जब जीवन में तरक्की उन्नति के सभी मार्ग बंद हो जाएं तो कीजिए भगवान शेषनाग कि अचूक साधना।
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भगवान शेषनाग साधना, जीवन में धन दौलत की बरसात कर देगी, यह बड़ी अचूक साधना है।
जब जीवन में तरक्की- उन्नति और धन -संपत्ति आगमन के सभी मार्ग बंद हो जाएं तो, इस साधना को आजमा कर देखना चाहिए, यह अचूक साधना कभी निष्फल नहीं होती है।
यह साधना अखंड धन प्राप्ति के लिए है,यहाँ तक देखा गया है, इस साधना से आसन की स्थिरता भी मिलती है, धन मार्ग में आ रही बाधा अपने आप हट जाती है, नाग देवता के इस रूप को आप सभी जानते हैं, भगवान विष्णु के सुरक्षा आसन के रूप में जाने जाते हैं, यह भगवान विष्णु का अभेद सुरक्षा कवच है।
जब कोई साधक सच्चे मन से भगवान शेषनाग की उपासना या साधना करता है तो, उसके जीवन के सारे दुर्भाग्य का नाश कर देते हैं,उसके जीवन में अखंड धन की बरसात कर देते हैं, अगर जीवन के उन्नति के सभी मार्ग बंद हो गए हैं, अगर जीवन में अचल संपति की कामना है, आय के स्त्रोत नहीं बन रहे तो आप भगवान शेष नाग की साधना से वह आसानी से प्राप्त कर सकते हैं।
जो भी साधक भगवान शेषनाग की साधना करता है, उसे अभेद सुरक्षा कवच प्रदान करते हैं, कर्ज से मुक्ति देते हैं, व्यापार में वृद्धि होती है, जीवन में सभी कष्टों का नाश करते हैं।
साधना विधि।
१. इसमें साधना सामाग्री जो लेनी है, लाल चन्दन की लकड़ी के टुकड़े, नीला और सफ़ेद धागा जो तकरीबन 8 – 8 उंगल का हो | कलश के लिए नारियल, सफ़ेद व लाल वस्त्र, पूजन में फल, पुष्प, धूप, दीप, पाँच मेवा आदि
२. सबसे पहले पुजा स्थान में एक बाजोट पर सफ़ेद रंग का वस्त्र बिछा दें और उस पर एक पात्र में चन्दन के टुकड़े बिछा कर उस पर एक सात मुख वाला नाग का रूप आटा गूंथ कर बना लें और उसे स्थापित करें, साथ ही भगवान शिव अथवा विष्णु जी का चित्र भी स्थापित करें, उसके साथ ही एक छोटा सा शिवलिंग एक अन्य पात्र में स्थापित कर दें।
३. पहले गुरु पूजन कर साधना के लिए आज्ञा लें और फिर गणेश जी का पंचौपचार पूजन करें।
उसके बाद भगवान विष्णु जी का और शंकर जी का पूजन करें।
४. पूजन में धूप, दीप, फल, पुष्प, नैवेद्य आदि रखें।
प्रसाद पाँच मेवों का भोग लगाएं।
५. यह साधना रविवार शाम 7 से 10 बजे के बीच करें |
६. माला रुद्राक्ष की उत्तम है, और 9 ,11 या 21 माला मंत्र जाप करना है।
७. दीप साधना काल में जलता रहना चाहिए।
८. भगवान शेष नाग का पूजन करें,आपको पूर्व दिशा की ओर शेषनाग की स्थापना करनी है और उसके ईशान कोण में मनसा देवी का अपना मुख भी पूर्व की ओर रखना है।
अब भगवान शेषनाग का आवाहन करें, हाथ में अक्षत पुष्प लेकर निम्न मंत्र पढ़ते हुए शेषनाग पर चढ़ाएं।
आवाहन मन्त्र
ॐ विप्रवर्गं श्र्वेत वर्णं सहस्र फ़ण संयुतम् |
आवाहयाम्यहं देवं शेषं वै विश्व रूपिणं ||
ॐ शेषाये नमः शेषं अवह्यामि।
ईशान्यां अमृत रक्षणी साहितायै मनसा दैव्ये नमः।
प्रतिष्ठः || प्रतिष्ठः ||
अब हाथ में अक्षत लें और प्राण प्रतिष्ठता करें।
प्राण प्रतिष्ठा मन्त्र।
