केतु देवता बताएंगे, हम पूर्व जन्म में कौन थे और क्या करके आए हैं।
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केतु देवता बताएंगे आप पूर्व जन्म में क्या थे और क्या करके आएं हैं।
कुंडली में केतु को पूर्व जन्म के कर्मों और अधूरी इच्छाओं का कारक माना जाता है, जो बताता है कि, आप पिछले जन्म में किन क्षेत्रों में अधिक सक्रिय थे या कहाँ मोह रह गया था। जिस भाव में केतु होता है, वहां व्यक्ति का पूर्व जन्म का अनुभव होता है, लेकिन इस जन्म में उस भाव से मोहभंग या अलगाव महसूस हो सकता है।
विभिन्न घरों में केतु का पूर्व जन्म आधारित फल इस प्रकार है।
#प्रथम भाव (लग्न) व्यक्ति पिछले जन्म में अपने शरीर, स्वास्थ्य या आत्म-केंद्रित कार्यों में अधिक मग्न रहा हो सकता है, इस जन्म में स्वभाव में चंचलता या वैराग्य मिल सकता है।
#द्वितीय भाव पिछले जन्म में धन, परिवार या वाणी के मामलों में ज्यादा रुझान था, इस जन्म में इन मामलों में मोहभंग या उतार-चढ़ाव रह सकता है।
#तृतीय भाव पूर्व जन्म में साहस, यात्रा या छोटे भाई-बहनों के साथ अधिक समय बीता हो सकता है।
#चतुर्थ भाव व्यक्ति पिछले जन्म में सुख-सुविधाओं और मातृ सुख में काफी लिप्त रहा हो सकता है।
#पंचम भाव यह पूर्व जन्म के कर्मों का मुख्य घर है, यहाँ केतु होने पर व्यक्ति गुप्त विद्याओं, रचनात्मकता या शिक्षा के क्षेत्र में पिछले जन्म के अनुभव ला सकता है।
#षष्ठ भाव (छठा घर): पूर्व जन्म में शत्रुओं को हराने या विवादों में रहने का अनुभव हो सकता है, इस जन्म में रोग या शत्रुओं से संघर्ष या अचानक विजय मिल सकती है।
#सप्तम भाव: पूर्व जन्म में साझेदारी या विवाह से संबंधित कार्यों में ज्यादा जुड़ाव रहा हो सकता है।
#अष्टम भाव: पिछले जन्म में गहरे रहस्यों, तंत्र-मंत्र या शोध कार्यों में समय व्यतीत हुआ हो सकता है।
#नवम भाव: पूर्व जन्म में भाग्य या धर्म के कार्यों से जुड़ाव, लेकिन इस जन्म में भाग्य में अवरोध या 'अयश' (यश न मिलना) महसूस हो सकता है।
#दशम भाव: करियर और सामाजिक प्रतिष्ठा के क्षेत्र में पिछले जन्म में अधिक अनुभव रहा हो सकता है।
#एकादश भाव (11वां घर): पिछले जन्म में धन कमाने के लिए अनैतिक या विभिन्न रास्तों का उपयोग किया हो सकता है।
#द्वादश भाव (12वां घर): गहन अंतर्ज्ञान, एकांतप्रियता और मोक्ष की ओर झुकाव पिछले जन्म के कर्म हो सकते हैं।
ज्योतिष के माध्यम से आप अपने पिछले, वर्तमान और आने वाले जन्म के बारे में बहुत विस्तार से जान सकते हैं।
कुंडली का प्रथम, पंचम और नवम भाव आपके सारे राज खोलकर रख देता है। यदि आप जानना चाहते हैं कि, आप अपने पिछले जन्म में कौन-सा कार्य अधूरा छोड़कर आएं हैं और उसे इस जन्म में पूरा करना चाहते हैं तो, अपनी कुंडली खोलकर बैठ जाएं और खुद ही जान लें।
