कुलदेवी कुलदेवता के आशीर्वाद के बिना हमारा कोई भी पूजा पाठ, दान पुण्य सफल नहीं होगा।
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हमारे जीवन में कुलदेवी कुल देवता का महत्व उनके आशीर्वाद के बिना तरक्की उन्नति एवं वंश वृद्धि नहीं होती हैं।
जब तक आपको कुलदेवी कुलदेवता का आशीर्वाद प्राप्त नहीं होगा तब तक आपका पूजा पाठ जप तप दान पुण्य सफल नहीं होगा,वर्तमान समय में बहुत से लोगों को यह नहीं पता हमारे कुलदेवी कुलदेवता कौन है, इस स्थिति में हमारे परिवार की रक्षा कौन करेगा, हमारे जीवन में कुलदेवी और कुलदेवता का स्थान सर्वोच्च और रक्षक के रूप में है। ये न केवल परिवार की सुख-समृद्धि, वंश वृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा के स्रोत होते हैं, बल्कि जीवन की सभी कठिनाइयों और नकारात्मक बाधाओं से रक्षा भी करते हैं। वे हमारे पूर्वजों की परंपराओं से हमें जोड़कर रखते हैं और उनकी पूजा करने से मानसिक शांति व आध्यात्मिक उन्नति मिलती है।
कुलदेवी-कुलदेवता का महत्व।
कुलदेवी/कुलदेवता को एक प्रकार का परिवार के लिए दिव्य सुरक्षा चक्र माना जाता है, जो बुरी ऊर्जाओं से रक्षा करते हैं, समृद्धि और सुख, इन देवी-देवताओं की पूजा से घर में आर्थिक समृद्धि, बरकत और शांति बनी रहती है।
संतान और वंश वृद्धि, मान्यता है कि, कुलदेवी की कृपा से वंश आगे बढ़ता है और संतान संबंधी बाधाएं दूर होती हैं, पूर्वजों का आशीर्वाद, ये पूर्वजों द्वारा पूजे जाते रहे हैं, इसलिए इनकी पूजा से पूर्वजों (पितरों) का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है।
संस्कार और परंपरा:-- विवाह, मुंडन या नए घर में प्रवेश (गृह प्रवेश) जैसे महत्वपूर्ण मौकों पर कुलदेवी/कुलदेवता की पूजा की जाती है, जो हमारी परंपरा को पीढ़ी दर पीढ़ी बनाए रखती है, मनोकामना पूर्ण-- कुलदेवी-कुलदेवता शीघ्र प्रसन्न होकर वंशजों की हर मनोकामना पूरी करते हैं।
हमारे जीवन में कुलदेवी और कुलदेवता का स्थान सर्वोच्च और रक्षक के रूप में है।
ये न केवल परिवार की सुख-समृद्धि, वंश वृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा के स्रोत होते हैं, बल्कि जीवन की सभी कठिनाइयों और नकारात्मक बाधाओं से रक्षा भी करते हैं। वे हमारे पूर्वजों की परंपराओं से हमें जोड़कर रखते हैं और उनकी पूजा करने से मानसिक शांति व आध्यात्मिक उन्नति मिलती है,परिवार की कुलदेवी/कुलदेवता को एक प्रकार का दिव्य सुरक्षा चक्र माना जाता है, जो बुरी ऊर्जाओं से रक्षा करते हैं।
इन देवी-देवताओं की पूजा से घर में आर्थिक समृद्धि,वंश वृद्धि, खुशहाली, बरकत और शांति बनी रहती है।
मान्यता है कि, कुलदेवी की कृपा से वंश आगे बढ़़ता है और संतान संबंधी बाधाएं दूर होती हैं, पूर्वजों द्वारा पूजे जाते रहे हैं, इसलिए इनकी पूजा से पूर्वजों (पितरों) का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है, संस्कार और परंपरा, विवाह, मुंडन या नए घर में प्रवेश (गृह प्रवेश) जैसे महत्वपूर्ण मौकों पर कुलदेवी/कुलदेवता की पूजा की जाती है, जो हमारी परंपरा को पीढ़ी दर पीढ़ी बनाए रखती है।
मनोकामना पूर्ण, कुलदेवी-कुलदेवता शीघ्र प्रसन्न होकर वंशजों की हर मनोकामना पूरी करते हैं।
घर में कुलदेवी/कुलदेवता का स्थान कहाँ होता है?
