बिष योग जीवन को नर्क बना देता है।
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पिशाच योग, राहु शनि के मिलन से बनता है, यह महा विनाशक योग, जो मृत्यु तुल्य कष्ट देता है।
राहु और शनि की युति से पिशाच योग बनता है, जिसके नकारात्मक प्रभावों में मानसिक कष्ट, शारीरिक रोग, भ्रम, आर्थिक नुकसान, और जीवन में अस्थिरता शामिल हैं। इस योग के प्रभाव को कम करने के लिए भगवान शिव की पूजा, रुद्राभिषेक, हनुमान चालीसा का पाठ, शनि और राहु के ग्रहों की शांति के लिए उपाय, जैसे दान और पूजा-पाठ करना प्रभावी होता है।
पिशाच योग के प्रभाव:--
मानसिक परेशानी: --इस योग से व्यक्ति को मानसिक भ्रम, भय, और बेचैनी महसूस हो सकती है।
शारीरिक कष्ट:-- यह योग शारीरिक कष्टों और रोगों का कारण बन सकता है।
आर्थिक अस्थिरता:-- धन संबंधी बाधाएं, आर्थिक नुकसान, और कर्ज लेने की स्थिति पैदा हो सकती है, संबंधों में दरार: --घर-परिवार और व्यावसायिक साझेदारों के साथ संबंधों में मुश्किलें आ जाती हैं।
जीवन में उथल-पुथल: --जीवन में लगातार उठापटक और उतार-चढ़ाव बने रहते हैं।
अशुभ आदतें:-- कुछ मामलों में यह योग व्यक्ति को गलत या अनैतिक कामों की ओर धकेल सकता है।
शनि और राहु एक साथ हो तो क्या होता है?
शनि और राहु की युति से पिशाच योग (या श्रापित योग) बनता है, जिससे व्यक्ति को शारीरिक, मानसिक कष्ट, आर्थिक तंगी, और वैवाहिक जीवन में कलह जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
यह योग व्यक्ति के जीवन में नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है और अचानक दुर्घटनाएं, बीमारियां या करियर में रुकावटें लाता है। फल नहीं दे रहे हैं तो, यहां दिए जा रहे छोटे-छोटे उपाय आपको बड़ी राहत दे सकते हैं।
जब ये ग्रह अशुभ फल दे रहे हों। इसके लिए जरुरी है कि, पहले किसी विद्वान से ग्रहों की स्थिति का पता कर लिया जाए।
राहु केतु शनि के शांति उपाय:--
शनि -
शनिवार के दिन पीपल वृक्ष की जड़ पर तिल के तेल का दीपक जलाएं। शनिवार के दिन लोहे, चमड़े, लकड़ी की वस्तुएं एवं किसी भी प्रकार का तेल नहीं खरीदना चाहिए।
शनिवार के दिन बाल एवं दाढ़ी-मूँछ नहीं कटवाने चाहिए।भड्डरी को कड़वे तेल का दान करना चाहिए।
भिखारी को उड़द की दाल की कचोरी खिलानी चाहिए।
किसी दुःखी व्यक्ति के आंसू अपने हाथों से पोंछने चाहिए।
घर में काला पत्थर लगवाना चाहिए।
शनि के दुष्प्रभाव निवारण के लिए किए जा रहे उपायों हेतु शनिवार के दिन, शनि के नक्षत्र, पुष्य, अनुराधा, उत्तरा-भाद्रपद तथा शनि की होरा में अधिक शुभ होते हैं।
राहु-
ऐसे व्यक्ति को अष्टधातु का कड़ा दाहिने हाथ में धारण करना चाहिए।हाथी दांत का लाकेट गले में धारण करना चाहिए।
अपने पास सफेद चन्दन अवश्य रखना चाहिए। सफेद चन्दन की माला भी धारण की जा सकती है, जमादार को तम्बाकू का दान करना चाहिए।
दिन के संधिकाल में अर्थात सूर्योदय या सूर्यास्त के समय कोई महत्त्वपूर्ण कार्य नहीं करना चाहिए। यदि किसी अन्य व्यक्ति के पास रुपया अटक गया हो तो प्रातःकाल पक्षियों को दाना चुगाना चाहिए।
झूंठी कसम नही खानी चाहिए। राहु के दुष्प्रभाव निवारण के लिए किए जा रहे टोटकों हेतु शनिवार का दिन, राहु के नक्षत्र,आर्द्रा, स्वाती, शतभिषा तथा शनि की होरा में अधिक शुभ होते हैं।
केतु-
भिखारी को दो रंग का कम्बल दान देना चाहिए। नारियल में मेवा भरकर भूमि में दबाना चाहिए। बकरी को हरा चारा खिलाना चाहिए।ऊंचाई से गिरते हुए जल में स्नान करना चाहिए।
घर में दो रंग का पत्थर लगवाना चाहिए।
चारपाई के नीचे कोई भारी पत्थर रखना चाहिए।
किसी पवित्र नदी या सरोवर का जल अपने घर में लाकर रखना चाहिए।
केतु के दुष्प्रभाव निवारण के लिए किए जा रहे टोटकों हेतु मंगलवार का दिन, केतु के नक्षत्र,अश्विनी, मघा तथा मूल तथा मंगल की होरा में अधिक शुभ होते हैं।
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अनिल सुधांशु
ज्योतिषाचार्य
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