मानव जीवन पर चंद्र का प्रभाव और ग्रहण पर किए जाने वाला विशेष प्रयोग.

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मानव जीवन पर चंद्र का प्रभाव एंव उपाय और चंद्र ग्रहण पर किए जाने वाले विशेष प्रयोग.

 चंद्र हमारे मन का कारक है, क्योंकि चंद्र का संबंध पानी से माना जाता है और हमारे शरीर में लगभग 75% पानी की उपस्थिति पाई जाती है, चंद्र कमजोर होने से हमारे मन की स्थिति ठीक नहीं रहती, ऐसा जातक एक निर्णय पर कायम नहीं रहता, और बार-बार अपने निर्णय बदलता है, कई बार जीवन में आत्महत्या जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है, धन की समस्या रहती है, जरूर से ज्यादा कर्ज बढ़ जाता है, अपमान बहुत करते हैं, अपनों का साथ नहीं मिलता, जन्म स्थान पर सफलता नहीं मिलती, पैतृक संपत्ति का लाभ नहीं मिलता और बात-बात पर अपमान की स्थिति देखने को मिलती है. महिलाओं के साथ और तनाव की स्थिति रहती है.

चन्द्र साधना मन, भावनाओं और आकर्षण शक्ति को जागृत करने की सूक्ष्म तांत्रिक प्रक्रिया है। ग्रहण काल में यह साधना अनेक गुना प्रभाव देती है। यह प्रयोग मन-शुद्धि, चन्द्रदोष शमन और व्यक्तित्व आकर्षण के लिए किया जाता है।

माला का चयन (अत्यंत महत्वपूर्ण)
चन्द्र जप के लिए स्फटिक माला सर्वोत्तम मानी जाती है।
यदि स्फटिक उपलब्ध न हो तो मोती माला प्रयोग करें।
विशेष तांत्रिक ग्रहण साधना में चाँदी की माला भी ली जा सकती है।
रुद्राक्ष माला इस साधना में सामान्यतः प्रयोग नहीं की जाती।

१. पूर्व तैयारी
ग्रहण या पूर्णिमा की रात्रि में स्नान करें।
सफेद या हल्के वस्त्र धारण करें।
उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर मुख करके बैठें।
चाँदी या स्टील के पात्र में स्वच्छ जल भरकर सामने रखें।
उसमें चन्द्र प्रतिबिंब देखने का प्रयास करें।

२. विनियोग
दाहिने हाथ में जल लेकर संकल्प करें —
ॐ अस्य सोम मन्त्रस्य
अत्रि ऋषिः
अनुष्टुप् छन्दः
सोम देवता
ॐ बीजम्
मम मनःशुद्धि, आकर्षण सिद्धि तथा चन्द्रदोष शमनार्थे जपे विनियोगः॥
जल पृथ्वी पर छोड़ दें।

३. करन्यास
ॐ सोमाय अङ्गुष्ठाभ्यां नमः
ॐ सोमाय तर्जनीभ्यां नमः
ॐ सोमाय मध्यमाभ्यां नमः
ॐ सोमाय अनामिकाभ्यां नमः
ॐ सोमाय कनिष्ठिकाभ्यां नमः
ॐ सोमाय करतलकरपृष्ठाभ्यां नमः

४. अङ्गन्यास
ॐ सोमाय हृदयाय नमः
ॐ सोमाय शिरसे स्वाहा
ॐ सोमाय शिखायै वषट्
ॐ सोमाय कवचाय हुं
ॐ सोमाय नेत्रत्रयाय वौषट्
ॐ सोमाय अस्त्राय फट्

५. ध्यान:--

दधिशंखतुषाराभं क्षीरोदार्णवसम्भवम्।
नमामि शशिनं सोमं शम्भोर्मुकुटभूषणम्॥

चन्द्रदेव को शीतल, अमृतमय, श्वेत प्रकाश से आच्छादित रूप में ध्यान करें। अनुभव करें कि, वह ज्योति आपके आज्ञा चक्र और हृदय में भर रही है।

६. मूल मंत्र जप (स्फटिक या मोती माला से)

ॐ सोम सोमाय नमः
या
ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्राय नमः॥
११, २१ या ५१ माला जप करें।
एक माला पूर्ण होने पर सुमेरु पार न करें, माला पलट दें।
तर्जनी उंगली का प्रयोग न करें।

७. विशेष तांत्रिक प्रयोग:--

एक सफेद कपड़े में चावल और मिश्री बाँध लें।
पूरे ग्रहण काल में वह आपके सामने रहे।
मोक्ष के बाद उसे पूजास्थल या तिजोरी में रखें।

८. पूर्णाहुति:--

ॐ सोमाय नमः
तीन बार उच्चारण करें।
पात्र का जल किसी पवित्र पौधे में अर्पित करें।
यह साधना किसी पर अनैतिक प्रभाव डालने के लिए नहीं, अपितु अपने मन और आभा को शुद्ध व आकर्षक बनाने के लिए है। मन स्थिर होगा तो आकर्षण स्वाभाविक होगा।

कमजोर चंद्र के संकेत.

