शनि देव का अभिषेक करने से सभी प्रकार की परेशानियों से छुटकारा मिल जाता है.

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शनिवार के दिन शनिदेव का तिल के तेल या सरसों के तेल से अभिषेक करने से जीवन के सभी प्रकार के कष्ट खत्म होने लगते हैं और जीवन में तरक्की उन्नति होती है.

शनि देव का अभिषेक मुख्य रूप से शनिवार को किया जाता है। इसके लिए स्वच्छ जल और शुद्ध सरसों या तिल के तेल का प्रयोग किया जाता है, अभिषेक करते समय मन में श्रद्धा रखना और 'ॐ शं शनैश्चराय नमः' मंत्र का जाप करना अत्यंत फलदायी माना गया है。 

अभिषेक की सरल विधि:--

सही समय: अभिषेक सूर्योदय से पहले या सूर्यास्त के समय करना सबसे उत्तम माना जाता है,स्नान करके स्वच्छ वस्त्र (विशेषकर नीले या काले) धारण करें, याद रखें कि, सिर ढका हुआ नहीं होना चाहिए。

*** अभिषेक सामग्री: स्वच्छ जल, सरसों/तिल का तेल, काले तिल, काले वस्त्र, और नीले फूल。 

 अभिषेक करने की प्रक्रिया प्रक्रिया:--

सबसे पहले जल से अभिषेक करें, इसके बाद शनिदेव को सरसों का तेल अर्पित करें, काले तिल, फूल और काले वस्त्र चढ़ाएं, अंत में तेल का दीपक जलाकर आरती करें, अभिषेक और पूजा के दौरान इस मंत्र का उच्चारण करें:

ॐ शं शनैश्चराय नमः

धार्मिक कथाओं की मान्यताओं के अनुसार शनिदेव को कर्मफल दाता कहा जाता है। शनिदेव व्यक्ति के कर्मों के अनुसार फल देते हैं। शनिदेव कि, जिन पर कृपा होती है, वह व्यक्ति का का जीवन संवर जाता है। वही जिनकी राशि में शनिदेव साढ़े साती या ढैय्या की स्थिति में होते है, उन्हें जीवन में बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

किसी भी कार्य में सफलता प्राप्त करने के लिए उन्हें कठोर परिश्रम करना पड़ता है। ऐसे में शनिदेव की कृपा पाने के लिए प्रत्येक शनिवार शनिदेव को तेल चढ़ाया जाता है। इस लेख में जानें की शनिदेव को तेल क्यों चढ़ाया जाता है।

जानें शनिदेव को तेल चढ़ाने की परंपरा कैसे शुरू हुई?

रामायण काल में एक समय शनिदेव को अपने बल और पराक्रम पर घमंड हो गया था। उस काल में हनुमान जी के बल और पराक्रम की कीर्ति चारों दिशाओं में फैली हुई थी। जब शनिदेव को हनुमान जी के संबंध में जानकारी प्राप्त हुई तो शनिदेव हनुमान जी से युद्ध करने के लिए निकल पड़े। उस समय हनुमान जी सीता माता की खोज के लिए बनाए गए रामसेतु पर अपने स्वामी श्रीराम की भक्ति में लीन बैठे थे, तभी वहां शनिदेव आए और उन्होंने हनुमान जी को युद्ध का आवाहन दिया।

युद्ध का आवाहन सुनकर हनुमानजी ने शनिदेव से कहा कि, वे अभी अपने आराध्य श्री राम की साधना कर रहे है। आप इसमें विघ्न ना करें। लेकिन शनिदेव ने हनुमान जी का कहा नहीं माने और पुनः युद्ध का आवाहन देने लगे। इस प्रकार हनुमान जी भी युद्ध के लिए विवश हो गए। फिर दोनों के बीच घमासान युद्ध हुआ। हनुमानजी ने शनिदेव को अपनी पूंछ से जकड़ लिया। शनिदेव अत्यंत शक्ति प्रदर्शन के बाद भी अपने आप को हनुमान जी की पकड़ से छुड़ा नहीं पाए। हनुमान जी ने फिर राम सेतु पर परिक्रमा करते हुए, शनिदेव को पटकना शुरू कर दिया। पत्थरों की मार से शनिदेव लहूलुहान हो गए। और इस प्रकार हनुमान जी ने शनिदेव को परास्त कर दिया।

