जगत जननी मां जगदंबे कि, स्तुति.

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हे जगत जननी माता जगदंबे आपके चरणों में कोटि-कोटि नमन, हे मां ! जगत के कल्याण हेतु, सबको सद्बुद्धि दो, ताकि सब का कल्याण हो, सबके भंडार भर रहे. सबकी खूब तरक्की उन्नति हो सब आपस में मिलजुल कर प्रेम और भाईचारे के साथ रहे हमारे देश की एक तारा करता हमेशा बनी रहें.

 देवी स्तोत्र (मूल श्लोक)

या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥

या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥

या देवी सर्वभूतेषु निद्रारूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥

या देवी सर्वभूतेषु क्षुधारूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥

या देवी सर्वभूतेषु छायारूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥

या देवी सर्वभूतेषु शान्तिरूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥

या देवी सर्वभूतेषु श्रद्धारूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥

🌼 भावार्थ (सरल हिन्दी अर्थ)

1. शक्तिरूपेण
जो देवी समस्त प्राणियों में शक्ति बनकर विद्यमान हैं, उन्हें बार-बार प्रणाम।

2. बुद्धिरूपेण
जो देवी सभी जीवों में बुद्धि और विवेक के रूप में स्थित हैं, उन्हें नमन।

3. निद्रारूपेण
जो देवी निद्रा के रूप में सबको विश्राम देती हैं, उन्हें प्रणाम।

4. क्षुधारूपेण
जो देवी भूख बनकर जीवन को चलायमान रखती हैं, उन्हें नमस्कार।

5. छायारूपेण
जो देवी छाया बनकर सदा हमारे साथ रहती हैं, उन्हें नमन।

6. शान्तिरूपेण
जो देवी शांति बनकर मन और संसार को संतुलित रखती हैं, उन्हें प्रणाम।

7. श्रद्धारूपेण
जो देवी श्रद्धा और विश्वास के रूप में हृदय में विराजमान हैं, उन्हें बार-बार नमन।

🌸 इस स्तोत्र का सार
यह स्तोत्र सिखाता है कि देवी केवल मंदिर या मूर्ति तक सीमित नहीं, बल्कि हमारी शक्ति, बुद्धि, भूख, नींद, शांति और श्रद्धा—सब कुछ वही हैं।

अर्थात पूरा जीवन ही देवी का प्रकट स्वरूप है।

 अनिल सुधांशु
 ज्योतिषाचार्य 
* नीम करोली आश्रम, कैंची धाम, नैनीताल (उत्तरांचल)
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अलखनाथ मंदिर किला बरेली (उत्तर प्रदेश)

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