सूर्य अष्टकम पढ़ने से सरकारी नौकरी के योग बनते हैं।
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नियमित सूर्य अष्टम का पाठ करने से जीवन के हर क्षेत्र में तरक्की और उन्नति होती है।
* सरकारी नौकरी मिलने का आशीर्वाद या सरकार से फायदा मिलने का योग बनेगा।
सूर्य अष्टकम का पाठ करने से व्यक्ति के जीवन में नवजीवन का संचार होता है। इस धरा धाम श्री सूर्य देव जी ही एक ऐसे देव हैं, जिनका दर्शन हम सभी को प्रतिदिन होता है। ज्योतिष के नवग्रह मंडल में सूर्य देव का स्थान सर्वोपरि है, सूर्य देव की नियमित साधना जीवन में चमत्कारिक रूप से लाभ पहुंचती है, जिन युवाओं को सरकारी नौकरी चाहिए या सरकार से संबंधित कार्य करने पड़ते हैं, ऐसे लोगों को नियमित रूप से सूर्य अष्टम का पाठ करना चाहिए।
श्री सूर्य अष्टकम पढ़ने के फायदे:--
श्री सूर्य अष्टकम के पाठ से व्यक्ति के जीवन में चमत्कारिक परिवर्तन देखने को मिलता है। लेकिन हम यहां पर आप सभी को बता दें कि, किसी भी देवी देवता की पूजा आराधना करने से व्यक्ति के जीवन में बदलाव या मनोवांछित लाभ तभी मिल पाता है, जब पूजा आराधना पूर्ण श्रद्धा व सच्चे मन से किया जाता है।
ग्रह बाधा से मुक्ति:---
ज्योतिष विद्या में श्री सूर्य देव जी को नवग्रह मंडल का प्रमुख माना गया है। श्री सूर्य अष्टकम का पाठ करने से सभी प्रकार की नौ ग्रह शांत होते हैं। शनि दोष राहु केतु सभी का दोष दूर होते हैं। जिस साधक की कुंडली में या उनकी राशि में किसी भी प्रकार का ग्रह दोष उत्पन्न होता है, तो उन्हें श्री सूर्य अष्टकम का पाठ निश्चय ही करनी चाहिए।
रोगों से मुक्ति:--
श्री सूर्य अष्टकम के पाठ से असाध्य रोगों में भी आशातीत लाभ मिलता है। जब कोई व्यक्ति किसी गंभीर बीमारी या दुर्घटना का शिकार हो गया हो तो, उन्हें या उनके परिजन को उनके लिए सूर्य अष्टकम का पाठ अवश्य ही करनी चाहिए। इससे उस तकलीफ में उसे शीघ्र लाभ मिलता है और शीघ्र ही स्वास्थ्य लाभ प्राप्त करता है।
शत्रु पर विजय प्राप्ति:---
जो व्यक्ति श्री सूर्य देव जी के भक्त हैं, जो नियमित रूप से उनका पूजा करते हैं, श्री सूर्य अष्टकम का पाठ करते हैं उनका कोई भी शत्रु उनका कुछ भी बिगाड़ नहीं सकता है। शत्रु चाहे जितना भी बलवान क्यों नहीं रहे बाल भी बांका नहीं कर सकता। श्री सूर्य अष्टकम के पाठ से शत्रु पर विजय प्राप्त होता है।
मानसिक विकास:---
श्री सूर्य अष्टकम के पाठ से सभी प्रकार के मानसिक विकार दूर होता है। अच्छे बुरे को सोचने समझने की ताकत आती है। वह व्यक्ति कुसंगति का त्याग कर सत्संगति को अपनाता है। व्यक्ति मानसिक रूप से मजबूत बनता है । वह व्यक्ति अच्छे बुरे का अच्छे से पहचान कर पाता है। इसके पाठ से दुराचारी व्यक्ति भी सदाचारी बनने लगता है। व्यक्ति सात्विक बनता है सकारात्मक सोच रखता है। व्यक्ति के मन से तामसिक भावना नष्ट होती है। वह साधुवाद को प्राप्त होता है। ऐसे व्यक्ति से सभी लोग प्रेम करते हैं।
सभी कार्यों में सफलता प्राप्त होना:---
हमने जाना कि इसके पाठ से मानसिक विकास होता है। व्यक्ति मानसिक रूप से मजबूत बनता है। लोगों को रोगों से छुटकारा मिलता है। जब व्यक्ति शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत एवं स्वस्थ रहता है तो उन्हें सभी कार्यों में निश्चय ही सफलता प्राप्त होता है। ऐसे व्यक्ति सफलता हासिल होने तक मेहनत से पीछे नहीं हटते हैं और जो व्यक्ति पूरी लगन पूरी मेहनत के साथ किसी कार्य को करते हैं तो उन्हें निश्चय ही सफलता प्राप्त होती है।
सुख समृद्धि की प्राप्ति:---
