राहु का जीवन पर शुभ एवं अशुभ प्रभाव.
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राहु का जीवन पर प्रभाव और उपाय. जहां शुभ राहु जातक को जमीन से आसमान में पहुंचा देता है, वही अशुभ राहू जातक को मिट्टी में मिला देता है.
वैदिक ज्योतिष में राहु एक विशेष ग्रह है, यह बहुत तीव्र गति से आपके जीवन में अपना असर दिखाता है । ज्योतिष शास्त्र में इसे बहुत मजबूत और अनिश्चित ग्रह माना जाता है, इसका महत्व आपके जीवन में बहुत ज्यादा बढ़ जाता जब इसकी महादशा या अंतर्दशा चल रही हो।
राहु का प्रभाव व्यक्ति की मन, भ्रम, अचानक बदलाव और जीवन में सुख-सम्पत्ति से जुड़ा होता है। शुभ राहु व्यक्ति को अचानक ऊंचाइयों पर ले जाता है, जबकि अशुभ राहु उसी ऊंचाई से नीचे लाने के लिए भी जाना जाता है। राहु के लक्षण और उपाय क्या हैं, राहु की महादशा के दौरान क्या सावधानियां बरतें, और राहु को शांत करने के लिये कौन-से घरेलू उपाय उपयोगी हैं।
ज्योतिष में राहु का प्रभाव
अवस्था प्रभाव और उपाय अशुभ राहु के लक्षण मानसिक अशांति, अचानक धन की हानि, अनिद्रा, भय तथा सही निर्णय न ले पाना । घर में अशांति और तनाव, राहु की महादशा का प्रभाव 18 वर्षों की महादशा होती है, जिसमें शुभ राहु इतनी तेज गति से सफलता देता है, जिसकी कोई सीमा नहीं होती है।
लेकिन अशुभ राहु असफलता, भटकाव और स्वास्थ्य में दिक्कत देता है.
नीच का राहु वृश्चिक राशि में नीच का राहु;-- गुप्त शत्रु, परिवार में कलह और मानसिक अशांति देता है साथ ही आपके कार्य में रुकावट भी देता है।
सटीक उपाय"ॐ रां राहवे नमः" मंत्र जाप, शनिवार को काले तिल / उड़द का दान, गोमेद रत्न धारण (ज्योतिषी के परामर्श के बाद) करें, एवं नियमित घरेलू उपाय।
अशुभ राहु के लक्षण: कैसे पहचानें?
जब जन्मकुंडली में राहु किसी ग्रह के साथ स्थित होता है तो, दोष उत्पन्न होता है, तथा राहु अगर आपकी कुंडली के महत्वपूर्ण भाव में स्थित हो या नीच का हो (वृश्चिक/धनु राशि में) स्थित हो -
तब नीचे दिए गए लक्षण स्पष्ट रूप से दिखते हैं:
अनिद्रा और दुःस्वप्न: -- बिना किसी कारण के रात को नींद न आना, बार-बार बुरे सपनों का दिखना।
अअस्पष्ट भय और चिंता: --किसी न किसी अज्ञात शंका में जीना, मन में बिना किसी कारण घबराहट रहना।
अचानक आर्थिक हानि: --धन का अचानक से नुकसान, व्यापार में धोखा या निवेश में नुकसान।
निर्णय-क्षमता में भ्रम:-- सही और गलत में अंतर न कर पाना, लोगों पर विश्वास न करना।
सामाजिक अपमान:-- बिना दोष के अपमान, झूठे आरोप और बदनामी।
स्वास्थ्य समस्याएं:-- मानसिक रोग, गैस और फेफड़ा की समस्याएं।
पारिवारिक कलह:-- घर में कलह, ससुराल पक्ष से विवाद और सम्बन्धों में कड़वाहट।
विशेषकर नीच या दोषयुक्त राहु के उपाय करना अत्यावश्यक हो जाता है.