1. लग्न:--- यदि आपकी कुंडली के लग्न यानी प्रथम भाव में केतु विराजमान है तो, ज्योतिष मान्यता के अनुसार आप अपने पिछले जन्म में स्वयं के लिए कोई कार्य कर रहे थे जिसे आप अधूरा छोड़कर आए हैं। स्वयं की उन्नति के लिए या कोई आप कोई कार्य करने में व्यस्त थे। यह भी हो सकता है कि, आप कुछ सीख रहे थे और इस दौरान आपकी मृत्यु हो गई। यदि इसमें राशि, ग्रह और नक्षत्र जोड़ देते हैं तो आपका कार्य स्पष्ट हो जाएगा।
2. दूसरा भाव:--- यदि कुंडली के दूसरे भाव में केतु विराजमान है तो, यह माना जाता है कि, आप अपने घर-परिवार या कुटुंब के प्रति कोई कार्य कर रहे थे। आपकी वाणी से कुछ बुरा हुआ है। परिवार के प्रति धन कमा रहे या संचित कर रहे थे। यदि इस जन्म में धन अच्छा है और वाणी भी ठीक है तो, समझो कुछ अच्छा ही करके आए हो। यदि दांत, मसूड़े खराब हैं और वाणी भी खराब है तो, मतलब कुटुंब का बुरा करके आए हैं। इस जन्म में धन की और परिवार की चिंता लगी रहेगी।
3. तृतीय भाव:--- यदि तीसरे भाव में केतु विराजमान है तो, यह माना जाएगा कि, भाई-बहनों के कर्तव्य का निर्वहन करते हुए मृत्यु हुई है। यह भी हो सकता है कि, किसी खेल, युद्ध, लड़ाई झगड़ा में मृत्यु हुई। यात्रा करते समय भी मृत्यु का संकेत मिलता है। इससे जुड़ा कोई कार्य था जो अधूरा रह गया। यदि ग्रह, राशि और नक्षत्र जोड़ देंगे तो स्पष्ट हो जाएगा।
4. चतुर्थ भाव:-- चौथे भाव में केतु के विराजमान होने का अर्थ है कि, माता, भूमि, भवन और वाहन से जुड़ी कोई इच्छा रह गई थी, जिसे अब इस जन्म में पूरा करना है। राशि, ग्रह और नक्षत्र से यह स्पष्ट हो जाएगा कि, कौन सी इच्छा अधूरी रह गई थी। जैसे राशि तुला का केतु है तो मोलभाव से जुड़ा हुआ मामला पूरा नहीं हुआ। यानी भूमि और भवन से जुड़ा मामला है।
5. पंचम भाव:--- यदि पांचवें भाव में केतु विराजमान है तो, यह माना जाता है कि, आप अपनी संतान के प्रति कोई उत्तरदायित्व अधूरा छोड़कर आए हैं। उसकी शिक्षा को आप पूर्ण कर पाने में सक्षम नहीं हो पाए या उसके साथ आपने कुछ अच्छा या बुरा कार्य किया है। यदि इस जन्म में आप अपनी संतान को लेकर अति संवेदनशील हैं तो शिक्षा या किसी रोग से जुड़ा मामला हो सकता है। गर्भ नष्ट हुआ है तो, बच्चों से जुड़ा कोई कर्म करके आए हैं।
6. छठा भाव:-- यदि केतु छठे भाव में विराजमान है तो, यह समझा जाएगा कि रोग, ऋण या शत्रु के कारण या इनके दबाव के चलते मृत्यु को प्राप्त हुए हैं। वर्तमान जीवन से यह जान सकते हैं कि, किसके कारण मृत्यु हुई। जैसे रोग से ग्रस्त हैं, कर्ज ज्यादा हो गया है या शत्रुओं से परेशान हैं। यह भी कि मामा के प्रति कोई कार्य अधूरा छोड़ आए हैं।
7. सातवां भाव:-- यदि केतु सातवें भाव में विराजमान है तो, यह समझा जाएगा कि आप अपने जीवनसाथी, व्यापार का पार्टनर या व्यापार के प्रति निर्वाह करते हुए मृत्यु को प्राप्त हुए। केतु यदि अच्छा है तो, उनका भला करके आएं हैं और बुरा है तो, इनके कारण आप त्रस्त रहे हैं। यदि इस जन्म में जीवनसाथी या साझेदार के साथ आपका व्यवहार अच्छा नहीं है तो, यह माना जाएगा कि, आप अपने पिछले जन्म के कर्म को ही दोहरा रहे हैं।
