शिव मंदिर में दो दीपक जलाने के चमत्कार !
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शिव मंदिर में 2 दीपक जलाने का रहस्य, एक गोल बत्ती एक लंबी बत्ती का दिया, धन, सुख और सकारात्मक ऊर्जा का चमत्कारी उपाय !
क्या आप जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा चाहते हैं? तो आज ही संकल्प लीजिए कि, अगले सोमवार से भगवान शिव के मंदिर में एक गोल बत्ती का और एक लंबी बत्ती का दीपक जलाएंगे, ऐसा करने से आपसे जीवन में सुख संपत्ति और सकारात्मक ऊर्जा का आगमन होगा, सभी परेशानियों का अंत होने लगेगा, एक बार आजमा कर दीजिए?
हमारे सनातन धर्म में दीपक को केवल प्रकाश का स्रोत नहीं माना गया, बल्कि इसे देवत्व, ज्ञान और चेतना का प्रतीक कहा गया है। खासकर भगवान शिव के मंदिर में दीपक जलाने का विशेष महत्व है। शास्त्रों में एक अद्भुत उपाय बताया गया है –
**“प्रदोष काल में 2 दीपक जलाने का उपाय”**
मान्यता है कि, इस छोटे से उपाय से मानसिक शांति मिलती है, घर की नकारात्मकता दूर होती है और आर्थिक समस्याओं में राहत मिलती है !
-- दीपक का आध्यात्मिक महत्व
शास्त्र कहते हैं – “तमसो मा ज्योतिर्गमय” अर्थात अंधकार से प्रकाश की ओर चलो।
दीपक के 5 तत्व:---
मिट्टी का दीया – पृथ्वी तत्व, स्थिरता और सहनशीलता देता है, तेल/घी – स्नेह, भक्ति और समर्पण का प्रतीक
बत्ती – अहंकार की सूत, जो जलकर खत्म होती है, अग्नि – तेज, ऊर्जा और ज्ञान की ज्योति, प्रकाश – शिव तत्व, जो अज्ञान का नाश करता है
जब हम शिव मंदिर में दीपक जलाते हैं, तो ये पांचों तत्व मिलकर हमारे जीवन के पंचक्लेश – अविद्या, अस्मिता, राग, द्वेष, अभिनिवेश – को दूर करते हैं।
दो दीपक ही क्यों ? इसका रहस्य जानिएं:--
शिव पुराण और स्कंद पुराण के अनुसार 2 दीपक का विशेष संयोजन है:---
रहस्य: शिव अकेले शव हैं, शक्ति के साथ शिव बनते हैं। संसार भी शिव-शक्ति के मिलन से ही चलता है। पहला दीपक आपके संकल्प और आत्मबल को बढ़ाता है, दूसरा दीपक माता पार्वती का स्वरूप माना जाता है, जो घर में अन्न, धन और सुख लाता है। जब दोनों साथ जलते हैं तो, जीवन में संतुलन आता है – न सिर्फ आध्यात्मिक बल्कि भौतिक भी।
लंबी बत्ती का महत्व:-- ऊर्ध्वगामी ऊर्जा, पितरों का आशीर्वाद, करियर में उन्नति। लंबी बत्ती की लौ सीधी ऊपर जाती है, जो लक्ष्य की ओर एकाग्रता का प्रतीक है।
गोल बत्ती का महत्व: --कुंडलिनी स्वरूप, माता लक्ष्मी का आवाहन। गोल बत्ती से तेल चारों तरफ फैलता है, जो धन का विस्तार और घर में बरकत का संकेत है।
***दीपक कैसे तैयार करें - विधि:--
सामग्री:--
*** दो मिट्टी के दीये – नए हों तो उत्तम, पुराने हैं तो धोकर धूप में सुखा लें
तिल का तेल या गाय का घी – तिल का तेल शनि दोष, राहु-केतु शांति के लिए। घी से सात्विक ऊर्जा.
रूई की बत्ती – 1 लंबी, 1 गोल बनाएं, लाल मौली/कलावा – दीये पर बांधने के लिए, अक्षत, काले तिल, थोड़ा सा गुड़!
