जीवन में सम्पूर्णता पाने के लिए कर,ें मां तारा कि साधना।

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जीवन में पूर्णता के लिए करें, महाविद्या तारा साधना महाविद्या तारा साधना एक अत्यंत शक्तिशाली साधना, धन संपत्ति, मान सम्मान, भोग एवं मोक्ष सभी कुछ प्राप्त होगा।

वैसे तो हर साधना अपने आप में विशिष्‍ट होती है, किन्तु हर साधना का अपना-अपना अलग ही महत्त्व होता है, तारा साधना व्यक्ति को सम्पूर्ण भोग व ऐश्‍वर्य प्रदान करती है, इसे सम्पन्न कर साधक थोड़े समय में ही ... संपूर्ण हो जाता है, संसार उसके के लिए कुछ भी संभव नहीं रहता।

भगवती तारा की उपासना तांत्रिक पद्धति से मूल रूप से की जाती है और उनकी साधना करने से साधक बृहस्पति ग्रह के समान या वनस्पति गुरु के समान विद्वान भी हो जाता है। इन के तीन रूप बताए गए हैं।

मां तारा की साधना करने से नकारात्मक प्रभावों से सुरक्षा, मन में शांति और स्पष्टता, भय से मुक्ति, साहस और करुणा में वृद्धि, धन-संपदा में वृद्धि, कार्यस्थल में उन्नति, ज्ञान और वाक् सिद्धि, तथा सांसारिक और आध्यात्मिक मुक्ति प्राप्त होती है। तारा साधना साधक के जीवन में भौतिक सुख और मोक्ष दोनों प्रदान करती है। 

शारीरिक और मानसिक लाभ।

भय से मुक्ति:-- तारा की आराधना भय और असुरक्षा से मुक्ति दिलाती है। 
मन की शांति और स्पष्टता: --मंत्र जाप से मन शांत होता है और विचारों में स्पष्टता आती है। 
साहस और करुणा: --साधना मन में साहस, करुणा और दयालुता को बढ़ाती है। 
नकारात्मकता से सुरक्षा: --मां तारा नकारात्मक ऊर्जाओं और प्रभावों से एक कवच प्रदान करती हैं। 
मानसिक कष्टों का निवारण: --यह साधना मानसिक पीड़ाओं को दूर करने में मदद करती है। 
आध्यात्मिक लाभ
मुक्ति प्रदान करती हैं:-- माँ तारा भक्तों को सांसारिक और निम्न निर्वाण के बंधन से मुक्त करती हैं, जिससे पूर्ण प्रबुद्धता का मार्ग खुलता है। 
ज्ञान और आत्मज्ञान:-- यह साधना समग्र विकास और आत्मज्ञान की दिशा में मार्गदर्शन करती है। 
आध्यात्मिक पथ पर मार्गदर्शन: --तारा साधकों को आध्यात्मिक ज्ञान के मार्ग पर ले जाती हैं और बाधाओं को पार करने में मदद करती हैं। 

भौतिक और सांसारिक लाभ।

धन-संपदा की प्राप्ति: --तारा साधना से धन-सम्पदा संबंधी समस्याएं दूर होती हैं और प्रचुर धन प्राप्त होता है।
कार्यस्थल में उन्नति: --कार्यस्थल में प्रगति और उन्नति के लिए यह साधना सहायक है।
वाक् सिद्धि और प्रभाव:-- साधना से वाणी में ओज, प्रभाव और वाक् सिद्धि प्राप्त होती है।
समग्र ऐश्वर्य और सौभाग्य:-- यह साधना साधक को सम्पूर्ण ऐश्वर्य और सौभाग्य प्रदान करती है।
व्यक्तित्व का आकर्षण: --तारा की साधना से व्यक्तित्व आकर्षक बनता है।

अन्य लाभ।

कुंडलिनी का शुद्धिकरण: --तारा साधना कुंडलिनी शक्ति को शुद्ध करती है।
बच्चों के बुद्धि में वृद्धि: --नील सरस्वती के रूप में भी तारा की साधना से बच्चों की बुद्धि में वृद्धि होती है।
सुरक्षा:-- यह व्यापार और कार्यस्थल को नजर दोष और अन्य बुरी शक्तियों से सुरक्षित करती है।

