शुक्र कवच सभी प्रकार के भौतिक सुख और ऐश्वर्य प्रदान करता है।

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शुक्र ग्रह कवच का नियमित पाठ जीवन में प्रेम सौंदर्य भोग कला सुख समृद्धि और ऐश्वर्य प्रदान करता है।

शुक्र ग्रह, जो जीवन में प्रेम, सौंदर्य, भोग, कला और समृद्धि का कारक माना जाता है, जब अशांत होता है तो जीवन असंतुलित हो जाता है। ऐसे में एक ही उपाय है – शुक्र ग्रह कवच। इस दिव्य कवच का नियमित पाठ आपके जीवन में खोई हुई मिठास, आकर्षण और वैभव को पुनः ला सकता है।

 शुक्र देवता सभी प्रकार के सुख एवं वैभव देने वाले हैं, शुक्र की बिना कृपा के भौतिक सुखों की प्राप्ति नहीं होती। 

ज्योतिष शास्त्र में नवग्रहों का महत्वपूर्ण स्थान है और प्रत्येक ग्रह हमारे जीवन पर गहरा प्रभाव डालता है। शुक्र ग्रह को सौंदर्य, प्रेम, वैवाहिक सुख, ऐश्वर्य, धन, कला और मनोरंजन का कारक माना जाता है। यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में शुक्र ग्रह अशुभ स्थिति में हो या नीच का हो, तो उसके जीवन में आर्थिक तंगी, वैवाहिक समस्याएँ और भोग-विलास में कमी आ सकती है। शुक्र ग्रह से जुड़े दोषों को दूर करने के लिए शुक्र ग्रह कवच का पाठ अत्यंत प्रभावी माना जाता है।

शुक्र ग्रह कवच श्लोक

मृणालकुन्देन्दुषयोजसुप्रभं पीतांबरं प्रस्रुतमक्षमालिनम् ।
समस्तशास्त्रार्थनिधिं महांतं ध्यायेत्कविं वांछितमर्थसिद्धये।।

ॐ शिरो मे भार्गवः पातु भालं पातु ग्रहाधिपः ।
नेत्रे दैत्यगुरुः पातु श्रोत्रे मे चन्दनदयुतिः ॥
पातु मे नासिकां काव्यो वदनं दैत्यवन्दितः ।
जिह्वा मे चोशनाः पातु कंठं श्रीकंठभक्तिमान् ॥
भुजौ तेजोनिधिः पातु कुक्षिं पातु मनोव्रजः ।
नाभिं भृगुसुतः पातु मध्यं पातु महीप्रियः॥
कटिं मे पातु विश्वात्मा ऊरु मे सुरपूजितः ।
जानू जाड्यहरः पातु जंघे ज्ञानवतां वरः ॥
गुल्फ़ौ गुणनिधिः पातु पातु पादौ वरांबरः।
सर्वाण्यङ्गानि मे पातु स्वर्णमालापरिष्कृतः ॥
य इदं कवचं दिव्यं पठति श्रद्धयान्वितः ।
न तस्य जायते पीडा भार्गवस्य प्रसादतः ॥

शुक्र ग्रह कवच के लाभ:--

आर्थिक समृद्धि में वृद्धि: शुक्र ग्रह को धन, वैभव और विलासिता का प्रतीक माना जाता है। इसका कवच नियमित रूप से पढ़ने से व्यक्ति की आर्थिक स्थिति मजबूत होती है और धन की आवक बनी रहती है।

वैवाहिक जीवन में सुख और सौहार्द: जिन लोगों के दांपत्य जीवन में कलह, असंतोष या तलाक जैसी समस्याएँ आ रही हों, उन्हें शुक्र ग्रह कवच का पाठ अवश्य करना चाहिए। इससे पति-पत्नी के बीच प्रेम और सामंजस्य बढ़ता है।

स्वास्थ्य में सुधार: शुक्र ग्रह से संबंधित बीमारियाँ, जैसे प्रजनन संबंधी विकार, त्वचा रोग, मधुमेह और हार्मोनल असंतुलन को ठीक करने में यह पाठ सहायक होता है।

कलात्मक और रचनात्मक क्षेत्रों में सफलता: यदि आप फिल्म, संगीत, नृत्य, लेखन, पेंटिंग या अन्य कलात्मक क्षेत्रों में करियर बना रहे हैं, तो शुक्र ग्रह कवच का पाठ आपको प्रसिद्धि और सफलता दिला सकता है।

शारीरिक आकर्षण और प्रभाव शीलता में वृद्धि: शुक्र ग्रह सुंदरता और आकर्षण का कारक है। इसका कवच पढ़ने से व्यक्ति का व्यक्तित्व निखरता है और उसका प्रभाव समाज में बढ़ता है।

