बडे मंगल का महत्व, हनुमान जी की पूजा करने से सभी प्रकार के कष्ट क्लेश कट जाते हैं.
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बड़े मंगल का महत्व, हनुमान जी की पूजा करने से सभी प्रकार के कष्ट क्लेश कट जाते हैं, सभी ग्रह अनुकूल हो जाते हैं, भोग के साथ मोक्ष भी प्राप्त होता है.
ज्योतिष में 'बड़े मंगल' (या बुढ़वा मंगल) का संबंध सीधे तौर पर मंगल ग्रह की शांति और हनुमान जी की कृपा से है। ज्येष्ठ माह के हर मंगलवार को बड़ा मंगल कहा जाता है। ज्योतिषीय दृष्टिकोण से इस दिन बजरंगबली की पूजा करने से कुंडली के सभी प्रकार के मांगलिक दोष, भूमि-विवाद, कर्ज और शत्रुओं से मुक्ति मिलती है।।
ज्योतिष में बड़े मंगल का महत्व और प्रभाव:--
मांगलिक दोष का निवारण:-- यदि किसी जातक की कुंडली में मंगल कमजोर, नीच या अशुभ स्थिति में (मांगलिक दोष) है, तो उसे विवाह संबंधी बाधाओं और क्रोध का सामना करना पड़ता है। बड़े मंगल के दिन हनुमान जी की पूजा करने से मंगल ग्रह का कुप्रभाव शांत होता है।
साहस और पराक्रम में वृद्धि:-- मंगल ऊर्जा, साहस और पराक्रम का कारक है। बड़े मंगल पर हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ करने से जातक को मानसिक दृढ़ता और निर्भीकता प्राप्त होती है।
कैरियर और कार्यक्षेत्र में सफलता: --सेना, पुलिस, इंजीनियरिंग, और प्रशासन जैसे क्षेत्रों में सफलता के लिए मंगल ग्रह का मजबूत होना जरूरी है। बड़े मंगल पर हनुमान जी की आराधना करने से कार्यक्षेत्र में आ रही रुकावटें दूर होती हैं।
संकट और रोगों से मुक्ति: --बजरंगबली को 'संकटमोचन' माना जाता है। बड़े मंगल के दिन उपवास रखकर गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन या जल दान करने से स्वास्थ्य लाभ होता है और बुरे ग्रहों का प्रभाव कम होता है।
बड़े मंगल पर किए जाने वाले प्रमुख उपाय:--
यदि आपकी कुंडली में मंगल से जुड़ी कोई भी समस्या है, तो आप बड़े मंगल के दिन इन उपायों को अपना सकते हैं —
हनुमान चोला और सिंदूर: --बजरंगबली को चमेली के तेल में सिंदूर अर्पित करें। इससे जीवन में आ रहे आकस्मिक संकट दूर होते हैं।
दान-पुण्य:-- इस दिन गुड़, चने, तांबे के बर्तन या लाल वस्त्र का दान करें।मंत्र जाप: हनुमान जी की कृपा प्राप्त करने के लिए "ॐ हनुमते नमः" या "ॐ अं अंगारकाय नमः" मंत्र का जाप करें।
रामरक्षा स्तोत्र का पाठ: --कर्ज और पारिवारिक तनाव से मुक्ति पाने के लिए हनुमान मंदिर में बैठकर रामरक्षा स्तोत्र का पाठ करें।
बुढ़वा (बड़ा) मंगल कथा और महत्व:-*
लाल देह लाली लसे, अरु धरि लाल लंगूर।
बज्र देह दानव दलन, जय जय जय कपि सूर॥
बुढ़वा मंगल उत्सव हनुमान जी के वृद्ध रूप के लिए किया जाता है। यह उत्सव ज्येष्ठ माह के चारों मंगलवार को आयोजित किया जाता है, जिसे प्रचलित भाषा में बूढ़े मंगल के नाम से भी जाना जाता है।
बुढ़वा मंगल हिंदुओं का एक महत्वपूर्ण पर्व है, इसे भारत में वानर राज राम भक्त हनुमान जी के वृद्ध रूप की पूजा की जाती है। श्री हनुमंत शक्ति और ऊर्जा के प्रतीक हैं, वह जादुई शक्तियों और बुरी आत्माओं को जीनते की क्षमता रखने वाले देव के रूप मे पूजे जाते हैं।
बुढ़वा मंगल दक्षिण भारत की अपेक्षा उत्तर भारत मे ज्यादा प्रमुखता से मनाया जाता है। परंतु उत्तर भारत में ही कहीं-कहीं यह त्यौहार ज्येष्ठ माह के प्रथम मंगलवार को भी मनाया जाता है, जिनमे कानपुर एवं वाराणसी प्रमुख शहर हैं।
