विजयदशमी दशहरा 2026 किस प्रकार पूजन करें.
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विजयदशमी (दशहरा) के दिन किसी भी शुभ काम के लिए मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं होती, यह दिन इतना शुभ होता है.
ज्योतिषीय दृष्टि में दशहरे (विजयादशमी) को एक अत्यंत पावन और अबूझ मुहूर्त माना जाता है, जिसे हिंदू पंचांग के साढ़े तीन सबसे शुभ मुहूर्तों (साढ़े तीन मुहूर्त) में से एक का स्थान प्राप्त है। इस दिन ब्रह्मांड में ऐसी सकारात्मक ऊर्जा और ग्रहों का ऐसा अद्भुत संयोग बनता है, जो किसी भी नए कार्य की शुरुआत, खरीद-फरोख्त और सफलता के लिए सर्वथा उपयुक्त होता है।
1. सर्वार्थसिद्धि और अबूझ मुहूर्त
ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को सर्वार्थसिद्धि योग के रूप में देखा जाता है। इस दिन का समय इतना पवित्र होता है कि किसी भी शुभ या मांगलिक कार्य को शुरू करने के लिए अलग से कोई पंचांग या शुभ मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं होती है। यदि आप लंबे समय से किसी विशेष तिथि का इंतजार कर रहे हैं, तो दशहरा इसके लिए सबसे उत्तम दिन माना जाता है।
2. नए कार्यों और व्यावसायिक शुरुआत के लिए श्रेष्ठ:--
मान्यता है कि, दशहरे के दिन शुरू किए गए कार्य कभी असफल नहीं होते और उनमें निश्चित ही विजय प्राप्त होती है।
• व्यापारिक शुरुआत: लोग इस दिन नए प्रतिष्ठान, नए व्यवसाय या नए प्रोजेक्ट्स की नींव रखते हैं।
• मूल्यवान वस्तुओं की खरीदारी: जमीन, मकान, प्रॉपर्टी, सोना-चांदी या नई गाड़ी खरीदने के लिए इस तिथि को ज्योतिष में बेहद भाग्यशाली माना गया है।
तरक्की और सफलता के उपाय:--
शमी के पौधे की पूजा:-- विजयादशमी के दिन शमी के पौधे की पूजा करें, उस पर दीपक जलाएं, आरती करें और शमी की कुछ पत्तियां तोड़कर अपनी तिजोरी या पर्स में रखें, जिससे धन में वृद्धि होती है।
करियर में उन्नति:-- यदि आप अपने करियर में नया मुकाम पाना चाहते हैं, तो दशहरा के दिन एक चुटकी सरसों के दाने लेकर बहते जल में प्रवाहित कर दें।
श्रीयंत्र की पूजा:-- इस दिन घर में श्रीयंत्र की स्थापना और पूजा करने से सुख, समृद्धि, सौभाग्य और ऐश्वर्य में वृद्धि होती है।
नई झाड़ू का दान:-- धन और समृद्धि पाने के लिए विजयादशमी की शाम को मां लक्ष्मी का ध्यान करते हुए किसी मंदिर में नई झाड़ू का दान करें।
चांदी का हाथी:-- अपने विचारों में स्पष्टता और निर्णय क्षमता बढ़ाने के लिए चांदी का एक छोटा-सा हाथी लाकर अपने घर की उत्तर या पूर्व दिशा में रखें।
शस्त्र या औजारों की पूजा:-- इस दिन भगवान राम और माता दुर्गा के साथ-साथ अपने कार्यक्षेत्र से जुड़े औजारों, वाहनों या शस्त्रों की पूजा 'अपराजिताय नमः' मंत्र का जाप करते हुए करें।
दशहरा के दिन करें ये अचूक उपाय:--
अगर आप अपने विचारों को मजबूत करना चाहते हैं, तो दशहरा के दिन आपको चांदी का छोटा-सा हाथी लाकर घर में रखना चाहिए।
अगर आप अपने जीवन में हर तरह के सुख-साधन पाना चाहते हैं, तो दशहरा के दिन मंदिर में सिंघाड़े का आटा दान करें।
अगर आप अपने आत्मविश्वास में वृद्धि करना चाहते हैं, तो दशहरा के दिन सरसों के तेल की शीशी मंदिर में दान करें।