क्योंकि नीच राशि में स्थित राहु गुप्त शत्रुओं को सक्रिय करता है और जातक के मनोबल को तोड़ता है। यदि आप उपरोक्त में से तीन या अधिक लक्षण अनुभव कर रहे हैं, तो तत्काल किसी विशेषज्ञ/ज्योतिषाचार्य को अपनी कुंडली दिखाएं।
राहु की महादशा और अंतर्दशा:--
वैदिक ज्योतिष में राहु की महादशा 18 वर्षों की होती है। यह एक बड़ी अवधि है, जिसमें राहु की महादशा के लक्षण और उपाय दोनों को ध्यान में रखकर जीवन जीना चाहिए।
राहु की महादशा के लक्षण:--
महादशा के प्रारम्भ में अक्सर जीवन में कई परिवर्तन देखने को मिलते हैं - नया स्थान, नई नौकरी, विवाह, या किसी प्रियजन/घर के बुजुर्ग की मृत्यु। यह बदलाव राहु की प्रकृति के अनुसार अच्छा या बुरा हो सकता है। मुख्य लक्षण इस प्रकार हैं:
जीवन में अचानक और अप्रत्याशित घटनाएं, विदेश यात्रा, स्थान परिवर्तन या यात्रा की संभावना, बार-बार काम का खराब होना या निर्णय का गलत होना, नए-नए विचारों का आना और अत्यधिक इच्छाओं में वृद्धि, मानसिक तनाव और मन में संदेह, सामाजिक जीवन में परेशानियां और गैर जरूरी मित्र-शत्रु।
राहु के राजयोग:--- जब राहु देता है, असाधारण सफलता.
यह कहना बिल्कुल अनुचित है कि, राहु सदा अशुभ होता है। जब राहु तृतीय, षष्ठ, दशम या एकादश भाव में स्थित हो, या केंद्र-त्रिकोण के स्वामियों से सम्बन्ध बनाए, तो वह राहु राजयोग का निर्माण करता है। इस स्थिति में राहु जातक को राजनीतिक ऊंचाई, विशाल धन-संचय, विदेशों में यश और अचानक सफलता प्रदान करता है। अनेक राजनेता, उद्योगपति और फिल्मी हस्तियां इसी राजयोग के कारण शिखर पर पहुंच पाते हैं।
राहु की महादशा के उपाय:-- व्यवहारिक निर्देश.
राहु की महादशा में निम्नलिखित उपाय अत्यंत प्रभावशाली सिद्ध होते हैं:--
राहु ग्रह की शांति:-- राहु ग्रह की वैदिक पद्धति से शांति करवाना चाहिए। प्रतिदिन "ॐ रां राहवे नमः" का जाप करें।
भैरव उपासना:-- भैरव राहु के इष्ट देव हैं ऐसे में भैरव की पूजा-अर्चना राहु की महादशा में अत्यंत लाभकारी होता है।
दान-पुण्य: बुधवार/शनिवार को काले वस्त्र, काले तिल और कम्बल का दान करें।
आचरण की शुद्धि: -- राहु की महादशा में मछली का सेवन एवं धूम्रपान का प्रभाव बहुत गलत होता है, इनसे राहु और अधिक अशुभ फल देता है।
कुत्तों को भोजन: --राहु के प्रतिकूल प्रभाव को कम करने के लिए आसपास की जगह पर कुत्तों को भोजन दें।
राहु को शांत करने के अचूक और वैदिक उपाय:--
राहु के उपाय अनेक प्रकार के हैं:---
मांत्रिक, तांत्रिक, औषधीय और घरेलू। नीचे हम सबसे सिद्ध और व्यावहारिक उपायों की विस्तृत विवरण देते हैं।
1. राहु को शांत करने के घरेलू उपाय
चांदी का चौकोर टुकड़ा:-- शुद्ध चांदी का एक छोटा चौकोर यंत्र अपनी जेब में रखें या घर के पूजास्थल पर रखें। चांदी चंद्रमा की धातु है और चंद्रमा राहु के दुष्प्रभाव को संतुलित करता है।