बनाने की विधि:---
शुद्धिकरण:--- दोनों दीयों को गंगाजल से धोकर सुखाएं। फिर एक चुटकी हल्दी लगाएं।
बत्ती बनाना:--- पहली बत्ती 4-5 इंच लंबी रखें। दूसरी बत्ती को गोल करके गठान लगा दें। मान्यता है कि, गोल बत्ती में 7 फेरे होने चाहिए – सप्तऋषियों के प्रतीक।
तेल भरना: --दीये में तेल भरते समय “ॐ नमः शिवाय” का 3 बार जाप करें। तेल में 2 काले तिल और 1 दाना अक्षत डालें।
संकल्प:-- दीपक जलाने से पहले हाथ में जल लेकर अपना नाम, गोत्र और मनोकामना बोलें।
---दीपक जलाने का सही समय:-- प्रदोष काल
प्रदोष काल क्या है?
*** सूर्यास्त से लगभग 1 घंटा पहले से लेकर सूर्यास्त के 1 घंटा बाद तक का समय। मोटे तौर पर शाम 5:30 से 7:30 के बीच।
++प्रदोष काल ही क्यों?
यह समय दिन और रात का संधिकाल है। इस समय शिवजी कैलाश पर तांडव करते हैं और अत्यंत प्रसन्न मुद्रा में होते हैं। इस काल में की गई प्रार्थना सीधे शिव तक पहुंचती है। सोम प्रदोष, शनि प्रदोष का विशेष महत्व है।
कितने दिन करना है?
कम से कम 11 सोमवार या 3 प्रदोष तिथि,आर्थिक तंगी ज्यादा हो तो 43 दिन लगातार करें।
#दीपक कहाँ जलाना चाहिए? स्थान का रहस्य:--
इस उपाय में स्थान का विशेष महत्व है:--
पहला दीपक: शिवलिंग के ठीक सामने, नंदी के पीछे। नंदी भगवान के कान में अपनी मनोकामना कहने की परंपरा है। नंदी और शिवलिंग के बीच दीपक रखने से संदेश सीधा पहुंचता है।
#दूसरा दीपक: मंदिर परिसर में स्थित बेलपत्र के वृक्ष के नीचे।
बेलपत्र वृक्ष का रहस्य: --
शिवपुराण कहता है कि, बेल के पेड़ की जड़ में स्वयं माता पार्वती का वास है। बेलपत्र की तीन पत्तियां त्रिदेव – ब्रह्मा, विष्णु, महेश का प्रतीक हैं। बेल के पेड़ के नीचे दीपक जलाने से कुंडली का चंद्र मजबूत होता है, मन शांत होता है और घर की कलह खत्म होती है।
**अगर बेल का पेड़ न हो तो?
मंदिर में पीपल के पेड़ के पास या तुलसी के पौधे के पास दूसरा दीपक रख सकते हैं। अगर मंदिर में भी सुविधा न हो, तो पहला दीपक शिवलिंग के पास और दूसरा मुख्य द्वार के दाहिनी ओर रखें।
***दीपक जलाते समय बोलने योग्य मंत्र:--
दीपक जलाने के बाद इन मंत्रों का जाप करें:--
दीप मंत्र: --
*“शुभं करोति कल्याणम् आरोग्यम् धनसंपदा।
शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपज्योतिर्नमोऽस्तु ते॥”*
अर्थ:--- हे दीप ज्योति, आप शुभ करने वाली, कल्याण, आरोग्य और धन देने वाली हैं। शत्रु बुद्धि का नाश करने वाली आपको नमस्कार है।
शिव मंत्र: 11 बार “ॐ नमः शिवाय” बोलें.
