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यदि शनि के कारण विवाह में देरी हो रही है तो.

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*** शमी (खेजड़ी) वृक्ष कि, पूरे श्रद्धा भाव से पूजा करने से शनि से संबंधित सभी प्रकार की परेशानियां दूर होती हैं और जीवन में सुख शांति तरक्की उन्नति के नए रास्ते खुलते हैं. स्नानोपरांत साफ कपड़े धारण करें।  फिर प्रदोषकाल में शमी के पेड़ के पास जाकर सच्चे मन से प्रमाण कर उसकी जड़ को गंगा जल, नर्मदा का जल या शुद्ध जल चढ़ाएं। उसके बाद तेल या घी का दीपक जलाकर उसके नीचे अपने शस्त्र रख दें।  फिर पेड़ के साथ शस्त्रों को धूप, दीप, मिठाई चढ़ाकर आरती कर पंचोपचार अथवा षोडषोपचार पूजन करें। साथ ही हाथ जोड़ कर सच्चे मन से यह प्रार्थना करें।  'शमी शम्यते पापम् शमी शत्रुविनाशिनी। अर्जुनस्य धनुर्धारी रामस्य प्रियदर्शिनी।। करिष्यमाणयात्राया यथाकालम् सुखम् मया। तत्रनिर्विघ्नकर्त्रीत्वं भव श्रीरामपूजिता।।' इसका अर्थ है👉  हे शमी वृक्ष आप पापों को नाश और दुश्मनों को हराने वाले है। आपने ही शक्तिशाली अर्जुन का धनुश धारण किया था। साथ ही आप प्रभु श्रीराम के अतिप्रिय है। ऐसे में आज हम भी आपकी पूजा कर रहे हैं। हम पर कृपा कर हमें सच्च व जीत के रास्ते पर चलने की प्रेरणा दें। साथ ही हमारी जीत के र...

धन संपत्ति और दुख दरिद्रता को दूर करने वाले भगवान शिव के अचूक उपाय.

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*** 🌹#सुख_समृद्धि के सरल एंव चमत्कारी उपाय. भगवान शिव की कृपा से जीवन के सभी कष्ट क्लेश खत्म होकर घर में सुख संपत्ति का आगमन होता है. आज का युग अर्थ का युग है. अर्थ की इस युग में धन की अपनी एक प्राथमिकता है. धन की कमी के कारण आपके बहुत से काम अटके रह जाते हैं. आर्थिक संकट से मुक्त होकर समृद्धि की ओर बढ़ने के लिए एक बहुत ही सरल साधना का विधान है. जिसमें आपका एक रुपया भी खर्च नहीं होगा. इसे करने के लिए आपको कहीं आने जाने की जरूरत नही होगी. जो आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं, जिनके पास धन नहीं रुकता है, कर्ज जिनका पीछा नहीं छोड़ रहा है वे इसे जरूर करें. साधना की सामग्री:- एक लोटा जल और शहद साधना की अवधि:- 40 दिन साधना का मंत्र:- ''ॐ शं शंकराय धनम् देहि देहि ॐ'' साधना का स्थान:- साधना के लिए अपने आसपास किसी एक शिव मंदिर को चुन लें. साधना विधि'- 1.मंदिर में शिवलिंग के पास उत्तर की दिशा की ओर मुंह करके बैठ जाएं.  2.जल से भरे हुई पात्र को अपने दाएं और रख लें उसमें थोड़ा शहद मिला ले. 3. भगवान शिव से कामना करें:- कहे हे शिव आप मेरे गुरु हैं मै आपका शिष्य हूँ मुझ शिष्य पर दया करे...

विष योग जीवन में मृत्यु के सामान कष्ट देता है.

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*** विष योग, जीवन को जहर के समान बना देता है, आदमी को कदम कदम पर दुर्भाग्य और मुसीबतों का सामना करना पड़ता है.  कई बार इस योग के कारण व्यक्ति मानसिक रूप से डिस्टर्ब हो जाता है और पागलपन जैसी स्थिति भी उत्पन्न हो जाती है, ऐसे जातक के अंदर बहम की स्थिति बनी रहती है, वह सही से निर्णय नहीं ले पता क्या करें, क्या ना करें, किसी पर विश्वास नहीं करता. अगर कोई उसके भले की बात करता है, तब भी उसे बुरा लगता है और उसे अपना दुश्मन मानने लगता है.  ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, विष योग जीवन को मृत्यु से बदतर बना देता है.  जिनकी कुंडली में विष योग बन जाता है, उसके जीवन बहुत ही कष्टकारी हो जाता है, ऐसा जातक यदि सोने को भी हाथ लगाए तो, मिट्टी हो जाता है, जीवन में बहुत मुश्किल से सफलता मिलती है और जो सफलता मिलती है वह जातक की योग्यता के अनुसार नहीं होती, जातक लाख योग्यता होने के बाद भी कामयाब नहीं हो पाता, पैसे पैसे के लिए ऐसा जातक मोहताज हो जाता है कर्ज बढ़ जाता है कई बार जीवन में आत्महत्या करने जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है लेकिन यहां यह भी ध्यान रखने वाली बात है कि विश्व योग हमेशा खराब नहीं...

