राहु देवता का चमत्कारी कवच, जीवन के सभी दुख दूर कर देता है।
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राहू देवता का चमत्कारी कवच, हर प्रकार से तरक्की और उन्नति देता है।
कहा जाता है कि, जो कोई ग्रह नहीं दे सकता, वह सब कुछ राहु देने में सक्षम है, राहु यदि मेहरबान हो जाएं तो, आदमी को फकीर से राजा की ताकत रखते हैं, राहु ग्रह कवच स्तोत्र का पाठ राहु ग्रह को शांत करने के सबसे सरल उपायों में से एक है। ज्योतिष शास्त्र की दृष्टि से यह एक छाया ग्रह है अर्थात आकाश में पिंड रूप में इसक अस्तित्व नहीं है। फिर भी इसके अपरिमित महत्व से इंकार नहीं किया जा सकता है। राहु कवच नित्यप्रति पढ़ने से जन्म-कुंडली में राहु द्वारा प्राप्त हो रहे खराब परिणाम बन्द हो जाते हैं और राहु ग्रह शुभ फल देने लगता है। जब भी कुंडली में राहु अनुकूल न हो तो राहु ग्रह कवच का पाठ करने से सभी परेशानियां दूर हो जाती हैं और धन, शक्ति, प्रसिद्धि, नाम और सभी सुख प्राप्त होते हैं।
अथ राहुकवचम्
अस्य श्रीराहुकवचस्तोत्रमंत्रस्य चंद्रमा ऋषिः ।
अनुष्टुप छन्दः । रां बीजं । नमः शक्तिः ।
स्वाहा कीलकम् । राहुप्रीत्यर्थं जपे विनियोगः ॥
प्रणमामि सदा राहुं शूर्पाकारं किरीटिन् ॥
सैन्हिकेयं करालास्यं लोकानाम भयप्रदम् ॥ १ ॥
निलांबरः शिरः पातु ललाटं लोकवन्दितः ।
चक्षुषी पातु मे राहुः श्रोत्रे त्वर्धशरीरवान् ॥ २ ॥
नासिकां मे धूम्रवर्णः शूलपाणिर्मुखं मम ।
जिव्हां मे सिंहिकासूनुः कंठं मे कठिनांघ्रीकः ॥ ३ ॥
भुजङ्गेशो भुजौ पातु निलमाल्याम्बरः करौ ।
पातु वक्षःस्थलं मंत्री पातु कुक्षिं विधुंतुदः ॥ ४ ॥
कटिं मे विकटः पातु ऊरु मे सुरपूजितः ।
स्वर्भानुर्जानुनी पातु जंघे मे पातु जाड्यहा ॥ ५ ॥
गुल्फ़ौ ग्रहपतिः पातु पादौ मे भीषणाकृतिः ।
सर्वाणि अंगानि मे पातु निलश्चंदनभूषण: ॥ ६ ॥
राहोरिदं कवचमृद्धिदवस्तुदं यो ।
भक्ता पठत्यनुदिनं नियतः शुचिः सन् ।
प्राप्नोति कीर्तिमतुलां श्रियमृद्धिमायु
रारोग्यमात्मविजयं च हि तत्प्रसादात् ॥ ७ ॥
॥ इति श्रीमहाभारते धृतराष्ट्रसंजयसंवादे द्रोणपर्वणि राहुकवचं संपूर्णं ॥
मैं राहु को सदैव नमस्कार करता हूँ, जिसका मुकुट पंखे के समान है। वह सिहिका यानी शेरनी का बेटा है। वह लोगों की परेशानियां दूर करते हैं।
मेरे सिर की रक्षा नीलांबर द्वारा की जाए। लोकवंदिता मेरे मस्तक की रक्षा करें। मेरी आँखों की राहु से रक्षा हो। मेरे कानों को अर्धशरीरवन (वह, जिसका केवल शरीर है और कोई सिर नहीं है) द्वारा संरक्षित किया जाए।
धूम्रवर्ण (जिसका शरीर धुएँ के रंग का हो) मेरी नाक की रक्षा करें। मेरे चिमटे की रक्षा शेरनी के बेटे द्वारा की जाए। कथिनाघृका से मेरे कंठ की रक्षा हो।