हनुमान जी द्वारा किए गए प्रहारों से शनिदेव के पूरे शरीर में भयंकर पीड़ा हो रही थी। इस पीड़ा को दूर करने के लिए हनुमानजी ने शनिदेव को तेल दिया। इस तेल को लगाते ही शनिदेव की समस्त पीड़ा दूर हो गई। तभी से शनिदेव को तेल चढाने की परंपरा आरम्भ हुई। इसीलिए ऐसी मान्यता है की शनिदेव को तेल चढ़ाने से उनकी पीड़ा शांत हो जाती हैं और वे प्रसन्न हो जाते हैं। शनिदेव पर जो भी व्यक्ति तेल चढाता है, उसके जीवन की सभी परेशानियां दूर हो जाती हैं और धन प्राप्ति के कार्य आसान हो जाते है। 

शनिदेव को तेल चढ़ाने की विधि:--

शनिदेव को सरसों का तेल चढ़ाना उत्तम होता है। शनिदेव की प्रतिमा को तेल चढ़ाने से पहले तेल में अपना चेहरा अवश्य देखें। ऐसा करने पर शनि के दोषों से मुक्ति मिलती है। धन व स्वास्थ्य संबंधी कार्यों में आ रही रुकावटें दूर हो जाती हैं और सुख-समृद्धि बनी रहती है। तेल चढ़ाते वक्त  का ध्यान रखें कि, आप शनिदेव के सामने ना खड़े हो। ऐसे जगह पर खड़े हो कर तेल चढ़ाए कि, शनि देव की सीढ़ी दृष्टि आप पर ना पड़े। 

शनिदेव पर तेल चढ़ाने की वैज्ञानिक मान्यता:--

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार हमारे शरीर के सभी अंगों में अलग-अलग ग्रहों का वास होता है। हमारे शरीर के प्रत्येक अंग के कारक ग्रह अलग-अलग हैं। शनिदेव त्वचा, दांत, कान, हड्डियां और घुटनों के कारक ग्रह हैं। यदि आपकी कुंडली में शनि अशुभ हो तो, आपको इन अंगों से संबंधित परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इन अंगों की विशेष देखभाल के लिए हर शनिवार को सरसों के तेल मालिश करने से आपको फायदा होगा। 

शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए उपाय:--

जिन राशियों पर वर्तमान शनिदेव की साढ़ेसाती, ढैय्या या वक्री भाव का प्रभाव चल रहा है वे लोग शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए निम्न उपाय करें। 

°° प्रत्येक शनिवार को शनिदेव के लिए व्रत रखें, प्रत्येक शनिवार को काले वस्त्र पहनें, प्रत्येक शनिवार को शनिदेव को सरसों का तेल एवं काली तिल चढ़ाएं, प्रत्येक शनिवार शनिदेव के मंदिर अवश्य जाएं एवं वहां गरीबों को यथाशक्ति दान अवश्य करें। गाय को चारा खिलाएं।

हनुमान जी के आराधना करने से भी आपको शनिदेव के प्रकोप से बचने में बहुत लाभ मिलेगा। शनिदेव हनुमान जी के भक्तों को परेशान नहीं करते।

शनि देव के मंत्र:--
"ॐ शं शनैश्चराय नमः ॥
"ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः ॥
"ॐ भगभवाय विद्महे मृत्युरूपाय धीमहि तन्नो शनिः प्रचोदयात् ॥"
"नीलांजन समाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्।छाया मार्तण्ड संभूतं तं नमामि शनैश्चरम ॥
 प्रतिदिन या शनिवार को कम से कम 108 बार जाप करें, शनि देव की पूजा और मंत्र जाप का सबसे उत्तम समय सूर्यास्त के बाद (शाम 6 बजे के बाद) माना गया है。
 
निष्कर्ष:--
शनिदेव सबसे बलवान है। वे कर्मफल प्रदाता भी है। आपके अच्छे-बुरे कर्मों का शनिदेव न्यायपूर्वक फल देते है। इसलिए सभी को शनिदेव को प्रसन्न करना चाहिए। अगर आपकी कुंडली में शनिदेव मजबूत स्थिति में हैं, तो आपके जीवन में स्वास्थ्य सम्बन्धी परेशानियाँ नहीं होंगी। आपके सारे काम सफल होंगे।

 अनिल सुधांशु 
ज्योतिषाचार्य 
94580 64249 

°°° नीम करोली आश्रम, कैंची धाम, नैनीताल (उत्तरांचल) 
••• बाबा अलखनाथ मंदिर, किला, बरेली (उत्तर प्रदेश )

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