घर में विभिन्न प्रकार की धूनी देने के चमत्कारी लाभ.
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#धूप" #या "#धूनी" #का_प्रयोग, इसको घर में जलने से नकारात्मक शक्तियां दूर होती है तथा घर में धन संपत्ति के अलावा सुख शांति का आगमन होता है.
धूपन या धूप या फिर धूनी देना एक अत्यंत लाभकारी प्रक्रिया है। प्राचीनकाल से ही मन की शांति और प्रसन्नता के लिए तथा घर से नकारात्मक ऊर्जा को हटाने के लिए धूप का प्रयोग होता आया है। धूपन से मानसिक तनाव दूर होता है तथा कई सारे रोगों में भी लाभ मिलता है। घर से नकारात्मक ऊर्जा निकालकर सकारात्मक उर्जा बढ़ाने के लिए 'धूप' दिए जाते हैं. धूप देने से मन को शांति और प्रसन्नता मिलती है। साथ ही, मानसिक तनाव दूर करने में भी इससे बहुत लाभ मिलता है।
"धूप" या "धूनी"—देवपूजन में या सुगंध के लिये कपूर, आग, गुग्गुल, आदि गंधद्रव्यों को जलाकर उठाया हुआ धुआँ. गंधद्रव्य जिसे जलाने से सुगंधित धुआँ उठता और फैलता है. जलाने पर महकवाली चीज ।
विशेष—धूप के लिये पाँच प्रकार के द्रव्यों में से किसी न किसी का व्यवहार होता है—(१) निर्यात अर्थात् गोंद । जैसे, गुग्गुल, राल, (२) चूर्ण, जैसे, जायफल का चूर्ण । (३) गंध, जैसे, कस्तूरी । (४) काष्ठ, जैसे, अगर की लकड़ी । (५) कृत्रिम अर्थात् कई द्रव्यों के योग के बनाई हुई धूप ।
कृत्रिम धूप कई प्रकार की होती है;-- जैसे, पंचांग धूप, अष्टांग धूप, दशांग धूप, द्वादशांग धूप, षोडशांग धूप ।
इनमें से दशांग धूप अधिक प्रसिद्ध है जिसमे दस चीजों का मेल होता है । ये इस चीजें क्या क्या होनी चाहिए, इसमें मतभेद है । पद्यपुराण के अनुसार कपूर, कुष्ठ, अगर, चंदन, गुग्गुल, केसर, सुगंधबाला तेजपत्ता, खस और जायफल से दस चीजें होनी चाहिएँ । सारांश यह कि साल और सलई का गोंद, मैनसिल, अगर, देवदार, पद्याख, मोचरस, मोथा, जटामासी इत्यादि सुगंधित द्रव्य धूप देने के काम में आते हैं ।
कैसे और किस प्रकार देते हैं, धूप - पितरों, देवताओं और क्षेत्रज्ञ को तथा वास्तु अर्थात हमारे घर के वातारवण को शुद्ध करने के लिए धूप देते हैं। धूप उपर बताए अनुसार सामग्री को मिलाकर धूप बनाई जाती है, फिर उसे जलाकर धूप दी जाती है। धूप को लकड़ी पर या कंडे पर रखकर जलाया जाता है। लेकिन वर्तमान में सामान्य तौर पर धूप दो तरह से ही दी जाती है। पहला गुग्गुल-कर्पूर से और दूसरा गुड़-घी मिलाकर जलते कंडे पर उसे रखा जाता है।
(1) गुड़ और घी की धूप:- सर्वप्रथम एक कंडा जलाएं। फिर कुछ देर बार जब उसके अंगारे ही रह जाएं, तब गुड़ और घी बराबर मात्रा में लेकर उक्त अंगारे पर रख दें और उसके आस-पास अंगुली से जल अर्पण करें। अंगुली से देवताओं को और अंगूठे से अर्पण करने से वह धूप पितरों को लगती है।
