कर्मफल दाता शनिदेव कि पूजा का विधान और अलग-अलग वारह घरों में प्रभाव और उपाय

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कर्म फल दाता शनिदेव कि पूजा का विधान और अलग-अलग वारह घरों में उसका प्रभाव और उपाय।

शनिदेव की पूजा शनिवार को सूर्योदय से पहले या सूर्यास्त के बाद करना उत्तम है। स्नान कर नीले/काले वस्त्र पहनें। घर या मंदिर में सरसों के तेल का दीपक जलाएं, काले तिल, नीले फूल और लौंग अर्पित करें। "ॐ शं शनैश्चराय नमः" मंत्र का जाप करें, पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाकर परिक्रमा करें और शनि चालीसा का पाठ करें। 

शनि पूजा का विस्तृत विधान।

पूजा का समय: शनिवार के दिन सुबह जल्दी या शाम के समय (सूर्यास्त के बाद) पूजा करें, स्नान के बाद स्वच्छ, संभव हो तो नीले या काले रंग के वस्त्र धारण करें, सरसों का तेल, काले तिल, नीले फूल, शमी का पत्ता, काला कपड़ा, लोहे की वस्तु, अगरबत्ती, धूप और कपूर।

पूजा विधि:--

घर के मंदिर में या शनि मंदिर में शनिदेव की प्रतिमा के सामने सरसों के तेल का दीपक जलाएं।

शनिदेव को काला तिल और तेल अर्पित करें।

"ॐ शं शनैश्चराय नमः" या "ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः" मंत्र का 108 बार जाप करें।

शनि चालीसा और शनि आरती करें।

विशेष उपाय।

शाम को पीपल के पेड़ की जड़ में जल चढ़ाएं और सरसों के तेल का दीपक जलाकर सात बार परिक्रमा करें।सात बार कच्चा सूट लपेटे और शनि कवच का पाठ करें, गरीबों को भोजन कराएं या काली उड़द, कंबल, लोहे की वस्तु दान करें। 

सावधानी और नियम:-  

पूजा करते समय मुंह पश्चिम दिशा की ओर रखें।

शनि देव की प्रतिमा को सामने से ना देखें, बगल से दर्शन करें। शनिवार को मांस-मदिरा के सेवन से बचें। 

* शनि को ज्योतिष में क्रूर ग्रह माना गया है, इसलिए लोग इनका नाम सुनकर ही डर जाते हैं. लेकिन शनि को कर्म फल दाता भी कहा जाता है।

*कहा जाता है कि, वे व्यक्ति के कर्मों के हिसाब से उसे फल देते हैं, अगर कुंडली में शनि शुभ स्थिति में बैठे हैं तो, ये व्यक्ति को रंक से राजा बना सकते हैं।

*लेकिन शनि की अशुभ स्थिति राजा को भी भिखारी बना सकती है. फिर भी अगर शनिवार के दिन कुछ विशेष उपाय किए जाएं तो, शनि के अशुभ प्रभावों को भी शुभ प्रभावों में बदला जा सकता है. अगर आप भी शनि के अशुभ प्रभावों को झेल रहे हैं तो, इन उपायों को कीजिए।

१. यदि शनि कुंडली के प्रथम भाव में बैठकर अशुभ प्रभाव दे रहा हो तो, व्यक्ति को शनिवार के दिन दूध में थोड़ी चीनी मिलाकर बरगद या पीपल के पेड़ में चढ़ाना चाहिए और नीचे से गीली मिट्टी लेकर माथे पर तिलक लगाना चाहिए।

२. यदि शनि दूसरे घर में अशुभ फल दे रहा हो तो, शनिवार के दिन आपको अपने माथे पर दूध या दही का तिलक लगाना चाहिए. और शिवलिंग पर दूध चढ़ना चाहिए।

३. तीसरे भाव में बैठे शनि के दुष्प्रभावों से बचने के लिए शनिवार के दिन काले तिल, केले और नींबू का दान करें, कुत्तों की सेवा करें और मांस मदिरा से परहेज करें।

४. चौथे घर में विराजमान शनि के अशुभ फल से बचने के लिए शनिवार के दिन भैंस और कौए को भोजन दें. गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करें. उन्हें अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान दें. बहते पानी में शराब को प्रवाहित करें।

५. पांचवे भाव में शनि के अशुभ प्रभाव से बचने के लिए लोहे का छल्ला हाथ में पहनें और साबुत मूंग की दाल को किसी जरूरतमंद को शनिवार के दिन दान करें।

६. छठे भाव से शनि अशुभ फल दे रहा हो तो चमड़े एवं लोहे की वस्तुएं खरीदें. शनिवार के दिन जल में काले तिल डालकर शिव जी का अभिषेक करें।

