पीपल के नीचे बैठकर पूजा करने के चमत्कारी लाभ।
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पीपल वृक्ष के नीचे बैठकर साधना करने के चमत्कारी फायदे।
भगवद्गीता में जहां भगवान ने स्वयं को वृक्षों में पीपल बताया है, वहीं देववृक्ष माने जाने वाले पीपल को लेकर कई उपाय भी प्रसिद्ध हैं। ऐसा माना जाता है कि, यदि पीपल की पूजा नियमित रूप से की जाए तो, सभी देवी-देवताओं की कृपा प्राप्त हो जाती है। पीपल में प्रतिदिन जल अर्पित करने से कुंडली के कई अशुभ माने जाने वाले ग्रह योगों का प्रभाव खत्म हो जाता है।
सनातन धर्म में पीपल वृक्ष को देवतुल्य माना गया है। तभी तो इसके पूजन का विधान शास्त्रों में भी बताया गया है। पीपल को कलियुग का कल्पवृक्ष माना जाता है। पीपल एकमात्र पवित्र देववृक्ष है, जिसमें सभी देवताओं के साथ ही पितरों का भी वास रहता है। श्रीमद्भगवदगीता में भगवान श्री कृष्ण ने कहा है कि,
‘अश्वत्थ: सर्ववृक्षाणाम, मूलतो ब्रहमरूपाय मध्यतो विष्णुरूपिणे, अग्रत: शिवरूपाय अश्वत्थाय नमो नम:’
अर्थात मैं वृक्षों में पीपल हूं।
पीपल के मूल में ब्रह्मा जी, मध्य में विष्णु जी तथा अग्र भाग में भगवान शिव जी साक्षात रूप से विराजित हैं। स्कंदपुराण के अनुसार पीपल के मूल में विष्णु, तने में केशव, शाखाओं में नारायण, पत्तों में भगवान श्री हरि और फलों में सभी देवताओं का वास है।
इस उपाय को करने से निम्न प्राकर की समस्याओं से मुक्ति मिलेगी-
** लगातार बीमार चल रहे हैं-
यदि कोई व्यक्ति लगातार अस्वस्थ्य रह रहा हो अथवा अल्पायु योग हो तो, वह पीपल के वृक्ष के नीचे बैठकर ॐ जाप करें नमो भगवते वासुदेवाय का जाप करें, तत्काल उसे लाभ होना निश्चित है।
शत्रु से परेशान हैं-
यदि आपको शत्रु अधिक परेशान कर रहें है, तो आप पीपल वृक्ष के नीचे बैठकर हनुमान चालीसा, सुंदरकांड और बजरंग बाण में से कोई एक का पाठ करें। ऐसा करने से शत्रुओं का नाश होगा।
दु:खों से ग्रसित हो कन्या-
यदि किसी कन्या की पत्री में प्रबल वैधव्य योग हो तो, उसे नियमित पीपल के वृक्ष की सेवा करना चाहिए, प्रतिदिन सरसों के तेल से युक्त आटे का दीपक लगाकर पीपल के वृक्ष की 11 परिक्रमा करना चाहिए, उपरोक्त उपाय को कम से कम 1 वर्ष तक करने से लाभ अवश्य प्राप्त होगा।
काल सर्प योग-
कालसर्प योग के कारण कई लोग परेशान होते हैं, उनके जीवन में रुकावट आती है पीपल के वृक्ष पर हल्दी डालकर नियमित जल चढ़ाने से और सोमवार और शनिवार को सरसों के तेल का दीपक शाम के समय पीपल के वृक्ष पर लगाने से इस दोष में आने वाली परेशानियां खत्म होती है यदि किसी के जन्मपत्री में कालसर्प योग हो तो, उपरोक्त उपाय करने से कालसर्प दोष से मुक्ति मिलेगी।
बृहस्पति मजबूत नहीं हो-
देव गुरू बृहस्पति की अशुभता समाप्त करने के लिए केले के वृक्ष के साथ पीपल के वृक्ष की भी निममित सेवा करें तो लाभ होगा। गुरुवार के दिन पीले वस्त्र धारण कर पीपल के वृक्ष की 11 परिक्रमा तथा चने की दाल चढ़ाने से बृहस्पति मजबूत होता है।
पीपल का पेड़ लगायें-
किसी शुभ मुहूर्त में पीपल के पौधे को लगाने से तथा उसकी नियमित सेवा करने से आर्थिक स्थिति अच्छी बनी रहती है। गुरुवार के दिन हल्दी डालकर पीपल पर जल चढ़ाने से चमत्कारिक लाभ होता है।
**किसी विशेष कार्य के लिये-
यदि आपको कोई विशेष कार्य सिद्ध करना है, तो शानिवार के दिन उपरोक्त उपाय करने से पूर्व अपना कार्य होने का निवेदन कर पीपल वृक्ष के समक्ष मिट्टी में एक बड़ी लोहे की कील गाड़ दें और कार्य सिद्ध होने के पश्चात निकाल दें।
शरीर में दर्द रहता है-
यदि आपको हाथ-पैरों में अथवा कमर के निचले हिस्से में दर्द बना रहता है तो, आप काले कपड़े में पीपल के वृक्ष की जड़ या लकड़ी को रखकर अपने बिस्तर के सिरहाने रख लें और साथ में पीपल वृक्ष की सेवा करते रहें। कुछ समय बाद आप दर्द से मुक्त हो जायेंगे।