घर में कुलदेवी/कुलदेवता का स्थान, कुछ परिवारों में उनकी मूर्ति या चित्र पूजाघर में स्थापित होती है, जहाँ अन्य देवी–देवताओं की भी आराधना होती है। कुछ परिवारों में उन्हें घर के बाहरी भाग या किसी विशेष कक्ष में रखा जाता है, जहाँ केवल उनकी पूजा-अर्चना की जाती है।
कुलदेवी को प्रसन्न करने के क्या उपाय हैं?
कुलदेवता की पूजा करते समय शुद्ध देसी घी का दीया, धूप, अगरबत्ती, चंदन और कपूर जलाना चाहिए साथ ही प्रसाद स्वरूप भोग भी लगाना चाहिए। कुलदेवता को चंदन और चावल का टीका अर्पण करते समय ध्यान रखें की टूटे हुए या खंडित चावल ना हो। कुलदेवता को हल्दी में लिपटे पीले चावल पानी में भिगोकर अर्पण करना शुभ माना जाता है।
मुझे कैसे पता चलेगा कि, मेरी कुलदेवी कौन है?
कुलदेवी (या कुलदेवता) का पता लगाने के लिए अपने बड़े-बुजुर्गों, परिवार की परंपराओं और पैतृक गांव/मंदिरों से पूछना सबसे अच्छा तरीका है, आप अपनी जन्मकुंडली या गोत्र का सहारा ले सकते हैं, और यदि यह जानकारी उपलब्ध न हो तो 'श्री कुलदेवता' लिखकर पूजा करने का एक सरल प्रयोग भी कर सकते हैं, जिससे वे स्वयं प्रकट हो सकते हैं।
कुलदेवी रूठ जाए तो कैसे मनाए?
रूठी हुई कुलदेवी को मनाने के लिए श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना, मंत्र जाप (जैसे ॐ कुलदैव्यै नमः), व्रत, और कुलदेवी के स्थान पर जाकर माफ़ी मांगना जैसे उपाय किए जाते हैं; घर में घी का दीपक जलाएं, पीले चावल और चंदन चढ़ाएं, और परिवार के साथ आरती कर प्रसाद घर में बांटें, खासकर मासिक अष्टमी या शुक्रवार को पूजा करें और अपनी गलती स्वीकारते हुए उनसे कृपा की प्रार्थना करें।
कुलदेवी के नाराज होने के क्या लक्षण हैं?
अगर घर में ये संकेत दिखाई दे रहे हैं तो, इसका मतलब घर के पितृ आपसे नाराज हैं, कुलदेवता के नाराज होने का दूसरा सबसे बड़ा संकेत परिवार के सदस्यों को बार-बार बीमार पड़ना, सर्जरी, दुर्घटनाएं सभी प्रकार की तरक्की उन्नति का रुक जाना, संतान न होना, नौकरी, रोजी रोजगार व्यापार खत्म हो होना, इस तरह के संकेत ईश्वरीय असुरक्षा की ओर इशारा करते हैं।
कुलदेवी की प्रार्थना कैसे करें?
ॐ अद्य अमुक गोत्रीयः (अपना गौत्र बोलें), अमुक शर्माऽहं (नाम बोलें) स्व कुलदेवता प्रीत्यर्थ सकल मनोकामना पूर्ति निमित्तं कुलदेवता साधनां सम्पत्स्ये। जल को भूमि पर छोड़ दें, फिर कुलदेवता यंत्र को जल से धोकर पोछ दें और किसी पात्र में पुष्प का आसन देकर स्थापित करें। फिर यंत्र पर कुंकुम, अक्षत व नैवेद्य चढ़ाएं।
घर की कुलदेवी को कैसे प्रसन्न करें?
