जब जीवन में तरक्की उन्नति के सभी रास्ते बंद हो जाएं तो, हनुमान जी का यह उपाय करके देखें.

***
जब सभी ओर से परेशानी होने लगे, कोई रास्ता नजर ना आए तो, बजरंगबली के यह अचूक उपाय करके देखें !!

भक्तों, जब व्यापार में बाधा आने लगे, घर में बार-बार रोग घेर लें, बिना कारण कलह हो, मन भारी रहे और नकारात्मक ऊर्जा का अनुभव हो, तो संकटमोचन हनुमान जी की शरण ही सबसे बड़ा उपाय है। हनुमान जी को कलियुग के जाग्रत देव कहा गया है। जो सच्चे मन से उनका स्मरण करता है, उसके रोग, दोष, भय, बाधा और दरिद्रता सब दूर हो जाते हैं। 

यहाँ मैं आपको बजरंगबली के प्रमाणिक उपाय बता रहा हूँ। इन्हें श्रद्धा, नियम और धैर्य के साथ करने से व्यापार, स्वास्थ्य और गृह-शांति तीनों में लाभ निश्चित है।

१. समस्या का मूल समझें:---

पहले यह जानना आवश्यक है कि, बाधा क्यों आती है। हमारे शास्त्र कहते हैं कि, तीन प्रकार के कष्ट होते हैं — दैहिक, दैविक और भौतिक।

हनुमान जी के लिए कहा गया है — "भूत पिशाच निकट नहीं आवे, महावीर जब नाम सुनावे"। अर्थात जहाँ हनुमान जी का नाम लिया जाता है, वहाँ अपवित्र शक्तियाँ ठहर नहीं सकतीं।

२. बजरंगबली के १२ सिद्ध उपाय:--

उपाय १: मंगलवार और शनिवार का व्रत.

विधि: ---
१. मंगलवार को सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें। लाल वस्त्र धारण करें।  
२. हनुमान मंदिर जाकर उन्हें सिंदूर, चमेली का तेल, जनेऊ, लाल लंगोट, बूंदी के लड्डू अर्पित करें।  
३. श्री हनुमान चालीसा का ११ बार पाठ करें।  
४. दिन भर नमक का त्याग करें। सायंकाल में एक समय गेहूँ या चने के आटे की रोटी और गुड़ ग्रहण करें।  
५. २१ मंगलवार तक यह व्रत रखें।

व्यापार हेतु: --पाठ के पश्चात अपनी दुकान या गद्दी पर "ॐ हनुमते नमः" का उच्चारण करते हुए गंगाजल छिड़कें।  
रोग हेतु: हनुमान जी के चरणों का सिंदूर रोगी के मस्तक पर लगाएँ।  
नकारात्मक ऊर्जा हेतु: गृह के मुख्य द्वार पर सिंदूर से स्वस्तिक बनाएँ।

उपाय २: हनुमान चालीसा का अनुष्ठान:--

श्री हनुमान चालीसा ४० चौपाइयों का महामंत्र है। यह सबसे शीघ्र फल देने वाला है।

संकट नाशक अनुष्ठान: ---
समय: प्रातः ४ से ६ बजे ब्रह्म मुहूर्त में, अथवा रात्रि ८ बजे के बाद।  
संख्या: प्रतिदिन ७ बार, ४० दिन तक। स्थान और समय एक ही रखें।  
नियम: लाल आसन पर बैठें, सम्मुख सरसों के तेल का दीपक जलाएँ।  
संकल्प: प्रथम दिन हाथ में जल लेकर कहें — "हे महावीर, मैं अपने व्यापार/रोग/गृह-क्लेश निवारण हेतु ४० दिन तक ७ पाठ का संकल्प लेता हूँ। मेरी रक्षा करें।"

४० दिन पूर्ण होने पर ५ बालकों को बूंदी का प्रसाद खिलाएँ और लाल वस्त्र दान करें।

विशेष: "नासै रोग हरै सब पीरा, जपत निरंतर हनुमत बीरा" — इस चौपाई को रोग में १०८ बार रोगी के ऊपर से घुमाकर पढ़ें। रोग शांत होता है।

उपाय ३: बजरंग बाण का प्रयोग
जब सब मार्ग बंद लगें, तब बजरंग बाण ब्रह्मास्त्र के समान है। इसे केवल अत्यंत कष्ट में करें।