ॐ मनोजुतिर्जुषता माज्यस्य बृस्पतिर्यज्ञ मिमन्तनो त्वरिष्टं यज्ञ ठरंसमिनदधातु।
विश्वेदेवसेऽइहं मदन्ता मों 3 प्रतिष्ठ ||
अस्मै प्राणाः प्रतिष्ठन्तु अस्मै प्राणाः क्षरन्तु च,
अस्ये देवत्वमर्चाये मामहेति च कश्चन ||
मनसा देवी पूजन।
अब ईशान कोण में एक अष्ट दल कमल अक्षत से बनाएं और उस पर एक ताँबे या मिटटी के कलश पर कुंकुम से दो नाग बनाकर अमृत रक्षणी माँ मनसा की स्थापना करें।
कलश पर पाँच प्लव रख कर नारियल पर लाल वस्त्र लपेट कर रख दें, हाथ में अक्षत, कुंकुम, पुष्प लेकर मनसा देवी की स्थापना के लिए निम्न मंत्र पढ़ते हुए अक्षत कलश पर छोड़ दें।
ॐ अमृत रक्षणी साहितायै मनसा दैव्ये नमः |
प्रतिष्ठः || प्रतिष्ठः ||
अब मनसा देवी का पूजन पंचौपचार से करें |
एक जल आचमनी चढ़ाएं।
ॐ अमृत रक्षणी साहितायै मनसा दैव्ये नमः ईशनानं स्मर्पयामी ||
चन्दन से गन्ध अर्पित करे।
ॐ अमृत रक्षणी साहितायै मनसा दैव्ये नमः गन्धं समर्पयामि ||
पुष्प अर्पित करें।
ॐ अमृत रक्षणी साहितायै मनसा दैव्ये नमः पुष्पं समर्पयामि ||
धूप।
ॐ अमृत रक्षणी साहितायै मनसा दैव्ये नमः धूपं अर्घ्यामि।।
दीप।
ॐ अमृत रक्षणी साहितायै मनसा दैव्ये नमः दीपं दर्शयामि ||
नवैद्य—मेवो या दूध् से बना नैवेद्य अर्पित करें |
ॐ अमृत रक्षणी साहितायै मनसा दैव्ये नमः नवैद्यं समर्पयामि ||
अब पुनः आचमनी जल अर्पित करें |
ॐ अमृत रक्षणी साहितये मनसा दैव्ये नमः आचमनीयं जलं समर्पयामि ||
अब नाग पूजा बताई हुई विधि से करें।
अगर किसी कारण पूर्ण पुजा न कर पायें तो पंचौपचार पूजन कर लें।
वैसे साधना का पूर्ण लाभ लेने के लिए पूजन विधि अनुसार ही करें,अब नीला और सफ़ेद धागा शेष नाग को अर्पित करें, यह धागा पूंछ की तरफ ही अर्पित करना है या चढ़ा देना है, रुद्राक्ष की माला से निम्न मंत्र का जप करें।
साधना मंत्र
|| ॐ शं शं श्री शेष नागराजाये नमः ||
जप समाप्ती पर माला को गले में पहन लें और यह माला पहन कर ही सोएं।
जब साधना पूर्ण हो जाए तो, शिवलिंग का पंचौपचार पूजन करें और पंचामृत से अभिषेक करें।
अभिषेक करते हुये आप “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करते रहें या शिव कवच से भी अभिषेक किया जा सकता है, नहीं तो लघु रुद्राअभिषेक स्तोत्र पढ़ते हुए भी किया जा सकता है।
इसके बाद अगर आप चाहो तो सर्प सूक्त का पाठ कर लें, सोते हुये माला गले में रहे, दूसरे दिन आप उस नाग की आकृति को किसी नदी पर जाकर जल प्रवाह कर दें, समस्त पूजन सामग्री के साथ जो पूजन किया है, वह फूल आदि भी सब प्रवाहित कर दें।
कलश का जल घर में छिड़क दें या किसी पौधे को डाल दें, इस प्रकार यह साधना पूर्ण हो जाती है और अखंड धन आने के मार्ग खोल देती है, कर्ज से छुटकारा मिलता है।
ॐ नव कुलाय विध्महे विषदन्ताय धीमाहि तन्नो सर्प प्रचोदयात ll
नाग गायत्री का पाठ रोजाना सूर्योदय के समय 108 बार करना बहुत अधिक फलदायी होता है।
नाग स्तोत्र का मंत्र है।
ब्रह्म लोके च ये सर्पाः शेषनागाः पुरोगमाः।
नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा॥
