जन्म कुंडली में भकूट दोष का पति पत्नी के जीवन पर प्रभाव और उपाय.
***
*** जन्म कुंडली में भकूट दोष, क्यों जरूरी है, भकूट दोष का निदान, निदान न होने से आपसी संबंध खराब होते हैं और संतान पर इसका बुरा प्रभाव पड़ता है. धन की बहुत ज्यादा समस्या रहती है.
भारतीय संस्कृति में शादी से पूर्व गुण मिलान करने की परम्परा प्राचीन काल से चली आ रही है तथा ज्योतिष को मानने वाले गुण मिलान को अत्यधिक महत्त्व देते है।
सामान्यतः ज्योतिषी कुंडली मिलान के क्रम में यदि भकूट दोष बन रहा है तो शादी नहीं करने के लिए सलाह देते हैं। हालांकि केवल एक दोष के आधार पर कभी भी शादी न करने की सलाह नहीं देनी चाहिए, क्योकि ऐसे अनेक दम्पति है, जिनके कुंडली में भकूट दोष है, फिर भी सुखमय दाम्पत्य जीवन व्यतीत कर रहे है।
अतः विवाह आदि के लिए कुंडली मिलान की प्रक्रिया में केवल गुण मिलान कर लेना ही पर्याप्त नहीं है, यदि कोई ज्योतिषी ऐसा करते है तो, यह उचित नहीं है, ऐसा करने से ही ज्योतिष और ज्योतिषी के प्रति अविश्वास पैदा होता है। अतः विवाह के सम्बन्ध में कोई निर्णय लेने से पहले लड़का और लड़की की कुंडली में ग्रहो की स्थिति, उच्च, नीच, योग इत्यादि पर विचार करके ही शादी करने और न करने का फैसला लेना चाहिए।
भकूट दोष क्या होता हैं?
अगर पुरुष और स्त्री की कुंडली में चंद्रमा 6-8, 9-5 या 12-2 का संयोजन कर रहा हो, तब भकूट दोष बनता है। अगर नर का चंद्र राशि मेष है, और महिला का कन्या है, तब 6-8 का भकूट दोष बनता है, क्योंकि स्त्री का चंद्र राशि नर के चंद्र राशि से छठे और नर का चंद्र राशि स्त्री के चंद्र राशि से आठवें नंबर पर होता है। इसी तरह का भकूट दोष चंद्र राशि के 9-5 और 12-2 संयोजन के लिए भी माना जाता है। 6-8 का भकूट दोष शादी जोड़ों के लिए स्वास्थ्य की गंभीर समस्या पैदा कर सकता है, 9-5 का भकूट दोष संतान की समस्या का कारण होता है, और 12-2 का भकूट दोष वित्तीय समस्याएं पैदा करता है।
भकूट दोष का दाम्पत्य जीवन पर प्रभाव-
जन्मकुंडली मिलान में तीन प्रकार से भकूट दोष बनता है जिसकी चर्चा ऊपर की गई है। मुहूर्त चिन्तामणि में इसके दाम्पत्य जीवन में आने वाले प्रभाव के सम्बन्ध में कहा गया है।
अर्थात षड़-अष्टक 6/8 भकूट दोष होने से वर-वधू में से एक की मृत्यु हो जाती है या आपस में लड़ाई झगड़ा होते रहता है।
नवम-पंचम ( 9/5) भकूट दोष होने से संतान की हानि होती है या संतान के जन्म में मुश्किल आती है, या फिर संतान होती ही नहीं।
द्वादश-दो ( 1२/२) भकूट दोष होने से वर-वधू को निर्धनता का सामना करना पड़ता या दोनों बहुत ही खर्चीले होते है।
भकूट दोष का परिहार:--
भकूट मिलान में तीन प्रकार के दोष होते हैं। जैसे षडाष्टक दोष, नव-पंचम दोष और द्वि-द्वार्दश दोष होता है। इन तीनों ही दोषों का परिहार भिन्न – भिन्न प्रकार से हो जाता है।
षडाष्टक परिहार:--
यदि वर-वधु की मेष/वृश्चिक, वृष/तुला, मिथुन/मकर, कर्क/धनु, सिंह/मीन या कन्या/कुंभ राशि है तब यह मित्र षडाष्टक होता है अर्थात इन राशियों के स्वामी ग्रह आपस में मित्र होते हैं. मित्र राशियों का षडाष्टक शुभ माना जाता है।