विधि: ---
१. मंगलवार रात्रि ९ बजे के बाद स्नान करके लाल वस्त्र पहनें।  
२. हनुमान जी को लाल गुलाब, लाल ध्वजा और चमेली के तेल का दीपक अर्पित करें।  
३. पहले हनुमान चालीसा १ बार, फिर बजरंग बाण ३ बार पढ़ें।  
४. २१ दिन तक यह करें।  

सावधानी: ---इस काल में मांस, मदिरा, असत्य, क्रोध का त्याग करें। ब्रह्मचर्य का पालन करें। नियम भंग होने पर कष्ट हो सकता है।

उपाय ४: ---सिंदूर और चमेली तेल का चोला
हनुमान जी को सिंदूर अत्यंत प्रिय है। यह माता सीता के सुहाग का प्रतीक है।

व्यापार वृद्धि हेतु: --

प्रत्येक मंगलवार हनुमान जी को चमेली के तेल में सिंदूर मिलाकर चोला चढ़ाएँ। चोला चढ़ाते समय "ॐ श्री रामदूताय नमः" बोलते हुए उनके चरणों से मस्तक तक ले जाएँ। बचा हुआ सिंदूर तिजोरी या गल्ले पर स्वस्तिक बनाकर लगाएँ। ग्राहक आकर्षित होंगे।

गृह शुद्धि हेतु: --
गृह के प्रत्येक कोने में, मुख्य द्वार की चौखट पर सिंदूर की रेखा खींचें। बुरी शक्तियाँ प्रवेश नहीं कर पातीं।

उपाय ५: पीपल के पत्ते का प्रयोग:---
शनिवार को प्रातः पीपल के ११ पत्ते तोड़ें। ध्यान रहे पत्ते खंडित न हों।  
१. पत्तों को गंगाजल से धोएँ।  
२. प्रत्येक पत्ते पर सिंदूर से "श्री राम" लिखें।  
३. इनकी माला बनाकर हनुमान जी को अर्पित करें।  
४. प्रार्थना करें — "हे मारुति नंदन, मेरे व्यापार के बंधन काटो"।

यह उपाय शनि और राहु जनित बाधा को समाप्त करता है। ७ शनिवार करें।

उपाय ६: हनुमान जी की ध्वजा:---
व्यापार स्थान पर लाल रंग की हनुमान ध्वजा लगाएँ। ध्वजा पर "जय श्री राम" लिखा हो। इसे मंगलवार को रोहिणी नक्षत्र में लगाना उत्तम है। ध्वजा जहाँ फहरती है, वहाँ दरिद्रता और रोग नहीं टिकते। हर ६ माह में ध्वजा बदलें। पुरानी ध्वजा को जल में प्रवाहित कर दें।

उपाय ७: रोग नाशक हनुमत मंत्र:--
यदि घर में कोई बहुत रोगी हो तो यह करें —  
१. एक नारियल पर सिंदूर से स्वस्तिक बनाएँ।  
२. हनुमान जी के सम्मुख १०८ बार यह मंत्र जपें:  
   "ॐ नमो भगवते हनुमते सर्व रोगान् नाशय नाशय स्वाहा"  
३. मंत्र जप के बाद नारियल को रोगी के ऊपर से ७ बार उतारकर हनुमान मंदिर में फोड़ दें।  
यह ३ मंगलवार करें। रोग की तीव्रता घटेगी।

उपाय ८: गृह कलह निवारण हेतु सुंदरकांड:---
जिस घर में कलह हो, वहाँ प्रत्येक मंगलवार या शनिवार को सुंदरकांड का पाठ कराएँ। सुंदरकांड में हनुमान जी की विजय गाथा है। जहाँ सुंदरकांड होता है, वहाँ भूत-प्रेत, कलह, दरिद्रता नहीं रहती।  
यदि स्वयं न पढ़ सकें तो सुंदरकांड की पुस्तक को लाल वस्त्र में लपेटकर पूजा स्थान में रखें और धूप-दीप करें।

उपाय ९: लौंग का टोटका व्यापार हेतु:---
मंगलवार को ५ लौंग, ५ इलायची, ५ साबुत सुपारी लेकर लाल वस्त्र में बाँध लें।  
हनुमान जी के सम्मुख ११ बार हनुमान चालीसा पढ़कर यह पोटली तिजोरी में रख दें। ग्राहक बढ़ेंगे, उधार लौटेगा। पोटली ४३ दिन बाद पीपल के नीचे रख आएँ और नई बना लें।

