महालक्ष्मी की अचूक साधना नहीं रहेगी धन संपत्ति की कमी.

***
लक्ष्मी बीज मंत्र "श्रीं" का रहस्य - जिनकी कृपा से जीवन में कभी धन की कमी नहीं होती?

1. बीज मंत्र क्या होता है?

"बीज" का अर्थ है बीज यानी  जैसे एक छोटे बीज में पूरा वटवृक्ष छुपा होता है, वैसे ही एक बीज मंत्र में उस देवता की सम्पूर्ण शक्ति, तत्व और चैतन्य सूक्ष्म रूप में समाहित रहता है। तंत्र शास्त्र कहता है: "मननात् त्रायते इति मंत्रः" - जो मनन करने से रक्षा करे वह मंत्र है। बीज मंत्र सबसे शक्तिशाली और गूढ़ होते हैं।

श्रीं = श + र + ई + अनुस्वारं + नाद + बिंदु  
यह महालक्ष्मी का एकाक्षर बीज मंत्र है। इसे "लक्ष्मी बीज", "कमला बीज" और "श्री बीज" भी कहते हैं।

2. श्रीं बीज का वर्ण-रहस्य: एक-एक अक्षर का विश्लेषण
null
संक्षेप में: श = लक्ष्मी, र = धन, ई = तुष्टि, ं = दुःख नाश। पूरा अर्थ हुआ - "हे महालक्ष्मी, जो धन देकर तुष्टि करती हो और दुःखों का नाश करती हो, आप मेरे यहाँ स्थिर हों।"

3. शास्त्रों में श्रीं बीज का प्रमाण:--

लक्ष्मी तंत्र: "श्रीं बीजं परमं प्रोक्तं महालक्ष्म्या: प्रकीर्तितम्। यस्य उच्चारणमात्रेण दारिद्र्यं नश्यति ध्रुवम्॥" - श्रीं महालक्ष्मी का परम बीज है, जिसके उच्चारण मात्र से दरिद्रता नष्ट होती है।  
देवी अथर्वशीर्ष: "कां सोस्मितां हिरण्यप्राकारामार्द्रां ज्वलन्तीं तृप्तां तर्पयन्तीम्। पद्मेस्थितां पद्मवर्णां तामिहोपह्वये श्रियम्॥" - यहाँ "श्रियम्" का बीज श्रीं ही है।  
मंत्र महोदधि: "श्रीं ह्रीं क्लीं" - तीनों महाविद्याओं के बीज। श्रीं = लक्ष्मी, ह्रीं = भुवनेश्वरी, क्लीं = काली।  
ऋग्वेद श्री सूक्त: "हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम्" - पूरे सूक्त का सार श्रीं बीज है।

4. श्रीं का वैज्ञानिक और ध्वनि विज्ञान रहस्य:--

फ्रीक्वेंसी: आधुनिक शोध में "श्रीं" का उच्चारण 432 Hz पर गूंजता है, जो ब्रह्मांड की प्राकृतिक आवृत्ति मानी जाती है। यह मूलाधार से अनाहत चक्र तक स्पंदन पैदा करता है।  
नासिका विज्ञान: "श" बोलते समय हवा मुंह से, "र" बोलते समय जीभ तालु पर, "ई" में कंपन, "हृदय" में नासिका गुंजन। यह पूरा मस्तिष्क एक्टिवेट करता है।  
धन आकर्षण: "र" की रेफ ध्वनि और "ई" का खिंचाव चुंबकीय क्षेत्र बनाता है। इसी कारण श्री यंत्र के मध्य में श्रीं लिखा जाता है।

5. श्रीं बीज के 16 मुख्य स्वरूप और लाभ:--

6. श्रीं बीज के जागरण की विधि - तांत्रिक रहस्य:--

बिना संस्कार के बीज मंत्र सुप्त रहता है। जागरण के 5 चरण: --

चरण 1: शुद्धि  
स्नान करके सफेद या गुलाबी वस्त्र पहनें। उत्तर या पूर्व मुख। कमलगट्टे की माला, कमल पर बैठी लक्ष्मी का चित्र।  

चरण 2: न्यास  
कर न्यास: ॐ शां अंगुष्ठाभ्यां नमः, ॐ रीं तर्जनीभ्यां नमः...  
हृदयादि न्यास: ॐ श्रीं हृदयाय नमः  

चरण 3: संकल्प  
"मम दारिद्र्य नाशार्थं धनधान्य समृद्ध्यर्थं श्रीं बीज मंत्रस्य जपं करिष्ये"  

चरण 4: जाप संख्या  
शास्त्रीय पुरश्चरण = 12 लाख जाप। गृहस्थ के लिए = 1.25 लाख जाप 40 दिन में। रोज कम से कम 108 बार।  
विशेष: शुक्रवार को 1008 बार। जाप करते समय "श" पर ध्यान मणिपुर, "र" पर अनाहत, "ईं" पर आज्ञा चक्र पर।  

चरण 5: हवन और तर्पण  
जाप का दशांश = 12500 आहुति। सामग्री: कमल गट्टा, खीर, घी, शहद। मंत्र: "ॐ श्रीं स्वाहा"।  

गुप्त कुंजी: जाप के अंत में "श्रीं श्रीं श्रीं श्रीं श्रीं" 5 बार बोलकर "महालक्ष्मी च विद्महे विष्णुपत्नीं च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात्" बोलें। इससे लक्ष्मी स्थिर होती हैं।

7. श्रीं से जुड़े मुख्य संपुटित मंत्र:--

महालक्ष्मी मंत्र: ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः !

