हनुमान जी की पूजा साधना उपासना के साथ-साथ परिक्रमा करने का बहुत महत्व है.
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*हनुमानजी कि, पूजा, साधना के अलाबा उनकी परिक्रमा करने से बड़े से बड़ा संकट खत्म हो जाता है.
जब जीवन में चारों तरफ से संकट घेर ले और बचने का कोई रास्ता नजर ना आए तो, किसी ऐसे हनुमान मंदिर की तलाश करें, जहां पर हनुमान जी की मूर्ति की परिक्रमा लगाने की व्यवस्था हो, अर्थात हनुमान जी की मूर्ति बीच में हो और उसके चारों तरफ परिक्रमा लगाने की जगह हो, जहां आप परिक्रमा लगा सकें. हनुमान जी की परिक्रमा करने से सभी ग्रह/ नक्षत्र जातक के अनुकूल हो जाते हैं. तथा अपनी कृपा और अपना आशीर्वाद देने लगते हैं, जिससे व्यक्ति के जीवन में चारों तरफ से सुख और समृद्धि के नए रास्ते खुलने लगते हैं.
अपने संकट के निदान हेतु कम से कम 8 मंगलवार या 11 मंगलवार हनुमान जी की परिक्रमा करनी चाहिए और परिक्रमा करते समय निम्नलिखित चौपाई का निरंतर पाठ करतें रहें.
!! संकट कटे मिटे सब पीरा,जो सुमिरै हनुमत बलबीरा'!!
अर्थ:--जो भी व्यक्ति बलवान और वीर हनुमान जी का सच्चे मन से स्मरण करता है, उसके सभी संकट (मुसीबतें) दूर हो जाते हैं और सारी पीड़ाएं (दुख-दर्द) मिट जाती हैं。
कहेहु तात अस मोर प्रनामा। सब प्रकार प्रभु पूरनकामा॥
दीन दयाल बिरिदु संभारी। हरहु नाथ मम संकट भारी॥
इसका अर्थ है:-- "हे तात! मेरा प्रणाम निवेदन करना और कहना कि हे प्रभु! यद्यपि आप सब प्रकार से परिपूर्ण (पूर्णकाम) हैं, फिर भी दीनों पर दया करना आपका विरद (यश/स्वभाव) है। उसी दयालु स्वभाव को याद करके हे नाथ! मेरे इस भारी संकट को दूर कीजिए।"
कलयुग में हनुमानजी की भक्ति सभी मनोकामनाओं को शीघ्र पूर्ण करने वाली मानी गई है। इसी वजह से आज इनके भक्तों की संख्या काफी अधिक है। ऐसा माना जाता है कि, हनुमानजी बहुत जल्द अपने भक्तों के सभी दुखों को दूर करके सुख-समृद्धि प्रदान करते हैं। हनुमान जी के पूजन में एक महत्वपूर्ण क्रिया है, परिक्रमा/
किसी भी भगवान के पूजन कर्म में एक महत्वपूण क्रिया है, प्रतिमा की परिक्रमा। वैसे तो सामान्यत:-- सभी देवी-देवताओं की एक ही परिक्रमा की जाती है, परंतु शास्त्रों के अनुसार अलग-अलग देवी-देवताओं के लिए परिक्रमा की अलग संख्या निर्धारित की गई है/
धर्म शास्त्रों के अनुसार आरती और पूजा-अर्चना आदि के बाद भगवान की मूर्ति के आसपास सकारात्मक ऊर्जा एकत्रित हो जाती है, इस ऊर्जा को ग्रहण करने के लिए परिक्रमा की जाती है। सभी देवी-देवताओं की परिक्रमा की अलग-अलग संख्या है।
परिक्रमा के संबंध में नियम:--
परिक्रमा शुरु करने के पश्चात बीच में रुकना नहीं चाहिए। साथ परिक्रमा वहीं खत्म करें, जहां से शुरु की गई थी। ध्यान रखें कि, परिक्रमा बीच में रोकने से वह पूर्ण नही मानी जाती। परिक्रमा के दौरान किसी से बातचीत कतई ना करें। जिस देवता की परिक्रमा कर रहे हैं, उनका ही ध्यान करें व उनके मंत्रों का जप करें। इस प्रकार परिक्रमा करने से पूर्ण लाभ की प्राप्ती होती है, तथा जीवन में चल रहे हैं, सभी प्रकार के संकटों से छुटकारा मिलता है.
हनुमान जी की परिक्रमा लगाने से क्या होता है?