*** जब देवताओं के लिए करें तब ब्रह्मा, विष्णु और महेश का ध्यान करें और जब पितरों के लिए अर्पण करें, तब अर्यमा सहित अपने पितरों का ध्यान करें और उनसे सुख-शांति की कामना करें। श्राद्धपक्ष में 16 दिन ही दी जाने वाली धूप से पितृ तृप्त होकर मुक्त हो जाते हैं तथा पितृदोष का समाधान होकर पितृयज्ञ भी पूर्ण होता है।
(2) गुग्गुल-कर्पूर की धूप:- सर्वप्रथम एक कंडा जलाएं। फिर कुछ देर बार जब उसके अंगारे ही रह जाएं, तब उस पर गुग्गुल डाल दें। इससे संपूर्ण घर में एक सुगंधित धुआं फैल जाएगा। अक्सर यह धूप गुरुवार और रविवार को दी जाती है।
धूप देने के नियम:- रोज धूप नहीं दे पाएं तो, तेरस, चौदस, अमावस्या और तेरस, चौदस तथा पूर्णिमा को सुबह-शाम धूप अवश्य देना चाहिए। मान्यता है कि, सुबह दी जाने वाली धूप देवगणों के लिए और शाम को दी जाने वाली धूप पितरों के लिए लगती है। हालांकि शाम की धूप भी देवगणों के लिए दी जा सकती है।
*** धूप देने के पूर्व घर की सफाई कर दें।
पवित्र होकर-रहकर ही धूप दें। धूप ईशान कोण में ही दें। घर के सभी कमरों में धूप की सुगंध फैल जाना चाहिए। धूप देने और धूप का असर रहे, तब तक किसी भी प्रकार का संगीत नहीं बजाना चाहिए। हो सके तो कम से कम बात करना चाहिए।
धूप के प्रकार और लाभ :-
(i) षोडशांग धूप:- तंत्रसार के अनुसार, तगर, अगर, कुष्ठ, शैलज, शर्करा, नागर, चन्दन, इलाइची, ताज, नखनखी, मुशीर, जटामांसी, कर्पूर, ताली, सड़लान और गुग्गुल - ये सोलह प्रकार के धूप माने गए हैं। इसे षोडशांग धूप कहते हैं। षोडशांग धूप देने से मन को प्रसन्नता मिलती है और मानसिक तनाव दूऱ होता है। रोगो से छुटकारा मिलता है। इससे घर में मौजूद वास्तु दोष और नकारात्मक ऊर्जा समाप्त हो जाती है। हिन्दू धर्म में नौरात्र में धूपन जरूर करना चाहिए। हफ्ते में 1 बार इसकी धूप जलने से वातावरण शुद्ध रहता है तथा नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती हैं।
(ii) दशांग धूप:- मदरत्न के अनुसार, चंदन, कुष्ठ, नखल, राल, गुड़, शर्करा, नखगंध, जटामांसी, लघु और क्षौद्र सभी को समान मात्रा में मिलाकर जलाने से उत्तम धूप बनती है। इसे दशांग धूप कहते हैं। इस धूप को देने से घर में शांति रहती है तथा नकारात्मक ऊर्जा का क्षय होता है।
(iii) इसके अलावा भी अन्य मिश्रणों का भी उल्लेख मिलता है जैसे- छह भाग कुष्ठ, दो भाग गुड़, तीन भाग लाक्षा, पांचवां भाग नखला, हरीतकी, राल समान अंश में, दपै एक भाग, शिलाजय तीन लव जिनता, नागरमोथा चार भाग, गुग्गुल एक भाग लेने से अति उत्तम धूप तैयार होती है। रुहिकाख्य, कण, दारुसिहृक, अगर, सित, शंख, जातीफल, श्रीश ये धूप में श्रेष्ठ माने जाते हैं।
(iv) भोजन करने के पूर्व कुछ मात्रा में भोजन को अग्नि को समर्पित करने से वैश्वदेव यज्ञ पूर्ण होता है। यह भी एक प्रकार की धूप है।
मुख्य रूप से धूप के 6 प्रकार होते है। निम्नांकित धूप सबसे प्रचलित है, इसके अलावा चिकित्सानुसार या दोष निवारण अथवा ज्योतिष विद्या अनुसार अलग-अलग अवसरो पर विभिन्न प्रकार की औषधियों या जड़ी बूटियों द्वारा धूनी देने का भी प्रचलन है।
(1) गुग्गुल धूप, (2) कपूर और घी गुड़,
(3) कपूर और लौंग धूप, (4) दशांग धूप,
(5) लोबान धूप, (6) षोडशांग धूप