महाविद्या तारा साधना

महाविद्या तारा साधना एक अत्यंत शक्तिशाली साधना मानी जाती है।

तारा महाविद्या दस महाविद्याओं में से एक हैं, जिन्हें "त्रितारणि" (तीनों लोकों से तारने वाली) भी कहा जाता है। वह संकटों से मुक्ति देने वाली, भय दूर करने वाली और साधक को गहन आध्यात्मिक अनुभूति प्रदान करने वाली देवी हैं।
तारा का स्वरूप प्रचंड, करुणामयी और रहस्यमय है। तंत्र मार्ग में उनकी साधना अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है, विशेषतः मोक्ष, ज्ञान, सिद्धियाँ और भौतिक सुखों के लिए।

तारा साधना का मूल उद्देश्य:--

भय, संकट, मृत्यु के भय से मुक्ति,वाणी में अद्भुत प्रभाव (वाक् सिद्धि),तंत्र-सिद्धि, अष्टसिद्धि और नवनिधि की प्राप्ति,ब्रह्मज्ञान और मोक्ष का अनुभव, साधक का सभी लोकों में तारण (उद्धार)।

तारा साधना कैसे करें? (संक्षिप्त प्रारूप)

1. साधना समय:

विशेषकर अमावस्या, पूर्णिमा, या गुप्त नवरात्रि में आरंभ करें, मध्य रात्रि (12 बजे के बाद) का समय उत्तम है।

2. स्थान, एकांत, शांत और पवित्र स्थान हो,साधना हेतु काला/नीला वस्त्र धारण करें।

3. आसन,काले या नीले रंग का आसन प्रयोग करें, कुशासन या कंबल का भी उपयोग कर सकते हैं।

4. पूजन सामग्री:
नीला/ पुष्प, नीला वस्त्र, कपूर, धूप, दीपक, नीले रंग की माला (नीलम, कांच, नीली हकीक, रुद्राक्ष या विशेष नीलमणि की माला) भोग में नारियल, नीला फल (जैसे जामुन), या खीरा।

5. देवी तारा  मंत्र:--(यह मंत्र विशेष तिब्बती शैली के तारा साधना से भी जुड़ा हुआ है)

6. साधना विधि:

माँ तारा का ध्यान करें — नीली आभा से दमकतीं, गले में मुण्डमाला, हाथों में खड्ग और खप्पर।

दीप प्रज्वलित कर तारा देवी को आमंत्रित करें, ध्यान के बाद बीज मंत्र से 21 माला का जप करें,कम से कम 21 दिन तक साधना नियमित करें।

विशेष बातें ध्यान रखें।

साधना के समय संयम (ब्रह्मचर्य, मौन) का पालन करें, साधना के दौरान मांस-मदिरा से पूरी तरह परहेज रखें, पूरी श्रद्धा और एकाग्रता से साधना करें,गुरु दीक्षा लेकर करना सर्वोत्तम होता है, लेकिन शुद्ध मन से अकेले भी प्रारंभ कर सकते हैं, सिद्धि के बाद "संभार" ( आवश्यक होता है — साधना सम्पन्न होने पर हवन और माँ तारा का विशेष पूजन करें।

तारा साधना के रहस्य।

साधना पूर्ण होने पर साधक के भीतर अद्भुत निर्भयता, ओज और तेज प्रकट होता है,साधक को वाणी में चमत्कारिक प्रभाव प्राप्त होता है,साधक के जीवन में अचानक से कठिन समस्याओं का समाधान होने लगता है,तारा देवी की कृपा से मृत्यु भय समाप्त होता है और साधक भवसागर से पार होता है।

मां तारा की पूजा कैसे की जाती है?