मेरी भुजाओं की रक्षा नाग देवता करें। मेरे हाथों को नीलामाल्याम्बरा (जिसने नीले रंग की माला और नीले वस्त्र पहने हैं) द्वारा संरक्षित किया जाए। मेरी कुक्षि की रक्षा विधुन्तुदा (राहु चंद्रमा का नाश करने वाला है, इसलिए उसे विधुंतुड कहा जाता है) करें।
मेरी कमर की रक्षा विकटा द्वारा की जाए। सुरपूजिता (जिसकी देवताओं द्वारा पूजा की जाती है) से मेरे स्तन की रक्षा हो। मेरे घुटनों की रक्षा स्वभानु द्वारा की जाए। मेरी जाँघ जड्याहा द्वारा सुरक्षित रहे।
मेरे टखने की रक्षा ग्रहपति द्वारा की जाए। भीषणाकृति मेरे चरणों की रक्षा करें। मेरे शरीर के अन्य सभी अंग नील, चंदन भूषणा द्वारा सुरक्षित रहें।
जो कोई भी प्रतिदिन भक्ति और विश्वास के साथ इस राहु कवचम का पाठ करता है, उसे राहु भगवान के आशीर्वाद से धन, प्रसिद्धि और नाम, लंबे स्वस्थ जीवन और आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त होगा।
राहु कवच के क्या फायदे हैं?
राहु कवच एक शक्तिशाली महाकवच है, इस कवच का पाठ करने से व्यक्ति की जन्मकुंडली में राहु ग्रह के कारण बने सभी दोष जैसे, राहु महादशा दोष, काल सर्प दोष, दारिद्रता दोष, सूर्य ग्रहण दोष आदि ठीक होने लगते हैं।
राहु कौन सी बीमारी देता है?
ज्योतिष के अनुसार, राहु त्वचा और मुख के गंभीर रोग, मूत्र रोग, बवासीर, पेट संबंधी समस्याएँ, बाल झड़ने, नाखून टूटना, मानसिक रोग जैसे डिप्रेशन और भ्रम, तथा असाध्य बीमारियाँ ( कैंसर ) देता है। राहु अक्सर उन बीमारियों से जुड़ा होता है जिनका पता लगाना मुश्किल होता है या जिनके कारण का पता नहीं चल पाता।
क्या खाने से राहु मजबूत होता है?
राहु को मजबूत करने के लिए आप मशरूम, कॉफी और मसालेदार स्नैक्स जैसे विदेशी या अपारंपरिक खाद्य पदार्थों का सेवन कर सकते हैं, लेकिन संयम महत्वपूर्ण है। इसके अतिरिक्त, कुत्ते को रोटी खिलाना, तुलसी के पत्ते खाना, फास्ट फूड से परहेज करना और गरीबों व जरूरतमंदों की मदद करना भी राहु को शुभ बनाने में सहायक हो सकता है।
राहु को खुश करने के लिए क्या पहने?
राहु को प्रसन्न करने के लिए आप गोमेद रत्न (हेसोनाइट) या चांदी धारण कर सकते हैं, और इसके साथ ही सफेद चंदन का प्रयोग, इत्र लगाना, तुलसी की माला पहनना (नियमों के साथ) या नीले वस्त्र पहनना जैसे उपाय किए जाते हैं, लेकिन कोई भी रत्न या उपाय करने से पहले किसी योग्य ज्योतिषी से कुंडली विश्लेषण करवाना ज़रूरी है, क्योंकि गलत रत्न हानि पहुंचा सकता है।
राहु का शक्तिशाली उपाय क्या है?
गुड़ और तांबा दान करें, जरूरतमंद लोगों या मंदिरों में गुड़, तांबे की वस्तुएं या भोजन दान करने से राहु को शांत करने में मदद मिलती है। आवारा पशुओं को भोजन कराएं, कुत्तों, कौवों या भूखे लोगों को भोजन कराना राहु के नकारात्मक प्रभावों को कम करने का एक और सरल और प्रभावी तरीका है।
राहु के लिए कौन सा दान करना चाहिए?