धन प्राप्ति मंत्र: 3 बार “ॐ शं शनैश्चराय नमः, ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीभ्यों नमः”
तिल का तेल शनि राहू केतू से जुड़ा है, इसलिए शनि मंत्र से कर्ज और बाधा दूर होती है।
मनोकामना मंत्र: आखिर में अपनी भाषा में प्रार्थना करें – “हे भोलेनाथ, मेरे घर से नकारात्मकता दूर करो, धन-धान्य की वृद्धि करो।”
मानसिक शांति: प्रदोष काल की ऊर्जा + दीपक की लौ त्राटक करने से बेचैनी, डिप्रेशन में लाभ। गोल बत्ती चंद्र को बल देती है। तिल के तेल की गंध और अग्नि से घर के वास्तु दोष, ऊपरी बाधा का शमन होता है। दूसरा दीपक माता लक्ष्मी का स्वरूप है। 43 दिन करने से रुका हुआ पैसा आने की मान्यता है, शिव-पार्वती के संयुक्त स्वरूप की पूजा से पति-पत्नी में प्रेम बढ़ता है।
*** पितृ दोष शांति: लंबी बत्ती का धुआं पितरों तक पहुंचता है। सोमवार को करने से पितृ प्रसन्न होते हैं।
*** करियर-बिजनेस में ग्रोथ: पहली बत्ती की सीधी लौ एकाग्रता और निर्णय शक्ति बढ़ाती है, घी का दीपक वातावरण शुद्ध करता है, फेफड़ों के लिए अच्छा। “तमसोमा” से आंखों की रोशनी भी ठीक रहती है।
#सावधानियां:--
खंडित दीया न लें:--टूटे दीये से ऊर्जा बिखरती है, दीपक बुझाएं नहीं:-- खुद बुझने दें। फूंक मारकर न बुझाएं, इससे लक्ष्मी नाराज होती हैं।
#सूतक में न करें: घर में जन्म या मृत्यु का सूतक हो तो, 13 दिन बाद करें। सिर्फ दिखावे के लिए नहीं, श्रद्धा से करें। भाव के बिना फल नहीं मिलता, सफाई का ध्यान: दीपक रखने की जगह गंदी न हो। मंदिर में रखने के बाद पुजारी से अनुमति लें।
#शास्त्रीय प्रमाण कहाँ मिलता है?
शिव पुराण, रुद्र संहिता: --“प्रदोषे दीपदानं यः करोति शिव सन्निधौ। तस्य गेहे सदा लक्ष्मीः पुत्रपौत्रादिसंयुता॥”
अर्थ:-- जो प्रदोष काल में शिव के पास दीप दान करता है, उसके घर लक्ष्मी पुत्र-पौत्र सहित निवास करती हैं।
स्कंद पुराण: --तिल तेल के दीपक से शनि, राहु, केतू पीड़ा शांत होती है।
वायुपुराण:-- बेल वृक्ष के नीचे दीप जलाने से अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता।
#अगर शिवलिंग घर में है तो कर सकते हैं। पहला दीपक शिवलिंग के पास, दूसरा मुख्य दरवाजे पर। लेकिन शिव मंदिर में फल 100 गुना बताया गया है, संतुलन के लिए एक लंबी, एक गोल ही रखें। दोनों लंबी रखें तो आक्रामकता बढ़ सकती है, दोनों गोल रखें तो, आलस्य आ सकता है।
#बेहद संकट में सरसों का तेल चला सकते हैं, पर तिल का तेल सर्वोत्तम है। सरसों का तेल उग्र होता है, वैवाहिक जीवन वालों को तिल या घी ही रखें।
याद रखें:-- उपाय काम तब करता है जब उसके साथ कर्म भी हो। दीपक जलाकर घर आएं और झूठ, छल, आलस्य करते रहें तो फल नहीं मिलेगा। दीपक की तरह खुद भी जलें – अहंकार, क्रोध, ईर्ष्या को जलाएं।
आज ही संकल्प लें:--- आने वाले सोमवार से ये 2 दीपक वाला उपाय शुरू करें। 11 सोमवार बाद खुद अनुभव करके देखिए। घर में शांति, मन में संतोष और जेब में बरकत – महादेव सब देंगे।
ॐ नमः शिवाय 🪔 भगवान शिव भाव के भूखे हैं, उनकी पूरे श्रद्धा भाव से भक्ति करने से ब्रह्मांड की समस्त ऊर्जाएं आपकी मदद के लिए तत्पर हो जाती हैं !
#अनिल सुधांशु
ज्योतिषाचार्य
नीम करोली आश्रम, कैंची धाम, नैनीताल (उत्तरांचल )
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