   लाभ: 16 शुक्रवार जाप से कर्ज मुक्ति।  
श्री सूक्त संपुट: श्री सूक्त की हर ऋचा के आगे-पीछे "श्रीं" लगाकर पाठ। प्रचंड धन वर्षा।  
कुबेर मंत्र: ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा ॥ श्रीं ॥  
व्यापार वृद्धि: ॐ श्रीं श्रीं श्रीं परमां सिद्धिं श्रीं श्रीं श्रीं  

8. श्रीं जाप के नियम और वर्जनाएं
करें:  
शुक्रवार व्रत, सफेद मिठाई का भोग।  
दक्षिणावर्ती शंख में जल भरकर "श्रीं" 11 बार फूंक मारें, पूरे घर में छिड़कें।  
कमल, गुलाब, गन्ना, दूध, चावल लक्ष्मी को प्रिय।  

न करें:  --
अशुद्ध अवस्था, क्रोध, अपशब्द बोलकर जाप निष्फल। लक्ष्मी चंचला हो जाती हैं।  
श्रीं का जाप शौचालय, जूते पहनकर, या बिस्तर पर न करें।  
मांस-मदिरा, झूठ, परस्त्री गमन से अलक्ष्मी आती है और श्रीं निष्फल।  

अलक्ष्मी नाश: "श्रीं" के साथ "ह्रीं" जरूर लगाएं। केवल "श्रीं" से धन आता है पर टिकता नहीं। "श्रीं ह्रीं" से धन स्थिर होता है। "ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं" से धन, आकर्षण और कार्य सिद्धि तीनों।

9. श्री यंत्र और श्रीं का संबंध:--

श्री यंत्र ब्रह्मांड का नक्शा है। इसके 9 आवरण हैं। मध्य बिंदु में "श्रीं" विराजमान है। बिंदु = महालक्ष्मी। 43 त्रिकोण = 43 देवियाँ। श्री यंत्र पर "श्रीं" लिखकर रोज कुंकुम से पूजन करने पर 1 साल में गरीबी दूर होती है।  

स्थापना: दीपावली, अक्षय तृतीया, गुरु पुष्य पर। श्री यंत्र के सामने बैठकर "श्रीं" 1008 बार जाप।

10. अनुभव और प्रामाणिक अनुभूतियाँ:--

तुलसीदास: "कबहुँक हौं यहि रहनि रहौंगो। श्री रघुनाथ कृपालु कृपा ते संत सुभाव गहौंगो॥" - यहाँ "श्री" बीज ही है।  
वारेन बफेट का नियम: वे भी कहते हैं " - यह "श्रीं" का ही सिद्धांत है: धन की रक्षा।  
प्रैक्टिकल: 40 दिन तक रोज सुबह नहाकर 108 श्रीं जाप + 1 श्री सूक्त। 90% लोगों को 90 दिन में धन संबंधी रास्ता खुलता है।  

11. श्रीं बीज का सबसे बड़ा रहस्य - "स्थिरता"
लक्ष्मी चंचला हैं। 

सिर्फ "श्रीं" से आती हैं, पर "ह्रीं" से रुकती हैं और "क्लीं" से बढ़ती हैं। इसलिए कुंजी है: --

ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः - यह संपूर्ण बीज है।  
"श्रीं" अकेला 100 बार = 100 रु, पर "श्रीं ह्रीं" 100 बार = 10000 रु का फल। क्योंकि ह्रीं लज्जा बीज है, लक्ष्मी को लज्जा आती है जाने में।

सबसे गुप्त बात: श्रीं का जाप रात 9 से 11 के बीच "निशीथ काल" में करने से 10 गुना फल। क्योंकि यह लक्ष्मी के विचरण का समय है।

समापन: --

"श्रीं" सिर्फ मंत्र नहीं, महालक्ष्मी का प्राण है। जो इसे श्रद्धा, नियम और पवित्रता से जपता है, उसके घर में 8 प्रकार की लक्ष्मी - आदि लक्ष्मी, धन लक्ष्मी, धान्य लक्ष्मी, गज लक्ष्मी, संतान लक्ष्मी, वीर लक्ष्मी, विजय लक्ष्मी, विद्या लक्ष्मी - सब वास करती हैं।  

*या रक्ताम्बुजवासिनी विलासिनी चण्डांशु तेजस्विनी।  
या रक्ता रुधिराम्बरा हरिसखी या श्री मनोल्हादिनी॥*

#अनिल सुधांशु
मो0 94580 64249
 ज्योतिषाचार्य 
नीम करोली आश्रम, कैंची धाम, नैनीताल,( उत्तरांचल )

Comments

Popular posts from this blog

राजा परीक्षित का जीवन के प्रति मोह भंग हो गया।

दुर्भाग्य को दूर करने वाली अखंड लक्ष्मी साधना।

लग्जरी लाइफ जीना है तो, शुक्र देवता की साधना कीजिए।