 किलोमीटर की दूरी पर स्थि​त है. इस मंदिर के चमत्‍कार के किस्‍से दूर-दूर तक प्रचलित हैं. भारत में ऐसी कई जगह हैं जहां के चमत्‍कारों के किस्‍से दूर-दूर तक मशहूर हैं. ऐसी ही एक जगह है कामाख्‍या देवी मंदिर. कामाख्या माता का मंदिर  ये मंदिर असम की राजधानी दिसपुर से करीब 7 किलोमीटर की दूरी पर स्थि​त है. कहा जाता है कि यहां माता की योनि का भाग गिरा था. इसे शक्तिपीठों में से एक माना जाता है. ये शक्ति पीठ तांत्रिक साधनाओं के लिए मशहूर है. कहा जाता है कि यहां माता रजस्‍वला होती हैं. चैत्र नवरात्रि के मौके पर आइए आपको बताते हैं इस शक्तिपीठ की महिमा. रजस्‍वला होती हैं माता:-- कहा जाता है कि, जब माता कामाख्‍या रजस्वला होती हैं, तब यहां अम्बुवाची मेले का आयोजन होता है. कहा जाता है कि जब मां रजस्‍वला होती हैं तो मंदिर के कपाट खुद बंद हो जाते हैं. इन तीन दिनों तक गुवाहाटी में कोई मंगल कार्य नहीं होता है. इस...

भगवान शिव बोले, मेरे दर पर भूल कर भी किसी गरीब का अपमान ना हो?

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काशी में सावन का पहला सोमवार था, और गंगा इस बार भी घाटों को छूने से पहले रुक रुक कर बह रही थी जैसे किसी की प्रतीक्षा में हो। मणिकर्णिका से दो घाट छोड़ कर, विश्वनाथ गली के नुक्कड़ पर एक टूटी सी चौकी पर भीखू बैठता था। उम्र सत्तर के पार, शरीर पर गोंड जनजाति की धारीदार धोती, पैर नंगे, पीठ पर बाँस की टोकरी। वह मोची नहीं था, माली नहीं था, पुजारी तो बिल्कुल नहीं। लोग उसे पगला भीखू कहते। उसका नियम पचास साल से एक ही था। भोर में तीन बजे उठना, पहाड़ी से उतर कर जंगल में जाना, बेल के सात पत्ते तोड़ना, धतूरे के दो फूल, और एक लोटा भर कर झरने का पानी लाना। बारह कोस पैदल चल कर वह काशी पहुँचता, विश्वनाथ के गर्भगृह में नहीं, बाहर नंदी के कान में धीरे से कहता, "बाबा, आज भी लाया हूँ," और पत्ते नंदी की पीठ पर रख देता। फिर घाट पर बैठ कर एक सौ आठ बार "नमः शिवाय" कहता, और बिना किसी से कुछ माँगे लौट जाता। पुजारियों को यह अच्छा नहीं लगता था। मंदिर में सोने का कलश चढ़ाने वालों की सूची बनती थी, भीखू का नाम उसमें नहीं आता था। पर महादेव को शायद उसकी टोकरी की खुशबू ज्यादा प्रिय थी। सेठ ज्वाला प्रस...

मां कामाख्या की अचूक साधना.

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****  मां कामाख्या की साधना सभी प्रकार के भौतिक सुख तांत्रिक सिद्धियां और मोक्ष प्रदान करने वाली साधना है! कामाख्या साधना तांत्रिक शक्ति प्राप्त करने और मनोकामना पूर्ति (सौभाग्य, समृद्धि) के लिए एक अत्यंत शक्तिशाली साधना है। यह मुख्य रूप से असम के कामाख्या मंदिर से जुड़ी है। इसके लिए गुरु दीक्षा अनिवार्य मानी जाती है और यह साधना नवरात्रों में करना श्रेष्ठ है। साधना के लिए लाल आसन, लाल पुष्प और कामाख्या मंत्र का निश्चित संख्या में जाप आवश्यक है।। कामाख्या साधना विधि: चरण-दर-चरण. गुरु मार्गदर्शन:-- किसी योग्य तांत्रिक या गुरु से दीक्षा लेकर ही साधना आरंभ करें, क्योंकि यह एक तांत्रिक साधना है ! पूजा सामग्री: लाल वस्त्र, लाल आसन, तांबे या पीतल का पात्र, लाल पुष्प (गुलाब, कमल), दीपक (घी/तेल), कपूर, धूप, सिंदूर, कुमकुम, और माता की तस्वीर या यंत्र। शुभ समय:--* नवरात्र के दिन या शुक्रवार की रात साधना के लिए सर्वोत्तम है। पूजा विधि:-- स्थान को शुद्ध करें और लाल आसन पर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें। गणेश वंदना करें। माता कामाख्या का ध्यान करें और मानसिक रूप से गुरु को प्रणाम करें।...

वेद माता गायत्री की चमत्कारिक साधना !

