बटुक भैरव की चमत्कारी उपासना
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बटुक भैरव की साधना से जीवन में सभी प्रकार के मुसीबत से छुटकारा मिलता है और धन संपत्ति की प्राप्ति होती है.
मुख्य रूप से आठ भैरव माने गए हैं:--
1.असितांग भैरव, 2. रुद्र भैरव, 3. चंद्र भैरव, 4. क्रोध भैरव, 5. उन्मत्त भैरव, 6. कपाली भैरव, 7. भीषण भैरव और 8. संहार भैरव। आदि शंकराचार्य ने भी 'प्रपञ्च-सार तंत्र' में अष्ट-भैरवों के नाम लिखे हैं। तंत्र शास्त्र में भी इनका उल्लेख मिलता है। इसके अलावा सप्तविंशति रहस्य में 7 भैरवों के नाम हैं। इसी ग्रंथ में दस वीर-भैरवों का उल्लेख भी मिलता है। इसी में तीन बटुक-भैरवों का उल्लेख है। रुद्रायमल तंत्र में 64 भैरवों के नामों का उल्लेख है।
बटुक भैरव : --
1. 'बटुकाख्यस्य देवस्य भैरवस्य महात्मन:। ब्रह्मा विष्णु, महेशाधैर्वन्दित दयानिधे।।'- अर्थात् ब्रह्मा, विष्णु, महेशादि देवों द्वारा वंदित बटुक नाम से प्रसिद्ध इन भैरव देव की उपासना कल्पवृक्ष के समान फलदायी है।
2. बटुक भैरव भगवान का बाल रूप है। इन्हें आनंद भैरव भी कहते हैं। उक्त सौम्य स्वरूप की आराधना शीघ्र फलदायी है। यह कार्य में सफलता के लिए महत्वपूर्ण है। 'महा-काल-भैरव' मृत्यु के देवता हैं। 'स्वर्णाकर्षण-भैरव' को धन-धान्य और संपत्ति का अधिष्ठाता माना जाता है, तो 'बाल-भैरव' की आराधना बालक के रूप में की जाती है। सद्-गृहस्थ प्रायः बटुक भैरव की उपासना ही करते हैं, जबकि श्मशान साधक काल-भैरव की।
3. बटुक भैरवजी तुरंत ही प्रसन्न होने वाले दुर्गा के पुत्र हैं। बटुक भैरव की साधना से व्यक्ति अपने जीवन में सांसारिक बाधाओं को दूर कर सांसारिक लाभ उठा सकता है। बटुक भैरव आराधना के लिए मंत्र है- ।।ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाचतु य कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं ॐ।।
4. साधना का मंत्र : '
।।ॐ ह्रीं वां बटुकाये क्षौं क्षौं आपदुद्धाराणाये कुरु कुरु बटुकाये ह्रीं बटुकाये स्वाहा।।'
उक्त मंत्र की प्रतिदिन 11 माला 21 मंगल तक जप करें। मंत्र साधना के बाद अपराध-क्षमापन स्तोत्र का पाठ करें। भैरव की पूजा में श्री बटुक भैरव अष्टोत्तर शत-नामावली का पाठ भी करना चाहिए।
5. एकमात्र भैरव की आराधना से ही शनि का प्रकोप शांत होता है। आराधना का दिन रविवार और मंगलवार नियुक्त है। पुराणों के अनुसार भाद्रपद माह को भैरव पूजा के लिए अति उत्तम माना गया है। उक्त माह के रविवार को बड़ा रविवार मानते हुए व्रत रखते हैं।
6. आराधना से पूर्व जान लें कि कुत्ते को कभी दुत्कारे नहीं बल्कि उसे भरपेट भोजन कराएं। जुआ, सट्टा, शराब, ब्याजखोरी, अनैतिक कृत्य आदि आदतों से दूर रहें। दांत और आंत साफ रखें। पवित्र होकर ही सात्विक आराधना करें। अपवित्रता वर्जित है।
7. इस साधना से बटुक भैरव प्रसन्न होकर सदा साधक के साथ रहते हैं और उसे सुरक्षा प्रदान करते हैं अकाल मौत से बचाते हैं। ऐसे साधक को कभी धन की कमी नहीं रहती और वह सुखपूर्वक वैभवयुक्त जीवन- यापन करता है। जो साधक बटुक भैरव की निरंतर साधना करता है तो भैरव बींब रूप में उसे दर्शन देकर उसे कुछ सिद्धियां प्रदान करते हैं जिसके माध्यम से साधक लोगों का भला करता है।
>>साधना के लाभ :-
बटुक भैरव मां काली के बहुत ही प्रिय है अतः इनकी साधना करने से मां काली भी प्रसन्न होती है और साधक को बहुत सी सिद्धियां प्राप्त होती है.
