शत्रुओं से छुटकारा पाने के लिए करें मां बगलामुखी का लाल और काली मिर्च से हवन.

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माँ बगलामुखी काली और लाल मिर्च का हवन - हर तरह के ज्ञात- अज्ञात शत्रुओं का विनाश कर देता है, जाने विधि और लाभ---

 क्या सचमुच शत्रुओं ने आपका जीना मुश्किल कर दिया है?

 किसी भी स्थिति में आपको चैन से रहने नहीं दे रहे हैं, क्या शत्रु आपको नुकसान पहुँचाने की कोशिश कर रहा है? क्या कोई आपके खिलाफ़ साजिश रच रहा है, कोर्ट केस में उलझा रहा है, या व्यापार में रोडे अटका हुआ है? नौकरी नहीं करने दे रहा है, पूरे घर को तंत्र-मंत्र में उलझा रखा है, पूरे घर को रोगी और बीमार कर रखा है, पैसा आने के सभी साधन रोक दिए हैं, यदि हाँ, तो तंत्र शास्त्र में एक अत्यंत प्रभावशाली और शीघ्र फलदायक उपाय है.

 मां बगलामुखी की शरण में आए और हर तरह की मुश्किलों से छुटकारा पाएं. पूरी श्रद्धा और विश्वास से करें, मां बगलामुखी का हवन और निश्चित हो जाएं.

*** माँ बगलामुखी के घर में लाल मिर्च की आहुति से शत्रु की शक्ति, वाणी और बुद्धि का स्तंभन होता है, कोर्ट कचहरी के मामलों में जीत मिलती है, हर तरह के शत्रुओं को पूरी तरह से विनाश हो जाता है.

माँ बगलामुखी - शत्रुनाशिनी देवी का परिचय:--

माँ बगलामुखी दश महाविद्याओं में अष्टम महाविद्या हैं। 'बगला' शब्द संस्कृत के 'वल्गा' से बना है, जिसका अर्थ है लगाम् - अर्थात् वह शक्ति जो शत्रु को लगती है, उसे रोकती है। माँ का एक और नाम है 'पीताम्बरा माता', क्योंकि उनका पूरा रंग पीला है।

माँ बगलामुखी का स्वरूप अत्यंत तीव्र है:---

 - *** वे अपने बाएँ हाथ से शत्रु की जिह्वा पकड़ती हैं और दाहिने हाथ से मुद्गर (गदा) से प्रहार करती हैं। यह प्रारूप इस बात का प्रतीक है कि माँ शत्रु की वाणी और बुद्धि दोनों एक साथ नष्ट हो जाती हैं।

***तंत्र शास्त्र के अनुसार षट्कर्म (शांति, वशीकरण, स्तम्भन, विद्वेषण, उच्चाटन और मारण) में स्तम्भन से माँ बगलामुखी की साधना सर्वोत्तम मानी जाती है।

अग्नि और लाल मिर्च और काली मिर्च का संयोग - दार्शनिक वर्णन:--

तंत्र शास्त्र में प्रत्येक सामग्री एक विशिष्ट तत्व और ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करती है। लाल मिर्च 'अग्नि तत्व' और 'मारक शक्ति' का प्रतीक है। 

जब अग्नि (हवन कुंड) में काली मिर्च की आहुति दी जाती है तो:---
⦁ काली मिर्च का तीव्र उग्र वातावरण में एक विशेष शीत (कंपन) उत्पन्न होता है
⦁ मां बगलामुखी के मंत्रों के साथ यह शक्तिशाली शत्रु की नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट करता है
⦁ अग्नि में आहुति से मंत्रशक्ति में कई प्रकार की आहुति दी जाती है - यह मूल मंत्र है
⦁ काली मिर्च की 'उष्णता' शत्रु की शक्ति और औषधि की 'शीतलता' को नष्ट करती है

यही कारण है कि, राक्षस नाश में काजल, नल और स्तुति के लिए विशेष रूप से काली मिर्च का घर/मिर्ची यज्ञ किया जाता है।

शत्रु स्तम्भन - शत्रुओं को निष्क्रिय करना:--

यदि कोई व्यक्ति आपके खुले शत्रुओं को नुकसान पहुँचाने की कोशिश करता है, तो काली मिर्च से उसकी विचारधारा-समझ और कार्य करने की क्षमता स्तम्भ (रुक जाती है) हो जाती है। उनके षड्यंत्र स्वयंसिद्ध होकर उसी पर पलटवार बार करने लगते हैं 

कोर्ट-कचहरी और बैराज में विजय--

देश के बड़े-बड़े वकील और राक्षसबाज लोग मां बगलामुखी की शरण में आते हैं। और विरोधी पक्ष के वकील की बुद्धि भ्रमित हो जाती है, आपके सामने उनकी बोलती बंद हो जाती है, और न्यायालय में आपके पक्ष में परिस्थितियां अनुकूल होने हैं।
चुनाव में जीत:--
जगजाहिर सच यह है कि, राजनेता चुनाव से पहले मां बगलामुखी धाम में काली मिर्च बनवाते हैं। प्रतिद्वंद्वी की जनता में छवि अलग होती है और आपकी जीत सुनिश्चित हो जाती है.