श्री सूर्य अष्टकम के नियमित पाठ से घर परिवार एवं जीवन में सुख समृद्धि आती है। जीवन खुशियों से भर जाती है। इसके पाठ से व्यक्ति को उनके जीवन में सफलता मिलती है। उनका हर कार्य सफल होता है। जहां सफलता है, वहां खुशियां आती है।
बेरोज़गारी दूर होती है:--
ऐसे व्यक्ति जो बेरोजगार हैं या जिनके पास आय का कोई साधन नहीं हैं, उन्हें श्री सूर्य अष्टकम का पाठ अवश्य ही करनी चाहिए। इसके नियमित पाठ से शीघ्र ही नौकरी या व्यवसाय का मार्ग प्रशस्त होता है। व्यक्ति को योग्यता अनुसार मनचाही नौकरी की प्राप्ति होती है। अगर कोई व्यापार या किसी व्यवसाय के क्षेत्र में है तो उन्हें अपने कार्य में सफलता मिलती है।
प्रतिद्वंद्वियों से आगे होना:---
आज का युग कंपटीशन एवं चुनौतियों से भरा पड़ा है। आप किसी भी कार्य क्षेत्र में रहे सभी कार्यों में चुनौतियां और कंपटीशन बहुत ज्यादा है। श्री सूर्य अष्टकम के पाठ से व्यक्ति मानसिक रूप से प्रबल रहता है। उनका हौसला बढ़ा हुआ रहता है। वह किसी भी कार्य को पूरे जोश उत्साह के साथ करता है। उनमें इतना जोश उत्साह रहता है कि वह चुनौतियों का सामना करने से कभी घबराता नहीं है। कभी हारता नहीं है, कभी थकता नहीं है, फल स्वरूप वह अपने प्रतिद्वंद्वियों से सदा आगे रहता है।
मानसिक शांति मिलती है:---
श्री सूर्य अष्टकम के पाठ से व्यक्ति के सभी कार्य सफल होता है। जीवन में खुशियां आती है। ग्रह बाधा से मुक्ति मिलती है। बीमारियों से छुटकारा मिलता है। बेरोजगारी दूर होती है। इन सब कारणों से व्यक्ति का जीवन खुशियों से भरा रहता है, फलस्वरूप मानसिक शांति की प्राप्ति होती है।
सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं:---
श्री सूर्य अष्टकम का पाठ मनुष्य जिस उद्देश्य से या जिस कामना की पूर्ति के लिए करता है वह निश्चय ही पूरा होता है। इसका पाठ पूर्ण विश्वास व श्रद्धा भक्ति के साथ करने से सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। सारी मनोकामनाएं से तात्पर्य यह है कि वह मनोकामनाएं जो आपके अनुकूल है या उस कामना के लिए आप योग्य हैं। अगर आपमें लगन हैं उस काम के प्रति आप में समर्पण का भाव है तो सूर्यअष्टकम का पाठ करने से आपके मार्ग में आ रही परेशानियां और अड़चनें दूर होगी और आपकी मनोकामनाएं पूरी होगी।
2. श्री सूर्य अष्टकम पाठ:--
आदिदेव नमस्तुभ्यं प्रसीद मम भास्कर ।
दिवाकर नमस्तुभ्यं प्रभाकर नमोऽस्तु ते॥1॥
सप्ताश्व रथमारूढं प्रचण्डं कश्यपात्मजम् ।
श्वेत पद्माधरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम् ॥2॥
लोहितं रथमारूढं सर्वलोक पितामहम् ।
महापापहरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम् ॥3॥
त्रैगुण्यश्च महाशूरं ब्रह्माविष्णु महेश्वरम् ।
महापापहरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम् ॥4॥
बृहितं तेजः पुञ्ज च वायु आकाशमेव च ।
प्रभुत्वं सर्वलोकानां तं सूर्यं प्रणमाम्यहम् ॥5॥
बन्धूकपुष्पसङ्काशं हारकुण्डलभूषितम् ।
एकचक्रधरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम् ॥6॥
तं सूर्यं लोककर्तारं महा तेजः प्रदीपनम् ।
महापाप हरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम् ॥7॥
तं सूर्यं जगतां नाथं ज्ञानप्रकाशमोक्षदम् ।
महापापहरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम् ॥8॥
सूर्याष्टकं पठेन्नित्यं ग्रहपीडा प्रणाशनम् ।
अपुत्रो लभते पुत्रं दारिद्रो धनवान् भवेत् ॥9॥
अमिषं मधुपानं च यः करोति रवेर्दिने ।
सप्तजन्मभवेत् रोगि जन्मजन्म दरिद्रता ॥10॥
स्त्री-तैल-मधु-मांसानि ये त्यजन्ति रवेर्दिने ।
न व्याधि शोक दारिद्र्यं सूर्य लोकं च गच्छति ॥1
!! सम्पूर्ण !!