दद्याच्छीशक कृष्ण धान्यवसनं राहु ग्रह प्रीतये ।।
अमृत कुम्भ ग्रन्थ में बताया है कि, राहु के अशुभ होने पर सूप, खड्ग, सोने का सर्प, सात अन्न व फल, पेठा, तिल, चावल, नमक, कस्तूरी, सरसों, नारियल, जूता, गोमेद, शय्या, शीशा, काले धान्य व कपड़ा का दान करने से राहु का दोष नष्ट होता है।
राहु की उंगली कौन सी है?
राहु – गोमेद उंगली: मध्यमा धातु: पंचधातु या चांदी पहनने का दिन: शनिवार या राहु काल में मंत्र:--- ॐ रां राहवे नमः लाभ:--- भ्रम, मानसिक व्याधियाँ, कोर्ट केस, अचानक लाभ विज्ञान:--- विद्युत चुम्बकीय प्रभावों से रक्षा करता है।
राहु को नारियल से कैसे ठीक करें?
राहु दोष को दूर करने का एक और कारगर उपाय है नदियों या झरनों जैसे बहते पानी में नारियल बहाना, बुधवार या शनिवार को नदी किनारे नारियल फोड़ें और उसका जल राहु को अर्पित करें, साथ ही मन ही मन भय को त्यागें और एकाग्रता के लिए प्रार्थना करें।
धन के लिए राहु को कैसे सक्रिय करें?
राहु ऊर्जा को सक्रिय करने के लिए, इस शक्तिशाली मंत्र का प्रतिदिन पूर्ण श्रद्धापूर्वक जाप करें: -- “ॐ सिंहिका पुत्राय नमः” यह मंत्र आपके कर्मों को राहु के दिव्य कंपन के साथ संरेखित करता है और धन, सफलता और परिवर्तन को आकर्षित करना शुरू करता है।
राहु को प्रसन्न करने के लिए राहु की माता के साथ निम्नलिखित मंत्र का जाप करें राहु देवता अपनी माता से बहुत प्यार करते हैं जो उनकी आराधना करता है उसको हमेशा राहु देवता का आशीर्वाद प्राप्त रहता है।
"ॐ सिंहिका पुत्राय नमः"
एक शक्तिशाली मंत्र है जिसे मुख्य रूप से राहु ग्रह को शांत करने, उसके अशुभ प्रभावों को कम करने और शुभ फल पाने के लिए जपा जाता है, जिससे जीवन से भय और मानसिक चिंताएँ दूर होती हैं; इस मंत्र का जाप 108 बार शाम के समय करने से राहु से जुड़े कष्टों का निवारण होता है।
मंत्र का अर्थ और उद्देश्य:--
सिंहिका: --यह राहु की माता का नाम है, जो पौराणिक कथाओं में एक राक्षसी थी, और इसी कारण राहु को सिंहिका पुत्र कहा जाता है।
पुत्राय ---: पुत्र के लिए।
नमः --: नमस्कार/प्रणाम।
संपूर्ण अर्थ: "सिंहिका के पुत्र (राहु) को नमस्कार है"।
लाभ:--राहु के अशुभ प्रभावों से मुक्ति, भय का नाश, मानसिक शांति, और जीवन में आने वाली बाधाओं का समाधान हो जाता है।
जाप विधि:--
समय:-- शाम के समय (साय काल)।
संख्या:-- प्रतिदिन 108 बार।
कैसे करें:--रुद्राक्ष की माला का प्रयोग कर सकते हैं, जिससे एकाग्रता बढ़ती है और मंत्र का प्रभाव बढ़ता है.
यह मंत्र विशेष रूप से ज्योतिषीय उपायों और ग्रहों को प्रसन्न करने के लिए प्रयोग किया जाता है।
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अनिल सुधांशु
ज्योतिषाचार्य
नीम करौली आश्रम कैंची धाम नैनीताल (उत्तरांचल)
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