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*** गायत्री साधना की सरल विधि क्या है?  गायत्री ...गायत्री साधना की सरल विधि में सुबह स्नान के बाद पूर्व दिशा की ओर मुख करके कुशा के आसन पर बैठें। पवित्रीकरण, आचमन, शिखा-वंदन, प्राणायाम और न्यास के बाद गायत्री मंत्र का ३, ५ या ९ माला (रुद्राक्ष/तुलसी) जाप करें। मंत्र जाप शांत मन से और होंठ हिलाते हुए करें। नित्य, निश्चित समय और स्थान पर साधना करना सबसे उत्तम माना जाता है।  गायत्री साधना की सरल दैनिक विधि (५-१० मिनट): तैयारी:-- सुबह शौच व स्नान से निवृत्त होकर स्वच्छ कपड़े पहनें। आसन:-- कुशा या ऊनी आसन पर बैठें। पवित्रीकरण: ---बाएँ हाथ में जल लेकर उसे दाएँ हाथ से ढँकें और  "ॐ अपवित्रः पवित्रो वा, सर्वावस्थांगतोऽपि वा। यः स्मरेत्पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः॥"  मंत्र बोलकर जल को सिर और शरीर पर छिड़कें। आचमन: तीन बार "ॐ अमृतोपस्तरणमसि स्वाहा" कहते हुए जल पिएं। ध्यान:--- माता गायत्री का ध्यान करें (शांत और प्रसन्न मुद्रा में)। गायत्री मंत्र जप: ---तुलसी या रुद्राक्ष की माला से गायत्री मंत्र का जाप करें:-- ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो ...

सूर्य उदय के समय सूर्य देव को जल देने के फायदे!

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*** आप सबके अनुरोध पर रविवार पर विशेष आलेख. *** सूर्य उदय के समय सूर्य देव को जल देने के चमत्कारी फायदें, भगवान भास्कर से जो मांगोगे वह मिलेगा! रोज सुबह आपने देखा होगा। कोई छत पर खड़ा है, तांबे के लोटे से पानी की धार गिर रही है, आँखें बंद हैं, होंठों पर "ॐ सूर्याय नमः"। बगल वाली आंटी बाल्टी से ही जल फेंक देती हैं, कोई ऑफिस जाते-जाते बोतल से छींटे मार देता है। सबका भाव एक है — सूर्य देव को प्रणाम। पर परिणाम अलग-अलग क्यों? क्योंकि जल चढ़ाना केवल परंपरा नहीं, एक विज्ञान है। हमारे ऋषियों ने इसे पूजा नहीं, ऊर्जा-प्रबंधन कहा था। सही समय, सही दिशा, सही धातु और सही भाव — ये चार मिल जाएँ तो वही एक लोटा पानी आपकी नींद, मन, काम और किस्मत चारों को बदल देता है। आज यही पूरी विधि, कथा और नियम, 2000 शब्दों की इस छोटी-सी यात्रा में समझते हैं। 1. सूर्य क्यों? करोड़ों लोग क्यों झुकते हैं वेद कहते हैं — "सूर्य आत्मा जगतस्तस्थुषश्च"। सूर्य केवल आग का गोला नहीं, वह इस सृष्टि की आत्मा है। ऋग्वेद के पहले ही सूक्त में अग्नि के बाद सूर्य की स्तुति है। अथर्ववेद कहता है, जो प्रातः सूर्य को देख...

सूर्य उदय के समय सूर्य देव को जल देने के चमत्कारी फायदे!

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*** आप सबके अनुरोध पर रविवार पर विशेष आलेख. *** सूर्य उदय के समय सूर्य देव को जल देने के चमत्कारी फायदें, भगवान भास्कर से जो मांगोगे वह मिलेगा! रोज सुबह आपने देखा होगा। कोई छत पर खड़ा है, तांबे के लोटे से पानी की धार गिर रही है, आँखें बंद हैं, होंठों पर "ॐ सूर्याय नमः"। बगल वाली आंटी बाल्टी से ही जल फेंक देती हैं, कोई ऑफिस जाते-जाते बोतल से छींटे मार देता है। सबका भाव एक है — सूर्य देव को प्रणाम। पर परिणाम अलग-अलग क्यों? क्योंकि जल चढ़ाना केवल परंपरा नहीं, एक विज्ञान है। हमारे ऋषियों ने इसे पूजा नहीं, ऊर्जा-प्रबंधन कहा था। सही समय, सही दिशा, सही धातु और सही भाव — ये चार मिल जाएँ तो वही एक लोटा पानी आपकी नींद, मन, काम और किस्मत चारों को बदल देता है। आज यही पूरी विधि, कथा और नियम, 2000 शब्दों की इस छोटी-सी यात्रा में समझते हैं। 1. सूर्य क्यों? करोड़ों लोग क्यों झुकते हैं वेद कहते हैं — "सूर्य आत्मा जगतस्तस्थुषश्च"। सूर्य केवल आग का गोला नहीं, वह इस सृष्टि की आत्मा है। ऋग्वेद के पहले ही सूक्त में अग्नि के बाद सूर्य की स्तुति है। अथर्ववेद कहता है, जो प्रातः सूर्य को देख...