शनिदेव का पूर्व जन्म से क्या संबंध है?
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शनि का पूर्वजन्म से क्या संबंध है?
ज्योतिष शास्त्र में शनि को 'कर्मफलदाता' माना जाता है, जो पूर्वजन्म के अधूरे कार्यों (अपूर्ण कर्मों), पाप और पुण्य के आधार पर इस जीवन में दंड या पुरस्कार देते हैं। कुंडली में शनि की स्थिति पिछले जन्म के ऋण, दरिद्रता, या जिम्मेदारियों को न निभाने की सजा दर्शाती है, जिसे इस जन्म में मेहनत और अनुशासन से सुधारना होता है।
शनि और पूर्वजन्म के संबंध के प्रमुख बिंदु:---
अपूर्ण कर्मा : ---शनिदेव कुंडली के जिस भाव में बैठे होते हैं, वह क्षेत्र आपके पिछले जन्म के अधूरें कार्यों को दर्शाता है, जिसे इस जन्म में पूरा करना आवश्यक होता है।
पूर्वजन्म का ऋण:--- यदि शनि पहले (लग्न), चौथे, सातवें, या ग्यारहवें भाव में हो, तो यह पिछले जन्म में दरिद्रता या पाप कर्मों का संकेत दे सकता है।
कर्मों का दंड: ---यदि किसी की कुंडली में शनि कमजोर या नीच का है, तो माना जाता है कि उसने पिछले जन्म में अधीनस्थों का हक मारा था या अपनी जिम्मेदारियों को ठीक से नहीं निभाया था।
शनि की स्थिति और पूर्वजन्म के संकेत:--
5वां भाव: पूर्वजन्म में किसी को हथियार से कष्ट देने के कारण संतान संबंधी कष्ट या बीमारियां। 8वां भाव: पिछले जन्म में तंत्र-मंत्र के दुरुपयोग के कारण अकारण भय, 9वां भाव: पूर्वजन्म में दूसरों की उन्नति में बाधा डालने के कारण नौकरी/जीवन में संघर्ष।
उपाय:--- शनि की स्थिति से मिल रहे पूर्वजन्म के कष्टों को दूर करने के लिए ईमानदारी, सेवा भाव, और जरूरतमंदों की मदद करना ही सबसे अच्छा उपाय माना जाता है।
शनि देव की पूजा, आराधना, साधना का जीवन पर चमत्कारी प्रभाव। शनि ग्रह को ज्योतिष में न्याय का देवता कहा जाता है।
आपके कर्मों के अनुसार है, यह आपको परिणाम देते हैं। इसलिए जन्म कुंडली में इनकी स्थिति का आपके जीवन पर गहरा प्रभाव देखने को मिल सकता है। ज्योतिष की मानें तो, कुंडलियां दो प्रकार की होती हैं, एक शनि प्रधान कुंडली और एक गुरु प्रधान कुंडली। अगर आपकी कुंडली शनि प्रधान है तो शनि देव कई तरह से आपके जीवन पर असर डालेंगे। ऐसे में आज हम आपको बताने वाले हैं कि, उन लोगों के साथ कैसी घटनाएं घटित होती हैं जिनके जीवन पर शनि का अधिक प्रभाव होता है।
शनि के प्रभाव वाले व्यक्ति के साथ होती हैं, ऐसी घटनाएं
अगर किसी व्यक्ति को हर छोटे से छोटे कार्य को करने में बड़ा संघर्ष करना पड़ रहा है, तो समझ जाइए उसके जीवन पर शनि का गहरा प्रभाव है।
शनि देव कभी भी आसानी से कोई खिताब व्यक्ति को प्रदान नहीं करते। जिनके जीवन पर शनि का प्रभाव होता है उन्हें, हर दिन नई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे लोग कम उम्र में ही समझ जाते हैं कि, भाग्य नहीं कर्म के बल पर ही उन्हें जीवन में कुछ प्राप्त होगा। इसीलिए ऐसे लोग अक्सर आपको दुनिया से अलग-थलग लग सकते हैं।
शनि जिन लोगों को प्रभावित करते हैं, उनकी दुर्घटनाएं होने की भी संभावना रहती है। ऐसे लोगों को अंदरूनी चोट लगने की ज्यादा संभावना होती है, इन पर बाहर से देखने पर तो कोई बड़ी खरोंच नहीं दिखेगी, लेकिन अंदर से घाव गहरा हो सकता है। ऐसे लोगों की हड्डियां टूट सकती है या कोई अंदरूनी घाव इनको हो सकता है।