व्यावसायिक विज्ञापनों और साजिशों से सुरक्षा:--
यदि आपके व्यापार को नुकसान पहुँचाया जा रहा है, तो मिर्ची हवन उसकी सारी चालें विफल कर देता है।

काला जादू और शैतान से मुक्ति:--
यदि किसी ने आप पर काला जादू किया है या काला जादू चलाया है तो, माँ बगलामुखी काली मिर्च का वह नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट करने में अत्यंत प्रभावशाली है। काली मिर्च की आहुति से काले जादू की ऊर्जा जल उत्पन्न होती है।

वाक सिद्धि और प्रभावशाली व्यक्तित्व वाली:--
काली मिर्च के स्वर केवल शत्रु के विरुद्ध नहीं हैं, यह साधक की अपनी वाणी को भी शक्तिशाली बनाता है। वकील, नेता, लेखक, शिक्षक - जो लोग वाणी से अपना काम करते हैं, वे इस घर से वाक सिद्धि प्राप्त करते हैं।

माँ बगलामुखी काली मिर्च की विधि पूरी क्या है?

संकल्प: --- यजमान का नाम, गोत्र, मन के साथ संकल्प। 
काली मिर्च वाले घर में शत्रु का नाम भी संकल्प लिया गया है।
गणपति पूजन:--- हर शुभ कार्य में प्रथम गणेश पूजन - घर में विघ्न न हो सके।
मां बगलामुखी की षोडशोपचार पूजा :-- पीले पुष्प, हल्दी, पीले चंदन से मां का पूजन।
आवास कुंड जलाना:-- आम या पीपल की लकड़ी से कुंड जलाना।
मंत्र जाप: ---बगलामुखी मूल मंत्र का जाप - सवा लाख या अन्य।
काली मिर्च की आहुति: --हर काली मिर्च पर मंत्र की आहुति एक-एक आहुति देना - यही इस घर का सबसे महत्वपूर्ण चरण है।
दशांश घर :--राहत जापे, उनका दसवाँ भाग घर - संपूर्ण सामग्री की आहुति।
पूर्णाहुति: घर का समापन - जय माता दी के उद्घोष के साथ।
तांत्रिक प्रयोग (रात्रिकाल):-- विशेष मामलों में रात्रि में शमशान या एकांत स्थान पर विशेष तांत्रिक क्रिया संपन्न होती है.
समय कितना लगता है?
सामान्य मिर्ची घर:---  3-4 घंटे, विशेष महा मिर्ची घर (101 ब्राह्मण): 6-8 घंटे:--- रात्रिकाल का प्रयोग जिसमें पूरी रात शामिल है.

 आहुति देने का मूल मंत्र:--

ॐ ह्लीं बगलामुखि सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिह्वां कीलय कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लीं ॐ स्वाहा। 

हवन से जुड़ी मुख्य बातें:---
सामग्री: --इस प्रयोग में आमतौर पर सूखी लाल या पीली मिर्च (108 या 1008 की संख्या में), हल्दी की गांठें, और सरसों के तेल का उपयोग किया जाता है। 
विधि:--- प्रत्येक मंत्र (स्वाहा) के साथ एक मिर्च अग्नि में डाली जाती है。
 
 बगलामुखी हवन:---

 (विशेष रूप से तांत्रिक शत्रु बाधा और नकारात्मक ऊर्जा निवारण के लिए) में लाल मिर्च और काली मिर्च की संख्या इस बात पर निर्भर करती है कि, आप किस उद्देश्य और संकल्प के साथ हवन कर रहे हैं।

यहाँ इसके प्रमुख नियम दिए गए हैं:---

 महाराणा प्रयोग में कुल आहुतियों की संख्या:---  सामान्यतः-- यह अनुष्ठान 108 आहुतियों (108 मिर्च) का होता है। बड़े अनुष्ठानों या मारण प्रयोगों में इसे 1,008 या 11,000 से लेकर 51,000 तक भी किया जाता है।

काली मिर्च का प्रयोग:--- काली मिर्च का इस्तेमाल मुख्य रूप से बाधाओं और शत्रुओं के शमन के लिए किया जाता है। आमतौर पर 108 काली मिर्च (सबूत) की आहुति दी जाती है।

लाल मिर्च (मिर्ची हवन):--- लाल मिर्च की उग्र और तीखी प्रकृति नकारात्मकता और शत्रु को जलाने का प्रतीक मानी जाती है। इसके लिए 108 सूखी लाल मिर्च (खड़ी साबुत) का प्रयोग किया जाता है। कई जगह "पीली मिर्च" को भी विशेष महत्व दिया जाता है।

#विशेष चेतावनी :-- उपरोक्त हवन किसी योग्य साधक या बांग्लामुखी के साधक से ही कराना चाहिए, क्योंकि यह बड़ा ही उग्र हवन होता है, जरा सी असाबधानी आपके लिए मृत्यु के द्वारा तक पहुंचा सकती है. पूजा आरंभ करने से पहले मां बगलामुखी कवच और स्त्रोत का पाठ करना चाहिए.

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 अनिल सुधांशु
 ज्योतिषाचार्य
°°°  नीम करोली आश्रम, कैंची धाम, नैनीताल (उत्तरांचल) 
°°°° बाबा अलखनाथ मंदिर, किला, बरेली (उत्तर प्रदेश)

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