भगवान शिव के अवतार है हनुमान।
भगवान हनुमान को महादेव का 11वां अवतार भी माना जाता है। हनुमान जी की पूजा करने और व्रत रखने से हनुमान जी का आर्शीवाद प्राप्त होता है और जीवन में किसी भी प्रकार का संकट नहीं आता है, इसलिए हनुमान जी को संकट मोचक भी कहा गया है।
ज्योतिष विज्ञान के अनुसार जिन लोगों की कुंडली में शनि अशुभ स्थिति में होता हैं या फिर शनि की साढ़ेसाती चल रही होती है, उन लोगों को इस दिन हनुमान जी के सुन्दर कांड का 101 पाठ या हनुमान चालीसा का 1001 पाठ कराने से शनि ग्रह से जुड़ी समस्या में कमी आती हैं। हनुमान जी को मंगलकारी कहा गया है, इसलिए इनकी पूजा जीवन में मंगल लेकर आती हैं।
केसरी तथा माता अंजना के पुत्र श्री हनुमान को महावीर, बजरंगबली, मारुती, पवनपुत्र, अंजनीपुत्र तथा केसरीनन्दन के नाम से भी जाना जाता है। पवनपुत्र हनुमान को भगवान शिव का 11वां रूद्र अवतार माना गया है, अतः प्रत्येक हनुमान मंदिर में शिवलिंग स्थापित अवश्य किया जाता है।
हनुमानजी की प्रतिमा पर लगा केसरी सिन्दूर अत्यन्त पवित्र माना जाता है क्योंकि माना जाता है कि हनुमान को केसरी सिन्दूर अत्यन्त प्रिय है। भक्तगण प्रायः इस सिन्दूर को देसी घी में मिलाकर भगवान की प्रतिमा पर लगाते हैं और प्रसादस्वरूप उसी का टीका तिलक के रुप में अपने मस्तक पर लगाते हैं। ऐसा माना जाता है, कि इस तिलक के माध्यम से भक्त श्री हनुमानजी की कृपा से उन्हीं की तरह शक्तिशाली, ऊर्जावान तथा संयमित हो जाते हैं।
बुढ़वा मंगल का इतिहास और प्रचलित कथायें:--
वैसे तो बुढ़वा मंगल के बारे में कई कथायें प्रचलित हैं जिसका वर्णन मिलता है यहाँ पर कुछ ऐसी ही किवद्नतियां हैं जो सदियों से चली आ रही हैं ।
पुरानी मान्यताओं के अनुसार एक कथा यह है कि, महाभारत काल में हजारों हाथियों के बल को धारण किए भीम को अपने शक्तिशाली होने पर बड़ा अभिमान और घमंड हो गया था। भीम के घमंड को तोड़ने के लिए रूद्र अवतार भगवान हनुमान ने एक बूढ़े बंदर का भेष धारण कर उनका घमंड चूर-चूर किया। आगे चलकर यही दिन बुढ़वा मंगल कहलाने लगा।
दूसरी कथा:-*
एक अन्य मत के अनुसार रामायण काल में भाद्रपद महीने के आखिरी मंगलवार को माता सीता की खोज में जब लंका पहुंचने पर हनुमान जी की पूंछ में रावण ने आग लगा दी थी तो हनुमान जी ने अपने विराट स्वरूप को धारण कर लंका को जलाकर रावण का घमंड चूर किया।
मंत्र:--
ॐ हनु हनुमते नमो नमः, श्री हनुमते नमो नमः।
उत्सव व पूजा विधि:--
-हनुमान जी का जन्म सूर्योदय के समय हुआ था इसलिए बुढ़वा मंगल के दिन ब्रहम मुहूर्त में पूजा करना सबसे शुभ माना जाता है, हनुमान जी का उपवास रखें नमक का प्रयोग न करें।
-हनुमान जी को प्रिय चीज़ों का भोग जैसे लड्डू,केला ,अंगूर व शुद्ध चावल की खीर चढ़ायें।
-बुढ़वा मंगल पर 101 बार हनुमान चालीसा,सुंदरकांड का पाठ,बजरंग बाण का -पाठ करना शुभ होता है सारे कष्ट संकटमोचन दूर कर देते हैं।
-श्री हनुमंत लाल पर सिंदूर चढ़ाएँ, हनुमंत ध्वजा, प्रार्थना, भजन / कीर्तन करें।
-रामचरित मानस का पाठ कराना भी शुभ व अत्यन्त लाभकारी होता है।
-हनुमान मंदिर का दर्शन कर घर के मंदिर में करें पूजा।
धन और व्यापार से जुड़ी परेशानी दूर करने के लिए करें ये उपाय:--