- कुलदेवी या कुलदेवता को प्रातःकाल या सायंकाल के समय पूजा जाता है। राहुकाल, गुलिक काल, यमघंटा काल जैसे अशुभ समय में उनका आवाहन नहीं करना चाहिए। - कुलदेवी या कुलदेवता को उनकी पसंद के भोग, फूल, वस्त्र, आभूषण, धूप, दीप, नैवेद्य आदि अर्पित करना चाहिए। उनकी पसंद के बारे में आप अपने कुल के वृद्धों से पूछ सकते हैं।
कुलदेवी को जागृत करने का मंत्र क्या है?
#कुलदेवी / #कुलदेवता #का #मंत्र "ॐ कुलदैव्यै नमः" या "ॐ कुलदेवतायै नमः" है ||ॐ कुलदैव्यै नमः|| यह मंत्र विशेष रूप से कुल देवी (परिवार की देवी) को समर्पित है। ||ॐ कुलदेवतायै नमः|| यह मंत्र कुल देवता (परिवार के देवता) को समर्पित है।
अपनी कुलदेवी को कैसे प्रसन्न करें?
कुलदेवी कृपा प्राप्ति साधना – यह साधना शुक्ल पक्ष कि अष्टमी , 12 , 13, 14 तिथि को करनी है | किसी भी दिन शुक्रवार शाम को , खीर बनाओ ( चाहे 100 ग्राम चावल की ) संध्या के समय ,यानि शाम सवा सात बजे या उसके बाद | घर में जहाँ पूजा करते हो वहां पर एक घी का दीपक प्रज्वलित करो , उसकी लौ के पास अंगारा रखो ,अंगारे पर चुटकी भर खीर चढ़ानी चाहिए।
कुलदेवी की स्तुति इस प्रकार करें।
यदि विशेष मंत्र पता न हो, तो भी माता को याद करते हुए "हे कुलदेवी मैया मेरी रक्षा करो" कहकर प्रार्थना करें.
कुलदेवी कवच: यह मंत्र (ॐ ह्रीं कुल देवतायै मम् अनिष्टं निवारय... साधय धन धान्य समृद्धि मय देही...) रक्षा और समृद्धि के लिए अत्यंत फलदायी है.
सन पर बैठकर, सिंदूर/हल्दी अर्पित कर जपना चाहिए।
कुलदेवी शाबर मंत्र (आवाहन व सुरक्षा)
"ॐ कुलदेवी! (देवी का नाम लें) आद्य आदि कुल की माता, मेरे परिवार की रक्षा कर, अनिष्ट निवारण कर, धन-धान्य समृद्धि दे, सदा प्रसन्न रहे। ॐ ह्रीं ह्रीं फट स्वाहा।"
कुलदेवता शाबर मंत्र।
"ॐ श्री कुलदेवताय नमः, कुल के स्वामी, सुख-संपत्ति दाता, सकल मनोरथ सिद्ध करें, हम कुल-परंपरा की शरण में हैं।"
प्रमुख बीज मंत्र और मंत्र:--
कुलदेवी मंत्र: ॐ ह्रीं श्रीं कुलदेव्यै नमः या ॐ कुलदैव्यै नमः
कुलदेवता मंत्र: ॐ कुलदेवतायै नमः या ॐ कुलदेवताय नमः
सरल मंत्र: ॐ श्रीं [कुलदेवी/देवता का नाम] कुलदैव्यै/कुलदेवतायै नमः।
पूजा विधि।
समय:-- सुबह या शाम के समय, या विशेषकर नवरात्रि/दिवाली पर।
विधि:-- घर में कुलदेवी/देवता के स्थान पर घी का दीपक जलाएं, लाल पुष्प, सिंदूर और लाल चुनरी (देवी के लिए) अर्पित करें।
साधना:-- रुद्राक्ष या लाल मूंगे की माला से 3, 7 या 11 माला जप करें।
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अनिल सुधांशु
ज्योतिषाचार्य
नीम करौली आश्रम कैंची धाम नैनीताल (उत्तरांचल)
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