बार-बार मूड फ़्लोरिडा और स्थापत्य परंपरा।
नींद न आना या अनिद्रा की समस्या।
भारी संख्या में और छोटी-छोटी बातें दुखी होना।
ब्रह्मा, डॉक्टर और साथी की कमी।
परिवार और विपक्ष में असंतोष।
चंद्र ग्रह से होने वाले रोग
जब चंद्रमा खराब होता है तो, यह केवल मानसिक ही नहीं बल्कि शारीरिक समस्याएं भी उत्पन्न होती है। 

चंद्र ग्रह से होने वाले ये रोग इस प्रकार बताए गए हैं:

मानसिक, तनाव चिंता और अवसाद।
पाचन संबंधी रोग।
छाती और छाती से जुड़ी बीमारियाँ।
त्वचा संबंधी समस्याएँ।
अत्यधिक कमजोरी और कमजोरी।

 जन्म कुंडली में चंद्र नीच का हो तो, उसके जीवन में निम्न बातें दिखाई दे सकती हैं:

बार-बार असफलता के डर से परेशान।
निर्णय अंतिम चरण में होना।
माता के स्वास्थ्य में समस्या या आपकी दूरी।
जीवन में स्थिरता का अभाव।
सामाजिक साज़िश में असंतोष।

चंद्रमा के उपाय:--
ज्योतिष शास्त्र और हस्त रेखा शास्त्र में मंद चंद्रमा के उपाय बताए गए हैं, जिन्हें शामिल करके अपने चंद्रमा को बलवान किया जा सकता है और उसका शुभ फल प्राप्त किया जा सकता है।

सोमवार के दिन व्रत रखना और शिवलिंग पर जल चढ़ाना।
मंत्र "ॐ चन्द्राय नमः" का नियमित रूप से जाप करें।
दूध, सफ़ेद वस्त्र और चावल का दान करें।
माता का सम्मान करें और उनका आशीर्वाद लें।
शुद्ध मोती मोती ( सफेद मोती ) रत्न मोती, लेकिन पहले किसी भी उपयुक्त ज्योतिषी से परामर्श लें।

चंद्र ग्रह को ठीक करने के उपाय:--

यदि आप यह सोच रहे हैं कि चंद्र ग्रह को ठीक करने के उपाय क्या हैं, तो नीचे दिए गए सरल और प्रभावशाली उपाय अपना सकते हैं:

सोमवार को सफेद फूल और चांदी का दान करें।
दूध और चावल से बने भोजन का सेवन करें।
चंद्रमा को जल अर्घ्य, सोमवार की रात।
ध्यान और योग का अभ्यास करें ताकि मानसिक शांति बनी रहे।
गाय को हरा चारा खेलना भी माना जाता है।

ज्योतिष शास्त्र में माना गया है कि, मूनस्टोन ब्रेसलेट ( मूनस्टोन ब्रेसलेट ) धारण करने से भी चंद्रमा मजबूत होता है और मन को शांति मिलती है।
चंद्रमा चंद्रमा और जीवन पर प्रभाव
चंद्रमा के लक्षण और उपाय जानने के बाद यह जरूरी है कि, इसका जीवन पर क्या असर हो। असली चाँद से व्यक्ति का व्यक्तित्व घटता है और रिश्ते में तनाव आ सकता है। लेकिन यदि उचित उपाय है तो, यही चंद्रमा जीवन में शांति, स्थिरता और सुख प्रदान कर सकता है।

चंद्रमा को मजबूत करने के उपायमाता का सम्मान.

 अपनी माता की सेवा करें और उनका आशीर्वाद लें, इससे चंद्रमा मजबूत होता है।
चांदी के बर्तन का प्रयोग:-- चांदी के गिलास से पानी पीने या चांदी की अंगूठी पहनने से लाभ मिलता है।
शिव उपासना:-- भगवान शिव को जल अर्पित करें और 'ॐ नमः शिवाय' का जाप करें।

 पूर्णमासी या सोमवार का व्रत:--

 चंद्रमा को अनुकूल बनाने के लिए प्रत्येक पूर्णमासी का व्रत रखना चाहिए या सोमवार का व्रत रखना चाहिए, भगवान शिव का सोमवार के दिन दूध से अभिषेक करना चाहिए, व्रत रखने से चंद्र शांत होता है, और अपने शुभ फल प्रदान करने लगता है.

** बहते हुए पानी में सोमवार के दिन एक छोटा सा चांदी का टुकड़ा, साबुत चावल और मिश्री सफेद रुमाल में बांधकर बहाना चाहिए.

 पूर्णमासी की रात्रि में दूध चीनी पानी मिलाकर चंद्र देव को अर्घ देना चाहिए और कपूर से उनकी आरती उतारना चाहिए, मां के समान स्त्रियों का चरण छूकर आशीर्वाद लेना चाहिए, और पूरे श्रद्धा भाव से चंद्र के मंत्रों का जाप करके पूर्व जन्म में कि गई, अपनी गलतियों के लिए क्षमा मांगनी चाहिए.

 * गहरे पानी में स्नान करने से बचना चाहिए, तथा रात्रि के समय दूध का सेवन नहीं करना चाहिए. ऐसी स्थिति में यदि चंद्र के ऊपर शनि की दृष्टि पड़ने लगे तो कई बार ऐसे जातक पागलपन की स्थिति तक पहुंच जाते हैं. उनके अंदर भरम की स्थिति पैदा हो जाती है, सही गलत का निर्णय नहीं कर पाते.

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 अनिल सुधांशु 
ज्योतिषाचार्य
* नीम करोली आश्रम, कैंची धाम, नैनीताल( उत्तरांचल)
 °°अलखनाथ मंदिर, किला, बरेली (उत्तर प्रदेश)

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