ऐसे लोगों को हर काम शून्य से शुरू करना पड़ता है, यानि ना ही इन्हें परिवार से कोई विरासत मिलती है और ना ही इनका कोई बताने वाला होता है।
अगर आप अन्याय सहन नहीं कर पाते, किसी के साथ भी बुरा हो रहा हो और आप वहां कूद जाएं तो समझ जाइए शनि का आपके जीवन पर प्रभाव है।
शनि का प्रभाव जिनके जीवन पर होता है, वो स्पष्ट और सत्य बोलने वाले होते हैं, इसलिए अक्सर लोग इन्हें खुद से दूर रखने की कोशिश कर सकते हैं।
ऐसे लोग चाहते हैं कि उनके पास अच्छे कपड़े हों, वाहन हों, घर हो, लेकिन जिस समय इन चीजों की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, उसी समय ये इनके पास नहीं होते।
आपके दोस्त भी जरूरत के समय अगर आपके काम नहीं आते, पुराने दोस्तों से भी आपका संपर्क नहीं है, आप घर से दूर हैं, आसानी से अपने घर नहीं जा पाते तो, समझ लें कि, शनि देव आपकी परीक्षा ले रहे हैं और आपके जीवन को प्रभावित कर रहे हैं। हालांकि शनि जो लोग मरने के बाद भी हमेशा याद रखें जाते हैं, उनके जीवन पर भी शनि का ही प्रभाव दिखता है।
शनि प्रधान कुंडली वाले व्यक्ति अक्सर सन्यासी भी बन जाते हैं। मोहमाया के बंधनों से उठकर ये ज्ञान की तरफ कदम बढ़ाने वाले होते हैं।ऐसे लोगों को बहुत जल्दी जीवन की निर्थकता समझ आ जाती है।अगर आपको भी अपने जीवन में ये लक्षण देखने को मिलते हैं तो समझ जाइए शनि देव आपके जीवन को किसी न किसी तरह से प्रभावित कर रहे हैं।
शनि आपके जीवन को कैसे प्रभावित करता है?
वे कर्म, न्याय और प्रतिशोध के देवता हैं, तथा व्यक्ति के विचारों, वाणी और कर्मों के आधार पर परिणाम देते हैं। शनि दीर्घायु, दुख, पीड़ा, बुढ़ापा, अनुशासन, प्रतिबंध, जिम्मेदारी, देरी, महत्वाकांक्षा, नेतृत्व, अधिकार, विनम्रता, ईमानदारी और अनुभव से पैदा हुई बुद्धि के नियंत्रक हैं।
शनि के प्रभाव से क्या होता है?
शनि के प्रभाव से व्यक्ति के जीवन में साढ़ेसाती और ढैंय्या का सामना करना पड़ता है। शनि को न्यायाधीश, कर्म फलदाता और क्रूर ग्रह माना जाता है। यह व्यक्ति को उनके अच्छे और बुरे कर्मों के आधार पर फल प्रदान करते हैं। जातकों की कुंडली में शनि किस स्थान पर बैठे हैं यह बहुत ही महत्वपूर्ण होता है।
शनि मंत्र पढ़ने से क्या होता है?
अगर आप विधिपूर्वक शनि देव के मंत्रों का जाप करते हैं, तो सम्मान मिलेगा, भगवान शनिदेव को कर्म, अर्थ, धर्म और न्याय का प्रतीक माना गया है। मान्यता है कि, शनि मंत्र का जाप करने से धन संपत्ति और वैभव मिलता है। इसके अलावा शनिदेव के मंत्रों जाप करने से भगवान शनि देव प्रसन्न होते हैं।
शनि ग्रह से कौन सी बीमारी होती है?
जातक की कुंडली में शनि दोष होने पर समय से पहले ही व्यक्ति के बाल झड़ने लगते हैं, आंख खराब होने लगती है, कान में दर्द रहता है, शनि खराब होने से शारीरिक कमजोरी, पेट दर्द, टीबी, कैंसर, चर्म रोग, फ्रैक्चर, पैरालाइसिस, सर्दी-जुकाम, अस्थमा, आदि जैसे रोग हो जाते हैं। यदि किसी का शनि खराब है तो, उसे मेहनत का फल नहीं मिलता है, किसी भी कार्य में आसानी से सफलता नहीं मिलती जीवन में संघर्ष बहुत हो जाता है अपनों का साथ नहीं मिलता, पैसे की समस्या रहती है, कर्ज बढ़ जाता है।
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अनिल सुधांशु
नीम करौली आश्रम कैंची धाम नैनीताल (उत्तरांचल)
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