श्री सूर्य अष्टकम हिंदी में अर्थ:---
अर्थ ( १ )– हे आदिदेव भास्कर! आपको प्रणाम है, आप मुझ पर प्रसन्न हों, हे दिवाकर! आपको नमस्कार है, हे प्रभाकर! आपको प्रणाम है।
अर्थ ( २ )– सात घोड़ों वाले रथ पर आरुढ़, हाथ में श्वेत कमल धारण किये हुए, प्रचण्ड तेजस्वी कश्यपकुमार सूर्य को मैं प्रणाम करता हूँ।
अर्थ (३ )– लोहितवर्ण रथारुढ़ सर्वलोकपितामह महापापहारी सूर्य देव को मैं प्रणाम करता हूँ।
अर्थ (४ ) – जो त्रिगुणमय ब्रह्मा, विष्णु और शिवरूप हैं, उन महापापहारी महान वीर सूर्यदेव को मैं नमस्कार करता हूँ।
अर्थ ( ५ ) – जो बढ़े हुए तेज के पुंज हैं और वायु तथा आकाशस्वरुप हैं, उन समस्त लोकों के अधिपति सूर्य को मैं प्रणाम करता हूँ।
अर्थ ( ६ )– जो बन्धूक (दुपहरिया) के पुष्प समान रक्तवर्ण और हार तथा कुण्डलों से विभूषित हैं, उन एक चक्रधारी सूर्यदेव को मैं प्रणाम करता हूँ।
अर्थ ( ७ )– महान तेज के प्रकाशक, जगत के कर्ता, महापापहारी उन सूर्य भगवान को मैं नमस्कार करता हूँ।
अर्थ ( ८ )– उन सूर्यदेव को, जो जगत के नायक हैं, ज्ञान, विज्ञान तथा मोक्ष को भी देते हैं, साथ ही जो बड़े-बड़े पापों को भी हर लेते हैं, मैं प्रणाम करता हूँ।
सूर्य अष्टक पढ़ने की विधि:--
प्रातः काल सूर्य उदय होते समय लकड़ी की चौकी पर लाल रंग का कपड़ा बिछाकर उसके ऊपर सिर्फ सूर्य यंत्र रखें, यंत्र पर लाल चंदन, कुमकुम, केसर का तिलक लगाए, यदि संभव हो सके तो, रविवार का व्रत रखें, यदि व्रत नहीं रह सकते तो, रविवार के दिन नमक ना खाएं।
सूर्यदेव कैरियर और व्यापार से संबंधित रुकावटों को दूर करते हैं।
रोजी, रोजगार व्यापार की चाह रखने वाले अगर प्रति रविवार उनका दूध-भात-मिश्री का भोग लगा कर पूजन करें तो 7 रविवार के बीच में ही सरकारी नौकरी लगने की संभावना होती है, सूर्य देव की कृपा से बहुत अच्छा चलता है सूर्य देव मनुष्य की सभी कामनाओं को पूर्ण करने वाले देवताओं हैं, लेकिन पूरे मन चित्त से पूजन करना अनिवार्य है।
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अनिल सुधांशु
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