25 अक्टूबर 2026 रविवार शरद पूर्णिमा का महत्व और उपाय.
***
25 अक्टूबर 2026 रविवार
शरद पूर्णिमा का महत्व और विशेष उपाय
शरद पूर्णिमा (जिसे कोजागरी पूर्णिमा भी कहा जाता है) हिंदू धर्म में धन की देवी मां लक्ष्मी, चंद्रमा और भगवान श्रीकृष्ण की कृपा प्राप्त करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस रात चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है और आकाश से अमृत की वर्षा होती है।
शरद पूर्णिमा का महत्व:--
मां लक्ष्मी का आगमन: मान्यता है कि, शरद पूर्णिमा की रात को मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और यह देखती हैं कि, कौन जागकर उनकी आराधना कर रहा है। जो भक्त इस रात जागरण और पूजन करते हैं, उनके घर में मां लक्ष्मी का स्थायी वास होता है।
अमृतमयी खीर:--- इस रात दूध और चावल से बनी खीर को बनाकर रात भर चांदनी (खुले आसमान के नीचे) में रखा जाता है। ऐसा माना जाता है कि चंद्रमा की किरणों से इस खीर में औषधीय और अमृत जैसे गुण आ जाते हैं, जिसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करने से उत्तम स्वास्थ्य और मानसिक शांति मिलती है।
रासलीला और धार्मिक प्रसंग:---इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रज में गोपियों के साथ महारास रचाया था। इसलिए ब्रज क्षेत्र और कई अन्य स्थानों पर इस दिन विशेष धार्मिक अनुष्ठान होते हैं।
शरद पूर्णिमा के विशेष उपाय:--
खीर का भोग और वितरण: शाम के समय गाय के दूध और चावल की खीर बनाएं। इसे चंद्रमा की रोशनी में रखें और अगले दिन परिवार के सदस्यों में प्रसाद के रूप में बांटें।
मां लक्ष्मी की पूजा और मंत्र जाप: ---पूजा स्थल पर मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करें। कमल का फूल अर्पित करें और ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः या ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः मंत्र का 108 बार जाप करें।
कनकधारा स्तोत्र का पाठ: --आर्थिक संकट दूर करने और सुख-समृद्धि के लिए इस रात 'कनकधारा स्तोत्र' का पाठ करना बेहद फलदायी माना जाता है।
कुबेर मंत्र का जाप: धन-धान्य की प्राप्ति के लिए ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धन धान्याधिपतये नमः मंत्र का जाप करें।
दान-पुण्य:-- इस दिन जरूरतमंदों को सफेद वस्तुएं (जैसे दूध, चावल, चीनी, सफेद वस्त्र, मोती या सफेद मिठाई) और सात प्रकार के अनाज का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
रात में जागरण:-- मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए रात में जागकर भजन-कीर्तन या ईश्वर का स्मरण करना चाहिए।
शरद पूर्णिमा 2026 कब है?
हिंदू पंचांग के अनुसार, साल 2026 में शरद पूर्णिमा 25 अक्टूबर, रविवार को मनाई जाएगी. आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि 25 अक्टूबर को सुबह करीब 11:57 बजे शुरू होकर 26 अक्टूबर को सुबह करीब 9:42 बजे तक रहेगी. धार्मिक परंपरा के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की पूजा और खीर को चांदनी में रखने का विशेष महत्व है.
शरद पूर्णिमा पर क्यों रखी जाती है चांदनी में खीर?
शरद पूर्णिमा की सबसे खास परंपराओं में से एक है, रात में खीर बनाकर उसे चंद्रमा की रोशनी में रखना. धार्मिक मान्यता है कि, इस रात चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से पूर्ण होता है, उसकी किरणें अमृत के समान मानी जाती हैं. इसी विश्वास के चलते दूध और चावल से बनी खीर को चांदनी में रखने के बाद प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है.
शरद पूर्णिमा पर लक्ष्मी प्राप्ति के लिए किए जाने वाले बिशेष उपाय.