घर में स्वच्छता और व्यवस्था:-- राहु का अशुभ फल गंदगी और अंधकार में पनपता है। घर में जंक, पुराना टूटा-फूटा सामान और कबाड़ न रखें। घर साफ और हवादार रखने से राहु की नकारात्मक ऊर्जा कम होती है।
नीला या काला वस्त्र:-- शनिवार को नीले या काले रंग के वस्त्र धारण करना राहु को प्रसन्न करने का एक प्रचलित उपाय है।
सौंफ का सेवन: -- प्रतिदिन सौंफ चबाना और तांबे के पात्र में जल पीना राहु-जनित मन की अशांति को कम करता है।
जो जातक राहु को खुश करने के उपाय खोज रहे हैं, उनके लिए उपरोक्त घरेलू नुस्खे एक ठोस आधार प्रदान करते हैं। ये उपाय बिना किसी जटिल विधि के दैनिक जीवन में शामिल किए जा सकते हैं।
2. राहु- शांति के विशेष उपाय
काले तिल का दान:-- शनिवार को काले तिल किसी मंदिर या जरूरतमंद को दान करें। यह राहु दोष निवारण उपाय में सर्वाधिक प्रचलित और प्रमाणित है।
कम्बल दान: --सर्दियों में गरीबों को कम्बल दान करने से राहु की कृपा प्राप्त होती है।
आस पास के कुत्तों को भोजन: --प्रतिदिन या शनिवार को आवारा कुत्तों को रोटी खिलाएं। राहु के इष्ट देव भैरव हैं और उनका वाहन कुत्ता है, और यह कार्य राहु अशुभ फल को कम करता है।
सफाई कर्मचारियों का सम्मान: --उन्हें सामर्थ्य अनुसार सहायता और सम्मान दें, यह राहु के दोष निवारण उपाय में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य माना जाता है।
इष्ट-मित्र की सहायता: राहु की महादशा में कोई भी निर्णय अकेले न लें, इसके लिए अपने इष्ट-मित्र की सहायता लेना चाहिए।
नारियल दान:-- शनिवार को बहते जल में नारियल प्रवाहित करने से राहु तुरंत शांत होता है।
इन उपायों को नियमित अनुशासन के साथ अपनाने पर राहु के दुष्प्रभाव धीरे-धीरे खत्म होते हैं और जीवन में स्थिरता आती है।
3. रत्न चिकित्सा:-- गोमेद - राहु का सर्वश्रेष्ठ रत्न.
रत्न चिकित्सा की दृष्टि से गोमेद राहु का प्रमुख रत्न है और यह उपाय राहु ग्रह को शांत रखने में सार्वभौमिक रूप से प्रभावी माना जाता है। जो जातक गोमेद रत्न धारण करते हैं, उनमें राहु की ऊर्जा अच्छी हो जाती है और जीवन में हर तरफ स्पष्टता आती है।
प्रमाणित गोमेद धारण करने के मुख्य लाभ इस प्रकार हैं:
मानसिक स्पष्टता : --भय और निर्णय में परेशानी की स्थिति समाप्त होती है।
आर्थिक वृद्धि : -- व्यापार और करियर में पुनः तेज गति से प्रगति देता है।
शत्रुओं से सुरक्क्षा : --गुप्त शत्रुओं और नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव कम होता है।
गोमेद रत्न के फायदे:--
धातु के विषय में एक महत्वपूर्ण सुरक्षा-निर्देश: राहु एक छाया ग्रह है और इसकी ऊर्जा अत्यंत तीव्र होती है। इसलिए गोमेद को सदैव चांदी में जड़वाएं - यह राहु की प्रखर ऊर्जा को संतुलित करती हैं। विशेष परिणामों हेतु किसी विशेषज्ञ के निर्देशानुसार अन्य धातु का उपयोग किया जा सकता है।
राहु के उपाय किस दिन और कैसे करें:--