अगर आपके परिवार की खुशियां कहीं गुम हो गई हैं, तो दशहरा एक सफेद चंदन को घिसकर उसका पेस्ट बनाएं और उस चन्दन के पेस्ट से परिवार के सब लोगों के माथे पर चंदन का टीका लगाएं।
अगर आप अपने करियर में नए मुकाम हासिल करना चाहते हैं, तो दशहरा के दिन एक चुटकी सरसों के दाने लेकर बहते जल में प्रवाहित करें।
अगर आप कुछ समय से मानसिक रूप से परेशान चल रहे हैं तो दशहरा स्नान आदि के बाद चंदन की खुशबू वाली एक धूपबत्ती अपने घर के मंदिर में जलाएं।
अगर आप अपने व्यक्तित्व को अत्यंत आकर्षक और मजबूत बनाना चाहते हैं, तो दशहरा के दिन आपको मंदिर में कच्चा, जटा वाला नारियल दान करना चाहिए।
अगर आप नौकरी में अपना मनचाहा प्रमोशन कराना चाहते हैं तो दशहरा के दिन सिंघाड़े के आटे की रोटियां बनाएं। और उन रोटियों पर दो मूली रखकर मंदिर में दान कर दें।
अगर आप अपनी स्मरण शक्ति को तेज करना चाहते हैं, तो दशहरा के दिन रात को सोते समय अपने सिरहाने चंदन का टुकड़ा रख कर सोएं और सुबह उठकर उस चंदन के टुकड़े को किसी धार्मिक स्थल या मंदिर में दान कर दें।
अगर आप नई भाषाएं सीखना चाहते हैं, तो दशहरा के दिन आपको शमी के पेड़ की उपासना करनी चाहिए और हाथ जोड़कर प्रणाम करना चाहिए। अगर आपको कहीं आसपास शमी का पेड़ ना मिले, तो उसकी फोटो देखकर प्रणाम करें।
शमी पूजा विधि:--
शमी के पेड़ पर जल चढ़ाकर रोली-चावल से तिलक करें, सुपारी और फूल अर्पित करें, और दक्षिणा स्वरूप तांबे का सिक्का रखें। इसके बाद पेड़ की सात बार परिक्रमा करके पूरी दशहरा पूजा विधि संपन्न मानी जाती है। यह चरण बाकी सब से पहले या बाद में भी किया जा सकता है, कोई सख्त क्रम तय नहीं है — बस पूरी दशहरा पूजा विधि के भीतर यह हिस्सा शामिल होना जरूरी माना जाता है।
शमी पूजा का महत्व:--
मान्यता है कि रावण वध के लिए प्रस्थान करने से पहले स्वयं श्रीराम ने शमी वृक्ष की पूजा की थी। एक और कथा के अनुसार अर्जुन ने भी अज्ञातवास खत्म होने पर इसी वृक्ष की पूजा करके अपने शस्त्र वापस उठाए थे। इन्हीं दो घटनाओं की वजह से शमी वृक्ष को विजय और शक्ति से जोड़कर देखा जाता है, और इसीलिए यह हिस्सा हर साल की दशहरा पूजा विधि में जगह पाता है।
शमी के पत्ते बांटने की परंपरा:--
परिक्रमा के बाद वृक्ष के नीचे से कुछ मिट्टी और पत्ते घर लाए जाते हैं, जिन्हें फिर रिश्तेदारों और दोस्तों में बांटा जाता है। यह पत्ते सोने के प्रतीक माने जाते हैं, इसीलिए इन्हें बांटने की परंपरा को सौभाग्य और समृद्धि साझा करने जैसा माना जाता है।
अपराजिता पूजा:--
दोपहर बाद घर के ईशान कोण को साफ करके वहां गोबर लीपा जाता है, और उस पर चंदन से आठ पंखुड़ियों वाला कमल बनाकर देवी अपराजिता की पूजा की जाती है। मान्यता है कि यह पूजा साल भर हर काम में सफलता दिलाती है — हालांकि हर परिवार इसे उतनी बारीकी से नहीं निभाता, कई घरों में सरल तरीके से भी यह पूजा कर ली जाती है। यह हिस्सा भी पूरी दशहरा पूजा विधि का उतना ही अहम भाग है जितना रावण दहन या शमी पूजा, भले ही इसकी चर्चा उतनी न होती हो।
अनिल सुधांशु
ज्योतिषाचार्य
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