विष्णु लोके च ये सर्पाः वासुकि प्रमुखाश्चये।
अनंतं वासुकि शेष पद्मनाभं च कम्बलम्।
शड्खपाल धार्तराष्ट्र तक्षकं कालियं तथा।
एतानि नव नामानि नागानां च महात्मनाम्।
सायंकाले पठेन्नित्यं प्रातः काले विशेषतः।
तस्मे विषभयं नास्ति सर्वत्र विजयीं भवेत्।
नाग स्तोत्र में नाग देवता के नौ नामों का वर्णन मिलता है, इस स्तोत्र का पाठ करने से कालसर्प दोष और पितृदोष से मुक्ति मिलती है, ऐसा माना जाता है।
नाग से जुड़े कुछ और मंत्र।
नाग गायत्री मंत्र: ॐ नवकुलाय विद्यमहे विषदंताय धीमहि तन्नो सर्प: प्रचोदयात्।।
नागेश्वर ज्योतिर्लिंग मंत्र: ॐ विष्वेश्वराय विध्महे नागभूषणाय धीमहि। तन्नो नागेशः प्रचोदयात्।।
शेषनाग मंत्र: ॐ नवकुलाय विद्यमहे विषदंताय धीमहि तन्नो सर्प: प्रचोदयात् ।।
शिवलिंग पर नाग चढ़ाने से क्या होता है?
इसी वरदान के कारण सांप भगवान भोलेनाथ के गले में लिपटे नजर आते हैं, क्या है महत्व?: सावन महीने में भक्त पूरे श्रद्धा भाव से भगवान भोलेनाथ की पूजा करते हैं, ऐसा करने से भगवान अपने भक्तों को सुख, संपन्न और समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं, कथाओं की मानें तों, अगर सावन में अगर आपको कोई सांप दिखाई देता है तो, यह शुभ माना जाता है।
कालसर्प योग को दूर करने के लिए नाग नागिन का जोड़ा ज्योतिर्लिंग पर चढ़ाना चाहिए ?
उन्होंने बताया कि, जिन व्यक्तियों की कुंडली में काल सर्प दोष बना हुआ है, उन लोगों ने शिव मंदिर में शिव का रूद्धा अभिषेक कर शिव की पूजा की। उन्होंने बताया कि, शिव मंदिर नागदेव मंदिर में चांदी के नाग नागिन के जोड़ा चढ़ाने से काल सर्प दोष दूर होने की मान्यता है।
चांदी की सांप की अंगूठी पहनने के फायदे।
मानसिक शांति।
चांदी की सांप की अंगूठी पहनने से आपको आराम मिलता है, यह आपके दिमाग को शांत करता है, जिससे आप अधिक ध्यान केंद्रित कर पाते हैं, यह आपकी किस्मत भी बदलता है और आपके जीवन में सौभाग्य लाती है, यह आपकी मानसिक क्षमता को विकसित करने में भी मदद करती है, जिससे आपकी बुद्धि में सुधार होता है और आपका दिमाग तेज होता है।
अपने शरीर को स्थिर रखें और विषाक्त पदार्थों से बचें
लोग यह भी सोचते हैं कि, सांप का सिर ऊपर की ओर करके अपने बाएं हाथ में हीरे की सांप डिजाइन वाली अंगूठी पहनने से आपको शारीरिक संतुलन बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
चांदी पहनने से आपको ज़हर से बचने में मदद मिलती है, धातु अन्य विषाक्त पदार्थों के संपर्क में आने पर रंग बदल देगी। उदाहरण के लिए, यदि आप अपनी चांदी की साँप की अंगूठी लंबे समय तक पहनते हैं और वह नीली हो जाती है, तो यह दर्शाता है कि, आपके शरीर में सोडियम का स्तर अधिक है।
चेतावनी:-- उपरोक्त साधना किसी सिद्ध हस्त गुरु के निर्देशन में ही करना चाहिए, अन्यथा बिना सुरक्षा कवच और बिना गुरु के कई बार परेशानी हो सकती है, इसके लिए आप स्वयं जिम्मेदार होंगे।
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अनिल सुधांशु
ज्योतिषाचार्य
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