प्रातःकाल:-- सूर्योदय से पहले उठें, स्नान करें और पूजा करें।
राहुकाल में जाप: --अपने नगर के राहुकाल का समय जानकर उस अवधि में "ॐ रां राहवे नमः" का 108 बार जाप करें।
शनिवार को विशेष: --काले तिल, नीले फूल और काले वस्त्र शनिवार को किसी मंदिर में दान करें।
समय: बुधवार/शनिवार को सूर्यास्त के बाद या प्रतिदिन सांध्यकाल में करें।
माला: --चंदन, रुद्राक्ष या स्फटिक की माला का उपयोग करें।
वेश-भूषा: --जाप के समय काले या गहरे रंग के वस्त्र धारण करें।
आसन:-- काले या मिक्स रंग का ऊनी आसन प्रयोग करें।
एकाग्रता: --मंत्र जाप के दौरान मन को एकाग्र रखें, मन को भ्रमित न होने दें।
राहु मंत्र जाप संख्या के विषय में वैदिक ज्योतिष में स्पष्ट नियम है। अनुष्ठान के लिए 18,000 बार जाप निर्धारित है। परंतु कलयुग में पूर्ण फल प्राप्ति के लिए इसे चार गुना - अर्थात् 72,000 बार - जाप आवश्यक है।
सामान्य उपासकों के लिए प्रतिदिन 108 बार जाप भी प्रभावशाली है। 40 दिनों तक अनवरत जाप से उत्तम परिणाम प्राप्त होते हैं। यदि कोई विशेष राहु-जनित संकट हो, तो किसी सुयोग्य पंडित से पूर्ण अनुष्ठान करवाएं।
जन्म कुंडली के किस भाव में शुभ और किस भाव में अशुभ देता है.
वैदिक ज्योतिष में जन्म कुंडली के केंद्र (1, 4, 7, 10) और त्रिकोण (1, 5, 9) भावों को सबसे शुभ फलदायक माना गया है।
इसके विपरीत, छठे, आठवें और बारहवें भाव (त्रिक भाव/दुस्थान) को अशुभ या संघर्ष और असफलता देने वाला माना जाता है।
त्रिकोण भाव (1, 5, 9): इन्हें लक्ष्मी स्थान माना गया है।
पंचम से बुद्धि-संतान और नवम से भाग्य का लाभ मिलता है।
लाभ भाव (11वां भाव):-- यह आय और इच्छाओं की पूर्ति का स्थान है, जहां ग्रह अमूमन लाभ देते हैं।
अशुभ या असफल करने वाले भाव (त्रिक भाव)षष्ठ भाव (छठा भाव): --यह रोग, ऋण और शत्रुओं का स्थान है। यहां ग्रह अक्सर शारीरिक कष्ट व बाधाएं देते हैं।
अष्टम भाव (आठवां भाव): --यह आयु, आकस्मिक संकट, मृत्युतुल्य कष्ट और बाधाओं का भाव है। इसे सबसे कमजोर व नकारात्मक माना गया है।
द्वादश भाव (बारहवां भाव):-- यह खर्च, हानि और कारावास का भाव है। यहां स्थितियां धन हानि कराती हैं।
राहु की बीमारी :--
* कैंसर, *गैस प्रॉब्लम,* बाल झड़ना, * उदर रोग,* बवासीर। * पागलपन, * राजयक्ष्मा रोग, * निरंतर मानसिक तनाव बना रहेगा। * नाखून अपने आप ही टूटने लगते हैं।* मस्तिष्क में पीड़ा और दर्द बना रहता है, * राहु व्यक्ति को पागलखाने, दवाखाने या जेलखाने भेज सकता है, * राहु अचानक से भी कोई बड़ी बीमारी पैदा कर देता है और व्यक्ति मृत्यु को प्राप्त हो जाता है।
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अनिल सुधांशु
ज्योतिषाचार्य
°°°° नीम करोली आश्रम, कैंची धाम, नैनीताल (उत्तरांचल)
°°°बाबा अलखनाथ मंदिर, किला, बरेली (उत्तर प्रदेश)
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