मंत्रों में बीज मंत्र का रहस्य !
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बीज मंत्र का रहस्य,
"एक अक्षर, ब्रह्मांड की शक्ति" और मंत्रों का जाप !
**** बीज क्या है?
जैसे एक छोटे से बीज में पूरा वटवृक्ष छुपा होता है, वैसे ही बीज मंत्र एक अक्षर में पूरे ब्रह्मांड की शक्ति समेटे होता है।
"बीज" यानी - उत्पत्ति का स्रोत। मंत्र यानी "मन का त्राण" - मन को तारने वाला।
तो बीज मंत्र हुआ - वो ध्वनि-बीज जो मन को तार दे, और ब्रह्मांड को उत्पन्न कर दे।
शास्त्र कहते हैं: "एकाक्षरं परं ब्रह्म" - एक अक्षर ही परब्रह्म है। वो अक्षर है **ॐ** सभी बीज मंत्र उसी से निकले हैं।
** विज्ञान और अध्यात्म - ध्वनि का कमाल
आधुनिक विज्ञान:---
1940 में वैज्ञानिक हंस जेनी ने साइमेटिक्स प्रयोग किया। उन्होंने पाया कि हर ध्वनि रेत या पानी पर एक खास ज्यामितीय आकृति बनाती है।
जब ॐ की ध्वनि बजाई गई, तो पानी पर श्री यंत्र जैसी आकृति बनी। यानी हमारे ऋषि जो हजारों साल से कहते आए, विज्ञान आज सिद्ध कर रहा है - ध्वनि से सृष्टि बनती है।
ख. शास्त्रीय प्रमाण: ---
मांडूक्य उपनिषद कहता है:
"ॐ इत्येतदक्षरमिदं सर्वम्" - ॐ ही ये सब कुछ है। भूत, भविष्य, वर्तमान - सब ॐ है।
जैसे कंप्यूटर की सारी कोडिंग 0 और 1 से बनती है, वैसे ही सृष्टि की सारी कोडिंग बीज मंत्रों से बनी है।
---मुख्य बीज मंत्र और उनका रहस्य:---
---बीज मंत्र कैसे काम करते हैं? 3 स्तर का विज्ञान
स्तर 1: ध्वनि कंपन -
हर बीज मंत्र एक खास फ्रीक्वेंसी पर कंपन करता है। जैसे लं 256 Hz, वं 288 Hz। जब हम जपते हैं, तो वो कंपन हमारे शरीर के 72,000 नाड़ियों में गूंजता है। DNA तक असर करता है।
स्तर 2: मनोविज्ञान -
"क्लीं" जपने से मन में प्रेम का भाव आता है। "श्रीं" से समृद्धि का भाव है। 40 दिन लगातार जपो तो अवचेतन मन की कोडिंग बदल जाती है।
स्तर 3: आध्यात्म ---
हर बीज मंत्र एक देवता का साउंड बाडी है। जब तुम "गं" जपते हो, तुम गणेश को आवाज दे रहे हो। वो सूक्ष्म रूप में आते हैं। जैसे फोन नंबर डायल करने से व्यक्ति से बात होती है, वैसे ही बीज मंत्र से देवता से कनेक्शन होता है।
---कथाएँ - जब बीज मंत्र ने चमत्कार किए
--- गोरखनाथ और ह्रीं
गोरखनाथ ने 12 साल हिमालय में ह्रीं का जाप किया। ह्रीं महामाया का बीज है।
एक दिन देवी प्रकट हुईं, "क्या चाहिए?"
गोरख बोले, "माँ, मुझे कुछ नहीं चाहिए। बस ये वर दो कि जब भी कोई सच्चे मन से ह्रीं जपे, तू उसकी मदद करना।"
आज भी नवरात्रि में "ॐ ह्रीं दुं दुर्गायै नमः" जपने से संकट कटते हैं।
--- तुलसीदास और क्लीं
तुलसीदास को राम दर्शन नहीं हो रहे थे। हनुमान जी ने बताया, "काशी में घाट पर क्लीं कृष्णाय नमः जपो।"
तुलसी ने जपा। क्लीं आकर्षण का बीज है। राम खुद खिंचे चले आए और चंदन घिसने वाले का रूप धरकर मिले।
सीख:--- बीज मंत्र देवता को खींच लाता है।
---कलियुग का वैज्ञानिक :--
2020 में IIT के प्रोफेसर डिप्रेशन में थे। दवाई बेअसर। एक योगी ने कहा, "रोज 108 बार ऐं जपो।"
ऐं सरस्वती का बीज है, विशुद्धि चक्र खोलता है। 3 महीने बाद प्रोफेसर की वाणी बदल गई, डर खत्म, 2 रिसर्च पेपर लिखे।
उन्होंने EEG टेस्ट किया - पाया कि ऐं जपने से Alpha Brain Waves बढ़ती हैं। शांति आती है।
--- बीज मंत्र जप के 7 नियम - वरना उल्टा असर
गुरु दीक्षा जरूरी: ---बिना गुरु के बड़े बीज मंत्र जैसे ह्रीं, क्लीं, हौं मत जपो। ये परमाणु बम हैं। गलत उच्चारण से नुकसान। ॐ, गं, श्रीं कोई भी जप सकता है।