बटुक भैरव की चमत्कारी उपासना

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*** बटुक भैरव की साधना से जीवन में सभी प्रकार के मुसीबत से छुटकारा मिलता है और धन संपत्ति की प्राप्ति होती है. मुख्य रूप से आठ भैरव माने गए हैं:-- 1.असितांग भैरव, 2. रुद्र भैरव, 3. चंद्र भैरव, 4. क्रोध भैरव, 5. उन्मत्त भैरव, 6. कपाली भैरव, 7. भीषण भैरव और 8. संहार भैरव। आदि शंकराचार्य ने भी 'प्रपञ्च-सार तंत्र' में अष्ट-भैरवों के नाम लिखे हैं। तंत्र शास्त्र में भी इनका उल्लेख मिलता है। इसके अलावा सप्तविंशति रहस्य में 7 भैरवों के नाम हैं। इसी ग्रंथ में दस वीर-भैरवों का उल्लेख भी मिलता है। इसी में तीन बटुक-भैरवों का उल्लेख है। रुद्रायमल तंत्र में 64 भैरवों के नामों का उल्लेख है।   बटुक भैरव : -- 1. 'बटुकाख्यस्य देवस्य भैरवस्य महात्मन:। ब्रह्मा विष्णु, महेशाधैर्वन्दित दयानिधे।।'- अर्थात् ब्रह्मा, विष्णु, महेशादि देवों द्वारा वंदित बटुक नाम से प्रसिद्ध इन भैरव देव की उपासना कल्पवृक्ष के समान फलदायी है।    2. बटुक भैरव भगवान का बाल रूप है। इन्हें आनंद भैरव भी कहते हैं। उक्त सौम्य स्वरूप की आराधना शीघ्र फलदायी है। यह कार्य में सफलता के लिए महत्वपूर्ण है। 'महा-काल-भैरव'...

शनि देव का अभिषेक करने से सभी प्रकार की परेशानियों से छुटकारा मिल जाता है.

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*** शनिवार के दिन शनिदेव का तिल के तेल या सरसों के तेल से अभिषेक करने से जीवन के सभी प्रकार के कष्ट खत्म होने लगते हैं और जीवन में तरक्की उन्नति होती है. शनि देव का अभिषेक मुख्य रूप से शनिवार को किया जाता है। इसके लिए स्वच्छ जल और शुद्ध सरसों या तिल के तेल का प्रयोग किया जाता है, अभिषेक करते समय मन में श्रद्धा रखना और 'ॐ शं शनैश्चराय नमः' मंत्र का जाप करना अत्यंत फलदायी माना गया है。  अभिषेक की सरल विधि:-- सही समय: अभिषेक सूर्योदय से पहले या सूर्यास्त के समय करना सबसे उत्तम माना जाता है,स्नान करके स्वच्छ वस्त्र (विशेषकर नीले या काले) धारण करें, याद रखें कि, सिर ढका हुआ नहीं होना चाहिए。 *** अभिषेक सामग्री: स्वच्छ जल, सरसों/तिल का तेल, काले तिल, काले वस्त्र, और नीले फूल。   अभिषेक करने की प्रक्रिया प्रक्रिया:-- सबसे पहले जल से अभिषेक करें, इसके बाद शनिदेव को सरसों का तेल अर्पित करें, काले तिल, फूल और काले वस्त्र चढ़ाएं, अंत में तेल का दीपक जलाकर आरती करें, अभिषेक और पूजा के दौरान इस मंत्र का उच्चारण करें: ॐ शं शनैश्चराय नमः धार्मिक कथाओं की मान्यताओं के अनुसार शनिदेव को कर्मफल...

हनुमान जी को चोला चढ़ाने के अद्भुत एवं चमत्कारी फायदे.

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हनुमान जी की पूजा साधना उपासना के साथ-साथ परिक्रमा करने का बहुत महत्व है.

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*** *हनुमानजी कि, पूजा, साधना के अलाबा उनकी परिक्रमा करने से बड़े से बड़ा संकट खत्म हो जाता है.  जब जीवन में चारों तरफ से संकट घेर ले और बचने का कोई रास्ता नजर ना आए तो, किसी ऐसे हनुमान मंदिर की तलाश करें, जहां पर हनुमान जी की मूर्ति की परिक्रमा लगाने की व्यवस्था हो, अर्थात हनुमान जी की मूर्ति बीच में हो और उसके चारों तरफ परिक्रमा लगाने की जगह हो, जहां आप परिक्रमा लगा सकें. हनुमान जी की परिक्रमा करने से सभी ग्रह/ नक्षत्र जातक के अनुकूल हो जाते हैं. तथा अपनी कृपा और अपना आशीर्वाद देने लगते हैं, जिससे व्यक्ति के जीवन में चारों तरफ से सुख और समृद्धि के नए रास्ते खुलने लगते हैं. अपने संकट के निदान हेतु कम से कम 8 मंगलवार या 11 मंगलवार हनुमान जी की परिक्रमा करनी चाहिए और परिक्रमा करते समय निम्नलिखित चौपाई का निरंतर पाठ करतें रहें. !! संकट कटे मिटे सब पीरा,जो सुमिरै हनुमत बलबीरा'!! अर्थ:--जो भी व्यक्ति बलवान और वीर हनुमान जी का सच्चे मन से स्मरण करता है, उसके सभी संकट (मुसीबतें) दूर हो जाते हैं और सारी पीड़ाएं (दुख-दर्द) मिट जाती हैं。 कहेहु तात अस मोर प्रनामा। सब प्रकार प्रभु पूरनकामा॥...