यदि वर-वधु की चंद्र राशि स्वामियों का षडाष्टक शत्रु वैर का है तब इसका परिहार करना चाहिए।
मेष/कन्या, वृष/धनु, मिथुन/वृश्चिक, कर्क/कुंभ, सिंह/मकर तथा तुला/मीन राशियों का आपस में शत्रु षडाष्टक होता है इनका पूर्ण रुप से त्याग करना चाहिए।
यदि तारा शुद्धि, राशियों की मित्रता हो, एक ही राशि हो या राशि स्वामी ग्रह समान हो तब भी षडाष्टक दोष का परिहार हो जाता है।
नव पंचम का परिहार :--
नव पंचम दोष का परिहार भी शास्त्रों में दिया गया है. जब वर-वधु की चंद्र राशि एक-दूसरे से 5/9 अक्ष पर स्थित होती है तब नव पंचम दोष माना जाता है. नव पंचम का परिहार निम्न से हो जाता है।
यदि वर की राशि से कन्या की राशि पांचवें स्थान पर पड़ रही हो और कन्या की राशि से लड़के की राशि नवम स्थान पार पड़ रही हो तब यह स्थिति नव-पंचम की शुभ मानी गई है।
मीन/कर्क, वृश्चिक/कर्क, मिथुन/कुंभ और कन्या/मकर यह चारों नव-पंचम दोषों का त्याग करना चाहिए।
यदि वर-वधु की कुंडली के चंद्र राशिश या नवांशपति परस्पर मित्र राशि में हो तब नव-पंचम का परिहार होता है।
द्वि-द्वार्दश योग का परिहार:--
*********************
लड़के की राशि से लड़की की राशि दूसरे स्थान पर हो तो लड़की धन की हानि करने वाली होती है, लेकिन 12वें स्थान पर हो तब धन लाभ कराने वाली होती है।
द्वि-द्वार्द्श योग में वर-वधु के राशि स्वामी आपस में मित्र हैं, तब इस दोष का परिहार हो जाता है।
मतान्तर से सिंह और कन्या राशि द्वि-द्वार्दश होने पर भी इस दोष का परिहार हो जाता है।
भकूट दोष का निदान:--
वर-वधू दोनों की जन्म कुंडलियों में चन्द्रमा मेष-वृश्चिक तथा वृष-तुला राशियों में होने पर षडाष्टक की स्थिति में भी भकूट दोष नहीं माना जाता है, क्योकि क्योंकि मेष-वृश्चिक राशियों का स्वामी मंगल हैं तथा वृष-तुला राशियों का स्वामी शुक्र हैं।
अतः एक ही राशि होने के कारण दोष समाप्त माना जाता है।
इसी प्रकार वर वधु की कुंडली में चन्द्रमा मकर-कुंभ राशियों में होकर भकूट दोष का निर्माण कर रहा है तो, एक दूसरे से 12-2 स्थानों पर होने के पश्चात भी भकूट दोष नहीं माना जाता है, क्योंकि इन दोनों राशियों के स्वामी शनि हैं।
यदि वर-वधू दोनों की जन्म कुंडलियों में चन्द्र राशियों के स्वामी आपस में मित्र हैं तो, भी भकूट दोष का प्रभाव कम हो जाता है, जैसे कि मीन-मेष तथा मेष-धनु में भकूट दोष होता है, परन्तु उसका प्रभाव कम होता है, क्योंकि इन दोनों ही राशियों के स्वामी गुरू तथा मंगल हैं जो कि, आपस में मित्र हैं।
यदि दोनो कुंडलियों में नाड़ी दोष नहीं है तो, भी भकूट दोष होने के बाद भी इसका प्रभाव कम हो जाता है।
यदि कुंडली मिलान में ग्रहमैत्री, गणदोष तथा नाड़ी दोष नहीं है और भकूट दोष है तो, भकूट दोष का प्रभाव कम हो जाता है।
कुंडली मिलान में 'भकूट दोष' चंद्र राशियों के बीच परस्पर अशुभ स्थिति (जैसे 6-8, 2-12, या 5-9) के कारण उत्पन्न होता है। इसे दूर करने के लिए शिव-पार्वती की पूजा, ग्रहों की शांति के उपाय, और आपसी समझ-बूझ सबसे कारगर माध्यम हैं।
भकूट के 7 गुण क्या हैं?