8. आठवां भाव:--यदि आपने अपने जीवनसाथी से कोई बड़ा धन लिया या जीवन साथी को धन दिया है तो, यह लेने-देने का कार्य बचा था, जिसे इस जन्म में पूरा किया या अभी पूरा करना बाकी है। यह भी माना जाता है कि, आपने कोई गुप्त साधना की हो, जो अभी अधूरी रह गई है। आप पर किसी देवता की कृपा बनी हुई है। आपनी मृत्यु चारपाई पर हुई ऐसा माना जा सकता है।
9. नवम भाव:---यदि केतु नौवें भाव में विराजमान है तो, यह माना जाएगा कि, पिता और कुटुंब की परंपरा के निर्वाह में या कर्तव्य को छोड़कर आप आए हैं। यह हो सकता है कि, पूर्व जन्म में आपके पिता और आप में दूरी रही हो। किसी कारणवश बिछड़ गए हों। वर्तमान में यदि पिता से संबंध अच्छे हैं तो, पूर्व जन्म का कर्म पूरा हो गया अन्यथा इस जन्म में भोगना होगा। यदि केतु अच्छा होगा तो आप जन्म से ही धर्म-कर्म के कार्यों में रुचि ले रहे हैं। पिता की सेवा या धार्मिक कार्य आपके लिए महत्वपूर्ण है।
10. दसवां भाव:-- यदि केतु दसवें भाव में विराजमान है तो यह समझा जाएगा कि, पिछले जन्म में पद, प्रतिष्ठा, कर्म और नौकरी को लेकर आप असंतुष्ट थे। यह भी हो सकता है कि, अपने अपने काम या करियर को लेकर असंतुष्ट रहे हों, जो इस जन्म में भी बना हुआ है। बार-बार नौकरी या कार्य बदलना इस बात का संकेत माना जा सकता है। पिछले कई जन्म का कार्यक्षेत्र का कर्म शेष रह गया है, जो इस जन्म में पूरा होने का आप प्रयास कर रहे हैं। यदि आप में काम को लेकर हद से ज्यादा लगन है तो, कार्यक्षेत्र के कई जन्मों के कार्य अधूरे माने जाएंगे।
11. एकादश भाव:--- यदि आपका केतु 11वें भाव में विराजमान है तो, यह माना जाएगा कि, आपकी कोई खास इच्छा अधूरी रह गई है, जो बड़े भाई-बहनों या संतान के प्रति इच्छा या कर्तव्य था वह अधूरा रह गया। किसी खास मनोकामना की इच्छा रह गई और मृत्यु हो गई। वह इच्छा संतान से जुड़ी भी हो सकती है।
12. द्वादश भाव:-- इस भाव में केतु का होना मोक्ष के लिए पूर्वजन्म में किए गए प्रयास को दर्शाता है। यदि मोक्ष के लिए प्रयास किया होगा तो, गुरु की स्थिति भी अच्छी होगी या गुरु की केतु पर दृष्टि होगी। यदि गुरु की स्थिति अच्छी नहीं होगी तो, शय्यासुख में ही आप रत रहते थे और उसी के कारण आपकी मृत्यु हो गई। यानी आप या तो अच्छे भोगी थे या योगी।
उपाय:-- यदि केतु नीच का है या किसी पाप ग्रह की दृष्टि से खराब हो रहा है तो, बकरा या भूरा कद्दू दान करें। सात प्रकार के अनाज लेकर उसे जिस भाव में केतु बैठा है, उस भाव से जुड़े रिश्तेदारों को दान दे दें या किसी मंदिर में दान कर दें। तीन काले कुत्ते को प्रतिदिन रोटी खिलाएं। कर दें। यदि ऐसा नहीं कर सकते हैं तो, मंदिर में यह अनाज दान कर दें।
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अनिल सुधांशु
ज्योतिषाचार्य
नीम करौली आश्रम कैंची धाम नैनीताल (उत्तरांचल)
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