धूप देने के लाभ:- धूप देने से मन, शरीर और घर में शांति की स्थापना होती है। रोग और शोक मिट जाते हैं। गृह कलह और आकस्मिक घटना-दुर्घटना नहीं होती। घर के भीतर व्याप्त सभी तरह की नकारात्मक ऊर्जा बाहर निकलकर घर का वास्तुदोष मिट जाता है। ग्रह-नक्षत्रों से होने वाले छिटपुट बुरे असर भी धूप देने से दूर हो जाते हैं। धूप देने से देवता और पितृ प्रसंन्न होते हैं, जिनकी सहायता से जीवन के हर तरह के कष्ट मिट जाते हैं।
इन सबके अतिरिक्त दैनिक पूजन अथवा विशेष कामना से निम्न धूप अथवा धूनी का प्रयोग भी किया जाता है, इनके प्रकार और फल निम्नलिखित है :-
1- #कर्पूर_और_लौंग:-
रोज़ाना सुबह और शाम घर में कर्पूर और लौंग जरूर जलाएं। आरती या प्रार्थना के बाद कर्पूर जलाकर उसकी आरती लेनी चाहिए। इससे घर के वास्तुदोष ख़त्म होते हैं। साथ ही पैसों की कमी नहीं होती।
2- #गुग्गल_की_धूनी:-
हफ्ते में 1 बार किसी भी दिन घर में कंडे जलाकर गुग्गल की धूनी देने से गृहकलह शांत होता है। गुग्गल सुगंधित होने के साथ ही दिमाग के रोगों के लिए भी लाभदायक है।
3- पीली सरसों:- पीली सरसों, गुग्गल, लोबान, गौघृत को मिलाकर सूर्यास्त के समय उपले (कंडे) जलाकर उस पर ये सारी सामग्री डाल दें। नकारात्मकता दूर हो जाएगी।
4- #धूपबत्ती:-
घर में पैसा नहीं टिकता हो तो, रोज़ाना महाकाली के आगे एक धूपबत्ती लगाएं। हर शुक्रवार को काली के मंदिर में जाकर पूजा करें।
5- नीम के पत्ते:-️ घर में सप्ताह में एक या दो बार नीम के पत्ते की धूनी जलाएं। इससे जहां एक और सभी तरह के जीवाणु नष्ट हो जाएंगे। वही वास्तुदोष भी समाप्त हो जाएगा।
6- #षोडशांग_धूप:-
अगर, तगर, कुष्ठ, शैलज, शर्करा, नागर, चंदन, इलायची, तज, नखनखी, मुशीर, जटामांसी, कर्पूर, ताली, सदलन और गुग्गल, ये सोलह तरह के धूप माने गए हैं। इनकी धूनी से आकस्मिक दुर्घटना नहीं होती है।
7- #लोबान_धूनी:-
लोबान को सुलगते हुए कंडे या अंगारे पर रख कर जलाया जाता है, लेकिन लोबान को जलाने के नियम होते हैं, इसको जलाने से पारलौकिक शक्तियां आकर्षित होती है। इसलिए बिना विशेषज्ञ से पूछे इसे न जलाएं।
8- दशांग धूप:- चंदन, कुष्ठ, नखल, राल, गुड़, शर्करा, नखगंध, जटामांसी, लघु और क्षौद्र सभी को समान मात्रा में मिलाकर जलाने से उत्तम धूप बनती है। इसे दशांग धूप कहते हैं। इससे घर में शांति रहती है।
9- #गायत्री_केसर:-
घर पर यदि किसी ने कुछ तंत्र कर रखा है तो, जावित्री, गायत्री केसर लाकर उसे कूटकर मिला लें। इसके बाद उसमें उचित मात्रा में गुग्गल मिला लें। अब इस मिश्रण की धुप रोज़ाना शाम को दें। ऐसा 21 दिन तक करें।
10-#लाल मिर्च का हवन:--
इसके अलावा दुश्मनों के विनाश के लिए लाल मिर्च का हवन होता है और अन्य प्रकार के भी हवन होते हैं, जिनको करने से जीवन में सुख शांति और नकारात्मक शक्तियां दूर रहती हैं.
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अनिल सुधांशु
ज्योतिषाचार्य
*** नीम करोली आश्रम, कैंची धाम, नैनीताल (उत्तरांचल)
*°°बाबा अलखनाथ नाथ मंदिर, किला, बरेली, (उत्तर प्रदेश)
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