तारा तंत्र साधना – तारा देवी तंत्र ...।

माँ तारा की पूजा में सबसे पहले एक स्वच्छ स्थान पर चौकी स्थापित करें, जिस पर देवी का यंत्र या प्रतिमा रखकर गंगाजल छिड़ककर शुद्ध करें. इसके बाद, घी का दीपक जलाकर मंत्रों का जाप करें, जैसे “ॐ तारे तुत्तारे तुरे स्वाहा”. पूजा में गुलाब के फूल, चावल और लौंग का प्रयोग किया जाता है और मन को शांत रखते हुए देवी का ध्यान करना चाहिए।

पूजा विधि:-- चौकी की स्थापना: एक चौकी पर गुलाबी रंग का कपड़ा बिछाएं, यंत्र या प्रतिमा स्थापना, चौकी पर माँ तारा का यंत्र या प्रतिमा स्थापित करें, शुद्धिकरण, गंगाजल का छिड़काव करके चौकी को शुद्ध करें, दीपक प्रज्वलन: -- तारा यंत्र या प्रतिमा के सामने घी का दीपक जलाएं, मंत्र जाप: देवी तारा के बीज मंत्र का जाप करें, जैसे "ॐ तारे तुत्तारे तुरे स्वाहा", सामग्री अर्पण: चावल और लौंग का उपयोग करके देवी को भोग अर्पित करें, भक्ति भाव: --देवी की कथा सुनें और पूरे श्रद्धा व भक्ति भाव से उनका ध्यान करें।

प्रमुख मंत्र:--

बीज मंत्र: "ॐ तारे तुत्तारे तुरे स्वाहा" – यह सबसे शक्तिशाली मंत्र है, जो भय, चिंता और भ्रम को दूर करता है.
सरल मंत्र: "ॐ तारायै नमः" – यह मंत्र आत्मिक रूप से सीधा जुड़ाव स्थापित करता है और मन को शांति देता है.
सुरक्षा और कृपा के लिए: "ॐ ह्लीं तारा आयें स्वाहा" – यह मंत्र माँ तारा की कृपा और सुरक्षा प्राप्त करने के लिए अत्यंत उपयुक्त है।

मां तारा साधना के क्या चमत्कार हैं?

माँ तारा की साधना से शत्रुओं का नाश होता है, उत्कृष्ट ज्ञान की प्राप्ति होती है और जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सफलता मिलती है। यह साधना साधक को मोक्ष तक प्रदान करने में सक्षम है। आर्थिक उन्नति, धन संबंधी समस्याओं का निवारण और दिव्य सिद्धियों की प्राप्ति भी इस साधना के प्रमुख लाभों में से हैं।

क्या मां तारा मनोकामनाएं पूरी करती है?

तारापीठ को तांत्रिक पीठ के रूप में भी जाना जाता है। माँ तारा भक्तों की सभी मनोकामनाएँ पूर्ण करती हैं । दस महाविद्याओं में माँ तारा को दूसरा स्थान प्राप्त है। माँ तारा भक्तों को सभी प्रकार के ऐश्वर्य और सुख प्रदान करती हैं।

मनोकामना पूरी होने के क्या संकेत हैं?

मनोकामना पूरी होने के संकेतों में अंदर से सकारात्मक ऊर्जा और शांति महसूस करना, सपने में देवी-देवताओं या पूर्वजों के दर्शन होना, घर से निकलते ही शुभ चीजें दिखना जैसे कि कुएं से पानी भरती हुई महिला या बंदरों का झुंड, पूजा करते समय आंसू आना या दीपक की लौ का प्रज्वलित होना, और अचानक घर में सुगंध का फैलना शामिल हैं। ये संकेत बताते हैं कि, भगवान आपकी प्रार्थना सुन रहे हैं और आपकी मनोकामना पूर्ण होने वाली है। 

कौन सा तारा मंत्र अधिक शक्तिशाली है?

आध्यात्मिक जगत में, तारा को "सभी बुद्धों की माता" माना जाता है, अर्थात पूर्णतः प्रबुद्ध स्त्री बुद्ध। ऐसा ही एक अद्भुत मंत्र, माँ तारा मंत्र, विशेष रूप से इसके एक रूप "ॐ तारा तुत्तारे सोहा" ने अपनी परिवर्तनकारी शक्ति के लिए विश्व स्तर पर अपार लोकप्रियता प्राप्त की है।

माँ तारा ध्यान मंत्र क्या है?

|| माँ तारा ध्यान मंत्र ||

 प्रत्यालीढपदां घोरां मुण्डमालाविभूषिताम् ।
खर्वी लम्बोदरीं भीमां व्याघ्रचर्मावृतां कटौ ।। नवयौवनसम्पन्नां पश्वमुद्राविभूषिताम् । 
चतुर्भुजां ललज्जिह्वां महाभीमां वरप्रदाम् ।।

मां तारा का शाबर मंत्र क्या है?