७. कुंडली के सप्तम भाव में बैठे शनि के अशुभ फल से बचाव के लिए शनिवार के दिन शहद से भरा बर्तन या बांसुरी में चीनी भरकर किसी सुनसान जगह पर दबा आएं।

८. आठवें घर में शनि के दुष्प्रभाव से बचने के लिए हमेशा अपने पास चांदी की कोई चीज रखें. सांपों को दूध पिलाना चाहिए।

९. यदि कुंडली के नौवें घर से शनि का अशुभ प्रभाव हो तो घर की छत को अच्छे से साफ रखना चाहिए और छत पर कबाड़, लकड़ी आदि ऐसी कोई चीज नहीं रखनी चाहिए जो बरसात में भीगकर खराब हो जाती हो. इसके अलावा चांदी के चौकोर टुकड़े पर हल्दी लगाकर अपने पास रखना चाहिए. रोजाना पीपल के पेड़ को जल देना चाहिए।

१०. यदि दसवें भाव में शनि हो तो मंदिर मे केले और चने की दाल चढ़ाएं. शनिदेव के सामने सरसों के तेल का दीपक जलाएं. गुरुवार का व्रत रखें और मांस, मदिरा आदि का सेवन नहीं करना चाहिए।

11. कुंडली के ग्यारहवें भाव में शनि अशुभ फल से बचने के लिए चांदी की एक ईंट बनवाकर अपने घर में रखें. शनिवार के दिन शनि मंत्र का १०८ बार जाप करें और पीपल के नीचे सरसों के तेल का दीपक जरूर रखें।

१२. बारहवें भाव में बैठे शनि के दुष्प्रभाव रोकने के लिए शनिवार के दिन काली दाल, काले तिल, काला वस्त्र आदि सामर्थ्य के हिसाब से किसी जरूरतमंद को दें. मांस मदिरा का सेवन भूलकर भी न करें।

शनि बीज मंत्र का जाप कैसे करें।

मंत्र जाप सुबह और शाम कभी भी किया जा सकता है लेकिन मंत्र जाप के लिए शनिवार का दिन सबसे अच्छा होता है। स्नान करके काला या गहरा नीला रंग का कपड़ा पहन लें। एक शांत और स्वच्छ स्थान का चयन कर लें। और फिर मन में या बोलकर 23000 बार शनि मंत्र दोहराएं। हनुमान जी की मूर्ति के सामने अगर मंत्र का उच्चारण करते हैं, तो इससे शनि देव प्रसन्न होते हैं।

शनि बीज मंत्र।

ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः ॥

इस मंत्र का अर्थ है को शनि देव को मेरा प्रणाम। कृपया मुझ पर दया करें और मेरे मन को शांत करें।

तांत्रिक शनि मंत्र

ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।

शनि गायत्री मंत्र।

॥ ॐ काकध्वजाय विद्महे खड्गहस्ताय धीमहि तन्नो मन्दः प्रचोदयात ॥

अर्थात मैं उस प्रभु को नमन करता हूं, जिसके ध्वज पर काक बना हुआ है, जिनके हाथ में तलवार है। शनैश्वर को मेरे जीवन को ज्योति मान करने दो।

क्षमा हेतु शनि मंत्र।

अपराधसहस्त्राणि क्रियन्तेहर्निशं मया।

दासोयमिति मां मत्वा क्षमस्व परमेश्वर।।

गतं पापं गतं दु: खं गतं दारिद्रय मेव च।

आगता: सुख-संपत्ति पुण्योहं तव दर्शनात्।।

शनि महामंत्र।

नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्‌।

छायामार्तण्ड सम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्‌।

अर्थात वह नीले आकाश जैसे हैं, सूर्य की रोशनी हैं और सत्ता में आसीन शक्तियों में सबसे प्रभावशाली हैं। वह चमकते सूर्य पर भी अपनी छाया डाल सकते हैं। हम आदेश के देवता, शनि देव को साष्टांग प्रणाम करते हैं।

शनि बीज मंत्र का जाप करने के लाभ।

शनि बीज मंत्र के जाप से शनि के नकारात्मक प्रभावों और पिछले जन्मों के नकारात्मक कर्मों के असर को ख़त्म किया जा सकता है।

नियमित रूप से शनि बीज मंत्र का जाप करने से चिकित्सा और धन संबंधी समस्याओं को समाप्त करने में मदद मिलती है।

शनि बीज मंत्र का जाप सुरक्षा की भावना, सफलता और समृद्धि प्रदान करता है। शनि बीज मंत्र का जाप करने से साढ़े साती चरण की परेशानियों और कठिनाइयों का समाधान हो जाता है।

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अनिल सुधांशु 

ज्योतिषाचार्य 

नीम करौली आश्रम कैंची धाम नैनीताल (उत्तरांचल)

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