हनुमान चालीसा पढ़ने से बड़े से बड़ा संकट टल जाता है.
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नीम करोली धाम, कैंची धाम, नैनीताल (उत्तरांचल)
हनुमान चालीसा पढ़ने का चमत्कार और सही विधि, हनुमान जी की कृपा से बड़े से बड़ा संकट टल जाता है. और यदि पूरे नियम और संयम से 40 दिन सुंदरकांड का पाठ किया जाए तो, राम भक्त हनुमान जी की कृपा से बड़े से बड़ा संकट टल जाता है और बड़े से बड़ा बिगड़ा काम बन जाता है.
हनुमान जी को कलयुग का देवता भी कहा जाता है. श्रीराम जी के परम भक्त हनुमान जी की उपासना करना बेहद आसान हैं. मंगलवार और शनिवार का दिन विशेष तौर पर उन्हें समर्पित है. ऐसे में ज्यादातर लोग उनकी भक्ति करने के लिए हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं.
हनुमान चालीसा का पाठ कुछ लोग रोजाना, कुछ साप्ताहिक तो कुछ लोग विशेषकर मंगलवार को ही करते हैं. लेकिन बहुत कम लोग ही ये जानते हैं कि, हनुमान चालीसा का पाठ कैसे किया जाता है?
पाठ का जाप करते समय किस तरह की सावधानियां बरतनी होती है और किन नियमों का पालन करना होता है? आइए जानते हैं इसके बारे में.
हनुमान चालीसा पाठ की विधि:--
बजरंग बली के दिव्य कंपन से जुड़ने के लिए अपने शरीर और पूजा स्थान को शुद्ध और पवित्र करें. सुबह स्नान के पश्चात सरसों के तेल का दीया जलाएं
पाठ करने से पहले दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठें. अपनी आंखें बंद करें और संकल्प लें कि, 'मैं यह पाठ हनुमान जी को उनके आशीर्वाद, शक्ति और सुरक्षा के लिए समर्पित करता हूं'
यह सावधानियां बरतना चाहिए, पाठ करते समय :--
इसके बाद हनुमान चालीसा पाठ की शुरुआत, श्री गुरु चरण सरोज रज… या ऊं श्री हनुमते नमः का 11 बार जाप करें. पाठ करते वक्त किसी भी तरह की जल्दबाजी न दिखाएं.
प्रत्येक पंक्ति को भावना के साथ पढ़ें न कि तेजी से, पाठ का प्रत्येक शब्द आपकी आत्मा से कंपन करना चाहिए.
हनुमान चालीसा पढ़ने का सही समय
सुबह के समय पाठ करने से शांति और स्पष्ट बनी रहती है. रात के समय खासकर मंगलवार और शनिवार को करने से सुरक्षा बनी रहती है. ब्रह्म मुहूर्त में पाठ स्मरण करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है.
प्रतिदिन 1 बार पाठ का स्मरण करने से शांति और शक्ति बढ़ती है. 3 बार पाठ करने से सभी तरह की बाधाएं दूर होती है. 7 बार पाठ करने से हनुमान जी सभी तरह की मनोकामनाओं को पूर्ण करते हैं. 11 से 108 बार चालीसा का जाप करने से चमत्कारी लाभ देखने को मिलते हैं.
जब हनुमान चालीसा पाठ पूर्ण कर लें तो, 3 बार जय बजरंग बली का जाप करें, मौन बैठें और अपनी आभा में उनकी ऊर्जा को महसूस करने की कोशिश करें.
हनुमान चालीसा दिव्य चौपाइयों से भरी:--
हनुमान चालीसा की प्रत्येक चौपाइयों में एक दिव्य आवृत्ति है, जो आपके अंदर साहस, एकाग्रता और विश्वास को जागृत करने का काम करती है. इसलिए हनुमान चालीसा का पाठ प्रेमपूर्वक करें. इस बात को याद रखें कि हनुमान चालीसा कोई धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक सक्रियता है.
जब आप इसे सही तरीके से पढ़ते हैं तो, आपका डर आग में और आपकी भक्ति शक्ति में बदल जाती है.
40 दिन तक हनुमान चालीसा पढ़ने से क्या होता है?
40 दिन तक लगातार नियम और सच्चे मन से हनुमान चालीसा का पाठ करने से विशेष आध्यात्मिक ऊर्जा, मानसिक शांति और बजरंगबली की असीम कृपा प्राप्त होती है।
प्रमुख लाभ:--
संकटों से मुक्ति: मान्यता है कि 40 दिन के इस अनुष्ठान से बड़े से बड़ा संकट, कर्ज और बाधाएं दूर हो जाती हैं।
मानसिक बल और निर्भयता: मन का डर, तनाव और नकारात्मकता समाप्त होती है तथा साहस व आत्मबल बढ़ता है।
कुमति का नाश: बुरी संगति छूटती है और बुद्धि सत्पथ यानी 'सुमति' की ओर अग्रसर होती है।
कार्य सिद्धि: अटके हुए या कठिन कार्य सुगम होने लगते हैं।
जरूरी नियम:--
सच्चा संकल्प: प्रतिदिन एक निश्चित समय और स्थान पर बैठकर पाठ का संकल्प लें।
नियमितता: 40 दिनों तक बिना एक भी दिन छोड़े लगातार पाठ करें। बीच में खंडित होने पर इसे दोबारा आरंभ करना पड़ता है।
शुचिता और संयम: इस दौरान सात्विक जीवनचर्या अपनाएं, ब्रह्मचर्य का पालन करें तथा मांस-मदिरा या तामसिक भोजन से दूर रहें।
मानसिक स्थिरता और निर्भीकता: मन का धीरे-धीरे शांत और स्थिर होना हनुमान जी की कृपा का मुख्य लक्षण है। पहले जिन बातों पर घबराहट होती थी, वे अब आसानी से टलने लगती हैं और बिना किसी कारण मन में साहस व आत्मविश्वास बढ़ने लगता है।
संकटों का टलना: जीवन की बड़ी-बड़ी बाधाएं या मुसीबतें अचानक और चमत्कारी रूप से हल होने लगती हैं। ऐसा महसूस होता है कि कोई अदृश्य शक्ति हर कदम पर रक्षा कर रही है।
नकारात्मकता का दूर होना: --मन से डर, तनाव, और बुरे विचार स्वतः कम होने लगते हैं। जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होने लगता है।
भक्ति में स्वाभाविक रुचि:--- बिना किसी दबाव के बार-बार हनुमान चालीसा पढ़ने या सुनने की इच्छा होना इस बात का प्रमाण है कि आध्यात्मिक संबंध जुड़ रहा है।
शुभ सपने:-- सपने में भगवान श्रीराम का नाम सुनाई देना, बार-बार हनुमान जी के दर्शन होना या घंटियों की आवाज सुनाई देना भी शुभ संकेत माना जाता है।
हनुमान जी का चोला:--
हनुमान जी को मंगल या शनिवार चमेली के तेल में सिंदूर मिलाकर चोला चढ़ाना चाहिए, तथा बेसन के लड्डू बंदे के लड्डू या शुद्ध देसी घी और आटे से बने रोट का भोग लगाना चाहिए, तथा शुद्ध देसी घी के दीपक से पहले प्रभु श्री राम की उसके बाद हनुमान जी की आरती उतारना चाहिए.
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अनिल सुधांशु
ज्योतिषाचार्य एवं श्री राम कथा वाचक
*** नीम करोली आश्रम, कैंची धाम, नैनीताल (उत्तरांचल)
°°° बाबा बालक नाथ मंदिर, किला बरेली, (उत्तर प्रदेश)
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