हनुमान जी की परिक्रमा करने से व्यक्ति में साहस, बल और आत्मविश्वास बढ़ता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, ऐसा करने से सभी नकारात्मक ऊर्जाएं दूर होती हैं और संकट मोचन की कृपा से भक्तों कि, सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं तथा रोगों व कष्टों का निवारण होता है।
आपको कैसे पता चलेगा कि, आपको हनुमान जी कि, कृपा मिल रही है?
हनुमान जी की कृपा या उपस्थिति किसी चमत्कार से नहीं, बल्कि आपके भीतर आने वाले सकारात्मक बदलावों से महसूस होती है। जब बजरंगबली आपके साथ होते हैं, तो आपके जीवन और विचारों में कुछ स्पष्ट संकेत मिलने लगते हैं:-
*** अपने या दूसरों के जीवन में घटने वाली घटनाओं का आपको पहले से ही आभास होने लगेगा.
अकारण निर्भयता:-- सबसे बड़ा संकेत है कि, बड़ी से बड़ी मुसीबत में भी आपके मन में डर नहीं रहता और आपमें एक दृढ़ साहस बना रहता है।
संकटों का टल जाना:-- आपको ऐसा महसूस होगा कि, अचानक आए बड़े संकट बिना आपके विशेष प्रयास के सुलझ जाते हैं या आप सुरक्षित निकल आते हैं।
श्री राम नाम में रुचि: --आपको अनायास ही भगवान राम या हनुमान जी के भजन सुनने और 'राम नाम' का जाप करने में शांति और आनंद मिलने लगता हैं.
क्रोध और अहंकार का कम होना: -- आपके स्वभाव में विनम्रता बढ़ती है। नकारात्मक लोग या बुरी आदतें आपके जीवन से अपने आप दूर होने लगती हैं।
स्वप्न के माध्यम से: ---सपनों में बार-बार बंदरों का दिखना, हनुमान मंदिर या ध्वजा के दर्शन होना, या आसमान में उड़ते हुए खुद को देखने का अनुभव होना उनकी कृपा का प्रतीक है।
हनुमान मंदिर में माचिस दान करने का महत्व और मान्यताएं:--
अज्ञान का नाश:-- माचिस प्रकाश (दीपक) जलाने का माध्यम है。यह माना जाता है कि, इसे दान करने से जीवन के अंधकार और मानसिक भटकाव और सभी प्रकार की परेशानियां दूर होती हैं。
मंदिर में देसी घी, कपूर और रूई दान करने का महत्व:--
देसी घी कपूर राई मंदिर में दान करने से आपका शुक्र मजबूत होता है, देवी लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है, दूसरी चीज आपके दिए कपूर और देसी घी से भगवान की आरती होती है, इसका बड़ा पुण्य आपको प्राप्त होता है, भगवान के मंदिर में जिस प्रकार उजाला होता है, उसी प्रकार आपके जीवन में भी उजाला हो जाएगा.
हनुमान जी के मंत्र:--
मूल मंत्र है: "ॐ हं हनुमते नमः"।
ॐ नमो हनुमते रुद्रावताराय !
(संकट नाशक मंत्र): शत्रुओं पर विजय और घोर संकटों से रक्षा के लिए。
ॐ आंजनेयाय विद्महे वायुपुत्राय,
धीमहि तन्नो हनुमत् प्रचोदयात्.
(हनुमान गायत्री मंत्र): बुद्धि, ज्ञान और एकाग्रता के लिए。
संख्या: -- पूर्ण लाभ और एकाग्रता के लिए प्रतिदिन या मंगलवार, शनिवार विशेष दिनों में रुद्राक्ष की माला से 108 बार जाप करना चाहिए°
इसके अतिरिक्त हनुमान चालीसा, बजरंग बाण, हनुमान अष्टक, हनुमान बाहुक और सुंदरकांड का पूरे श्रद्धा भाव से पाठ करना चाहिए, ऐसा करने से बड़े से बड़ा संकट हनुमान जी की कृपा से समाप्त हो जाता है.
# अगर जीवन में ज्यादा परेशानी चल रही है तो, आप अपनी जन्म कुंडली दिखा सकते हैं, हमारा व्हाट्सएप नंबर 94580 64249 आपकी सेवा उपलब्ध है.
नोट:-- महिलाओं और लड़कियों के लिए यह परिक्रमा पूरी तरह से निषेध है. इस नियम का सख्ती से पालन किया जाए, अन्यथा आप स्वयं जिम्मेदार होंगे.
अनिल सुधांशु
ज्योतिषाचार्य
°°° नीम करोली आश्रम कैंची धाम नैनीताल (उत्तरांचल) °°° बाबा बालक नाथ मंदिर किला बरेली (उत्तर प्रदेश)
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