प्रेम संबंधों में स्थिरता: प्रेम जीवन में यदि अस्थिरता है, प्रेमी-प्रेमिका में बार-बार झगड़े होते हैं या विवाह में बाधा आ रही है, तो शुक्र ग्रह कवच का पाठ अत्यंत लाभकारी होता है।

विपरीत परिस्थितियों से बचाव: जिन लोगों की कुंडली में शुक्र ग्रह कमजोर है या शुक्र से संबंधित दोष (शुक्र दोष, कालसर्प दोष, ग्रहण दोष आदि) हैं, उनके लिए यह कवच सुरक्षा कवच का कार्य करता है।

शुक्र ग्रह को इन अन्य उपायों से भी मजबूत करें।

रुद्राक्ष धारण करें- छह मुखी रुद्राक्ष शुक्र ग्रह को बल प्रदान करता है।
गुरुजनों और महिलाओं का सम्मान करें- यह शुक्र ग्रह को बलवान बनाता है।
संगीत और कला का अभ्यास करें- इससे शुक्र की कृपा बनी रहती है।
अश्लीलता और नकारात्मक विचारों से बचें- यह शुक्र दोष को कम करता है।
साफ-सफाई का ध्यान रखें- स्वच्छता शुक्र ग्रह को संतुष्ट करती है।

शुक्र ग्रह कवच का पाठ करने से जीवन में धन, सुख-समृद्धि, प्रेम और सफलता प्राप्त होती है। यह न केवल अशुभ शुक्र के प्रभावों को समाप्त करता है, बल्कि सकारात्मक ऊर्जा को भी आकर्षित करता है। यदि नियमित रूप से विधिपूर्वक इसका पाठ किया जाए, तो जीवन में खुशहाली बनी रहती है। इसलिए, जो लोग जीवन में शुक्र ग्रह से जुड़ी समस्याओं का सामना कर रहे हैं, उन्हें श्रद्धा और विश्वास के साथ शुक्र ग्रह कवच का पाठ अवश्य करना चाहिए।

कैसे पता करें कि, शुक्र मजबूत है या कमजोर?

शुक्र मजबूत है या कमजोर, यह जानने के लिए अपने जीवन में सुख-सुविधा, प्रेम, आकर्षण, रिश्ते, कला और स्वास्थ्य पर ध्यान दें; मजबूत शुक्र व्यक्ति को आकर्षक, सफल और सुखी बनाता है (जैसे अच्छा वैवाहिक जीवन, भौतिक सुख, यश), जबकि कमजोर शुक्र रिश्तों में अस्थिरता, भौतिक सुखों की कमी, सौंदर्य में कमी और स्वास्थ्य समस्याओं (जैसे त्वचा) का कारण बन सकता है।

शुक्र खराब होने के क्या लक्षण हैं?

शुक्र खराब होने के लक्षणों में जीवन में सुख-शांति की कमी, प्रेम और दांपत्य जीवन में अशांति, आकर्षण का कम होना, त्वचा और आँखों की समस्याएं, और आर्थिक तंगी शामिल हैं; व्यक्ति दिखावे में अधिक लिप्त रहता है पर फिर भी असंतुष्ट रहता है, जिससे रिश्तों और करियर में बाधाएँ आती हैं।

शुक्र कौन सी बीमारी देता है?

शुक्र से संबंधित प्रमुख स्वास्थ्य समस्याओं में डायबिटीज, किडनी रोग, प्रोस्टेट समस्याएं, यौन रोग और आंखों की बीमारियां शामिल हैं।

शुक्र देव के प्रमुख मंत्र:---

शुक्र बीज मंत्र: ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः।
सरल मंत्र: ॐ शुं शुक्राय नमः !!
शुक्र गायत्री मंत्र: ॐ भृगुराजाय विद्महे दिव्य देहाय धीमहि तन्नो शुक्र प्रचोदयात् !!
स्तोत्र मंत्र: ॐ हिमकुंदमृणालाभं दैत्यानां परमं गुरुम्, सर्वशास्त्रप्रवक्तारं भार्गवं प्रणमाम्यहम् !!

जप के नियम और उपाय:---
समय: मंत्र का जाप शुक्रवार की सुबह या शाम को करें।
जाप संख्या: प्रतिदिन 108 बार या 16,000 बार का अनुष्ठान कर सकते हैं।

#अपनी जन्म कुंडली दिखाएं और जीवन में चल रही समस्याओं से छुटकारा पाएं, हमारा व्हाट्सएप नंबर 9458064249 आपकी सेवा में उपलब्ध है।

अनिल सुधांशु 
ज्योतिषाचार्य 
नीम करौली आश्रम कैंची धाम नैनीताल (उत्तरांचल)

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