कुंडली मिलान में भकूट (चंद्र राशि की स्थिति) के लिए कुल 7 गुण निर्धारित होते हैं। यह वैवाहिक जीवन में प्रेम, परिवार की वृद्धि और आपसी तालमेल को दर्शाता है। यदि राशि चक्र में वर-वधू का स्थान 1-7, 3-11, या 4-10 हो, तो पूरे 7 गुण होते है.
यदि दोनों की चंद्र राशियाँ 2-12, 6-8, या 9-5 के क्रम में होती हैं, तो भकूट दोष बनता है और इसके अंक शून्य (0) हो जाते हैं।
वैवाहिक जीवन में भकूट दोष के प्रभाव को कम करने के लिए निम्नलिखित उपाय किए जा सकते हैं:--
१. ज्योतिषीय और आध्यात्मिक उपायरुद्राभिषेक और शिव पूजा: --
प्रतिदिन या सोमवार को शिव-पार्वती की संयुक्त पूजा करें। शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाएं और "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का नियमित रूप से जाप करें।ग्रह शांति: जिन चंद्र राशियों के कारण दोष बन रहा है, उनके स्वामी ग्रहों (जैसे चंद्रमा, मंगल या गुरु) से जुड़े मंत्रों का जाप और दान करें।
विष्णु पूजा:-- भगवान विष्णु या श्री कृष्ण की आराधना करना और विष्णु सहस्रानाम का पाठ करने से भी इस दोष के नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं।
भूकुट दोष की शांति के लिए भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना करें.
कुंडली मिलान में भकूट दोष के निवारण के लिए भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा सबसे प्रभावी मानी जाती है, दोष निवारण के लिए प्रतिदिन ॐ नमः शिवाय मंत्र का 108 बार जाप करें तथा भकूट शांति के लिए महामृत्युंजय मंत्र का अनुष्ठान भी किया जाता है。
भकूट दोष निवारण मंत्र शिव मंत्र:-- ॐ नमः शिवाय महामृत्युंजय मंत्र: ---ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
भकूट दोष शांति के अन्य उपाय:---सोमवार का व्रत: सोमवार के दिन व्रत रखें और शिवलिंग पर दूध व बेलपत्र अर्पित करें。रुद्राभिषेक: --किसी योग्य पंडित द्वारा रुद्राभिषेक और हवन करवाने से भकूट दोष के दुष्प्रभाव दूर होते हैं。
दान:--- जरूरतमंदों को भोजन या वस्त्र दान करें。
# अपनी जन्म कुंडली दिखाएं और जीवन में चल रही समस्याओं से छुटकारा पाएं, हमारा व्हाट्सएप नंबर 945064249 आपकी सेवा में उपलब्ध है.
अनिल सुधांशु
ज्योतिषाचार्य
°°° नीम करोली आश्रम, कैंची धाम, नैनीताल (उत्तरांचल)
•••• बाबा अलखनाथ मंदिर, किला, बरेली (उत्तर प्रदेश)
Comments
Post a Comment