शनिवार को पीपल के पेड़ के नीचे आटेे के दीपक जलाने के चमत्कारी फायदे.

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शनिवार को पीपल के पेड़ के नीचे आटे के दीपक जलाने के चमत्कारी फायदें.

शनिवार के दिन पीपल के पेड़ के नीचे आटे का दीपक जलाने से शनि दोष, साढ़ेसाती, ढैय्या से मुक्ति मिलती है और पितरों तथा मां लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है, तथा जले हुए दीपक को का बचा हुआ आटा खाकर चीटें, चींटी, जीव, जंतु अपना पेट भरते हैं, इससे भी उनकी दुआएं आपके मिलती हैं और जीवन में कष्ट कम होते हैं, बेजुबानों कि, दुआओं से जातक और उसका परिवार फलता फूलता है, जीवन में तरक्की उन्नति होती है.

मुख्य लाभ:--

शनि शांति: सरसों के तेल या तिल के तेल का दीपक जलाने से शनि देव प्रसन्न होते हैं और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।

पितृ कृपा: आटे से बना चौमुखी (चार मुंह वाला) दीपक जलाने से पितृगण संतुष्ट होते हैं और घर में सुख-शांति आती है। 

आर्थिक लाभ: मान्यता है कि, पीपल में देवी-देवताओं का वास होता है, जिससे धन और करियर से जुड़ी समस्याएं हल होती हैं। 

सही तरीका:--

शनिवार की शाम को सूर्यास्त के बाद या गोधूल वेला में दीपक जलाना सबसे अच्छा माना जाता है,गूंथे हुए आटे का एक साफ चौमुखी दीपक बनाएं, उसमें सरसों का तेल और लंबी बाती का प्रयोग करें। 

 शनि देव की पूजा हमेशा सूर्य उदय से पहले यह सूर्यास्त होने के बाद ही करनी चाहिए और शनि देव की पूजा करते समय इस बात का विशेष ध्यान रखें कि, भूलकर भी शनिदेव की मूर्ति के सामने खड़े ना हो, ना उनकी आंखों से आंखें मिलाएं, तथा लाल रंग के पुष्प शनिदेव के ऊपर ना चढ़ाएं, दूर से ही शनिदेव को प्रणाम करें.

 शनिवार को केवल दीपक ही ना जलाएं बल्कि एक लोहे के पात्र में दूध, पानी, चीनी और मिलाकर पीपल की छांव में खड़े होकर पीपल की जड़ में चढ़ाएं, इस प्रकार विधान से पूजा करने से शनि देव के साथ-साथ राहु केतु की कृपा भी प्राप्त होती है तथा जीवन में चल रही परेशानियों से छुटकारा मिलता है, शनिदेव के आशीर्वाद से धन संपत्ति का आगमन होता है, जीवन में तर्क की उन्नति के नए रास्ते खुलते हैं तथा पूर्व जन्म के तथा इस जन्म के पापों का क्षय होता है.

 शनि देव की यदि कृपा पानी है तो, निम्नलिखित चीजों से हमेशा दूरी बनाकर रखें, बेईमानी मक्कारी ना करें, परस्त्री का संग ना करें, गरीब, असहाय, मजबूर और छोटे स्तर का काम करने वाले मजदूरी करने वालोंको ना सताएं, रिश्वतखोरी का पैसा ना खाएं, किसी का हक ना मारें, गरीबों की सेवा करें भूखे प्यासे को भोजन कराएं, जो बच्चे आर्थिक स्थिति के कारण नहीं पढ़ पा रहे हैं, उनकी पढ़ाई लिखाई में मदद करें, जिन कन्याओं का विवाह नहीं हो पा रहा है, उनके विवाह में आर्थिक मदद करें. अस्पतालों में कभी-कभी फल आदि का दान करें.

 शनि राहु केतु एवं अन्य ग्रहों की प्रसन्नता के लिए पक्षियों को सतनाजा खिलाएं, चीटियों को भुने हुए आटे में मीठा मिलकर खिलाएं, मछलियों को चारा खिलाएं, कौओं को सरसों के तेल में मीठे पूरे बनाकर खिलाएं, अगर जीवन में ज्यादा संकट है  तो, किसी बकरे की जान बख्श दें.

 याद रखें शनिदेव कर्म के देवता हैं, हम जैसा कर्म करेंगे, वह उसी के अनुसार हमें फल प्रदान करेंगे, अगर हम अच्छे कर्म करेंगे तो, शनि देव का आशीर्वाद प्राप्त होगा, जीवन में तरक्की उन्नति होगी और अगर गलत कर्म करेंगे तो, हमें शनिदेव के क्रोध का सामना करना पड़ेगा और जीवन में परेशानियां उठानी पड़ेगी, साथ में राहु केतु के भी कोप का दंड सहना पड़ेगा, क्योंकि यह तीनों ग्रह हमारे इस जन्म और पूर्व जन्म के कर्मों से संबंधित फल प्रदान करते हैं और शनिदेव को इसीलिए कलयुग में न्यायाधीश का दर्जा प्राप्त है, जो बिना किसी संकोच के अपना फल प्रदान करते हैं, आम इंसान की बात क्या है, शनिदेव की नजरों से देवता पशु पक्षी भी नहीं बच पाते है.

पीपल के पेड़ में जल चढ़ाने के मुख्य फायदे नीचे दिए गए हैं.

धन संबंधी बाधाएं दूर होना: प्रतिदिन विशेषकर सूर्योदय से पहले पीपल में जल चढ़ाने से आर्थिक तंगी, कर्ज और पैसों से जुड़ी हर तरह की रुकावटें दूर होती हैं।

निरंतर आय के स्रोत: मान्यता है कि, पीपल की सेवा करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और धन आगमन के नए रास्ते खुलते हैं।

2. ज्योतिषीय एवं ग्रह दोषों से मुक्ति शनि दोष से राहत: शनिवार के दिन पीपल की जड़ में जल अर्पित करने और शाम को सरसों के तेल का दीपक जलाने से शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या और शनि दोष का प्रभाव कम होता है।

राहु-केतु दोष का निवारण: पीपल की नियमित पूजा और जल देने से कुंडली में मौजूद राहु और केतु के नकारात्मक प्रभाव भी शांत होते हैं।

3. पितृ दोष से मुक्ति पितरों की तृप्ति: पीपल के वृक्ष में पितरों का वास माना जाता है। अमावस्या या शनिवार के दिन पीपल में दूध मिश्रित जल अर्पित करने से पितृ दोष शांत होता है और पूर्वजों का आशीर्वाद मिलता है।

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 अनिल सुधांशु 
ज्योतिषाचार्य 
* नीम करोली आश्रम, कैंची धाम, नैनीताल (उत्तरांचल) 
°° अलखनाथ मंदिर, किला, बरेली (उत्तर प्रदेश)

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