स्थान शुद्ध: जमीन पर ऊनी आसन बिछाओ। बिजली की वायरिंग नहीं होनी चाहिए। बीज मंत्र Electromagnetic Field बनाते हैं।
माला:--- रुद्राक्ष या स्फटिक की माला। 108 बार। अंगूठे से जपो, तर्जनी मत लगाओ।
समय: ब्रह्म मुहूर्त 4-6 AM सबसे उत्तम। सूर्य नाड़ी चलती है, मंत्र सिद्ध होते हैं।
संख्या:-- कम से कम 1 माला 40 दिन, 1.25 लाख बार जपने से मंत्र सिद्ध हो जाता है - पुरश्चरण कहते हैं।
गुप्त रखो: --मंत्र किसी को मत बताओ। TV पर, Reel में मत जपो। गुप्त का फल गुप्त।
भाव: ---मशीन की तरह मत जपो। आँख बंद करके देवता का रूप देखो। रोकर जपो तो 1 माला = 100 माला।
-- सबसे शक्तिशाली संयोजन - महा बीज मंत्र
ॐ गं गणपतये नमः - हर काम शुरू करने से पहले। विघ्न 100% कटते हैं।
ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं महालक्ष्मी नमः - धन, आकर्षण, माया। तीनों शक्तियाँ एक साथ।
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे - नवार्ण मंत्र। दुर्गा का सबसे शक्तिशाली मंत्र। रक्षा कवच।
हौं जूं सः - महामृत्युंजय का बीज। अकाल मृत्यु टालता है। बीमार को सुनाओ।
सोऽहम् - "वो मैं हूँ"। सबसे बड़ा बीज। अजपा जाप। सांस आती है तो "सो", जाती है तो "हम्"। 21,600 बार रोज होता है।
-- सावधान - बीज मंत्र के 3 खतरे:--
गलत उच्चारण: "क्लीं" को "किल्लीं" बोलोगे तो, काम की जगह वासना बढ़ेगी। इसलिए गुरु से सीखो।
स्वार्थ:-- शत्रु मारण के लिए क्रौं जपोगे तो 3 गुना पलटकर लगेगा। बीज मंत्र Boomerang हैं।
अहंकार:-- सिद्धि मिलते ही "मैं कुछ हूँ" आया, तो सारी शक्ति चली जाएगी। भृगु ऋषि ने विष्णु को लात मारी थी, लक्ष्मी रूठ गई थीं।
---कलियुग के लिए सबसे आसान बीज - "राम"
गोस्वामी तुलसीदास कहते हैं:
"राम नाम मनिदीप धरु जीह देहरीं द्वार"
राम नाम का दीपक जीभ की देहरी पर रख दो।
"रा" अग्नि बीज है - पाप जलाता है।
"म" अमृत बीज है - शांति देता है।
राम = अग्नि + अमृत = पूरा जीवन।
बिना गुरु, बिना नियम, बिना माला। बस चलते-फिरते जपो। कलियुग में यही तारेगा।
--- अंतिम रहस्य - तुम खुद बीज हो !
छांदोग्य उपनिषद में उद्दालक अपने बेटे श्वेतकेतु से कहते हैं:
बरगद का फल तोड़ो। क्या दिखा ?
बीज। बीज तोड़ो। क्या दिखा?
कुछ नहीं।
उद्दालक बोले:-- "जो 'कुछ नहीं' दिख रहा है बेटा, उसी से ये विशाल बरगद खड़ा है। वही तू है - तत् त्वम् असि।"
तुम्हारे अंदर भी एक बीज है - ॐ।
जब तुम शांत होते हो, वो बीज अंकुरित होता है।
तुमसे प्रेम निकलता है, सेवा निकलती है, प्रकाश निकलता है, तुम खुद एक चलता-फिरता बीज मंत्र हो।
सार:--
बीज मंत्र = Cosmic Code - एक अक्षर में ब्रह्मांड।
काम 3 स्तर पर - शरीर, मन, आत्मा तीनों बदल देता है।
गुरु + नियम जरूरी - वरना फायदा नहीं, नुकसान।
सबसे बड़ा बीज ॐ और राम - ये सबके लिए सेफ हैं।
तुम खुद बीज हो - अपने अंदर का ॐ जगाओ, दुनिया बदल जाएगी।
आज से रोज सुबह 11 बार ॐ गं गणपतये नमः बोलकर दिन शुरू करो, रात को सोने से पहले 11 बार राम बोलकर सो जाओ।
--- 40 दिन बाद खुद देखना - विघ्न कैसे कटते हैं, नींद कैसे आती है, क्योंकि बीज छोटा होता है, पर उसका वृक्ष आकाश छू लेता है।
---अनिल सुधांशु
ज्योतिषाचार्य एवं साहित्कार
नीम करौली आश्रम, कैंची धाम, नैनीताल (उत्ताराचंल)
बाबा अलखनाथ मंदिर बरेली उ0 प्र0
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