वैजयंती माला के अद्भुत चमत्कार.
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वैजयंती माला के चमत्कारी फायदे:-रुपये पैसों के लिए धारण करना भी बेहद लाभकारी.
वैजयंती माला को चमत्कारी माना गया है. जो कमलगट्टे के समान शुभ और लाभकारी होता है। वैजयंती माला भगवान श्रीकृष्ण को अत्यंत प्रिय है, इसलिए आपने श्रीकृष्ण की आरती भजन में सुना भी होगा, 'गले में वैजयंती मालाा, बजा रहे मुरली मधुर बाला'। जो लोग लाइफ में कई तरह की परेशानियों से गुजर रहे हैं. उन्हें भगवान श्रीकृष्ण का प्रिय वैजयंती माला जरूर घर में रखना चाहिए और धारण करना चाहिएं.
वैजयंती माला के बारे में धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख किया गया है। यह माला भगवान कृष्ण के गले में भी सुशोभित होती है। कहा जाता है कि, धरती माता ने भगवान कृष्ण को सृष्टि की रक्षा करने के लिए वैजयंती माला पूरी श्रद्धा और प्रेम से भेट की थी। उसके बाद से भगवान कृष्ण को वैजयंती माला बहुत श्रद्धा और प्रेम के साथ दी थी। वैजयंती माला के वैजयंती के बीजों से बनती है। वैजयंती माला का प्रयोग पूजा-पाठ, हवन, यज्ञ और जीवन में आ रही की समस्याओं का समाधान पाने के लिए उपाय के तौर पर इस्तेमाल की जाती है।
वैजयंती माला को लेकर एक मान्यता यह भी है कि, भगवान राम ने माता वैष्णो देवी को अगले जन्म में उन्हें विवाह का वचन देते हुए अपने गले से वैजयंती माला उतारकर भेंट की थी। साथ ही वचन दिया था कि, अगले जन्म में वह उनसे विवाह करेंगे। इसलिए माता वैष्णो को वैजयंती पुष्प और माला काफी प्रिय है।
वैजयंती माला धारण करने से मन में नकारात्मक विचार समाप्त होते हैं, इतना ही नहीं वैजयंती माला धारण करने से व्यक्ति को धन लाभ भी होता है, अगर किसी के विवाह में देरी हो रही है तो वैजयंती माला धारण करने से विवाह शीघ्र होता है, अगर किसी को ज्यादा क्रोध आता है तो उसे वैजयंती माला धारण करनी चाहिए। वैजयंती माला धारण करने से क्रोध शांत होगा।
वैजयंती माला से कार्यक्षेत्र की समस्या होगी दूर:--
अगर किसी व्यक्ति को कार्यक्षेत्र से संबंधित कोई परेशानी चल रही है तो वैजयंती माला को धारण कर लें। ऐसे करने से आपको सभी समस्याओं से छुटकारा मिलेगा। बस आपको इस माला को सही विधि के साथ धारण करना होगा।
वैजयंती माला धारण करने की विधि:--
वैजयंती माला धारण करने के लिए शुक्ल पक्ष के पहले गुरुवार और लक्ष्मी जी की साधना करने के लिए शुक्रवार के दिन स्नान आदि के बाद पूजन करें और ॐ वैष्णवायै नम: की माला का जप करें। यदि आपके कोई गुरु है तो उनके मंत्र का जप करें और गुरु नहीं है तो ऊं नमो: भगवते वासुदेवाय का कम से कम 108 बार जप करें। साथ ही गरीबों को कुछ दान करें। हो सके तो, गरीबों में कोई मिठाई जरूर बांटें। इसके बाद वैजयंती माला धारण करें।
वैजयंती माला पहनने के क्या फायदे और नुकसान हैं?
वैजयंती माला भगवान कृष्ण की प्रिय है। इसे पहनने से मानसिक शांति और एकाग्रता मिलती है, धन-आकर्षण बढ़ता है और आत्मविश्वास में सुधार होता है। इसका कोई नुकसान या शारीरिक दुष्प्रभाव नहीं है, लेकिन धार्मिक नियमों का पालन न करने से इसका लाभ कम हो सकता है।
वैजयंती माला पहनने से शनि राहु केतु शांत हो जाते हैं.
वैजयंती माला भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण को अत्यंत प्रिय है। इसे धारण करने से मानसिक शांति, धन-समृद्धि, और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। यह नकारात्मक ऊर्जा से बचाती है और ज्योतिषीय दोषों (विशेषकर शनि और राहु) को शांत करने में मदद करती है。
वैजयंती माला सिद्ध करने की विधि क्या है?
वैजयंती माला को सात्विकता और पवित्रता के साथ धारण किया जाता है। इसे पहनते समय मांस-मदिरा से परहेज करना, नहाते समय उतारना, और सोते समय इसे किसी सुरक्षित स्थान पर रखना चाहिए। यह माला भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण को अत्यंत प्रिय है。
वैजयंती माला पहनने के प्रमुख नियम और सावधानियाँ नीचे दी गई हैं:--
1. मुख्य नियम (क्या करें और क्या न करें)
सात्विक जीवन: वैजयंती माला धारण करने के बाद सात्विक जीवन का पालन करना चाहिए। मांस, मछली, प्याज, लहसुन और मदिरा के सेवन से बचना चाहिए。 स्नान करते समय माला को उतार दें.सोतेज्ञ समय भी माला को उतारकर किसी पवित्र या स्वच्छ स्थान पर रख देना चाहिए, शौच के समय: इसे पहनकर गंदे स्थानों या श्मशान आदि में जाने से बचना चाहिए।
2. धारण करने की विधि:--
शुद्धिकरण:-- पहली बार पहनने से पहले माला को गंगाजल या गाय के कच्चे दूध से शुद्ध करें。
मंत्र जाप:-- इसे किसी शुभ मुहूर्त में या शुक्रवार के दिन धारण करना सबसे उत्तम माना जाता है。 माला को धारण करने से पहले भगवान विष्णु या श्रीकृष्ण का ध्यान करें और “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें, इसे धारण करने से मन शांत रहता है और तनाव दूर होता है, यह कुंडली में कमजोर ग्रहों (विशेषकर शुक्र) को मजबूत करती है और राहु-केतु शनि के प्रभाव को कम करती है。
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अनिल सुधांशु
ज्योतिषाचार्य
••• नीम करोली आश्रम कैंची धाम नैनीताल (उत्तरांचल)
** बाबा बालक नाथ मंदिर किला बरेली (उत्तर प्रदेश )
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