तारा देवी मंत्र तंत्र साधना – तारा ...
तारा शाबर मंत्र एक शक्तिशाली मंत्र है जिसका जाप देवी तारा की कृपा प्राप्त करने, शत्रुओं से रक्षा करने, और बुद्धि व रिद्धि-सिद्धि बढ़ाने के लिए किया जाता है।
 कुछ प्रसिद्ध तारा शाबर मंत्र हैं: "ॐ ह्रीं स्त्रीं हुं फट्" (बीज मंत्र), "ॐ तारा तुत्तारे सोहा", और "ओम तारा तारा महातारा ब्रह्म विष्णु महेश उधारा..."। मंत्र के प्रभावी होने के लिए उसे उचित विधि से और निर्दिष्ट संख्या में जाप करके सिद्ध करना महत्वपूर्ण है। 

मां तारा साधना के क्या चमत्कार हैं?

माँ तारा की साधना से शत्रुओं का नाश होता है, उत्कृष्ट ज्ञान की प्राप्ति होती है और जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सफलता मिलती है। यह साधना साधक को मोक्ष तक प्रदान करने में सक्षम है। आर्थिक उन्नति, धन संबंधी समस्याओं का निवारण और दिव्य सिद्धियों की प्राप्ति भी इस साधना के प्रमुख लाभों में से हैं।

तारा साधना, जो दस महाविद्याओं में से एक है, साधक को भौतिक और आध्यात्मिक दोनों लाभ प्रदान करती है। यह साधना मुख्य रूप से बाधाओं, रोगों और भय से मुक्ति, त्वरित आर्थिक संपन्नता, ज्ञान व वाक् सिद्धि, तथा तीव्र नकारात्मक ऊर्जा से सुरक्षा के लिए की जाती है। माँ तारा को 'तारने वाली' (उद्धारकर्ता) माना जाता है, जो जीवन की विपत्तियों को दूर कर मोक्ष प्रदान करती हैं। 

तारा साधना के प्रमुख लाभ:---

समस्याओं का समाधान और सुरक्षा:-- माँ तारा की साधना साधक के जीवन से अचानक आने वाली बाधाओं और विपत्तियों को दूर करती है, जिससे जीवन में स्थिरता आती है। यह दुष्टात्माओं, तंत्र-मंत्र और नकारात्मक प्रभावों से एक सुरक्षा कवच प्रदान करती है।
आर्थिक समृद्धि:-- यह साधना विशेष रूप से धन और संपत्ति को आकर्षित करने के लिए जानी जाती है, जिससे जीवन में आर्थिक अभाव दूर होते हैं।
ज्ञान और बुद्धि:--- इन्हें नील सरस्वती भी कहा जाता है, इसलिए इनकी साधना से उच्च शिक्षा, वाक्-शक्ति (बोलने की कला), और तीक्ष्ण बुद्धि प्राप्त होती है।
मानसिक शांति और निर्भयता:-- माँ तारा का ध्यान करने से भय, चिंता और तनाव से मुक्ति मिलती है, और व्यक्ति में साहस व करुणा बढ़ती है।
आध्यात्मिक उन्नति और मोक्ष:-- सांसारिक सुखों के साथ-साथ यह साधना आत्मज्ञान, ईश्वरीय ज्ञान और अंततः जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति प्रदान करती है।
कठिन कर्मों का निवारण: --यह साधना साधक के पिछले नकारात्मक कर्मों को साफ करने और कठिन समय में भी उसे सुरक्षित रखने में मदद करती है। 

साधना संबंधी निर्देश:
यह साधना पुरुष या स्त्री कोई भी कर सकता है और यह 21 या 101 दिनों तक की जा सकती है।
साधना को गुरु के सानिध्य में करना सबसे अच्छा माना जाता है।

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अनिल सुधांशु 
ज्योतिषाचार्य 
नीम करौली आश्रम कैंची धाम नैनीताल (उत्तरांचल)

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