बुढ़वा मंगल के दिन कुछ उपाय करने से धन और व्यापार में आने वाली बाधाओं को दूर किया जा सकता है। बुढ़वा मंगल के दिन शुभ मुहूर्त में हनुमान जी को चमेली के तेल का दीपक जलाएं, इसके साथ ही इस दिन हनुमान जी को चोला और ध्वजा चढ़ाएं। हनुमान जी चोला चढ़ाने से भगवान विशेष प्रसन्न होते हैं।
मंत्र का ध्यान :--
मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्।
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतम् शरणं प्रपद्ये।।
अर्थात :-- जिनकी मन के समान गति और वायु के समान वेग है, जो परम जितेन्द्रिय और बुद्धिमानों में श्रेष्ठ हैं, उन पवनपुत्र वानरों में प्रमुख श्रीरामदूत की मैं शरण लेता हूं। कलियुग में हनुमानजी की भक्ति से बढ़कर किसी अन्य की भक्ति में शक्ति नहीं है। रामरक्षा स्तोत्र से लिए गए हनुमानजी के प्रति शरणागत होने के लिए इस श्लोक या मंत्र का जप करने से हनुमानजी तुरंत ही साधक की याचना सुन लेते हैं और वे उनको अपनी शरण में ले लेते हैं, जो व्यक्ति हनुमानजी का प्रतिदिन ध्यान करते रहते हैं, हनुमानजी उनकी बुद्धि से क्रोध को हटाकर बल का संचार कर देते हैं। हनुमान भक्त शांत चित्त, निर्भीक और समझदार बन जाता है।
बड़े मंगल पर क्या करना चाहिए?
बड़े मंगल (बुढ़वा मंगल) पर भगवान हनुमान की पूजा, व्रत और दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। बजरंगबली की कृपा पाने के लिए आप निम्न कार्य कर सकते हैं: --सुबह स्नानादि के बाद हनुमान जी को लाल चोला, सिंदूर, चमेली का तेल और फूलों की माला अर्पित करें, हनुमान चालीसा, सुंदरकांड या बजरंग बाण का पाठ करें और "ॐ हनुमते नमः" मंत्र का जाप करें।
विशेष भोग:-- बजरंगबली को बूंदी, बेसन के लड्डू या गुड़-आटे के रोट का भोग लगाएं।
दान-पुण्य:-- इस दिन गरीबों को भोजन कराएं, बंदरों को गुड़-चना खिलाएं, और राहगीरों के लिए मीठे जल की छबील (प्याऊ) लगाएं।
शुभ मंगल के क्या लक्षण हैं?
ज्योतिष में मंगल को साहस, ऊर्जा, भूमि और पराक्रम का कारक माना जाता है。शुभ मंगल के मुख्य लक्षण हैं: अद्भुत आत्मविश्वास, बड़े जोखिम लेने की क्षमता, अचल संपत्ति और भूमि का सुख, और छोटे भाइयों से मधुर संबंध。
शुभ मंगल वाले जातक के जीवन में निम्नलिखित स्पष्ट बदलाव और विशेषताएं देखने को मिलती हैं:--
🌟 शुभ मंगल के प्रमुख लक्षण:--
अदम्य साहस और ऊर्जा:-- ऐसे व्यक्ति शारीरिक रूप से मजबूत और ऊर्जावान होते हैं। वे किसी भी बड़ी चुनौती या जोखिम से घबराते नहीं हैं。
भूमि-संपत्ति का लाभ:-- जातक को जीवन में अचल संपत्ति (मकान, जमीन, खेत) और वाहनों का सुख आसानी से प्राप्त होता है。
क्षेत्र विशेष में सफलता: --सेना, पुलिस, इंजीनियरिंग, स्पोर्ट्स या नेतृत्व से जुड़े कार्यों में ऐसे लोग बहुत नाम कमाते हैं。
अशुभ मंगल का जीवन पर प्रभाव:-
वैवाहिक जीवन में समस्याएं आती हैं, पति-पत्नी में अनुमान रहती है. कभी-कभी तलाक की ना बात जाती है. संतान नहीं होती होती है. होती है तो, मृत्यु को प्राप्त हो जाती है. हाई ब्लड प्रेशर. बवासीर. कैंसर जैसे रोग मंगल के कुपित होने पर उत्पन्न होते हैं, व्यक्ति को अत्यधिक क्रोध आता है. मंगली जातक जातिका की शादी में समस्याएं आती हैं आदि.
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अनिल सुधांशु
ज्योतिषाचार्य
नीम करोली आश्रम, कैंची धाम, नैनीताल (उत्तरांचल)
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