>>जो लोग सट्टा या शेयर मार्किट में इन्वेस्ट अथवा कार्य करते है. उनके लिए यह साधना बहुत ही लाभकारी है, और उनको जरूर करनी चाहिए।
>बटुक भैरव की पूजा से शत्रुओं का विनाश होता है।
>बटुक भैरव की साधना करने पर साधक को बल, बुद्धि, विद्या, मान-सम्मान आदि की प्राप्ति होती है।
>बटुक भैरव की साधना करने पर राहु-केतु से संबंधी समस्याओं का समाधान हो जाता है।
>बटुक भैरव की साधना करने पर आपकी आकर्षण शक्ति में वृद्धि होती है।
>बटुक भैरव की साधना करने से आपको वाक सिद्धि की प्राप्ति होती है।
>बटुक भैरव की साधना करने पर आपको अचानक धन लाभ होता है और आय के नए- नए स्रोत पैदा होते है।
>बटुक भैरव की साधना करने से दुख और दरिद्रता का नाश होता हैं।
>बटुक भैरव की साधना करने से आपकी हर समस्या का समाधान होता है।
>बटुक भैरव बहुत ही दयालु और शीघ्र प्रसन्न होने वाले देवता है।
साधना विधि:--
>साधना के दिन सूर्योदय से पूर्व स्नानादि से निवृत्ति होकर बटुक भैरव जी का ध्यान करे और गुरु द्वारा प्राप्त मंत्र का ही जाप करे।
>आप व्रत एवं अनुष्ठान का संकल्प लेकर अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना करें।
>आप निकटतम भैरव या शिव मंदिर जाकर आशीर्वाद प्राप्त करें।
>आप धूप दीप (सरसों के तेल में) प्रज्ज्वलित कर सफेद पुष्प अर्पित करें, और गुरु प्रदत भैरव मंत्र का जाप करें।
भैरव को भोग में क्या-क्या चढ़ाना चाहिए.
भैरव बाबा (काल भैरव) को भोग में मुख्य रूप से सात्विक और तामसिक दोनों प्रकार की चीजें अर्पित की जाती हैं। सात्विक भोग में हलवा, खीर, गुलगुले (मीठे पुए), जलेबी और फल चढ़ाए जाते हैं, इसके अलावा काले चने, उड़द की दाल के बड़े/दही भल्ले भी प्रिय हैं, कुछ मंदिरों में मदिरा (शराब) का भोग लगाने की भी प्राचीन परंपरा है。
भैरव बाबा को प्रसन्न करने के लिए इन भोगों का विशेष ध्यान रखें:--
सात्विक भोग:-- उन्हें मीठे में हलवा, मालपुआ, खीर, गुलगुले और इमरती बहुत पसंद है, नमकीन/अन्य: काले चने और उड़द की दाल से बने व्यंजन (जैसे दही-भल्ले या पकौड़े) भी चढ़ाए जाते हैं。
मदिरा (शराब):--- तांत्रिक परंपराओं और कुछ प्रसिद्ध भैरव मंदिरों (जैसे उज्जैन या दिल्ली के भैरव मंदिर) में मदिरा का भोग लगाया जाता हैं, इसे आत्म-समर्पण या संकल्प का प्रतीक माना जाता है。
कुत्ते को भोजन:--भैरव बाबा का वाहन काला कुत्ता है, इसलिए भोग लगाने के बाद या सीधे तौर पर काले कुत्ते को मीठी रोटी, गुड़ के पुए, या जलेबी खिलाना अत्यंत शुभ माना जाता है。
भैरव के विशेष उपाय: --- प्रतिदिन या विशेषकर रविवार और मंगलवार को काले कुत्ते को मीठी रोटी (गुड़ की रोटी), या सरसों के तेल में बनी पूड़ी खिलाएं। ऐसा करने से राहु, केतु और शनि के अशुभ प्रभाव दूर होते हैं और आकस्मिक संकट टलते हैं।
तेल का दीपक और भोग : शनिवार या रविवार की रात को किसी काल भैरव मंदिर में जाकर उनके सामने सरसों के तेल का दीपक जलाएं。
. नींबू और काले तिल का उपाय: --- यदि आपको अज्ञात भय रहता है या कोई कार्य पूरा नहीं हो रहा है, तो रविवार की शाम को एक नींबू काटें। उस पर थोड़े काले तिल और सिंदूर लगाएं। इसे चौराहे पर रखकर चुपचाप अपने घर आ जाएं (पीछे मुड़कर न देखें)।
4. सुरक्षा और शत्रु नाश के उपाय : -- शनिवार की रात को काले कपड़े में कोयले, काले तिल और एक लोहे की कील बांध लें。 इसके ऊपर एक सिक्का रखें और इसे अपने सिरहाने से उतारकर बहते हुए जल (नदी) में प्रवाहित कर दें।
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अनिल सुधांशु
ज्योतिषाचार्य
°°° नीम करोली आश्रम कैंची धाम नैनीताल (उत्तरांचल)
••• बाबा बालक नाथ मंदिर किला बरेली (उत्तर प्रदेश)
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