कौड़ियों का उपाय: किसी भी शुभ दिन या पूजन के दौरान 11 पीली कौड़ियां मां लक्ष्मी को अर्पित करें। अगले दिन उन कौड़ियों को एक लाल रंग के कपड़े या रुमाल में बांधकर अपनी तिजोरी में रख लें, इससे धन में वृद्धि होती है।
पीपल के पत्ते का टोटका: शुक्रवार के दिन पीपल के एक साफ पत्ते पर लाल सिंदूर से बिना कटे स्वास्तिक का चिह्न बनाएं और उसे तिजोरी में रख दें। पत्ता सूखने पर कुछ महीनों बाद इसे बदल लें।
कमल गट्टे की माला: 108 दानों वाली कमल गट्टे की माला लेकर 'ओम श्रीं ह्रीं' मंत्र का नित्य 108 बार जाप करने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं।
शुक्रवार को गाय की सेवा: शुक्रवार के दिन गाय को गुड़-चावल या सफेद मीठे चावल खिलाने से महालक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है और आर्थिक संकट दूर होते हैं।
श्रीसूक्त और कनकधारा स्तोत्र का पाठ: प्रतिदिन या विशेष रूप से रात्रि के समय श्रीसूक्त और कनकधारा स्तोत्र का पाठ करने से घर में मां लक्ष्मी का स्थायी वास होता है।
श्री यंत्र की स्थापना: घर के पूजा स्थल या तिजोरी में शुभ मुहूर्त में श्री यंत्र, कनकधारा यंत्र या कुबेर यंत्र की विधि-विधान से स्थापना करें।
• लाल पोटली का उपाय: आर्थिक तंगी को दूर करने के लिए एक लाल रंग की पोटली में हल्दी, चावल, केसर, लौंग, तेजपत्ता, हरा धनिया और 5 सिक्के बांधकर मां लक्ष्मी के चरणों में रखें। इसके बाद इस पोटली को अपनी तिजोरी या धन रखने के स्थान पर रख दें।
• मंत्र जाप: मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए 'ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः' या 'ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालय प्रसीद प्रसीद नमः' मंत्र का 108 बार जाप करें। इसके अलावा कमलगट्टे की माला से भी मंत्र का जाप कर सकते हैं।
• ईशान कोण में दीपक: शरद पूर्णिमा की शाम को घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) में गाय के घी का दीपक जलाएं। दीपक की बत्ती में रुई के स्थान पर लाल रंग के धागे का उपयोग करना और उसमें थोड़ी केसर डालना बहुत शुभ माना जाता है।
• चंद्रदेव को अर्घ्य: रात्रि में चंद्रोदय होने के बाद तांबे के लोटे से जल और कच्चा दूध मिलाकर चंद्रमा को अर्घ्य दें। 'ॐ सोम सोमाय नमः' मंत्र का जाप करते हुए चंद्रदेव की पूजा करें।
• दान-पुण्य और खीर वितरण: इस रात जरूरतमंदों, गरीबों या किसी भूखे व्यक्ति को खीर का दान या भोजन कराना अत्यंत फलदायी माना जाता है।
शरद पूर्णिमा पर खीर खाने से स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ता है
शरद पूर्णिमा की रात चांदनी में रखी हुई खीर खाने से स्वास्थ्य को कई पारंपरिक और आयुर्वेदिक लाभ मिलते हैं:
मुख्य स्वास्थ्य लाभ (पारंपरिक एवं आयुर्वेदिक मान्यताएं)
• पित्त दोष से राहत: आयुर्वेद के अनुसार, मानसून और वर्षा ऋतु के बाद शरीर में पित्त (गर्मी) की मात्रा बढ़ जाती है। चांदनी रात में रखी ठंडी खीर खाने से शरीर की गर्मी शांत होती है।
• रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी): चांदी के बर्तन में खीर रखकर चांद की रोशनी में रखने से उसमें एंटी-बैक्टीरियल गुण और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जिससे शरीर की इम्युनिटी बढ़ती है।
• मानसिक शांति और तनाव में कमी: चंद्रमा को मन का कारक माना जाता है। इस खीर को प्रसाद के रूप में खाने से मानसिक तनाव, चिड़चिड़ापन और अनिद्रा (नींद न आना) जैसी समस्याओं में राहत मिलती है और मन शांत रहता है।
• दमा और श्वास रोग में फायदा: आयुर्वेदिक मान्यताओं के अनुसार, इस रात की चांदनी में रखी खीर का सेवन दमा (Asthma) या सांस से जुड़ी परेशानियों में आराम पहुंचाता है।
• आंखों की रोशनी: परंपरा के अनुसार इस खीर का सेवन करने और चांदनी में सुई में धागा पिरोने जैसे अभ्यासों से आंखों की दृष्टि तेज होने की बात कही जाती है।
• पाचन तंत्र में सुधार: दूध के लैक्टिक एसिड, चावल के स्टार्च और चांदनी की शीतलता का यह संयोजन पाचन तंत्र को मजबूती देता है।
• जिनकी जन्म कुंडली में चंद्र कमजोर है, उन लोगों को आज रात शुद्ध शौर्य यंत्र सिद्ध करके धारण करना चाहिए.
# जन्म कुंडली से संबंधित समस्याओं के लिए व्हाट्सएप नंबर 9458064249 पर संपर्क कर सकते हैं.
अनिल सुधांशु
ज्योतिषाचार्य
* नीम करोली आश्रम, कैंची धाम, नैनीताल (उत्तरांचल)
** अलखनाथ मंदिर, किला, बरेली (उत्तर प्रदेश)
Comments
Post a Comment