उपाय १०: सरसों के तेल का दीपक:---
शनिवार सायंकाल पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का चौमुखी दीपक जलाएँ। दीपक में २ लौंग डालें।  
"ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः" और "ॐ हं हनुमते नमः" का जप करें।  
पीपल में हनुमान जी का वास माना गया है। इससे शनि दोष, पितृ दोष और तंत्र बाधा तीनों शांत होते हैं। ७ शनिवार करें।

उपाय ११: हनुमान जी के नाम का कीर्तन:---
प्रतिदिन सायंकाल घर में सब लोग मिलकर १० मिनट "जय हनुमान ज्ञान गुण सागर" या "श्री राम जय राम जय जय राम" का कीर्तन करें।  
जहाँ हरि कीर्तन होता है, वहाँ नकारात्मक ऊर्जा टिक नहीं सकती। बच्चों का भय, बुरे स्वप्न भी समाप्त हो जाते हैं।

उपाय १२: दान और सेवा:---
हनुमान जी वानर रूप में हैं, अतः वानरों को गुड़-चना खिलाना, कुष्ठ रोगियों को भोजन कराना, लाल वस्तु का दान करना हनुमान जी को प्रसन्न करता है।  
मंगलवार को बंदरों को केले खिलाएँ। शनिवार को दिव्यांग जनों को भोजन कराएँ। यह कर्म व्यापार के बंधन खोलता है।

३. पालन करने योग्य नियम:--
१. पवित्रता: उपाय काल में असत्य, छल, मांस, मदिरा का त्याग करें।  
२. ब्रह्मचर्य: मंगलवार और शनिवार को संयम रखें।  
३. श्री राम नाम: हनुमान जी केवल श्री राम के सेवक हैं। उनके प्रत्येक उपाय से पहले "श्री राम जय राम जय जय राम" अवश्य बोलें। बिना राम नाम के हनुमान जी सिद्ध नहीं होते।  
४. अहंकार त्याग: "मैं करता हूँ" का भाव छोड़कर "हनुमान जी करवा रहे हैं" का भाव रखें।  
५. नियमितता: १ दिन भी खंडित न हो। खंडित होने पर फिर से आरम्भ करें।

४. विशेष प्रार्थना:--

रात्रि को सोने से पहले हाथ जोड़कर कहें —  
"हे पवनपुत्र, हे संकटमोचन, हे केसरी नंदन,  
मेरे व्यापार के बंधन काटो, मेरे घर के रोग काटो,  
मेरे द्वार की नकारात्मकता हर लो।  
जैसे आपने लंका जलाई थी, वैसे मेरे कष्ट जला दो।  
मैं आपका बालक हूँ, मेरी रक्षा करो। जय श्री राम।"

५. कब तक लाभ मिलेगा?
श्रद्धा सच्ची हो तो ११ दिन में संकेत मिलने लगते हैं। २१ दिन में व्यापार चलता दिखता है। ४० दिन में बड़ी बाधा टूटती है। यदि बहुत पुराना दोष हो तो ६ माह तक मंगलवार का व्रत रखें।

याद रखें, हनुमान जी भाव के भूखे हैं, वस्तु के नहीं। यदि सिंदूर-चोला न चढ़ा सकें तो केवल मन से "हे बजरंगबली मेरी सहायता करो" कह दें, तो भी वे दौड़े चले आते हैं।

संकट कटे मिटे सब पीरा, जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।  
जय जय जय हनुमान गोसाईं, कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।

# अपनी जन्म कुंडली दिखा सकते हैं?

श्रद्धा रखें, सेवा करें, श्री राम नाम जपें। आपके व्यापार, स्वास्थ्य और गृह तीनों पर बजरंगबली की कृपा अवश्य होगी। जय श्री राम।

#अनिल सुधांशु 
 ज्योतिषाचार्य
 नीम करोली आश्रम, कैंची धाम, नैनीताल ( उत्तरांचल)

Comments

Popular posts from this blog

राजा परीक्षित का जीवन के प्रति मोह भंग हो गया।

दुर्भाग्य को दूर करने वाली अखंड लक्ष्मी साधना।

लग्जरी लाइफ जीना है तो, शुक्र देवता की साधना कीजिए।