*** कैंसर से पीडि़त हैं-
कैंसर जैसे असाध्य रोग में भी पीपल के वृक्ष की नित्य सेवा की जाए और प्रतिदिन प्रातः और सायंकाल सरसों के तेल का दीपक श्रद्धा पूर्वक लगाया जाये तो, लाभ मिलेगा।
🔸निरंतर हानि हो रही है-
यदि आपको निरन्तर हानि उठानी पड़ रहीं है तो, प्रत्येक शनिवार को पीपल के एक नया पत्ते पर ऊँ लिखकर उस पत्तें को पीपल की लकड़ी के साथ धन रखने के स्थान पर रख दें। यह उपाय कम से कम 8 शनिवार तक करना होगा। कुछ समय में ही आपको लाभ होने लगेगा।
🔸जीवन में समस्याएं-
यदि आप किसी क्षेत्र में सफल होना चाहते है अथवा आपके कार्यों में बाधायें आ रही है, तो आप शनिवार के दिन काले धागे में पीपल के 8 पत्तों को एक गांठ में एक साथ बांधें। अगले शनिवार को जब नई गांठ बांधे तो पहली वाली गांठ को उतार कर बहते हुये जल में प्रवाहित कर दें। आप बाधाओं से मुक्त हो जायेंगे।
🔸शिवलिंग का पूजन-
प्रथम सोमवार को पीपल वृक्ष के नीचे शिव प्रतिमा अथ्वा शिवलिंग को रख कर नियमित ऊँ नमः शिवाय का जाप कर जल से आभिषेक करें। आपके परिवार में सुख व समृद्धि की बयार बहती रहेगी।
🔸धनवृद्धि वृद्धि के लिए -
*** ज्योतिष और सभी धर्म शास्त्रों के अनुसार एक पीपल पेड़ लगाने वाले व्यक्ति को जीवन में किसी भी प्रकार को कोई दुख नहीं सताता है। उस इंसान को कभी भी पैसों की कमी नहीं रहती है। पीपल का पेड़ लगाने के बाद उसे नियमित रूप से जल अर्पित करना चाहिए। जैसे-जैसे यह वृक्ष बड़ा होगा आपके घर-परिवार में सुख-समृद्धि बढ़ती जाएगी, धन बढ़ता जाएगा। पीपल के बड़े होने तक इसका पूरा ध्यान रखना चाहिए तभी आश्चर्यजनक लाभ प्राप्त होंगे।
*** शनिवार के दिन पीपल का एक पत्ता तोड़कर उसे गंगाजल से धोकर उसके ऊपर हल्दी तथा दही के घोल से अपने दाएं हाथ की अनामिका अंगुली से ह्रीं लिखें। इसके बाद इस पत्ते को धूप-दीप दिखाकर अपने बटुए में रखे लें। प्रत्येक शनिवार को पूजा के साथ वह पत्ता बदलते रहें। यह उपाय करने से आपका बटुआ कभी धन से खाली नहीं होगा। पुराना पत्ता किसी पवित्र स्थान पर ही रखें।
🔸मंगल और शनि को साधने के लिए-
कलयुग में हनुमानजी शीघ्र प्रसन्न होने वाले देवता माने गए हैं। इनकी कृपा प्राप्त करने के लिए कई प्रकार उपाय बताए गए हैं। यदि पीपल के वृक्ष के नीचे बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ किया जाए तो, यह चमत्कारी फल प्रदान करने वाला उपाय है। सप्ताह के प्रति मंगलवार और शनिवार को ब्रह्म मुहूर्त में उठें। इसके बाद नित्य कर्मों से निवृत्त होकर किसी पीपल के पेड़ से 11 पत्ते तोड़ लें। ध्यान रखें पत्ते पूरे होने चाहिए, कहीं से टूटे या खंडित नहीं होने चाहिए। इन 11 पत्तों पर स्वच्छ जल में कुमकुम या अष्टगंध या चंदन मिलाकर इससे श्रीराम का नाम लिखें। नाम लिखते समय हनुमान चालिसा का पाठ करें।
इसके बाद श्रीराम नाम लिखे हुए इन पत्तों की एक माला बनाएं। इस माला को किसी भी हनुमानजी के मंदिर जाकर वहां बजरंगबली को अर्पित करें। इस प्रकार यह उपाय करते रहें। कुछ समय में सकारात्मक परिणाम प्राप्त होंगे।
पीपल के वृक्ष की प्रत्येक शनिवार को (दूध, जल, शक्कर, शहद, काले तिल, गंगा जल और गुड़ इन सभी चीजों को जल में मिलायें ) तत्पश्चात यह मीठा जल पीपल वृक्ष पर चढ़ायें। और आटा का दीपक जलाकर उसमें सरसों का तेल, एक लोहे की सिक्का व 11 साबुत उड़त के दाने डालकर धूप दीप क साथ आर्पित करें। बायें हाथ से पीपल के वृक्ष की जड़ को स्पर्श कर अपने माथें में लगायें व 11 बार परिक्रमा करें। यह उपाय करने से कुछ ही समय पश्चात आपको शनिदेव की कृपा मिलने लगती है।
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अनिल सुधांशु
ज्योतिषाचार्य
नीम करौली आश्रम कैंची धाम नैनीताल (उत्तरांचल)
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