पितरों के लिए पहली रोटी क्यों जरूरी है?
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क्यों जरूरी है, भोजन की पहली रोटी पितरों के नाम, जानिए उस एक निवाले का रहस्य जो आपके पूरे परिवार का पेट भर सकता है!!
हम सब रोज़ अपने और अपने परिवार के लिए खाना बनाते हैं, लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि, हमारी दादी-नानी खाना बनाने के बाद पहली रोटी अलग क्यों निकाल कर रखती थीं? क्या यह सिर्फ एक पुरानी रस्म है, या इसके पीछे कोई बहुत बड़ा विज्ञान और आध्यात्मिक रहस्य छिपा है?
शास्त्रों में कहा गया है कि हमारे घर में जो अन्न आता है, वह हमारे पूर्वजों के पुण्य कर्मों का फल है। इसलिए, उस अन्न का पहला भोग उन्हें अर्पित करना हमारा कर्तव्य है। जब हम भोजन का एक छोटा सा हिस्सा पितरों के नाम से निकालते हैं, तो वे सूक्ष्म रूप में उसे ग्रहण करते हैं और बदले में हमारे घर में 'अन्नपूर्णा' का वरदान देते हैं। चलिए समझते हैं कि यह छोटी सी परंपरा आपके जीवन में कितनी बड़ी खुशहाली ला सकती है।
पितरों के नाम भोजन निकालने के पीछे के गहरे कारण:---
ऋण से मुक्ति: हम पर तीन मुख्य ऋण होते हैं— देव ऋण, ऋषि ऋण और पितृ ऋण। भोजन का पहला हिस्सा निकालने से हम प्रतिदिन पितृ ऋण का एक छोटा हिस्सा चुकाते हैं, जिससे जीवन के संकट कम होते हैं।
बरकत का आधार: आपने देखा होगा कि कुछ घरों में बहुत पैसा होने के बाद भी खाने के लाले पड़े रहते हैं या खाना कम पड़ जाता है। जिस घर में पितरों को भोग लगता है, वहां थोड़े से अन्न में भी पूरा परिवार तृप्त हो जाता है।
सकारात्मक ऊर्जा का संचार:--- जब हम श्रद्धा से पितरों को याद करके भोजन निकालते हैं, तो पूरे घर का वातावरण शुद्ध हो जाता है और भोजन करने वालों के मन में सात्विकता आती है।
अदृश्य तृप्ति:--- पितृ लोक में अन्न और जल की कमी मानी जाती है। हमारे द्वारा निकाला गया वह एक निवाला उन्हें वहां के कष्टों से मुक्ति दिलाता है और वे हमें दिल से दुआएं देते हैं।
भोजन अर्पण करने का सही और सरल तरीका क्या है?
पहली रोटी का नियम:--- रोज़ाना रसोई में जब पहली रोटी बने, तो उसके तीन हिस्से करें— एक गाय के लिए, एक कुत्ते के लिए और एक हिस्सा पितरों के नाम से कौवे या पक्षियों के लिए निकालें।
जल का अर्पण: --भोजन के साथ-साथ एक छोटा गिलास शुद्ध जल भी पितरों के नाम से अलग रखें। माना जाता है कि, पितृ अन्न से ज्यादा जल के प्यासे होते हैं।
अग्नि को भोग: ---अगर आप शहर में रहते हैं और पक्षी नहीं आते, तो रोटी का एक छोटा टुकड़ा आग पर पितरों का नाम लेकर समर्पित कर सकते हैं। अग्नि उस भोग को सीधे उन तक पहुँचा देती है।
भाव सबसे बड़ा:--- याद रखिए, पितृ आपकी महंगी थाली के भूखे नहीं हैं, वे आपके भाव के भूखे हैं। "हे पितृ देव, यह भोजन आपको समर्पित है" इतना कहना ही काफी है।
घर में पितरों का स्थान कहाँ होना चाहिए?
वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर की दक्षिण दिशा में पितरों का वास होता है, श्राद्धपक्ष के दौरान इस दिशा में प्रतिदिन खड़े होकर प्रणाम करना चाहिए।
*** गाय को गुड़–रोटी खिलाने का चमत्कारी उपाय
शुक्रवार के दिन काली गाय को गुड़ और रोटी खिलाना अत्यंत शुभ माना जाता है।
इससे शनि व शुक्र ग्रह की बाधाएँ शांत होती हैं धन, सौभाग्य और समृद्धि में वृद्धि होती है, घर में सुख-शांति और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है शास्त्रों के अनुसार काली गाय की सेवा से माता लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। इससे शनि व शुक्र ग्रह की बाधाएं शांत होती हैं, धन, सौभाग्य और समृद्धि में वृद्धि होती है
घर में सुख-शांति और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है
शास्त्रों के अनुसार काली गाय की सेवा से माता लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। और पितृ स्त्रोत, पितृ कवच का नियमित पाठ करें।
भक्तों आधुनिकता की चकाचौंध में अपनी इन छोटी-छोटी पर महान परंपराओं को मत छोड़िए। यही वो चीजें हैं जो एक घर को 'सुखी घर' बनाती हैं। आज से ही अपनी रसोई में पितरों का स्थान तय करें और देखें कि, कैसे आपकी सेहत और बरकत दोनों में सुधार होता है।
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अनिल सुधांशु
ज्योतिषाचार्य
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